भारत को सरकारी कानूनों और नियमों के प्रकाशन की व्यवस्था का आधुनिकीकरण करना चाहिए

पाठ्यक्रम : GS2/सुशासन

संदर्भ

  • भारत में कानूनों के प्रकाशन की व्यवस्था अभी भी बिखरी हुई है और PDF फ़ाइलों पर निर्भर है। इसके कारण नागरिकों, वकीलों और यहाँ तक कि न्यायालयों के लिए भी लागू कानूनों और उनमें हुए संशोधनों तक पहुँचना तथा उनका रिकॉर्ड रखना कठिन हो जाता है।
    • खुले कानूनी प्रकाशन मानकों को अपनाने से कानूनों तक पहुँच अधिक आसान होगी और लोकतांत्रिक भागीदारी भी मजबूत होगी।

परिचय

  • विधि का शासन (Rule of Law) यह अपेक्षा करता है कि संसद या राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत किए जाने वाले विधेयकों की जानकारी पहले से ही जनता को उपलब्ध कराई जाए।
    • इससे यह सुनिश्चित होता है कि नागरिक लागू कानूनों और उनमें हुए संशोधनों से अवगत रहें तथा न्यायपालिका भी उन कानूनों की वर्तमान स्थिति को समझ सके, जिन पर उसे निर्णय देना होता है। 
  • लेकिन वास्तव में, विधेयकों को प्रस्तुत किए जाने से पहले अक्सर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया जाता।
    • नागरिकों के लिए लागू कानून को ढूँढ़ना कठिन होता है, और यदि उसकी प्रति मिल भी जाए, तो यह पता लगाना कि किसी विशेष तिथि पर कौन-सा कानून लागू था, एक बड़ी चुनौती होती है।
  • सरकार राजपत्र को कानूनों के प्रकाशन और उन्हें लागू करने का मुख्य माध्यम मानती है।
    • ये राजपत्र PDF के रूप में प्रकाशित किए जाते हैं, ताकि फ़ॉन्ट और चित्र को उसमें शामिल करके डिजिटल दस्तावेज़ हर उपकरण पर एक जैसा दिखाई दे। 
    • हालाँकि, इससे PDF फ़ाइलों को साझा करना और प्रिंट करना आसान हो जाता है, लेकिन कानूनी दस्तावेज़ की संरचना और उसके वास्तविक अर्थ को निकालना या समझना बहुत कठिन हो जाता है। 

चिंताएँ

  • संशोधनों का पता लगाने में कठिनाई : विभिन्न अधिनियमों (Acts) और अधिसूचनाओं (Notifications) में बार-बार होने वाले संशोधनों के कारण किसी कानून का वर्तमान स्वरूप या किसी विशेष तिथि पर लागू कानूनी स्थिति का पता लगाना कठिन हो जाता है।
  • बिखरी हुई कानूनी जानकारी : कानूनी दस्तावेज़ विभिन्न राजपत्रों, मंत्रालयों और वेबसाइटों पर बिखरे हुए हैं। इनका कोई एकीकृत और मशीन द्वारा पढ़े जा सकने वाला भंडार नहीं है, जिससे असंगतियाँ और दोहराव की समस्या पैदा होती है।
  • न्यायपालिका और विधि विशेषज्ञों के लिए अक्षमता : न्यायाधीशों, वकीलों, शोधकर्ताओं और व्यवसायों को लागू नवीनतम कानूनी प्रावधानों की पुष्टि करने में काफी समय लगाना पड़ता है, जिससे मुकदमों की लागत और विलंब दोनों बढ़ जाते हैं।
  • कमज़ोर लोकतांत्रिक भागीदारी : विधिक जानकारी तक आसान पहुँच न होने के कारण नागरिकों के लिए कानूनों को समझना, उन पर चर्चा करना और विधायी प्रक्रिया में प्रभावी रूप से भाग लेना कठिन हो जाता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही कमजोर पड़ती है।

दूसरे देशों में कानून कैसे प्रकाशित किए जाते हैं?

  • कई देशों की सरकारों ने कानूनों को मार्कअप भाषाओं में प्रकाशित करना शुरू कर दिया है, जो कानूनों की संरचना , अर्थ और स्थानीय भाषाओं को सही ढंग से प्रदर्शित करती हैं।
  • अफ्रीका के कई देशों ने अकोमा न्टोसो मानक को अपनाया है। यह कानूनी दस्तावेज़ों के लिए विशेष रूप से विकसित एक मार्कअप भाषा है।
    • इसके माध्यम से किसी अधिनियम में किए गए संशोधनों को लागू करके यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि हर संशोधन में क्या बदलाव हुआ और किसी भी समय पर कौन-सा कानून लागू था।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका अपने कानूनों को USLM नामक प्रारूप में प्रकाशित करता है, जो Akoma Ntoso का ही एक संशोधित रूप है।
    • इसके परिणामस्वरूप केवल व्यावसायिक कानूनी सेवा प्रदाता ही नहीं, बल्कि गैर-लाभकारी संस्थाएँ, थिंक टैंक और अन्य संगठन भी इनका उपयोग करके नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भागीदारी करने में सहायता कर सकते हैं।
  • यूनाइटेड किंगडम अपने कानूनों को legislation.gov.uk पर प्रकाशित करता है, जिसका संचालन द नेशनल आर्काइव्स द्वारा किया जाता है।
    • वहाँ कानूनी सामग्री का मूल प्रारूप क्राउन लेजिस्लेशन मार्कअप लैंग्वेज है, जो Akoma Ntoso का एक अन्य संशोधित रूप है। 

आगे की राह

  • जबकि दुनिया के अधिकांश देश PDF आधारित प्रकाशन प्रणाली से आगे बढ़ चुके हैं, भारत अभी भी तीन दशक से अधिक पुरानी इस प्रणाली पर निर्भर है।
  • जब तक सरकार अपनी कानूनी प्रकाशन सॉफ़्टवेयर प्रणाली का आधुनिकीकरण नहीं करती, तब तक नागरिकों, वकीलों, न्यायाधीशों और लोकतंत्र से जुड़े अन्य हितधारकों के लिए कानूनों तक पहुँच अनावश्यक रूप से कठिन बनी रहेगी।
  • यदि सरकार नागरिकों से परामर्श करके कानूनी प्रकाशन की एक समान व्यवस्था अपनाती है, तो यह सरकार और जनता के बीच संवाद के तरीके में बड़ा बदलाव ला सकती है तथा नागरिकों को लोकतंत्र का अधिक सक्रिय भागीदार बना सकती है।

स्रोत: TH

 

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