भारत का आगामी ऊर्जा संक्रमण: औद्योगिक तापीय प्रक्रियाओं का विद्युतीकरण

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • भारत के ऊर्जा संक्रमण के आगामी चरण में औद्योगिक तापीय प्रक्रियाओं के विद्युतीकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाना आवश्यक है, जो ऊर्जा संक्रमण को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने तथा विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने में सहायक हो सकता है।

परिचय

  • नवीकरणीय ऊर्जा-संचालित क्षेत्र: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी आंतरिक दहन इंजन का स्थान ले रही है, कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई का उपयोग बढ़ रहा है तथा भवनों में अधिक स्मार्ट और ऊर्जा-कुशल उपकरण अपनाए जा रहे हैं।
  • आगामी चरण औद्योगिक तापीय प्रक्रियाओं, विशेषकर भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) में, के विद्युतीकरण का है। इससे विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता, ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन में कमी को सुदृढ़ किया जा सकता है।
  • भारत में सौर फोटोवोल्टिक क्रांति ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सहायक नीतियों के समन्वित पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से विगत दशक में सौर ऊर्जा शुल्क में 85% से अधिक की कमी की है।
    • अब औद्योगिक तापीय प्रक्रियाओं के विद्युतीकरण को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए भी इसी प्रकार के समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी।

औद्योगिक तापीय प्रक्रियाओं का विद्युतीकरण

  • औद्योगिक तापीय प्रक्रियाओं का विद्युतीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें औद्योगिक प्रक्रियाओं में ताप उत्पन्न करने के लिए जीवाश्म ईंधन, जैसे प्राकृतिक गैस, कोयला या तेल जलाने के स्थान पर विद्युत-संचालित प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जाता है।
  • जब यह विद्युत पवन, सौर, जलविद्युत या परमाणु ऊर्जा जैसे निम्न-कार्बन स्रोतों से प्राप्त होती है, तो यह ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी ला सकती है।

औद्योगिक तापीय प्रक्रियाओं के विद्युतीकरण को समर्थन देने वाले कारक

  • ऊर्जा की उच्च खपत: औद्योगिक क्षेत्र भारत की अंतिम ऊर्जा खपत का लगभग आधा हिस्सा उपयोग करता है। इस ऊर्जा का 40% से अधिक हिस्सा कोयले से प्राप्त होता है, जिसे विनिर्माता अपने प्रतिष्ठानों में जलाते हैं। इससे गंभीर वायु प्रदूषण तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न होते हैं।
  • आयातित ऊर्जा पर निर्भरता: लगभग 27% ऊर्जा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से प्राप्त होती है। ये ऐसे ईंधन हैं जिनका बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है और जिनकी प्रति इकाई ऊर्जा लागत सामान्यतः कोयले की तुलना में 4–4.5 गुना अधिक होती है। वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के दौरान इनकी कीमतों में और अधिक वृद्धि हो सकती है।
  • स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य: भारत जलवायु परिवर्तन के प्रति विश्व के सातवें सबसे अधिक संवेदनशील देशों में तथा जलवायु को गर्म करने वाले CO₂ के उत्सर्जन में तीसरे स्थान पर है।
    • इसी कारण भारत ने वर्ष 2021 में वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
    • भारत के विशाल और निरंतर बढ़ते औद्योगिक क्षेत्र को स्वच्छ बनाना इस लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • सौर ऊर्जा की उपलब्धता: भारत में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच सौर ऊर्जा की कीमतें सबसे कम हैं। सौर ऊर्जा तथा हीट पंप और थर्मल बैटरी जैसी व्यावसायिक रूप से उपलब्ध विद्युत प्रौद्योगिकियों को अपनाकर भारतीय उद्योग अपनी लागत में उल्लेखनीय कमी कर सकते हैं, ऊर्जा खपत घटा सकते हैं और स्वच्छ वायु को बढ़ावा दे सकते हैं।
  • लागत प्रभावशीलता: पाँच प्रमुख तापमान श्रेणियों में से तीन—100°C से कम, 100–200°C और 1,000–1,800°C—में विद्युतीकृत ताप कोयला-आधारित ताप की तुलना में सस्ता है। ये तीनों श्रेणियाँ मिलकर भारत की दहन-आधारित औद्योगिक तापीय आवश्यकताओं का 55% हिस्सा पूरा करती हैं।
  • ऊर्जा खपत में कमी: स्वच्छ ऊर्जा द्वारा समर्थित विद्युतीकरण औद्योगिक ऊर्जा खपत में 22% तक की कमी कर सकता है तथा क्षेत्र के आधे से अधिक CO₂ उत्सर्जन को कम कर सकता है।
  • पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य संबंधी लाभ: औद्योगिक विद्युतीकरण से पूरे क्षेत्र में गैर-ग्रीनहाउस गैस प्रदूषकों के उत्सर्जन में भी कमी लाई जा सकती है। इससे सूक्ष्म कण पदार्थ (PM2.5) में 38%, सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) में 60% और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) में 53% तक की कमी हो सकती है।
    • इन वायु प्रदूषकों से बचाव के माध्यम से भारत में पात्र सभी औद्योगिक प्रक्रियाओं का विद्युतीकरण प्रतिवर्ष लगभग 7,94,000 लोगों की जान बचा सकता है तथा अनेक गैर-घातक स्वास्थ्य जटिलताओं की घटनाओं को भी लगभग आधा कर सकता है।

इसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है?

