संक्षिप्त समाचार 28-07-2026

हेपेटाइटिस से निपटने के लिए की भारत की लड़ाई

पाठ्यक्रम: जीएस-2/स्वास्थ्य 

चर्चा में क्यों ?

  • भारत हेपेटाइटिस से मुकाबले के अपने प्रयासों को व्यवस्थित रूप से सुदृढ़ कर रहा है। राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम का लक्ष्य वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करना है।

हेपेटाइटिस क्या है?

  • हेपेटाइटिस यकृत (लिवर) की सूजन है, जो हेपेटाइटिस विषाणुओं, अन्य संक्रमणों, अल्कोहल एवं दवाओं जैसे विषैले पदार्थों तथा स्व-प्रतिरक्षी (Autoimmune) रोगों के कारण हो सकती है।
  • हेपेटाइटिस विषाणुओं के पाँच प्रमुख प्रकार हैं— हेपेटाइटिस A, B, C, D और E
  • इनमें हेपेटाइटिस B तथा हेपेटाइटिस C सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताएँ हैं, क्योंकि ये दीर्घकालिक (Chronic) संक्रमण का रूप ले सकते हैं तथा यकृत सिरोसिस (Liver Cirrhosis) और यकृत कैंसर का कारण बन सकते हैं।

संचरण के तरीके, रोकथाम एवं उपचार

हेपेटाइटिस विषाणुकारण / संचरणरोकथाम एवं उपचार
हेपेटाइटिस A (HAV)दूषित भोजन या पानी के माध्यम से मल-मुख मार्ग (Faecal-Oral Route) से संक्रमण। खराब स्वच्छता एवं सुरक्षित पेयजल का अभाव।रोकथाम: सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता एवं साफ-सफाई के उपाय।उपचार: सामान्यतः स्वयं ठीक हो जाता है। सहायक उपचार (पर्याप्त जल एवं पोषण)। कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं।
हेपेटाइटिस B (HBV)सबसे सामान्यतः जन्म के समय माता से शिशु में संक्रमण। संक्रमित रक्त, रक्त उत्पादों एवं शारीरिक द्रवों के संपर्क से।रोकथाम: सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के अंतर्गत हेपेटाइटिस-B टीका (जन्म के तुरंत बाद, अधिकतम 24 घंटे के भीतर; तथा 6, 10 एवं 14 सप्ताह पर)।उपचार: राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार पात्र रोगियों में एंटीवायरल दवाओं से दीर्घकालिक हेपेटाइटिस-B का उपचार।
हेपेटाइटिस C (HCV)असुरक्षित इंजेक्शन एवं चिकित्सीय प्रक्रियाओं के दौरान संक्रमित रक्त के संपर्क से। संक्रमित सुई/सिरिंज साझा करने से।संक्रमित रक्त, रक्त उत्पादों एवं शारीरिक द्रवों के संपर्क से।रोकथाम: हानि-न्यूनन उपाय (जैसे सुई विनिमय कार्यक्रम), सुरक्षित इंजेक्शन पद्धतियाँ। हेपेटाइटिस-C से बचाव के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है।उपचार: प्रत्यक्ष प्रभावी एंटीवायरल (DAAs) दवाओं के पैन-जीनोटाइपिक उपचार से लगभग सभी रोगी 12–24 सप्ताह में ठीक हो सकते हैं।
हेपेटाइटिस D (HDV)संक्रमित रक्त, रक्त उत्पादों एवं शारीरिक द्रवों के संपर्क से।संक्रमण केवल कुछ दीर्घकालिक HBV संक्रमित व्यक्तियों में होता है।रोकथाम: हेपेटाइटिस-B संक्रमण की रोकथाम द्वारा। हेपेटाइटिस-B का टीका हेपेटाइटिस-D से भी पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है।
हेपेटाइटिस E (HEV)दूषित भोजन या पानी के माध्यम से मल-मुख मार्ग से संक्रमण।खराब स्वच्छता एवं सुरक्षित पेयजल का अभाव।रोकथाम: सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता एवं साफ-सफाई के उपाय।उपचार: सामान्यतः स्वयं ठीक हो जाता है। सहायक उपचार (पर्याप्त जल एवं पोषण)। कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं।

