पैझेन भ्रंश
पाठ्यक्रम: GS-1 / भूगोल
समाचार में
- चीनी भूवैज्ञानिकों ने तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो (ब्रह्मपुत्र) नदी पर निर्मित चीन की जलविद्युत परियोजना की संरचनात्मक स्थिरता को लेकर पैझेन भ्रंश के कारण चिंता व्यक्त की है।
| क्या आप जानते हैं? तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र से निकलकर यारलुंग त्सांगपो नदी भारत के अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करने पर सियांग कहलाती है।इसके पश्चात यह असम में ब्रह्मपुत्र नदी के रूप में प्रवाहित होती है तथा बांग्लादेश में प्रवेश करने पर जमुना नदी कहलाती है। |
पैझेन भ्रंश
- यह पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में भारतीय एवं यूरेशियाई विवर्तनिक प्लेटों की टक्कर से निर्मित विवर्तनिक भ्रंशों के एक विस्तृत तंत्र का भाग है।
- यह यारलुंग त्सांगपो की निम्नधारा स्थित जलविद्युत परियोजना के जलाशय क्षेत्र में स्थित है।
- यह प्रारंभिक प्लीस्टोसीन युग से सक्रिय रहा है तथा वर्तमान होलोसीन युग में भी इसकी तीव्र सक्रियता बनी हुई है।
- प्राचीन झीलों के अवसादों के काल-निर्धारण से संकेत मिलता है कि यह भ्रंश लगभग 9,500 वर्ष पूर्व तक भी सक्रिय था।

स्रोत : TH
उमंग(UMANG ) पोर्टल
पाठ्यक्रम: GS-2 / सरकारी पहलें
संदर्भ
- शोधकर्ताओं ने भारत के उमंग पोर्टल में सुरक्षा संबंधी कमजोरियों की पहचान की है, जिससे नागरिकों के व्यक्तिगत आँकड़ों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।
उमंग पोर्टल के बारे में
- उमंग (यूनिफाइड मोबाइल एप्लीकेशन फॉर न्यू-एज गवर्नेंस), डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत एक प्रमुख पहल है।
- यह एकीकृत मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से केंद्र सरकार, राज्य सरकारों एवं स्थानीय निकायों द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाओं तक एकल मंच के माध्यम से पहुँच उपलब्ध कराता है।
- इसके माध्यम से नागरिक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, स्वास्थ्य सेवाएँ, पेंशन, एलपीजी बुकिंग, प्रमाण-पत्र तथा अन्य अनेक नागरिक-केंद्रित सेवाओं का लाभ एक ही मंच से प्राप्त कर सकते हैं।
- इसका शुभारंभ नवंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई दिल्ली में आयोजित साइबर स्पेस पर पाँचवें वैश्विक सम्मेलन के दौरान किया गया था।
- फरवरी 2026 तक उमंग पोर्टल पर 240 सरकारी विभागों की 2,446 सेवाएँ उपलब्ध थीं, जिनमें 80 केंद्रीय सरकारी विभाग तथा 30 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 160 विभाग सम्मिलित हैं।
- उमंग पोर्टल हिंदी, अंग्रेज़ी, नेपाली तथा संस्कृत सहित 23 भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है।
स्रोत: TH
स्थायी जमा सुविधा (SDF)
पाठ्यक्रम: GS-3 / अर्थव्यवस्था
समाचार में
- भारतीय रिज़र्व बैंक ने स्थायी जमा सुविधा के माध्यम से 1.67 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता का अवशोषण किया।
स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ)
- स्थायी जमा सुविधा भारतीय रिज़र्व बैंक का एक तरलता प्रबंधन उपकरण है, जिसका उपयोग बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करने तथा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
- वर्ष 2018 में भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की धारा 17 में संशोधन के माध्यम से केंद्रीय बैंक को बिना किसी प्रतिभूति (कोलेटरल) के अतिरिक्त तरलता के अवशोषण हेतु एसडीएफ प्रारंभ करने का अधिकार प्रदान किया गया।
- इसने निश्चित दर प्रतिवर्ती पुनर्खरीद दर (FRRR) का स्थान लेते हुए तरलता समायोजन सुविधा (LAF.) गलियारे की निचली सीमा का स्थान ग्रहण किया है।
- इसके अंतर्गत बैंक बिना किसी प्रतिभूति के अपनी अतिरिक्त निधि भारतीय रिज़र्व बैंक के पास जमा कर सकते हैं, जिससे मौद्रिक नीति के प्रभावी संचालन तथा वित्तीय स्थिरता को सुदृढ़ता मिलती है।
- एसडीएफ के अंतर्गत पात्र संस्थाएँ अपनी अतिरिक्त निधि एक रात्रि (ओवरनाइट) की अवधि के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक के पास जमा कर सकती हैं।
- आवश्यकता पड़ने पर भारतीय रिज़र्व बैंक उपयुक्त दर निर्धारण के साथ एसडीएफ के माध्यम से अधिक अवधि के लिए भी अतिरिक्त तरलता का अवशोषण कर सकता है।
- यह सुविधा पूरे वर्ष सीमांत स्थायी सुविधा के साथ उपलब्ध रहती है।
स्रोत: Air
एरेंडिल-1
पाठ्यक्रम: GS-3 / रक्षा
संदर्भ
- संयुक्त राज्य अमेरिका के संघीय संचार आयोग ने रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल नामक कंपनी को एरेंडिल-1 नामक परीक्षण उपग्रह के प्रक्षेपण एवं संचालन की अनुमति प्रदान की है।