  • प्रतिष्ठान-स्तरीय इंजीनियरिंग आकलन: औद्योगिक तापीय प्रक्रियाओं के विद्युतीकरण की आधारशिला प्रतिष्ठान-स्तरीय इंजीनियरिंग आकलनों को बनाया जाना चाहिए। सुदृढ़ इंजीनियरिंग आकलनों के अभाव में उद्योग ऐसी प्रौद्योगिकियों में निवेश करने का जोखिम उठा सकते हैं, जो उनकी प्रक्रियागत आवश्यकताओं के अनुकूल न हों।
    • ये आकलन स्थानीय औद्योगिक प्रोफाइल, नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों और अवसंरचना की तैयारी के अनुरूप जिला-स्तरीय औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन योजनाएँ तैयार करने में सहायता कर सकते हैं।
  • प्रौद्योगिकी-समावेशी दृष्टिकोण: औद्योगिक प्रक्रियाएँ तापमान, उत्पादन समय-सारणी और तापीय मांग के संदर्भ में व्यापक रूप से भिन्न होती हैं। इसलिए किसी एक प्रौद्योगिकी को सभी परिस्थितियों के लिए उपयुक्त मानना व्यावहारिक नहीं है।
    • थर्मल ऊर्जा भंडारण समाधान तापीय बफर के रूप में कार्य कर सकते हैं। ये नवीकरणीय विद्युत की प्रचुर उपलब्धता के समय उत्पन्न अतिरिक्त ताप को संग्रहित कर सकते हैं और औद्योगिक प्रक्रिया में ताप की आवश्यकता होने पर उसे उपलब्ध करा सकते हैं।
  • पूंजी तक पहुँच: सुधारों का उद्देश्य ओपन-एक्सेस प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, बैंकिंग प्रावधानों को तर्कसंगत बनाकर, लेन-देन संबंधी जटिलताओं को कम करके और ग्रिड अवसंरचना को सुदृढ़ करके लागत में कमी लाना होना चाहिए।
    • नवीकरणीय विद्युत की योजना को औद्योगिक विद्युतीकरण के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए, ताकि उद्योग अपनी तापीय मांग को नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की अवधि के अनुरूप समायोजित कर सकें।
  • इंजीनियरिंग संक्रमण: इसके बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए ऐसे इंजीनियरों, तकनीशियनों और ऑपरेटरों की कार्यबल आवश्यकता होगी, जिनके पास प्रक्रिया एकीकरण, प्रणाली डिजाइन, स्थापना, कमीशनिंग, संचालन एवं रखरखाव तथा डिजिटल स्वचालन और नियंत्रण प्रणालियों से संबंधित आवश्यक क्षमताएँ हों।
  • प्रदर्शन परियोजनाएँ: भारत को बड़े पैमाने पर अनिवार्य प्रावधान लागू करने से पहले प्रदर्शन परियोजनाओं की आवश्यकता है। इससे इंजीनियरिंग संबंधी प्रमाण उपलब्ध होंगे, व्यावसायिक मॉडलों की व्यवहार्यता सुनिश्चित होगी और निवेश से जुड़ी अनिश्चितता कम होगी।
  • राष्ट्रीय ढाँचा: औद्योगिक तापीय प्रक्रियाओं के विद्युतीकरण के लिए स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित कार्यान्वयन द्वारा समर्थित एक समन्वित राष्ट्रीय ढाँचे की आवश्यकता है।
    • इस ढाँचे में इंजीनियरिंग मानकों की स्थापना, संस्थागत जिम्मेदारियों का निर्धारण, मांग के समेकन को सुगम बनाना, वित्तीय संसाधनों को जुटाना तथा प्रारंभिक प्रदर्शन परियोजनाओं को समर्थन प्रदान करना शामिल होना चाहिए।

निष्कर्ष

  • रिकॉर्ड स्तर पर कम सौर ऊर्जा कीमतों और जीवाश्म ईंधनों के उपयोग की सीमाओं के साथ भारत के पास स्वच्छ उद्योग के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व करने का एक अद्वितीय अवसर है।
  • लक्षित नीतियों और प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से भारत सौर ऊर्जा-संचालित उद्योग के आर्थिक, पर्यावरणीय एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त कर सकता है तथा आगामी दशकों के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को सतत विकास और प्रतिस्पर्धात्मक सफलता के लिए तैयार कर सकता है।

स्रोत: TH

 

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