भारत की समुद्री सीमाओं के प्रहरी 

पाठ्यक्रम: GS3/ आंतरिक सुरक्षा

संदर्भ

  • भारत युद्ध संचालन, निगरानी तथा तटीय रक्षा के लिए स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्मों को नौसेना में सम्मिलित कर अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ कर रहा है। यह हिंद महासागर क्षेत्र के बढ़ते सामरिक महत्त्व को भी प्रतिबिंबित करता है।

भारत का समुद्री क्षेत्र

  • भारत का समुद्री क्षेत्र उन समुद्री सीमाओं एवं क्षेत्रों को संदर्भित करता है जिन पर आसपास के समुद्रों एवं महासागरों में भारत का अधिकार-क्षेत्र लागू होता है।
    • द्वीपीय क्षेत्रों सहित भारत की समुद्री तटरेखा 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी है।
  • हिंद महासागर क्षेत्र : हिंद महासागर विश्व के कुल महासागरीय क्षेत्रफल का लगभग पाँचवाँ भाग है।
    • इसके उत्तर में ईरान, पाकिस्तान, भारत एवं बांग्लादेश, पूर्व में मलय प्रायद्वीप, इंडोनेशिया के सुंडा द्वीपसमूह तथा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण में दक्षिणी महासागर तथा पश्चिम में अफ्रीका एवं अरब प्रायद्वीप स्थित हैं।

समुद्री सुरक्षा

  • समुद्री सुरक्षा का तात्पर्य महासागरों एवं समुद्रों से उत्पन्न होने वाले खतरों से राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा करना है।
  • इसके अंतर्गत तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा, समुद्री संसाधनों जैसे—मत्स्य संपदा, अपतटीय तेल एवं गैस कुओँ, बंदरगाह अवसंरचना आदि की रक्षा शामिल है।
  • भारत की समुद्री सुरक्षा हिंद महासागर एवं उसके आसपास स्थित प्रमुख सामरिक जलडमरूमध्यों से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है, जिनमें—
    • हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य,
    • बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य,
    • मलक्का जलडमरूमध्य, तथा
    • लोम्बोक जलडमरूमध्य प्रमुख हैं।

भारत की बहुस्तरीय नौसैनिक क्षमता

  • भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में प्रमुख समुद्री सुरक्षा प्रदाता है।
  • यह लगभग 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा, लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र तथा भारत के कुल व्यापार के लगभग 90 प्रतिशत (मात्रा के आधार पर) को वहन करने वाले समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
  • इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए संतुलित नौसैनिक बेड़े की आवश्यकता होती है, जिसमें प्रत्येक श्रेणी का युद्धपोत समुद्री सुरक्षा की एक विशिष्ट परत को सुदृढ़ करता है।
  • इसी बहुस्तरीय सुरक्षा अवधारणा को साकार करने हेतु भारत स्वदेशी नई पीढ़ी के नौसैनिक प्लेटफॉर्मों को नौसेना में सम्मिलित कर रहा है।

नौसेना के स्टील्थ फ्रिगेट

  • आधुनिक नौसैनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित इन युद्धपोतों में उन्नत हथियार, संवेदक तथा नौसैनिक विमानन सुविधाओं का समावेश किया गया है।
  • इनका निर्माण रडार, अवरक्त (ऊष्मीय) तथा ध्वनिक संकेतों को न्यूनतम रखने के उद्देश्य से किया गया है, जिससे इनकी गोपनीयता (स्टील्थ क्षमता) बढ़ती है।
  • परियोजना-17ए भारतीय नौसेना का उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत सात आगामी पीढ़ी के निर्देशित प्रक्षेपास्त्र-सज्जित युद्धपोतों का निर्माण किया जा रहा है।
  • नीलगिरि श्रेणी में निम्नलिखित युद्धपोत सम्मिलित हैं—
    • आईएनएस नीलगिरि,
    • आईएनएस हिमगिरि,
    • आईएनएस तारागिरि,
    • आईएनएस उदयगिरि,
    • आईएनएस दुनागिरि,
    • आईएनएस महेंद्रगिरि,
    • तथा निर्माणाधीन आईएनएस विंध्यगिरि।

