केरल में चाय की पत्तियों का ड्रोन-आधारित परिवहन

पाठ्यक्रम: जीएस-3/कृषि एवं अर्थव्यवस्था

सन्दर्भ

  • एक चाय कंपनी ने केरल के इडुक्की में ताज़ी तोड़ी गई हरी चाय की पत्तियों को चाय बागानों से तौल केंद्रों एवं प्रसंस्करण कारखानों तक पहुँचाने के लिए ड्रोन-आधारित परिवहन का उपयोग प्रारंभ किया है।

परिचय

  • ड्रोन चाय की पत्तियों को बागानों से 5–10 किमी की दूरी तक तौल केंद्रों एवं कारखानों तक पहुँचा सकते हैं।
  • इसका उद्देश्य ईंधन लागत कम करना, मैनुअल श्रम को घटाना, श्रमिकों की कमी की समस्या का समाधान करना तथा प्रसंस्करण की गति बढ़ाना है, जिससे चाय की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • यह पहल भारत के चाय क्षेत्र में परिशुद्ध कृषि (Precision Agriculture), डिजिटल परिवर्तन तथा सतत बागान प्रबंधन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

भारत का चाय उद्योग

  • भारत में 15 राज्यों में चाय की खेती की जाती है। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु एवं केरल प्रमुख उत्पादक राज्य हैं, जबकि त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार एवं कर्नाटक स्थापित किंतु अपेक्षाकृत छोटे उत्पादक हैं।
  • गैर-पारंपरिक नए चाय उत्पादक राज्य: अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड एवं सिक्किम।
  • भारत विश्व का सबसे बड़ा काली चाय (Black Tea) उत्पादक एवं उपभोक्ता है।
  • कुल चाय उत्पादन में भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है तथा 2024 में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा चाय निर्यातक रहा।
  • प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र: असम (असम घाटी, कछार) तथा पश्चिम बंगाल (डुआर्स, तराई, दार्जिलिंग)।
  • वैश्विक प्रतिष्ठा: भारतीय चाय, विशेषकर असम, दार्जिलिंग एवं नीलगिरि की चाय, अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
  • भारत के प्रमुख निर्यात गंतव्य: संयुक्त अरब अमीरात, इराक, रूस, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, ईरान, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, सऊदी अरब तथा तुर्की।

सरकारी योजनाएँ

चाय विकास एवं संवर्धन योजना (TDPS)

  • इसका क्रियान्वयन भारतीय चाय बोर्ड (Tea Board of India) द्वारा 15वें वित्त आयोग (2021–2026) के अंतर्गत किया जा रहा है।

लघु चाय उत्पादकों के लिए बागान विकास योजना (PDSTG)

  • इसके अंतर्गत क्षेत्रीय मशीनीकरण पर अनुदान दिया जाता है, जैसे—
  • छंटाई मशीनों पर ₹30,000 तक का अनुदान।
  • यांत्रिक चाय कटाई मशीनों पर ₹40,000 तक का अनुदान।
  • पावर स्प्रेयर पर सहायता।
  • साथ ही जैविक प्रमाणन एवं मृदा परीक्षण के लिए भी सहायता प्रदान की जाती है।

चाय उद्योग की चुनौतियाँ

  • जलवायु परिवर्तन: बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा तथा चरम मौसम की घटनाएँ चाय की उपज एवं गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं।
  • श्रमिकों की कमी: बागानों में श्रमिकों की उपलब्धता घटने से मशीनीकरण तथा प्रवासी श्रमिकों पर निर्भरता बढ़ गई है।
  • कम लाभप्रदता: बढ़ती उत्पादन लागत, चाय के कम मूल्य तथा पुराने चाय पौधों के कारण उत्पादकों का लाभ घट रहा है।
  • कीट एवं सतत कृषि संबंधी चुनौतियाँ: कीटों का बढ़ता प्रकोप, अवशेष प्रबंधन की समस्याएँ तथा टिकाऊ खेती की आवश्यकता।
  • व्यापार एवं बाजार संबंधी चुनौतियाँ: कम लागत वाले उत्पादक देशों से प्रतिस्पर्धा, परिवहन संबंधी बाधाएँ तथा गैर-शुल्कीय अवरोधों के कारण निर्यात प्रभावित होता है।

