भारत का खेल पारितंत्र

पाठ्यक्रम: जीएस-2/शासन

सन्दर्भ

  • नीतिगत सुधारों, अवसंरचना विकास, जमीनी स्तर की प्रतिभाओं के प्रोत्साहन तथा बढ़ते निवेश के कारण भारत का खेल परिदृश्य तीव्र गति से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।

भारत में खेलों का विकास

  • भारत का खेल इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। महाभारत, रामायण, मानसोल्लास तथा मल्लपुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में धनुर्विद्या, मल्लयुद्ध (कुश्ती), घुड़सवारी, तैराकी, शिकार तथा चतुरंग (शतरंज) का उल्लेख मिलता है।
  • मध्यकाल में मुगल शासकों को चौगान (पोलो), शतरंज, चौपड़ (लूडो) तथा शिकार का विशेष शौक था। इस काल में कुश्ती भी अत्यंत लोकप्रिय रही।
  • ब्रिटिश शासन के दौरान क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, गोल्फ तथा अन्य आधुनिक खेल भारत में आए, जिससे संगठित खेल संस्कृति का विकास हुआ।
  • स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान खेल राष्ट्रवाद के प्रतीक भी बने, जैसे कि मोहन बागान की एक ब्रिटिश रेजिमेंट के विरुद्ध ऐतिहासिक फुटबॉल विजय।
  • स्वतंत्रता के बाद भारत ने अनेक महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं, जैसे 1948 में ओलंपिक हॉकी का स्वर्ण पदक, 1951 में प्रथम एशियाई खेलों की मेजबानी, तथा अंतरराष्ट्रीय खेलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी।

वैश्विक खेल मंच पर भारत का उभार

ओलंपिक खेल:

  • वर्ष 2016 से 2024 के बीच भारत की ओलंपिक यात्रा में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला।
  • रियो 2016 में भारत ने 2 पदक जीते, जो टोक्यो 2020 में बढ़कर 7 पदक हो गए। पेरिस 2024 में भी भारत ने 6 पदक जीतकर इस प्रदर्शन को बनाए रखा।
  • नीरज चोपड़ा टोक्यो 2020 में ओलंपिक एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बने।
  • मीराबाई चानू भी भारत की सबसे निरंतर प्रदर्शन करने वाली ओलंपिक पदक विजेताओं में शामिल रहीं।

पैरालंपिक खेल: 

  • पिछले तीन संस्करणों में भारत के पैरालंपिक प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
  • रियो 2016 में भारत ने 4 पदक जीते, जो टोक्यो 2020 में बढ़कर 19 पदक हो गए।
  • पेरिस 2024 भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ पैरालंपिक अभियान रहा, जिसमें भारत ने 29 पदक जीते।
  • अवनि लेखरा, सुमित अंतिल तथा प्रमोद भगत देश के प्रमुख प्रदर्शनकर्ताओं में रहे।
  • टार्गेट ओलंपिक पोडियम योजना (TOPS) तथा खेलो इंडिया पैरा गेम्स जैसी योजनाओं ने पैरा खिलाड़ियों को मजबूत समर्थन प्रदान किया है।

एशियाई खेल: 

  • भारत ने बड़े दलों की भागीदारी तथा बेहतर पदक प्रदर्शन के माध्यम से एशियाई खेलों में लगातार अपनी स्थिति मजबूत की है।
  • इंचियोन 2014 में भारत ने 57 पदक जीते, जो जकार्ता 2018 में बढ़कर 69 पदक हो गए।

राष्ट्रमंडल खेल: 