नौसेना के सर्वेक्षण पोत

  • सर्वेक्षण पोत समुद्रतल एवं तटीय जलक्षेत्रों का मानचित्रण कर भारतीय नौसेना की जलमापकीय (हाइड्रोग्राफिक) क्षमता को सुदृढ़ करते हैं।
  • ये पोत नियमित रूप से मानवीय सहायता, आपदा राहत तथा खोज एवं बचाव अभियानों में भी भाग लेते हैं।
  • भारतीय नौसेना स्वदेशी संधायक श्रेणी के सर्वेक्षण पोतों को अपने बेड़े में सम्मिलित कर रही है।
  • इस श्रेणी में निम्नलिखित पोत शामिल हैं—
    • आईएनएस संधायक,
    • आईएनएस निर्देशक,
    • आईएनएस इक्षाक,
    • आईएनएस संशोधक।

उथले जलक्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी पोत

  • पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धपोत भारतीय नौसेना की तटीय रक्षा क्षमता को सुदृढ़ करते हैं।
  • इनका प्रमुख कार्य तटीय उथले जलक्षेत्रों में संचालित पनडुब्बियों का पता लगाना तथा उन्हें निष्क्रिय करना है।
  • भारतीय नौसेना स्वदेशी अर्नाला श्रेणी के युद्धपोतों को अपने बेड़े में सम्मिलित कर रही है।
  • इस श्रेणी के आठ पोत हैं—
    • अर्नाला,
    • अंद्रोथ,
    • अंजादीप,
    • अमिनी,
    • अभय,
    • अग्रय,
    • अक्षय,
    • अजय।

सरकार की अन्य पहलें

  • सागरमाला कार्यक्रम: भारत की विस्तृत तटरेखा एवं नौपरिवहन योग्य जलमार्गों की क्षमता का अधिकतम उपयोग करने पर केंद्रित।
    • बंदरगाह अवसंरचना, तटीय विकास तथा संपर्क-सुविधाओं को प्रोत्साहन प्रदान करता है।
    • तटीय घाटों, रेल एवं सड़क संपर्क, मत्स्य बंदरगाहों तथा क्रूज़ टर्मिनलों जैसी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
  • समुद्री भारत दृष्टि-2030 : वर्ष 2030 तक भारत को विश्व के शीर्ष 10 जहाज निर्माण देशों में शामिल करने का लक्ष्य।
    • विश्वस्तरीय, दक्ष एवं सतत समुद्री पारितंत्र का विकास करना इसका उद्देश्य है।
  • समुद्री विकास निधि: बंदरगाहों एवं नौवहन अवसंरचना के आधुनिकीकरण हेतु 25,000 करोड़ रुपये की दीर्घकालिक वित्तपोषण व्यवस्था।
    • इसका उद्देश्य निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है।
  • सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा एवं विकास): भारत ने वर्ष 2015 में अपने निकटवर्ती हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा एवं विकास) पहल प्रारंभ की।
  • महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति): वर्ष 2025 में भारत ने महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) पहल प्रारंभ कर इसके दायरे का विस्तार किया।
    • इसका उद्देश्य व्यापक वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ साझेदारी को सुदृढ़ करना है।

निष्कर्ष

  • भारत की समुद्री सुरक्षा संबंधी पहलें सैन्य क्षमता, अवसंरचनात्मक तैयारी, क्षेत्रीय साझेदारी तथा विधिक एवं संस्थागत व्यवस्थाओं के समन्वित दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती हैं।
  • एक्ट ईस्ट नीति, हिंद-प्रशांत दृष्टि तथा नीली अर्थव्यवस्था रणनीति जैसी पहलें हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की केंद्रीय एवं रणनीतिक भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करती हैं।

स्रोत: PIB

 

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