पाठ्यक्रम: जीएस-3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
सन्दर्भ
- भारत, शासन, सेवा प्रदायगी, जन विश्वास (विश्वास-आधारित शासन) को सुदृढ़ बनाने तथा समावेशी विकास के लिए राज्य की क्षमता बढ़ाने हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के बीच संबंध पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की आवश्यकता
- भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे; आधार,यूपीआई , डिजिलॉकर, फास्टैग, जीएसटीएन(GSTN), कोविन(CoWIN) तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer) ने जनसंख्या स्तर पर डिजिटल पहचान, भुगतान और आँकड़ा-साझाकरण(Data-sharing) प्रणालियाँ विकसित करके शासन व्यवस्था में परिवर्तन किया है।
- किंतु शासन के अगले चरण के लिए इन मंचों को अधिक बुद्धिमान, परस्पर-संगत (Interoperable) तथा नागरिक-केंद्रित बनाने हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की आवश्यकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की आवश्यकता क्यों?
- जनसंख्या स्तर पर आँकड़ों का प्रबंधन: भारत, यूपीआई, जीएसटी, आधार प्रमाणीकरण तथा फास्टैग के माध्यम से विशाल डिजिटल आँकड़े उत्पन्न करता है, जिनका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रियल टाइम में विश्लेषण कर सकती है।
- राज्य की क्षमता को सुदृढ़ करना: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निर्णय-निर्माण को स्वचालित कर सकती है, प्रशासनिक विलंब को कम कर सकती है तथा नीतियों के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बना सकती है।
- बेहतर सेवा प्रदायगी: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-सक्षम बहुभाषी संवाद प्रणाली सरकारी सेवाओं तक पहुँच में भाषा एवं शिक्षा संबंधी बाधाओं को कम कर सकती है।
- धोखाधड़ी की पहचान: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फर्जी लाभार्थियों, वित्तीय अनियमितताओं तथा संसाधनों के रिसाव की बेहतर पहचान कर सकती है, जिससे जापान में मृत लाभार्थियों के नाम पर हुए पेंशन घोटाले जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
- साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में सुधार: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस असंरचित प्रशासनिक आँकड़ों का विश्लेषण कर कल्याणकारी योजनाओं के लक्षित क्रियान्वयन तथा सार्वजनिक व्यय के लिए उपयोगी अंतर्दृष्टियाँ प्रदान कर सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के एकीकरण के लाभ एवं महत्त्व
1. शासन एवं राज्य क्षमता को सुदृढ़ करना
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बड़े पैमाने पर आँकड़ों का विश्लेषण कर पूर्वानुमान-आधारित शासन (Predictive Governance) को सक्षम बना सकती है, जिससे सरकारें समस्याओं का पूर्वानुमान लगाकर अधिक दक्षता से कार्य कर सकती हैं।
- यह शिकायतों के त्वरित निवारण, योजनाओं की रियल टाइम में निगरानी तथा पारदर्शी, उत्तरदायी एवं संवेदनशील शासन के माध्यम से जन विश्वास की अवधारणा को मजबूत करती है।
2. कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी वितरण व्यवस्था
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को अधिक प्रभावी बनाती है। यह फर्जी या दोहरे लाभार्थियों की पहचान कर वित्तीय रिसाव को कम करती है तथा पात्र लाभार्थियों तक कल्याणकारी लाभ अधिक दक्ष एवं समावेशी ढंग से पहुँचाती है।
3. सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार
- बहुभाषी आभासी सहायक तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-सक्षम संवाद प्रणाली सरकारी सेवाओं तक पहुँच बढ़ाते हैं।
- ये नागरिकों और सरकार के बीच संवाद को सरल बनाकर विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों तथा कम शिक्षित वर्गों के लिए डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देते हैं।
4. अर्थव्यवस्था का अधिक औपचारिककरण
- जीएसटी,यूपीआई तथा उद्यम आधारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग ऋण मूल्यांकन, श्रमिक-रोज़गार मिलान, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के औपचारिककरण को गति दे सकता है।
5. डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
- भारत, यूपीआई के माध्यम से विश्व के लगभग 42% डिजिटल भुगतान लेन-देन में योगदान देता है।
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-संचालित अनुप्रयोग नवाचार को गति दे सकते हैं, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित कर सकते हैं तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ा सकते हैं।

6. सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं शिक्षा में सुधार
- गुमनाम (Anonymised) सार्वजनिक आँकड़ों का उपयोग कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोग निगरानी, संसाधनों के बेहतर आवंटन, व्यक्तिगत शिक्षण तथा स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर योजना बनाने में सहायता कर सकती है, जिससे सार्वजनिक सेवाएँ अधिक प्रभावी एवं उत्तरदायी बनती हैं।
