पाठ्यक्रम: जीएस-2/राजव्यवस्था एवं शासन
सन्दर्भ
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक प्रदर्शनों से निपटने के संबंध में पुलिस के लिए देशव्यापी दिशानिर्देश तैयार करने का निर्णय लिया है। न्यायालय ने शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार को स्वीकार करते हुए कानून-प्रवर्तन करने वाले कर्मियों के जीवन के महत्त्व पर भी बल दिया।
पृष्ठभूमि
- यह आदेश नीट (NEET) परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के बाद छात्रों द्वारा देशभर में किए गए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों से संबंधित याचिकाओं के पश्चात पारित किया गया।
- याचिकाकर्ताओं ने प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को विनियमित करने तथा बल के मनमाने प्रयोग को रोकने के लिए राष्ट्रीय मानकों की मांग की।
- न्यायालय ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र की आधारशिला है, लेकिन विरोध शांतिपूर्ण होना चाहिए तथा वह दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकता और न ही सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
विरोध के अधिकार का संवैधानिक आधार
- संविधान में “विरोध का अधिकार” का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, किंतु यह कई मौलिक अधिकारों से व्युत्पन्न है:
- अनुच्छेद 19(1)(क): वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 19(1)(ख): शांतिपूर्वक एवं बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार।
- अनुच्छेद 19(1)(ग): संघ या संगठन बनाने का अधिकार।
- हालांकि, ये अधिकार निम्नलिखित युक्तिसंगत प्रतिबंधों के अधीन हैं:
- अनुच्छेद 19(2): भारत की संप्रभुता एवं अखंडता, राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था, शिष्टाचार, सदाचार आदि के हित में।
- अनुच्छेद 19(3): लोक व्यवस्था तथा भारत की संप्रभुता एवं अखंडता के हित में शांतिपूर्ण सभा पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
सार्वजनिक अशांति से निपटने की चुनौतियाँ
- शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और प्रदर्शनों में घुसपैठ करने वाले हिंसक या असामाजिक तत्वों के बीच अंतर करना।
- विशेषकर बड़े प्रदर्शनों के दौरान मौलिक स्वतंत्रताओं से समझौता किए बिना लोक व्यवस्था बनाए रखना।
- सामाजिक माध्यमों पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं एवं अफवाहों से निपटना, जो शीघ्र ही जनभावनाओं को भड़का सकती हैं।
- लंबे समय तक चलने वाले प्रदर्शनों के दौरान आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं, परिवहन अवसंरचना तथा आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान को रोकना।
- जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में प्रदर्शनकारियों एवं पुलिसकर्मियों दोनों के जीवन और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- वर्तमान भीड़-नियंत्रण साधनों, जैसे बॉडी कैमरा, निगरानी प्रणाली तथा गैर-घातक प्रौद्योगिकियों की सीमित उपलब्धता।
- पुलिस बल में कर्मियों की कमी तथा विशेषज्ञ प्रशिक्षण का अभाव।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णय
- रामलीला मैदान प्रकरण (2012): सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध एक मूल अधिकार है, सोने की स्वतंत्रता अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का हिस्सा है तथा आधी रात को सो रहे लोगों पर पुलिस की कार्रवाई अवैध है।
- मज़दूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ (2018): सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(क) एवं अनुच्छेद 19(1)(ख) के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार है।
- न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक सभाओं पर लगाए गए प्रतिबंध युक्तिसंगतता, आवश्यकता तथा आनुपातिकता की संवैधानिक कसौटी पर खरे उतरने चाहिए।
- अमित साहनी बनाम पुलिस आयुक्त (2020): न्यायालय ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर सार्वजनिक मार्गों एवं सार्वजनिक स्थलों पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता। इस निर्णय में शांतिपूर्ण असहमति के अधिकार तथा आम जनता के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित किया गया।
- डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1997): न्यायालय ने मनमानी गिरफ्तारी, निरोध तथा अभिरक्षा में उत्पीड़न को रोकने के लिए आवश्यक मानक निर्धारित किए। न्यायालय ने कहा कि पुलिस शक्तियों का प्रयोग विधि के शासन तथा अनुच्छेद 21 के अनुरूप होना चाहिए।
आगे की राह
- सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से निपटने के लिए पुलिस हेतु देशव्यापी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाए।
- भीड़-नियंत्रण कार्यों में आवश्यकता, आनुपातिकता तथा न्यूनतम बल प्रयोग के सिद्धांतों को अपनाया जाए।
- प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) में पुलिस सुधार, परिचालन स्वायत्तता एवं जवाबदेही संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ किया जाए।
- प्रौद्योगिकी-सक्षम पुलिसिंग को बढ़ावा दिया जाए, जिसमें शरीर पर धारण किए जाने वाले कैमरे (Body-Worn Cameras), ड्रोन, सीसीटीवी निगरानी तथा डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन शामिल हों।
- पुलिस को वार्ता, मध्यस्थता, तनाव-न्यूनन (De-escalation) रणनीतियों, मानवाधिकारों तथा सामुदायिक पुलिसिंग के विषय में बेहतर प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
स्रोत: TH
Previous article
सारनाथ यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल
Next article
भारत का खेल पारितंत्र