पाठ्यक्रम: GS2/शासन/GS3/अर्थव्यवस्था
समाचार में
- प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY-U) के अंतर्गत 1.25 करोड़ से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 1 करोड़ से अधिक आवासों का निर्माण पूरा कर उन्हें लाभार्थियों को सौंप दिया गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY-U)
- इसे वर्ष 2015 में भारत के शहरी आवास परिदृश्य में परिवर्तन लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
- इसका उद्देश्य शहरी प्रवासियों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना था।
- यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) और मध्यम आय वर्ग (MIG) सहित झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों की गंभीर आवास कमी को दूर करने पर केंद्रित है।
- इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र शहरी परिवारों को स्थायी और सतत आवास उपलब्ध हो।

PMAY-U के कार्यान्वयन के घटक

प्रगति
- प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY-U) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई है। PMAY-U और PMAY-U 2.0 के अंतर्गत 1.25 करोड़ से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं तथा 1 करोड़ से अधिक आवासों का निर्माण पूरा कर उन्हें लाभार्थियों को सौंप दिया गया है।
- हाल ही में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के परिवारों के लिए 2.09 लाख से अधिक अतिरिक्त आवासों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इनमें लाभार्थी-नेतृत्व निर्माण (BLC) के तहत 1.42 लाख आवास और साझेदारी में किफायती आवास (AHP) के अंतर्गत 67,045 आवास शामिल हैं। इन स्वीकृतियों के साथ PMAY-U 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत आवासों की संख्या 18.38 लाख से अधिक हो गई है।
- इस योजना में महिला सशक्तीकरण पर भी विशेष बल दिया गया है।
- हाल ही में आवंटित 2.03 लाख आवासों में से सभी 2.03 लाख आवास महिलाओं को आवंटित किए गए हैं तथा लगभग 1 करोड़ आवास महिलाओं के नाम या संयुक्त स्वामित्व में पंजीकृत हैं।
महत्त्व
- आर्थिक: बड़े पैमाने पर आवास निर्माण से इस्पात, सीमेंट, ईंट निर्माण, हार्डवेयर आदि संबद्ध क्षेत्रों में व्यापक मांग उत्पन्न होती है तथा कुशल और अकुशल दोनों प्रकार के श्रमिकों के लिए रोजगार के बड़े अवसर सृजित होते हैं।
- महिला सशक्तीकरण: महिला मुखिया के नाम पर स्वामित्व अथवा अनिवार्य संयुक्त स्वामित्व के प्रावधान से महिलाओं के कानूनी परिसंपत्ति स्वामित्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- सामाजिक समावेशन: यह अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), वरिष्ठ नागरिकों तथा अन्य हाशिए पर स्थित समूहों को सहायता प्रदान करके सामाजिक समावेशन को भी बढ़ावा देता है।
- झुग्गी पुनर्वास: असुरक्षित झुग्गियों में रहने वाले लोगों को प्रत्येक मौसम में सुरक्षित रहने योग्य पक्के आवासों में स्थानांतरित करके जीवन की बुनियादी गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा में सुधार किया जाता है।
- अवसंरचना का अभिसरण: यह जल जीवन मिशन (जल कनेक्शन), पीएम सौभाग्य (विद्युत) और स्वच्छ भारत मिशन (स्वच्छता) जैसी राष्ट्रीय अवसंरचना योजनाओं के साथ समन्वय स्थापित करता है। इससे अलग-अलग आवास इकाइयों के निर्माण के बजाय एकीकृत आवासीय विकास को बढ़ावा मिलता है।
कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियाँ
- भूमि अधिग्रहण की लागत: भूमि की सीमित उपलब्धता और शहरों के केंद्रीय क्षेत्रों में भूमि की ऊँची कीमतों के कारण किफायती आवास परियोजनाएँ शहरों की परिधि की ओर स्थानांतरित हो जाती हैं। इससे आवास एवं रोजगार के स्थानों के बीच स्थानिक असंगति उत्पन्न होती है तथा श्रमिकों के आवागमन के समय और परिवहन लागत में वृद्धि होती है।
- निजी क्षेत्र की कम भागीदारी: कम लाभ मार्जिन, भूमि स्वामित्व से संबंधित जटिलताएँ तथा वैधानिक एवं नियामकीय स्वीकृतियों में लगने वाला लंबा समय संयुक्त आवास साझेदारी परियोजनाओं में निजी डेवलपर्स की भागीदारी को सीमित करता है।
- लाभार्थियों की पहचान संबंधी समस्याएँ: शहरी गरीबों का एक बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत है, जिसके पास आय का औपचारिक प्रमाण, वेतन पर्ची और क्रेडिट इतिहास उपलब्ध नहीं होता।
- इसके कारण प्राथमिक ऋण संस्थाएँ (PLIs) उन्हें आवास ऋण देने में संकोच करती हैं।
- परियोजनाओं में विलंब: सीमेंट, इस्पात और निर्माण में प्रयुक्त अन्य सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि से वित्तीय दबाव बढ़ता है, जिसके परिणामस्वरूप परियोजनाओं की समय-सीमा बढ़ जाती है और कई आवास इकाइयाँ अधूरी रह जाती हैं।
आगे की राह
- शहरी स्थानीय निकायों को भूमि पूलिंग नीतियों, भूमि बैंकिंग तथा GIS-आधारित भूमि मानचित्रण को लागू करना चाहिए, ताकि शहर के आंतरिक क्षेत्रों में उपलब्ध अप्रयुक्त सरकारी एवं नगरपालिका भूमि को किफायती आवास के लिए उपयोग में लाया जा सके।
- वित्तीय संस्थाएँ ऋण पात्रता के आकलन के लिए वैकल्पिक तंत्र अपनाने पर विचार कर सकती हैं, जैसे उपयोगिता बिल भुगतान का इतिहास, ट्रेड यूनियनों के साथ पंजीकरण और नकदी प्रवाह आधारित बैंकिंग। इससे अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों को आवास वित्त उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।
- शहर स्तर पर समयबद्ध डिजिटल सिंगल-विंडो स्वीकृति प्रणाली लागू करने से निर्माण-पूर्व अवधि में होने वाली लागत को कम किया जा सकता है और परियोजनाओं में होने वाले विलंब से बचा जा सकता है।
- कर प्रोत्साहन निजी निर्माणकर्ताओं को साझेदारी में किफायती आवास (AHP) और किफायती किराये के आवास (ARH) के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
- आधुनिक, कम-कार्बन निर्माण सामग्री तथा जलवायु-लचीली डिजाइन तकनीकों का व्यापक स्तर पर उपयोग करने से निम्न-आय वाले निवासियों के लिए आवास की जीवन-चक्र संचालन लागत कम होगी और राष्ट्रीय डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान मिलेगा।
स्रोत:PIB
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