हेपेटाइटिस से मुकाबले की दिशा में भारत के कदम 

  • भारत में हेपेटाइटिस को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में मान्यता दी गई है। वर्ष 2018 में सरकार ने इस रोग से निपटने के लिए राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP) प्रारंभ किया, जिसके अंतर्गत जाँच एवं उपचार सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।
  • यह पहल विभिन्न वायरल रोगों से मुकाबला करने संबंधी संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDGs) के अनुरूप है।
  • इस कार्यक्रम में रोकथाम, जागरूकता, निदान एवं उपचार पर आधारित व्यापक दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, जाँच एवं उपचार तक पहुँच में सुधार करना तथा हेपेटाइटिस-B एवं हेपेटाइटिस-C के लिए निःशुल्क जाँच एवं दवाएँ उपलब्ध कराना है।
  • यह कार्यक्रम हेपेटाइटिस A, B, C, D एवं E सभी प्रकारों को कवर करता है। हेपेटाइटिस-A एवं हेपेटाइटिस-E की निगरानी एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के अंतर्गत की जाती है।

स्रोत: PIB

कॉर्पोरेट मित्र योजना

पाठ्यक्रम: जीएस-2/शासन

सन्दर्भ

  • भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (IICA), शिलांग ने कॉर्पोरेट मित्र योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु एक वेबिनार आयोजित किया।

कॉर्पोरेट मित्र योजना

  • कॉर्पोरेट मित्र योजना कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) की एक पहल है, जिसका संचालन भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (IICA) द्वारा किया जाता है।
  • इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) पारितंत्र को सुदृढ़ करना है। इसके लिए प्रशिक्षित एवं मान्यता प्राप्त कॉर्पोरेट मित्र (अर्ध-पेशेवर) तैयार किए जाते हैं, जो MSMEs को सुलभ लागत पर व्यावसायिक एवं अनुपालन संबंधी सहायता प्रदान करेंगे।
  • यह योजना विशेष रूप से टियर-2 एवं टियर-3 शहरों को लक्षित करती है, जहाँ एमएसएमई के लिए पेशेवर परामर्श सेवाओं की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है।
  • प्रथम चरण में देशभर के 2,000 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिनमें पूर्वोत्तर क्षेत्र के 200 अभ्यर्थी भी शामिल होंगे। इन्हें पाठ्यक्रम शुल्क में 50% की रियायत प्रदान की जाएगी।

स्रोत: PIB

बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) का डार्क वेब पर डेटा लीक

पाठ्यक्रम: जीएस-3/साइबर सुरक्षा 

चर्चा में क्यों ?

  • बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) पर एक साइबर हमला हुआ, जब उसके एक कर्मचारी का ई-मेल खाता समझौता (Compromise) हो गया। इसके परिणामस्वरूप कथित रूप से लगभग 1 टीबी ग्राहक एवं कॉर्पोरेट बैंकिंग डेटा डार्क वेब पर लीक हो गया।

क्या आप जानते हैं?

वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) को व्यापक रूप से तीन भागों में विभाजित किया जाता है—

  • सरफेस वेब (Surface Web): इसमें सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध वेबसाइटें होती हैं, जिन्हें गूगल जैसे सर्च इंजन के माध्यम से आसानी से खोजा जा सकता है।
  • डीप वेब (Deep Web): इसमें ऐसी सामग्री होती है जो सर्च इंजनों द्वारा सूचीबद्ध नहीं होती, जैसे निजी डेटाबेस, सरकारी एवं कॉर्पोरेट इंट्रानेट तथा पासवर्ड-संरक्षित रिसोर्सेस ।
  • डार्क वेब (Dark Web): यह डीप वेब का छिपा हुआ भाग है, जहाँ पहुँचने के लिए Tor (The Onion Router) या I2P (Invisible Internet Project) जैसे विशेष सॉफ़्टवेयर की आवश्यकता होती है, जो उपयोगकर्ताओं को उच्च स्तर की गुमनामी प्रदान करते हैं।

