पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- लोकसभा ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है।
परिचय
- उद्देश्य: जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करना।
- नए विधेयक का उद्देश्य विलंबित पंजीकरण संबंधी प्रावधानों को अधिक कठोर बनाना तथा जन्म एवं मृत्यु की घटनाओं की समय पर सूचना देने को प्रोत्साहित करना है।
- जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण: यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक, किंतु दो वर्ष के अंदर रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल जिलाधिकारी , उप-मंडल मजिस्ट्रेट अथवा जिलाधिकारी द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की स्वीकृति से ही किया जा सकेगा।
- दो वर्ष से अधिक विलंब के पश्चात पंजीकरण: यदि जन्म अथवा मृत्यु की सूचना दो वर्ष से अधिक विलंब से रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही किया जाएगा।
- अनिवार्य सत्यापन: विधेयक में यह भी अनिवार्य किया गया है कि विलंबित पंजीकरण की अनुमति प्रदान करने से पूर्व नामित प्राधिकारी संबंधित जन्म अथवा मृत्यु की सूचना की प्रामाणिकता का सत्यापन करेगा।
भारत में जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण
- भारत में जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य है तथा इसके आधार पर जारी प्रमाण-पत्र किसी व्यक्ति की वैधानिक पहचान प्रदान करता है।
- जन्म, मृत्यु तथा मृतजन्म (Stillbirth) संबंधी आँकड़े सिविल पंजीकरण प्रणाली (CRS) के अंतर्गत एक सतत एवं अनिवार्य व्यवस्था के माध्यम से दर्ज किए जाते हैं।
- यह प्रणाली भारत के जनसंख्या संबंधी आँकड़ों, जैसे—अनुमानित जन्म एवं मृत्यु, मृत्यु-दर, प्रजनन-दर तथा जन्म के समय लिंगानुपात के सटीक आकलन का आधार प्रदान करती है।
- इसका संचालन गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा किया जाता है।
- CRS वर्ष 1970 से विधिक रूप से संचालित है, यद्यपि प्रारंभिक वर्षों में इसकी कवरेज एवं रिपोर्टिंग की पूर्णता अपेक्षाकृत कम थी।
- यह प्रणाली जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अंतर्गत संचालित होती है, जिसमें वर्ष 2023 में संशोधन किया गया था।
- सामान्यतः जन्म एवं मृत्यु की सूचना 21 दिनों के अंदर देना आवश्यक होता है।
- अस्पतालों में इस सूचना को दर्ज कराने का दायित्व संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारी अथवा अधिकृत अधिकारी का होता है।
- घर पर घटित जन्म अथवा मृत्यु के मामलों में यह दायित्व सामान्यतः परिवार के मुखिया अथवा अधिसूचित सूचनादाता का होता है।
वर्षों के दौरान आँकड़ों की स्थिति
- वर्ष 2000 तक भारत में केवल 56% जन्म तथा 48% मृत्यु का पंजीकरण होता था।
- वर्ष 2014 तक यह आँकड़ा क्रमशः 86.6% तथा 72.5% तक पहुँच गया।
- वर्ष 2024 में जन्म पंजीकरण 99.1% तथा मृत्यु पंजीकरण 99.4% दर्ज किया गया।
- राज्यों के स्तर पर भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। वर्ष 2024 में 18 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने 100% जन्म पंजीकरण, जबकि 21 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने 100% मृत्यु पंजीकरण का लक्ष्य प्राप्त किया।
वर्ष 2024 में पंजीकरण में वृद्धि के कारण
- जन्म पंजीकरण में वृद्धि: अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में संस्थागत प्रसव की संख्या में वृद्धि तथा प्रसवोत्तर लाभों ने जन्म पंजीकरण को प्रोत्साहित किया।
- वर्तमान में जन्म प्रमाण-पत्र विद्यालय में प्रवेश, पहचान-पत्र, कल्याणकारी योजनाओं के लाभ तथा अन्य शासकीय कार्यों के लिए आवश्यक हो गया है।