चाय उत्पादन के लिए भौगोलिक परिस्थितियाँ

  • चाय का पौधा उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छी तरह विकसित होता है। इसे पूरे वर्ष गर्म, आर्द्र तथा पाले से मुक्त जलवायु की आवश्यकता होती है।
  • मिट्टी: गहरी, उपजाऊ, अच्छी जल-निकासी वाली तथा ह्यूमस एवं जैविक पदार्थों से समृद्ध मिट्टी उपयुक्त होती है।
  • तापमान: चाय के पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए औसत वार्षिक तापमान 15°C से 23°C के बीच होना चाहिए।
  • वर्षा: लगभग 150–200 सेमी वर्षा आवश्यक होती है। वर्षभर समान रूप से होने वाली नियमित वर्षा कोमल पत्तियों की निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करती है।

भारतीय चाय बोर्ड

  • इसकी स्थापना चाय अधिनियम, 1953 के अंतर्गत 1954 में एक वैधानिक निकाय के रूप में की गई।
  • इसका उद्देश्य भारतीय चाय उद्योग का विनियमन करना तथा भारत के चाय उत्पादकों के हितों की रक्षा करना है।
  • भारत के सभी चाय उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादित चाय का प्रशासन चाय बोर्ड द्वारा किया जाता है।
  • बोर्ड में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष सहित कुल 32 सदस्य होते हैं, जिन्हें भारत सरकार नियुक्त करती है और जो चाय उद्योग के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • चाय बोर्ड का मुख्यालय कोलकाता में स्थित है।

स्रोत: TH

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: जीएस-1/इतिहास एवं संस्कृति सन्दर्भ उत्तर प्रदेश स्थित भारत के प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल (अंकित) किया गया है। परिचय यह निर्णय दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र की बैठक के दौरान लिया गया। विश्व धरोहर सूची में 45 स्थलों...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-2/राजव्यवस्था एवं शासन सन्दर्भ भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक प्रदर्शनों से निपटने के संबंध में पुलिस के लिए देशव्यापी दिशानिर्देश तैयार करने का निर्णय लिया है। न्यायालय ने शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार को स्वीकार करते हुए कानून-प्रवर्तन करने वाले कर्मियों के जीवन के महत्त्व पर भी बल दिया। पृष्ठभूमि यह आदेश नीट...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-2/शासन सन्दर्भ नीतिगत सुधारों, अवसंरचना विकास, जमीनी स्तर की प्रतिभाओं के प्रोत्साहन तथा बढ़ते निवेश के कारण भारत का खेल परिदृश्य तीव्र गति से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। भारत में खेलों का विकास भारत का खेल इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। महाभारत, रामायण, मानसोल्लास तथा मल्लपुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में धनुर्विद्या,...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था सन्दर्भ भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) वर्ष 2004 से जारी विराम के बाद शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए नए लाइसेंस जारी करने की अनुमति देने की तैयारी में है। प्रस्ताव में क्या शामिल है? न्यूनतम पूंजी आवश्यकता:आरबीआई ने नए आवेदकों के लिए ₹300 करोड़ की न्यूनतम पूंजी आवश्यकता का सुझाव दिया है, जो...
Read More

पाठ्यक्रम:जीएस-2/शासन; जीएस-3/अर्थव्यवस्था  सन्दर्भ हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यूरिया हेतु राष्ट्रीय निवेश नीति (National Investment Policy for Urea (NIPU)-2026 को स्वीकृति प्रदान की है। इसका उद्देश्य वर्तमान खरीफ मौसम के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बीच घरेलू यूरिया उत्पादन में निवेश को बढ़ावा देना है। उर्वरक (Fertilisers) उर्वरक प्राकृतिक अथवा मानव-निर्मित...
Read More

हेपेटाइटिस से निपटने के लिए की भारत की लड़ाई पाठ्यक्रम: जीएस-2/स्वास्थ्य  चर्चा में क्यों ? भारत हेपेटाइटिस से मुकाबले के अपने प्रयासों को व्यवस्थित रूप से सुदृढ़ कर रहा है। राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम का लक्ष्य वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करना है। हेपेटाइटिस क्या...
Read More
scroll to top