डार्कवेब

  • यह इंटरनेट का वह भाग है जिसे जानबूझकर छिपाया गया है और जिसे सामान्य सर्च इंजन या ब्राउज़र द्वारा नहीं खोजा जा सकता।
  • इसमें प्रवेश के लिए Tor या I2P जैसे विशेष सॉफ़्टवेयर की आवश्यकता होती है, जो एन्क्रिप्टेड ओवरले नेटवर्क का उपयोग करके उपयोगकर्ताओं एवं वेबसाइट संचालकों की पहचान को काफी हद तक गुप्त रखते हैं।
  • डार्क वेब में ऑनियन रूटिंग (Onion Routing) तकनीक का उपयोग होता है, जिसमें इंटरनेट ट्रैफिक को कई परतों में एन्क्रिप्ट कर स्वयंसेवकों द्वारा संचालित विभिन्न रिले नोड्स से होकर भेजा जाता है। इससे कोई भी एक नोड डेटा के स्रोत एवं गंतव्य दोनों की जानकारी नहीं रखता।
  • हिडन सर्विसेज (Hidden Services) सर्वरों के वास्तविक स्थान को भी छिपाती हैं।

अनुप्रयोग

वैध उपयोग:

  • गोपनीयता की सुरक्षा, सेंसरशिप से बचाव, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, पत्रकारों, व्हिसलब्लोअरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं व्यवसायों के लिए सुरक्षित संचार तथा संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा।
  • कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ भी डार्क वेब का उपयोग निगरानी, गुप्त अभियानों, गुमनाम सूचना तंत्र तथा साइबर अपराधों की जाँच के लिए करती हैं।

अवैध उपयोग:

  • डार्कनेट बाजारों में अवैध मादक पदार्थों, जाली दस्तावेजों, चोरी किए गए वित्तीय डेटा, हैकिंग उपकरणों, मैलवेयर, साइबर अपराध सेवाओं तथा अन्य अवैध वस्तुओं का व्यापार।
  • इन लेन-देन में प्रायः बिटकॉइन एवं मोनेरो जैसी क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग किया जाता है।

स्रोत: TH

वर्ष 2031-32 तक एआई डेटा केंद्रों से 26.3 गीगावाट अतिरिक्त विद्युत भार: विद्युत मंत्रालय

पाठ्यक्रम: जीएस-3/अवसंरचना

सन्दर्भ

  • विद्युत मंत्रालय ने संसद को बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) डेटा केंद्र वर्ष 2031-32 तक विद्युत ग्रिड पर 26.3 गीगावाट (GW) का अतिरिक्त भार डालेंगे।

परिचय

  • इस अतिरिक्त विद्युत भार को राष्ट्रीय ग्रिड में समाहित किया जाएगा तथा इसकी आपूर्ति मुख्यतः नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के माध्यम से की जाएगी।
  • यह नया अनुमान सरकार के मार्च 2026 के पूर्व अनुमान से लगभग दोगुना है, जिसमें वर्ष 2031-32 तक डेटा केंद्रों से 13.56 गीगावाट बिजली की मांग का अनुमान लगाया गया था।
  • डेटा केंद्र एक भौतिक कक्ष, भवन अथवा सुविधा है, जहाँ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अवसंरचना स्थापित की जाती है, ताकि अनुप्रयोगों एवं सेवाओं का निर्माण, संचालन तथा वितरण किया जा सके।
  • यह उन अनुप्रयोगों एवं सेवाओं से संबंधित डेटा का भंडारण एवं प्रबंधन भी करता है।