  • राष्ट्रमंडल खेलों में भारत लगातार सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले देशों में रहा है।
  • ग्लासगो 2014 में भारत ने 64 पदक जीते, जो गोल्ड कोस्ट 2018 में बढ़कर 66 पदक हो गए।
  • इसके बाद बर्मिंघम 2022 में भारत ने 61 पदक जीते।
  • कुश्ती, भारोत्तोलन, टेबल टेनिस, बैडमिंटन तथा एथलेटिक्स ने भारत की सफलता में लगातार महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • पी. वी. सिंधु, विनेश फोगाट तथा अचिंता शेउली देश के प्रमुख प्रदर्शनकर्ताओं में शामिल रहे।
  • राष्ट्रमंडल खेल 2026 का आयोजन 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक ग्लासगो में किया जा रहा है। इसमें 74 देशों के खिलाड़ी 10 खेलों में भाग ले रहे हैं, जिनमें 6 पूर्णतः एकीकृत पैरा खेल भी शामिल हैं। भारत ने 124 सदस्यीय दल भेजा है, जिसमें 78 पुरुष और 46 महिलाएँ शामिल हैं। 27 जुलाई 2026 तक भारत ने 4 पदक जीते हैं: 1 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य।
  • मीराबाई चानू ने राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीता।
  • झांडू कुमार, ऋषिकांत सिंह और मुथुपांडी राजा ने क्रमशः कांस्य, रजत और रजत पदक जीतकर भारत की पदक संख्या में वृद्धि की।

सुदृढ़ खेल पारितंत्र का महत्त्व

  • जनसांख्यिकीय लाभांश एवं सशक्तिकरण: खेल भारत की विशाल युवा आबादी के लिए एक सकारात्मक माध्यम है तथा यह मानसिक स्वास्थ्य, नेतृत्व क्षमता और अनुशासन को बढ़ावा देता है।
  • आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन: खेल आयोजन प्रबंधन, खेल प्रौद्योगिकी, फिजियोथेरेपी, खेल चिकित्सा, विनिर्माण तथा खेल विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उत्पन्न करते हैं।
  • सॉफ्ट पावर: अंतरराष्ट्रीय खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किसी भी देश के लिए एक महत्त्वपूर्ण सॉफ्ट पावर का साधन है तथा राष्ट्रीय गौरव और वैश्विक कूटनीतिक प्रभाव को सुदृढ़ करता है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार: जमीनी स्तर पर खेलों में भागीदारी को बढ़ावा देकर गैर-संचारी रोगों (NCDs) में कमी लाई जा सकती है तथा अधिक स्वस्थ कार्यबल का निर्माण किया जा सकता है।

क्या आप जानते हैं ?

  • खेल राज्य सूची का विषय होने के कारण देश में खेलों के संवर्धन एवं विकास की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की होती है।
  • राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर (जिसमें अंतरराष्ट्रीय संधियों से संबंधित दायित्व भी शामिल हैं) यह विषय अवशिष्ट शक्तियों के अंतर्गत केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।

