पाठ्यक्रम : GS2/कल्याणकारी योजनाएँ एवं शासन; GS3/समावेशी विकास
संदर्भ
- हाल ही में, सरकार ने स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम ने दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत सामुदायिक नेतृत्व वाले उद्यमिता मॉडल के माध्यम से 4.32 लाख से अधिक ग्रामीण उद्यमों को सहायता प्रदान की है और ग्रामीण लोगों के जीवन में सुधार किया है।
स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) के बारे में
- इसे 2016 में ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की उप-योजना के रूप में शुरू किया गया था।
- उद्देश्य:
- ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देना।
- स्वरोज़गार और स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करना।
- पहली पीढ़ी के उद्यमियों, विशेष रूप से महिलाओं और वंचित वर्गों को सशक्त बनाना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में आय के स्रोतों में विविधता लाना, ताकि कृषि पर निर्भरता कम हो।
- समुदाय आधारित उद्यमों की स्थापना करना, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।
- मुख्य विशेषताएँ:
- सामुदायिक उद्यम निधि के माध्यम से वित्तीय सहायता।
- व्यवसाय योजना, कौशल विकास, मार्गदर्शन और उद्यम प्रबंधन में सहायता।
- सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय तथा बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा उपलब्ध कराना।
- व्यवसाय योजना, ऋण मूल्यांकन और उद्यमों की निगरानी के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग।
- उद्यमों के चयन और वित्तीय सहायता में समुदाय आधारित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देना।

SVEP का संस्थागत ढाँचा
- राष्ट्रीय स्तर : इसका क्रियान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के माध्यम से किया जाता है।
- राज्य स्तर : इसका संचालन राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (SRLMs) के माध्यम से किया जाता है।
- ब्लॉक स्तर : ब्लॉक रिसोर्स सेंटर–एंटरप्राइज प्रमोशन कार्यक्रम के क्रियान्वयन का समन्वय करते हैं।
- प्रत्येक ब्लॉक के लिए ₹6.50 करोड़ का प्रावधान
- प्रत्येक उद्यम पर औसत निवेश ₹27,083
- सामुदायिक स्तर : एंटरप्राइज प्रमोशन सामुदायिक संसाधन व्यक्ति व्यवसाय संबंधी मार्गदर्शन, उद्यम योजना, ऋण सुविधा और बाज़ार से जोड़ने में सहायता प्रदान करते हैं।
- प्रत्येक CRP-EP अधिकतम 50 उद्यमों को मार्गदर्शन प्रदान करता है।
- स्वयं सहायता समूहों की भूमिका: उपयुक्त उद्यमियों की पहचान करना, सामुदायिक उद्यम निधि से ऋण उपलब्ध कराना, उद्यमों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना तथा लगातार मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करना।

कार्यक्रम की समावेशी रूपरेखा
- महिला-केंद्रित दृष्टिकोण : कम से कम 60% लाभार्थी महिलाएँ होती हैं। कम से कम 60% CRP-EPs महिलाएँ होती हैं। लगभग 90% CRP-EPs की भर्ती स्वयं सहायता समूह (SHG) परिवारों से की जाती है।
- कमजोर वर्गों पर विशेष ध्यान : अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अल्पसंख्यकों, दिव्यांग व्यक्तियों (PwDs), गरीब ग्रामीण परिवारों तथा कम शैक्षणिक योग्यता वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाती है।
- सामुदायिक स्वामित्व : उद्यमों का चयन गरीबी की स्थिति, स्थानीय आवश्यकताओं, उद्यमिता की क्षमता तथा उद्यम की व्यवहार्यता (Enterprise Viability) के आकलन के आधार पर किया जाता है।
SVEP की उपलब्धियाँ
- उद्यम विकास : 4.32 लाख से अधिक ग्रामीण उद्यमों को सहायता प्रदान की गई।
- सबसे अधिक क्रियान्वयन असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में हुआ।
- प्रभाव आकलन : प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं:
- 99% उद्यम लाभदायक पाए गए।
- घरेलू आय का 57% हिस्सा इन उद्यमों से प्राप्त हुआ।
- प्रत्येक उद्यम की औसत मासिक आय ₹39,000 रही।
- विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र के उद्यमों की औसत मासिक आय लगभग ₹47,800 रही।
- 96% उद्यमियों ने बताया कि उनकी बचत में वृद्धि हुई।
- 75% उद्यमों का स्वामित्व या प्रबंधन महिलाओं के पास था।
- सामाजिक-आर्थिक परिणाम : वित्तीय समावेशन में वृद्धि, घरेलू आय में बढ़ोतरी, पोषण, शिक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य में सुधार, महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि तथा पहली पीढ़ी के ग्रामीण उद्यमियों को प्रोत्साहन मिला।
