समावेशी एवं लैंगिक-संवेदनशील कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): भारत की असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों तक पहुँच

पाठ्यक्रम: जीएस-3/समावेशी विकास; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

सन्दर्भ

  • भारत एआई शासन दिशानिर्देश (2025) तथा इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में हुई चर्चाओं में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर बल दिया गया।

लैंगिक-संवेदनशील एवं समावेशी एआई क्यों महत्वपूर्ण है?

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कृषि, स्वास्थ्य सेवा, रसद, शिक्षा, वित्त तथा शासन में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है।
  • भारत का असंगठित कार्यबल कुल श्रमशक्ति का लगभग 90% है तथा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग आधा योगदान देता है। एआई भारत के 49 करोड़ असंगठित श्रमिकों की सेवा कर सकता है (नीति आयोग)।
  • आईएलओ (2018) के अनुसार, भारत में कार्यरत महिलाओं का लगभग 82% असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है, जबकि पीएलएफएस 2023–24 के अनुसार ग्रामीण महिलाओं का 76.9% कृषि क्षेत्र में कार्य करता है।
  • यदि एआई प्रणालियाँ महिलाओं की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में नहीं रखतीं, तो वे मौजूदा असमानताओं को और मजबूत कर सकती हैं, क्योंकि भारत के असंगठित कार्यबल का बड़ा हिस्सा महिलाएँ हैं।
  • निष्पक्षता, सुलभता तथा जवाबदेही के आधार पर विकसित न होने पर एआई पूर्वाग्रहों, डिजिटल हिंसा तथा एल्गोरिद्मिक पक्षपात को स्थायी बना सकता है (यूएन वूमेन)।
  • विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि बढ़ी हुई उत्पादकता का लाभ समाज में समान रूप से वितरित हो, न कि केवल डिजिटल रूप से विशेषाधिकार प्राप्त समूहों तक सीमित रहे।

असंगठित आजीविका एवं कृषि में एआई

  • एआई निम्नलिखित माध्यमों से आजीविका में व्यापक सुधार की क्षमता रखता है:
    • फसल निगरानी, कीट पहचान तथा मौसम पूर्वानुमान के लिए सटीक कृषि।
    • स्थानीय भाषाओं में एआई आधारित परामर्श सेवाएँ, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग तथा बाज़ार से जुड़ाव संभव हो।
    • डिजिटल वित्तीय समावेशन हेतु एआई आधारित ऋण मूल्यांकन एवं बीमा।
    • घर-आधारित श्रमिकों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) तथा प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों के कौशल उन्नयन में सहायता।
  • फार्मर.चैट अध्ययन (2024) द्वारा 12 राज्यों में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि 61% महिला उपयोगकर्ताओं ने 45 दिनों के भीतर जीवन की गुणवत्ता में सुधार की सूचना दी तथा महिलाओं की सहभागिता पुरुषों की तुलना में अधिक थी।
  • इससे स्पष्ट होता है कि एआई तकनीकें तब अधिक प्रभावी होती हैं जब वे महिलाओं की वास्तविक परिस्थितियों, जैसे भाषा की प्राथमिकता, भूमि स्वामित्व की स्थिति, आवागमन की सीमाएँ तथा सूचना तक पहुँच को ध्यान में रखती हैं।
  • इस प्रकार, समावेशी एआई ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने, उत्पादकता बढ़ाने तथा महिलाओं की आर्थिक भागीदारी का विस्तार करने की क्षमता रखता है।

समावेशी एआई के लिए शासन संबंधी प्राथमिकताएँ

  • लैंगिक प्रभाव आकलन: भारत एआई शासन दिशानिर्देश (2025) निष्पक्षता एवं समानता पर बल देते हैं।
  • रोजगार, कल्याणकारी योजनाओं, ऋण, स्वास्थ्य सेवा अथवा सार्वजनिक सेवाओं को प्रभावित करने वाली एआई प्रणालियों का लैंगिक प्रभाव आकलन किया जाना चाहिए ताकि लिंग, जाति, दिव्यांगता, स्थान तथा सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर मौजूद असमानताओं की पहचान की जा सके।
  • सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में एआई साक्षरता: केवल डिजिटल पहुँच पर्याप्त नहीं है। एआई साक्षरता को दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY), स्किल इंडिया मिशन तथा मिशन शक्ति के सखी नेटवर्क के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए।
  • प्रशिक्षण परिणाम-आधारित होना चाहिए ताकि महिलाएँ सरकारी योजनाओं, डिजिटल मंचों, बाज़ारों तथा बेहतर आय वाले आजीविका विकल्पों तक पहुँच बना सकें।
  • डिजिटल सुरक्षा एवं विश्वास: डीपफेक, ऑनलाइन उत्पीड़न तथा बिना सहमति के बनाए गए कृत्रिम डिजिटल माध्यम जैसी प्रौद्योगिकी-सहायित लैंगिक हिंसा महिलाओं की डिजिटल भागीदारी को सीमित करती है।
  • सुरक्षित डिजिटल वातावरण के निर्माण हेतु इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा प्रस्तावित एआई-जनित सामग्री की अनिवार्य लेबलिंग तथा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है।

संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियाँ

  • अप्रतिनिधिक आँकड़ा-समूहों के कारण एल्गोरिद्मिक पक्षपात।
  • भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं के गुणवत्तापूर्ण आँकड़ा-समूहों की कमी।
  • उपकरण स्वामित्व तथा इंटरनेट पहुँच के संदर्भ में लगातार बना हुआ डिजिटल विभाजन।
  • असंगठित क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के बीच एआई एवं डिजिटल साक्षरता की सीमित समझ।
  • एआई आधारित निर्णयों में पारदर्शिता एवं व्याख्यात्मकता का अभाव।
  • एआई से उत्पन्न भेदभाव के विरुद्ध शिकायत निवारण तंत्र की अपर्याप्तता।
  • साइबर खतरे, डीपफेक तथा ऑनलाइन उत्पीड़न महिलाओं की डिजिटल भागीदारी को सीमित करते हैं।
  • एआई अनुसंधान, डिज़ाइन तथा नीति-निर्माण में महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व।

समावेशी एआई को समर्थन देने वाली सरकारी पहलें

उत्तरदायी एआई को बढ़ावा देने के लिए भारत के पास एक सुदृढ़ संस्थागत ढाँचा उपलब्ध है:

  • इंडियाएआई मिशन: एआई नवाचार, संगणन अवसंरचना, आँकड़ा-समूह तथा कौशल विकास के लिए।
  • भारत भाषा इंटरफ़ेस (भाषिणी): भाषाई बाधाओं को दूर करने के लिए बहुभाषी एआई सेवाएँ उपलब्ध कराएगा।
  • भारत एआई शासन दिशानिर्देश (2025): निष्पक्षता, जवाबदेही, पारदर्शिता, सुरक्षा, गोपनीयता एवं समानता को बढ़ावा देते हैं।
  • नीति आयोग का एआई रोडमैप: कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं शासन में एआई के उपयोग पर विशेष ध्यान देते हुए समावेशी सामाजिक विकास को प्रोत्साहित करता है।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI): आधार, यूपीआई तथा डिजिलॉकर जैसी प्रणालियाँ समावेशी एआई आधारित सेवा वितरण को सक्षम बनाती हैं।
  • मिशन शक्ति, स्किल इंडिया, DAY-NRLM तथा DDU-GKY: महिलाओं के लिए डिजिटल कौशल एवं आजीविका को सशक्त बनाने हेतु।
  • डिजिटल श्रमसेतु (नीति आयोग): इसका उद्देश्य एआई एवं अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के माध्यम से भारत के 49 करोड़ असंगठित श्रमिकों की आजीविका में परिवर्तन लाना है। यह व्यक्तित्व अथवा क्षेत्र-आधारित प्राथमिकता, राज्य-प्रेरित क्रियान्वयन, नियामकीय सहयोग तथा रणनीतिक साझेदारियों पर आधारित लक्षित रणनीति प्रस्तुत करता है ताकि वहनीयता एवं व्यापक विस्तार सुनिश्चित किया जा सके।

आगे की राह

एआई को समावेशी प्रगति का माध्यम बनाने के लिए भारत को निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:

  • उच्च प्रभाव वाली एआई प्रणालियों में लैंगिक लेखा-परीक्षण को अनिवार्य बनाना।
  • भाषिणी जैसे मंचों पर बहुभाषी एवं स्थानीयकृत एआई उपयोग के मामलों को बढ़ावा देना।
  • सामुदायिक संस्थाओं एवं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से एआई साक्षरता को बढ़ाना।
  • एआई निवेशों में लैंगिक उत्तरदायी बजट व्यवस्था को एकीकृत करना।
  • डिजिटल सुरक्षा बढ़ाने हेतु साइबर शासन को सुदृढ़ करना तथा शिकायत निवारण प्रक्रिया को तेज़ करना।
  • एआई अनुसंधान, उद्यमिता तथा नीति-निर्माण में महिलाओं की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न] विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में लैंगिक-संवेदनशील कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए। इसके समक्ष उपस्थित चुनौतियों का परीक्षण करते हुए उपयुक्त नीतिगत उपाय सुझाइए।

स्रोत: TH

 

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