7. आँकड़ा-आधारित नीति निर्माण
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रियल टाइम विश्लेषण अवसंरचना नियोजन, आपदा प्रबंधन, शहरी शासन तथा कृषि सहायता में सुधार कर साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता कर सकता है।
संबंधित प्रयास एवं पहल
- इंडिया एआई (IndiaAI) मिशन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर, नवाचार, डेटा सेट्स तथा कुशल मानव संसाधन का विकास करना।
- डिजिटल इंडिया कार्यक्रम: डिजिटल गवर्नेन्स तथा सार्वजनिक सेवाओं का विस्तार करना।
- आधार-सक्षम प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT): कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी वितरण व्यवस्था तथा रिसाव को कम करना।
- यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI): विश्व की सबसे बड़ी रियल टाइम भुगतान प्रणाली।
- डिजिलॉकर: डिजिटल दस्तावेज़ों का सुरक्षित सत्यापन एवं भंडारण।
- ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC): ओपन डिजिटल कॉमर्स इकोसिस्टम को बढ़ावा देना।
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM): परस्पर-संगत डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स विकसित करना।
- नेशनल डेटा गवर्नेन्स फ़्रेमवर्क पॉलिसी (प्रस्तावित): गुमनाम सार्वजनिक डेटासेट्स तक उत्तरदायित्वपूर्ण पहुँच सुनिश्चित करना।
- जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2023: जीवन-यापन की सुगमता तथा विश्वास-आधारित शासन को बढ़ावा देना।
- एंटरप्राइज डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (Enterprise DPI): (यूनिवर्सल एंटरप्राइज नंबर, एंटिटी डिजिलॉकर, API सेतु तथा नियमन हेतु एकल सत्य स्रोत) के माध्यम से व्यवसायिक अनुपालन को सरल बनाना।
आगे की राह: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा संचालित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण
- सुरक्षित, परस्पर-संगत तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुकूल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाए, न कि एपीआई-आधारित अलग-अलग डिजिटल तंत्र विकसित किए जाएँ।
- डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क का प्रभावी क्रियान्वयन करते हुए गोपनीयता-आधारित डिज़ाइन, सूचित सहमति तथा मज़बूत सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम करने के लिए स्थानीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल,ओपन डेटा, अनुसंधान संस्थानों तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रतिभा(AI talent) को प्रोत्साहित किया जाए।
- बहुभाषी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित संवाद प्रणाली विकसित कर पहुँच बढ़ाई जाए तथा डिजिटल डिवाइड को कम किया जाए।
- सरकारी संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमता विकसित करने हेतु विशेष प्रशिक्षण एवं समर्पित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यूनिट्स स्थापित की जाएँ।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से उत्तरदायी नवाचार को बढ़ावा दिया जाए तथा पारदर्शिता, जवाबदेही एवं नैतिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
- उद्यम डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर उसे श्रम, सामाजिक सुरक्षा एवं कौशल विकास मंचों से जोड़ा जाए ताकि औपचारिक रोजगार तथा ऋण तक पहुँच आसान हो सके।
- मुक्त एवं गुमनाम सार्वजनिक आँकड़ा-संग्रह (open, anonymised public data commons) के विकास को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे शैक्षणिक अनुसंधान एवं साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा मिले।
निष्कर्ष
- कौटिल्य के अर्थशास्त्र में कहा गया है कि सफल शासन के लिए शक्ति, समय और रणनीति का समन्वय आवश्यक है।
- आज भारत अपनी विश्वस्तरीय डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण सशक्त स्थिति में है।
- शासन सुधार का अगला चरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एकीकृत करना है, जिससे राज्य की क्षमता बढ़े, सेवा प्रदायगी बेहतर हो, संसाधनों का रिसाव कम हो तथा समावेशी विकास को बढ़ावा मिले।
- सुदृढ़ डेटा गवर्नेन्स , गोपनीयता संरक्षण तथा संस्थागत सुधारों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-सक्षम डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर भारत को केवल डिजिटल इंफ्रा वाले देश से आगे बढ़ाकर वास्तव में बुद्धिमान, नागरिक-केंद्रित राज्य में परिवर्तित कर सकती है। इससे जन विश्वास की परिकल्पना साकार होगी तथा व्यापक समृद्धि की दिशा में भारत की यात्रा तेज होगी।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न]आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का एकीकरण भारत में शासन व्यवस्था को पुनर्परिभाषित करने तथा राज्य की क्षमता बढ़ाने की अपार संभावनाएँ रखता है। चर्चा कीजिए। |
स्रोत: IE