- मृत्यु पंजीकरण में वृद्धि: विस्तारित स्वास्थ्य बीमा एवं आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं के कारण अधिक लोग औपचारिक स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं।
- परिवारों को पेंशन, बीमा दावा, उत्तराधिकार, संपत्ति हस्तांतरण, बैंक खातों एवं अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए मृत्यु प्रमाण-पत्र की आवश्यकता होती है।
- अधिनियम में संशोधन: जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने नागरिक पंजीकरण प्रणाली को अधिक समग्र, समयबद्ध एवं सुलभ बनाया है।
आँकड़ों का महत्व
- प्रशासनिक महत्व: स्वास्थ्य एवं सामाजिक नीतियों के प्रभाव का मूल्यांकन करने तथा प्रजनन, मृत्यु एवं जनसंख्या परिवर्तन की प्रवृत्तियों को समझने में सहायता मिलती है।
- वास्तविक समय की जानकारी: जन्म एवं मृत्यु का समय पर पंजीकरण जनसांख्यिकीय परिवर्तनों तथा जनस्वास्थ्य संबंधी वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराता है।
- CRS उच्च तापमान एवं प्रदूषण से प्रेरित मौसमी मृत्यु-दर के अध्ययन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- स्थानीय योजना निर्माण: एक सुदृढ़ CRS विकेंद्रीकृत शासन के अंतर्गत स्थानीय योजना निर्माण को सशक्त बनाता है, क्योंकि जिला एवं उप-जिला स्तर के आँकड़े राष्ट्रीय अथवा राज्य स्तरीय अनुमानों की तुलना में कार्यक्रम निर्माण के लिए अधिक उपयोगी होते हैं।
- व्यक्तिगत पहचान: जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण व्यक्तियों को अपनी वैधानिक पहचान सिद्ध करने में सक्षम बनाता है।
चिंताएँ
- क्षेत्रीय असमानताएँ: राज्यों एवं क्षेत्रों के बीच CRS के कार्यान्वयन की गुणवत्ता एवं पूर्णता में अभी भी उल्लेखनीय असमानताएँ विद्यमान हैं।
- विलंबित पंजीकरण: अनेक जन्म एवं मृत्यु निर्धारित 21-दिवसीय वैधानिक अवधि के अंदर पंजीकृत नहीं हो पाते, जिससे आँकड़ों की समयबद्धता एवं विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
- मृत्यु संबंधी आँकड़ों की निम्न गुणवत्ता: मृत्यु का पंजीकरण होने के बावजूद अधिकांश मामलों में मृत्यु के चिकित्सकीय प्रमाणित कारण (MCCD) उपलब्ध नहीं होते, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य योजना एवं रोग निगरानी में इन आँकड़ों की उपयोगिता सीमित हो जाती है।
- बेहतर आँकड़ा गुणवत्ता एवं सुशासन की आवश्यकता: समय पर पंजीकरण, सटीक अभिलेख संधारण, सुदृढ़ चिकित्सकीय प्रमाणीकरण तथा डिजिटल अभिलेखों के सुरक्षित एवं उत्तरदायी उपयोग पर अधिक बल देने की आवश्यकता है।
- आंतरिक प्रवासन के अभिलेखों का अभाव: आंतरिक प्रवासन को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने की व्यवस्था के अभाव में प्रशासनिक योजना निर्माण एवं सेवा वितरण की प्रभावशीलता प्रभावित होती है।
आगे की राह
- विशेष रूप से वंचित एवं दूरस्थ क्षेत्रों में जन-जागरूकता बढ़ाकर, प्रक्रियाओं को सरल बनाकर तथा अंतिम व्यक्ति तक सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित कर जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण की कवरेज एवं समयबद्धता को सुदृढ़ किया जाए।
- मृत्यु के कारणों के चिकित्सकीय प्रमाणीकरण (MCCD) का विस्तार, नियमित डेटा ऑडिट तथा सटीक एवं समयबद्ध अभिलेख संधारण के माध्यम से आँकड़ों की गुणवत्ता में सुधार किया जाए।
- लक्षित क्षमता निर्माण, बेहतर डिजिटल अवसंरचना तथा कमजोर प्रदर्शन वाले राज्यों एवं जिलों की प्रभावी निगरानी द्वारा क्षेत्रीय एवं ग्रामीण-शहरी असमानताओं को कम किया जाए।
- सीआरएस आँकड़ों के सुरक्षित उपयोग, आंतरिक प्रवासन अभिलेखों के एकीकरण तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को सुदृढ़ कर साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को बढ़ावा दिया जाए।
स्रोत: AIR
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संक्षिप्त समाचार 31-07-2026