केस स्टडी: सफलता की कहानियाँ
- भाग्यश्री लोंढे, महाराष्ट्र: इन्होंने SVEP से ₹45,000 का ऋण प्राप्त कर अपने खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय का विस्तार किया।
- महालक्ष्मी सरस में केवल 10 दिनों के भीतर ₹5 लाख की आय अर्जित की।
- ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित किए।
- पूनम (उत्तर प्रदेश): इन्होंने प्रमाणित CRP-EP बनकर लगभग 40 उद्यमों को मार्गदर्शन दिया तथा ऋण सुविधा, व्यवसाय योजना और बाज़ार तक पहुँच उपलब्ध कराने में सहायता की।
अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रम
- दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM): महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और आजीविका संवर्धन को बढ़ावा देता है। इसने एक मजबूत संस्थागत ढाँचा तैयार किया है, जिसके आधार पर SVEP की सफलता संभव हुई है।
- मुख्य विशेषताएँ :
- ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में संगठित करता है।
- मुख्य रूप से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है।
- वित्तीय समावेशन, कौशल विकास तथा आय के स्रोतों में विविधता को बढ़ावा देता है।
- मुख्य विशेषताएँ :
- प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना : सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को सहायता प्रदान करती है।
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP): ऋण आधारित रोजगार सृजन को बढ़ावा देता है।
- मुद्रा योजना : छोटे उद्यमों को बिना जमानत (Collateral-Free) ऋण उपलब्ध कराती है।
- स्टैंड-अप इंडिया : महिलाओं तथा अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उद्यमिता विकास को प्रोत्साहित करती है।
- SFURTI: पारंपरिक उद्योगों और औद्योगिक क्लस्टरों (Clusters) के उन्नयन (Up-gradation) को बढ़ावा देता है।
- राष्ट्रीय ग्रामीण आर्थिक परिवर्तन परियोजना : स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से उद्यम विकास को बढ़ावा देती है।
संबंधित चुनौतियाँ
- बाज़ार तक सीमित पहुँच : ग्रामीण उद्यमों को लंबे समय से ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन जैसे क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- ऋण संबंधी बाधाएँ : सामुदायिक सहायता पर निर्भरता तथा औपचारिक ऋण तक पहुँच का अभाव।
- सीमित डिजिटल साक्षरता : प्रौद्योगिकी को कम अपनाना ।
- बुनियादी ढाँचे की कमी : लॉजिस्टिक्स, भंडारण, परिवहन और इंटरनेट कनेक्टिविटी का अभाव।
- क्षमता संबंधी चुनौतियाँ : उद्यमों को सफलतापूर्वक चलाने के लिए लगातार कौशल उन्नयन आवश्यक है।
- क्षेत्रीय असंतुलन : यह कार्यक्रम कुछ ही राज्यों तक अधिक केंद्रित है, जबकि कई क्षेत्र अभी भी पर्याप्त रूप से कवर नहीं हो पाए हैं।
- विकास में बाधाएँ : छोटे उद्यमों का विस्तार प्रायः केवल स्थानीय बाज़ारों तक ही सीमित रह जाता है।
आगे की राह
- ग्रामीण स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना: दूरदराज़ क्षेत्रों में इन्क्यूबेशन सेंटर और नवाचार केंद्र स्थापित किए जाएँ।
- बाज़ार से जुड़ाव को मजबूत बनाना: GeM, ONDC तथा डिजिटल मार्केटप्लेस जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म को बढ़ावा दिया जाए।
- वित्त तक पहुँच बढ़ाना: क्रेडिट गारंटी योजनाओं का विस्तार किया जाए तथा इन्हें मुद्रा योजना (MUDRA) और स्टैंड-अप इंडिया से जोड़ा जाए।
- प्रौद्योगिकी को अपनाना : डिजिटल बहीखाता, UPI भुगतान, AI आधारित बाज़ार विश्लेषण तथा ई-कॉमर्स को बढ़ावा दिया जाए।
- कौशल विकास : कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs), औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITIs) तथा ग्रामीण स्वरोज़गार प्रशिक्षण संस्थान (RSETIs) के माध्यम से क्षेत्र-विशिष्ट उद्यमिता प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
- क्लस्टर आधारित विकास : उत्पादक समूहों और मूल्य शृंखलाओं का विकास कर प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत किया जाए।
- मजबूत निगरानी व्यवस्था : प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) आधारित निगरानी और प्रभाव मूल्यांकन को सुदृढ़ किया जाए, ताकि साक्ष्य आधारित नीति सुधार को समर्थन मिल सके।
स्रोत: PIB
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