सरकार की विभिन्न पहलें  

खेलो इंडिया योजना

  • भारतीय खेलों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने के उद्देश्य से 2017 में खेलो इंडिया योजना प्रारंभ की गई।
  • इस योजना के अंतर्गत पहले से चल रही तीन योजनाओं को एकीकृत किया गया। राजीव गांधी खेल अभियान, शहरी खेल अवसंरचना योजना तथा राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज योजना को मिलाकर खेल विकास के लिए एक समेकित ढाँचा तैयार किया गया।
  • टार्गेट ओलंपिक पोडियम योजना (TOPS): भारत के ओलंपिक एवं पैरालंपिक खेलों में प्रदर्शन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सितंबर 2014 में प्रारंभ की गई। अप्रैल 2018 में इस योजना का पुनर्गठन किया गया तथा खिलाड़ियों को समग्र सहायता प्रदान करने के लिए एक समर्पित तकनीकी सहायता दल का गठन किया गया।
  • TOPS के अंतर्गत खिलाड़ियों को विदेशी प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी, प्रशिक्षण शिविर, विशेष खेल उपकरण तथा ₹50,000 प्रतिमाह की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
  • खेलो इंडिया राइजिंग टैलेंट आइडेंटिफिकेशन (KIRTI) पहल: 9 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में खेल प्रतिभा की पहचान कर उनका विकास किया जाता है। 
  • केंद्रीय बजट 2026–27: खेल सामग्री निर्माण के लिए ₹500 करोड़ के आवंटन के साथ एक समर्पित पहल की घोषणा की गई। 
  • राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025: खिलाड़ियों के कल्याण तथा खेल प्रशासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सभी राष्ट्रीय खेल निकायों के लिए सुरक्षित खेल नीति (Safe Sports Policy), आचार संहिता (Code of Ethics) तथा आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र अनिवार्य किया गया है।
  • खेलो भारत नीति, 2025: विकसित भारत के लक्ष्य तथा 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की भारत की महत्त्वाकांक्षा के अनुरूप खेलों को जन आंदोलन तथा व्यवहार्य करियर के रूप में विकसित करने के लिए दीर्घकालिक रूपरेखा प्रदान करती है।
  • राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त): इस अवसर पर भारत के राष्ट्रपति खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय खेल पुरस्कार प्रदान करते हैं।
  • मेधावी खिलाड़ियों के लिए पेंशन योजना:  सेवानिवृत्त अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को ₹12,000 से ₹20,000 प्रतिमाह तक पेंशन प्रदान की जाती है।
  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय खिलाड़ी कल्याण कार्यक्रम: चिकित्सा उपचार, खेल उपकरण तथा प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • राष्ट्रीय खेल विकास कोष (NSDF): खेल अवसंरचना तथा खिलाड़ियों के विकास के लिए सरकारी वित्तपोषण के पूरक के रूप में निजी क्षेत्र, अनिवासी भारतीयों (NRIs) तथा परोपकारियों से योगदान आमंत्रित किया जाता है।
  • राष्ट्रीय खेल विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र (NCSSR): 2017 में स्थापित इस केंद्र का उद्देश्य खेल विज्ञान, खेल चिकित्सा, चोटों की रोकथाम, पुनर्वास तथा प्रदर्शन में सुधार को अनुसंधान एवं संस्थागत सहयोग के माध्यम से बढ़ावा देना है।

चुनौतियाँ

  • अवसंरचना संबंधी समस्याएँ: महानगरों एवं उत्कृष्ट खेल केंद्रों में विश्वस्तरीय सुविधाएँ उपलब्ध हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों तथा टियर-2/टियर-3 शहरों में मानकीकृत उपकरणों एवं प्रशिक्षण सुविधाओं की उपलब्धता सीमित है।
  • शासन संबंधी चिंताएँ: कुछ राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) में पारदर्शिता की कमी, न्यायिक विवाद तथा पेशेवर प्रबंधन के अभाव के कारण खिलाड़ियों के लिए सहायता एवं विकास कार्यक्रमों में विलंब होता है।
  • कौशल संबंधी कमी: भारत में अभी भी उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षकों, बायोमैकेनिस्ट, खेल मनोवैज्ञानिकों तथा पोषण विशेषज्ञों की कमी है, जिसके कारण महंगे विदेशी विशेषज्ञों पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • सामाजिक सोच एवं रोजगार सुरक्षा: क्रिकेट के अतिरिक्त अन्य खेलों को अभी भी पारंपरिक शैक्षणिक मार्गों की तुलना में आर्थिक दृष्टि से जोखिमपूर्ण करियर माना जाता है, यद्यपि यह धारणा धीरे-धीरे बदल रही है।

सुधार के सुझाव 

  • सहयोग बढ़ाया जाए: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत खेलों को मुख्य शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए, ताकि बचपन से ही मजबूत प्रतिभा आधार विकसित हो सके।
  • पेशेवर खेल प्रशासन: सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों में खिलाड़ियों का स्वतंत्र प्रतिनिधित्व, पारदर्शी वित्तीय लेखा-परीक्षण तथा पेशेवर मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
  • अवसंरचना को सुदृढ़ किया जाए: चिकित्सा विश्वविद्यालयों के सहयोग से क्षेत्रीय खेल विज्ञान केंद्रों की स्थापना की जाए, ताकि स्थानीय शारीरिक प्रशिक्षकों, फिजियोथेरेपिस्टों तथा प्रदर्शन विश्लेषकों को प्रशिक्षित किया जा सके।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP): निजी कंपनियों को विभिन्न खेलों के प्रायोजन के लिए प्रोत्साहित किया जाए, जिससे खेलों को दीर्घकालिक वित्तीय सहयोग प्राप्त हो सके।

स्रोत: PIB

 

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