भारत में डेटा केंद्र

  • आने वाले वर्षों में भारत में डेटा केंद्र क्षमता में तीव्र वृद्धि होने की संभावना है।
  • वर्ष 2020 में जहाँ डेटा केंद्रों की क्षमता केवल 375 मेगावाट (MW) थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर लगभग 1.5 गीगावाट (GW) हो गई।
  • वर्ष 2030 तक भारत की परिचालन डेटा केंद्र क्षमता लगभग 40% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) के साथ बढ़कर 12 गीगावाट (GW) होने का अनुमान है।
  • इसी अवधि में AI-समर्पित डेटा केंद्र क्षमता लगभग 24 गुना बढ़ने की संभावना है, जो 275 मेगावाट से बढ़कर 6,546 मेगावाट तक पहुँच सकती है।
  • हाइपरस्केल क्लाउड प्रदाताओं, उद्यमों के डिजिटल परिवर्तन तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग के कारण कंप्यूटिंग अवसंरचना की मांग तेज़ी से बढ़ रही है।

स्रोत: IE

Kimi K3

पाठ्यक्रम: जीएस-3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

सन्दर्भ

  • चीन के कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्टार्टअप Moonshot AI ने अपने AI चैटबॉट के लिए नए सदस्यता पंजीकरण (Subscriptions) अस्थायी रूप से रोक दिए हैं, क्योंकि हाल ही में लॉन्च किए गए Kimi K3 मॉडल की अत्यधिक मांग के कारण उपलब्ध GPU कंप्यूटिंग क्षमता समाप्त हो गई।

Kimi K3 क्या है ?

  • Kimi K3 एक नया लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) है, जिसे चीन के कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्टार्टअप मूनशॉट एआई(Moonshot AI)द्वारा विकसित किया गया है।
  • इसने कोडिंग तथा तर्क क्षमता (Reasoning) से संबंधित मानकों पर अग्रणी स्तर का प्रदर्शन किया है। कई कार्यों में इसके परिणाम ओपन एआई(OpenAI) एवं एंथ्रोपिक (Anthropic) द्वारा विकसित प्रमुख एआई मॉडलों के तुलनीय पाए गए हैं।
  • इस मॉडल को ओपन-वेट (Open-Weight) मॉडल के रूप में जारी किए जाने की संभावना है, जिससे डेवलपर इसे डाउनलोड करके अपने स्थानीय सिस्टम पर चला सकेंगे।

ओपन-वेट (Open-Weight) AI मॉडल क्या हैं?

  • ओपन-वेट AI मॉडल वह मॉडल होता है, जिसके प्रशिक्षित मानदंड (Weights) सार्वजनिक रूप से उपलब्ध करा दिए जाते हैं।

विशेषताएँ:

  • डेवलपर मॉडल को डाउनलोड, संचालित (Run), फाइन-ट्यून (Fine-Tune) तथा आवश्यकतानुसार संशोधित कर सकते हैं।
  • यह मॉडल डेवलपर की क्लाउड सेवा पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय निजी अवसंरचना (Private Infrastructure) पर भी संचालित किया जा सकता है।

लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs)

  • लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का एक प्रकार का एल्गोरिदम है, जो डीप लर्निंग तकनीकों तथा अत्यधिक बड़े डेटा-समूहों का उपयोग करके सामग्री को समझने, सारांशित करने, उत्पन्न करने तथा नई सामग्री का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम होता है।
  • डीप लर्निंग में असंरचित (Unstructured) डेटा का संभाव्य (Probabilistic) विश्लेषण किया जाता है, जिससे मॉडल बिना मानवीय हस्तक्षेप के विभिन्न प्रकार की सामग्री के बीच अंतर पहचानना सीखता है।
  • यह मॉडल अक्षरों, शब्दों एवं वाक्यों के परस्पर संबंध तथा उनके संयुक्त कार्य करने के तरीके को समझने में सहायता करता है।

स्रोत: IE

 

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