परिचय
- एरेंडिल-1 का नाम प्रसिद्ध लेखक जे. आर. आर. टॉल्किन के काल्पनिक महाकाव्य द सिल्मारिलियन के एक पात्र के नाम पर रखा गया है।
- यह एकल उपग्रह होगा, जिसे भू-स्थिर कक्षा से भिन्न कक्षा में स्थापित किया जाएगा तथा इसमें एक तैनात की जा सकने वाली, अत्यधिक परावर्तक पतली फिल्म परावर्तक ( लगाया जाएगा।
- यह परावर्तक मोटर चालित होगा तथा इसे विभिन्न दिशाओं में घुमाया जा सकेगा।
- उपग्रह लगभग 625 किलोमीटर की ऊँचाई तथा 88° के उच्च झुकाव वाली कक्षा में संचालित होगा।
- इसका उद्देश्य रात्रिकाल के दौरान सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी के विशिष्ट स्थानों की ओर परावर्तित करना है।
- इस प्रौद्योगिकी का उपयोग सौर पैनलों के उपयोग योग्य समय को बढ़ाने तथा आपातकालीन एवं मानवीय सहायता जैसे महत्त्वपूर्ण अभियानों के दौरान प्रकाश उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा।
- एफसीसी ने इस परीक्षण के लिए दो वर्ष का सीमित लाइसेंस प्रदान किया है।
- इस परियोजना ने अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन, परावर्तित ऊर्जा के स्वामित्व तथा प्रकाश प्रदूषण से संबंधित अनेक प्रश्न उत्पन्न किए हैं।
स्रोत: TH
सल्फर डाइऑक्साइड
पाठ्यक्रम: GS-3 / पर्यावरण
संदर्भ
- एक अध्ययन के अनुसार, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों से होने वाले सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन का लगभग 81 प्रतिशत उन संयंत्रों से होता है, जिन्हें प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियाँ स्थापित करने से छूट प्रदान की गई है।
परिचय
- सल्फर डाइऑक्साइड एक रंगहीन गैस है, जिसकी गंध तीव्र एवं दम घोंटने वाली होती है।
- इसका निर्माण तब होता है जब सल्फर युक्त ईंधन का दहन किया जाता है।
- यह उन प्राचीन वायु प्रदूषकों में से एक है, जिनकी निगरानी नियामक संस्थाएँ लंबे समय से करती रही हैं। इसका इतिहास लंदन में कोयले के धुएँ से उत्पन्न धूम-कुहरे (स्मॉग) के समय से जुड़ा है।
- भारत में इसका सबसे बड़ा स्रोत कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र हैं।
- इसके अतिरिक्त तेल शोधनशालाएँ तथा धातु प्रगलन इकाइयाँ (विशेषकर ताँबा एवं जस्ता प्रगलन संयंत्र) भी इसके उत्सर्जन में योगदान देती हैं।
- SO2 मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। वायुमंडल में उत्सर्जित होने के बाद यह ऑक्सीजन एवं आर्द्रता के साथ अभिक्रिया करके सल्फेट कणों, जो पीएम 2.5 का एक प्रमुख घटक हैं, तथा सल्फ्यूरिक अम्ल का निर्माण करता है।
- धूम्र गैस गंधक निष्कासन प्रणाली कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों से निकलने वाले SO2 को चूना-पत्थर के घोल की सहायता से हटाने की एक प्रौद्योगिकी है, जिसके उप-उत्पाद के रूप में जिप्सम प्राप्त होता है।
वैश्विक रहने-योग्यता सूचकांक, 2026
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट ने वैश्विक रहने-योग्यता सूचकांक, 2026 जारी किया है।
प्रमुख विशेषताएँ
- इस सूचकांक को प्रतिवर्ष EIU, जो द इकोनॉमिस्ट समूह की अनुसंधान एवं विश्लेषण शाखा है, द्वारा तैयार किया जाता है।
- इसमें 173 शहरों का मूल्यांकन 30 संकेतकों के आधार पर किया जाता है।
- इन संकेतकों को पाँच प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है—
- स्थिरता,
- स्वास्थ्य सेवा,
- संस्कृति एवं पर्यावरण,
- शिक्षा,
- अवसंरचना।
- कोपेनहेगन (डेनमार्क) लगातार विश्व का सर्वाधिक रहने-योग्य शहर बना हुआ है। इसके बाद क्रमशः वियना (ऑस्ट्रिया) तथा मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) दूसरे एवं तीसरे स्थान पर हैं।
- भारतीय शहरों में नई दिल्ली को 120वाँ, मुंबई को 121वाँ, चेन्नई को 123वाँ तथा बेंगलुरु को 127वाँ स्थान प्राप्त हुआ है।
- इस वर्ष तथा विगत वर्ष की रिपोर्ट में किसी भी भारतीय शहर को न तो शीर्ष दस और न ही निम्नतम दस शहरों में स्थान मिला है। साथ ही, कोई भी भारतीय शहर सर्वाधिक सुधार अथवा गिरावट दर्ज करने वाले शहरों में शामिल नहीं है।
- पश्चिमी यूरोप अभी भी रहने-योग्यता की दृष्टि से सबसे सुदृढ़ क्षेत्र बना हुआ है, यद्यपि उसके औसत अंक स्थिर रहे हैं, जबकि एशिया के औसत अंकों में वृद्धि दर्ज की गई है।
- कराची निरंतर दूसरे वर्ष 170वें स्थान पर बना हुआ है, ढाका 171वें स्थान पर स्थिर है, जबकि दमिश्क (सीरिया) लगातार दूसरे वर्ष विश्व का सबसे कम रहने-योग्य शहर बना हुआ है।
स्रोत: TOI
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