पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध, GS3/ आंतरिक सुरक्षा
संदर्भ
- हाल ही में अदन की खाड़ी में समुद्री दस्युता के प्रयासों के प्रति भारतीय नौसेना की त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया ने समुद्री दस्युता के मुद्दे को पुनः प्रमुखता से सामने ला दिया है।
समुद्री दस्युता क्या है?
- समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय, 1982 (UNCLOS) के अनुसार, समुद्री दस्युता से आशय ऐसे किसी भी हिंसात्मक कृत्य, अवैध निरोध अथवा विनाशकारी कार्य से है, जिसे निजी लाभ के उद्देश्य से खुले समुद्र अथवा किसी भी राज्य के अधिकार-क्षेत्र से बाहर स्थित जलक्षेत्र में किसी जहाज, उस पर सवार व्यक्तियों अथवा संपत्ति के विरुद्ध किया जाए।
- हालाँकि, समुद्री दस्युता (Piracy) समुद्र में होने वाली सशस्त्र लूट से भिन्न है। सशस्त्र लूट किसी देश के प्रादेशिक समुद्री जल के अंदर होती है तथा उस पर संबंधित तटीय राज्य का अधिकार-क्षेत्र लागू होता है।

समुद्री दस्युता के कारण
- स्थलीय सामाजिक-आर्थिक कारक: गरीबी, बेरोज़गारी, आजीविका की असुरक्षा तथा समुद्री संसाधनों में कमी के कारण तटीय समुदाय आय के वैकल्पिक स्रोत के रूप में समुद्री दस्युता की ओर आकर्षित होते हैं।
- राजनीतिक एवं सुशासन संबंधी विफलताएँ: राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार तथा समुद्री कानून-प्रवर्तन तंत्र की कमजोरी ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न करती हैं, जिनमें समुद्री दस्युता को प्रोत्साहन मिलता है।
- भौगोलिक एवं समुद्री यातायात संबंधी संवेदनशीलताएँ: व्यस्त अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग, सामरिक समुद्री संकीर्ण मार्ग तथा सीमित निगरानी वाले विशाल समुद्री क्षेत्र समुद्री दस्युओं के लिए आकर्षक एवं सुगम लक्ष्य उपलब्ध कराते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध: सुव्यवस्थित आपराधिक नेटवर्क वित्तपोषण, रसद, हथियार, खुफिया जानकारी तथा तस्करी एवं मानव तस्करी जैसी अन्य अवैध गतिविधियों से संबंध स्थापित कर समुद्री दस्युता को बढ़ावा देते हैं।
भारत के लिए समुद्री सुरक्षा का महत्त्व
- भारत के कुल व्यापार का लगभग 95% (मात्रा के आधार पर) तथा लगभग 70% (मूल्य के आधार पर) समुद्री परिवहन के माध्यम से संपन्न होता है।
- भारत के कुल कच्चे तेल के आयात का 80% से अधिक समुद्री मार्गों द्वारा परिवाहित किया जाता है।
- भारत की लगभग 11,098 किमी लंबी तटरेखा, लगभग 23.7 लाख वर्ग किमी का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) तथा महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों के समीप स्थित द्वीपीय क्षेत्र इसकी सामरिक महत्ता को बढ़ाते हैं।
- सुरक्षित समुद्री मार्ग भारत के व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, नीली अर्थव्यवस्था तथा हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में उसके रणनीतिक हितों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
भारत की समुद्री सुरक्षा संरचना
- भारतीय नौसेना की भूमिका: वर्ष 2008 से भारतीय नौसेना अदन की खाड़ी तथा अफ्रीका के पूर्वी तट पर समुद्री दस्युता-रोधी गश्त हेतु अपनी इकाइयाँ तैनात कर रही है।
- भारतीय नौसेना द्वारा मित्र देशों के साथ द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास, संयुक्त विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) निगरानी तथा समन्वित गश्त (CORPATs) संचालित की जाती हैं।
- राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र जागरूकता (NMDA) के अंतर्गत विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं का एकीकरण कर समुद्री गतिविधियों की वास्तविक समय में निगरानी की जाती है।
- भारत सरकार ने सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र की स्थापना की है, जिसके 25 साझेदार देशों तथा 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय संगठनों के साथ वास्तविक समय में सूचना आदान-प्रदान की व्यवस्था है, जिससे समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ बनाया जाता है।
- भारतीय तटरक्षक बल भारत के समुद्री क्षेत्रों में तटीय सुरक्षा, खोज एवं बचाव , समुद्री प्रदूषण नियंत्रण तथा तस्करी-रोधी अभियानों के लिए उत्तरदायी है।
सरकारी पहल
- समुद्री दस्युता निरोध अधिनियम, 2022: यह अधिनियम समुद्री दस्युओं के विरुद्ध, उनकी राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना, कानूनी कार्रवाई हेतु एक सुदृढ़ विधिक ढाँचा प्रदान करता है। इसके अंतर्गत भारतीय प्राधिकरण समुद्री दस्यु जहाजों को जब्त कर सकते हैं तथा खुले समुद्र में किए गए अपराधों के लिए अभियोजन चला सकते हैं।
- क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा एवं विकास (SAGAR): यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग, समुद्री सुरक्षा तथा क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करती है।
- इंडो-पैसिफिक महासागर पहल : यह पहल समुद्री सुरक्षा, आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग के क्षेत्र में सहयोग को प्रोत्साहन देती है।
अंतरराष्ट्रीय पहल
- समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS): यह समुद्री दस्युता की कानूनी परिभाषा प्रदान करता है तथा राज्यों को खुले समुद्र में समुद्री दस्यु जहाजों को जब्त करने एवं उनके चालक दल को गिरफ्तार करने का अधिकार प्रदान करता है।
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO): यह समुद्री खतरों के प्रबंधन तथा वैश्विक समुद्री व्यापार की सुरक्षा हेतु अंतरराष्ट्रीय नियम एवं मानक विकसित करता है।
- जिबूती आचार संहिता: यह पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री दस्युता से निपटने के लिए एक क्षेत्रीय सहयोगात्मक ढाँचा है।
- एशिया में जहाजों के विरुद्ध समुद्री दस्युता एवं सशस्त्र लूट के दमन हेतु क्षेत्रीय सहयोग समझौता (ReCAAP): वर्ष 2004 में स्थापित यह एशिया में समुद्री दस्युता एवं जहाजों के विरुद्ध सशस्त्र लूट की घटनाओं को रोकने तथा सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु सरकार-से-सरकार के बीच किया गया प्रथम और एकमात्र क्षेत्रीय समझौता है।
चुनौतियाँ
- विशाल समुद्री क्षेत्र के कारण समुद्री गतिविधियों की निरंतर निगरानी तथा खतरों के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना कठिन होता है।
- समुद्री दस्युओं एवं आपराधिक समूहों द्वारा ड्रोन तथा अन्य उन्नत प्रौद्योगिकियों के बढ़ते उपयोग ने समुद्री अपराधों को अधिक जटिल एवं परिष्कृत बना दिया है।
- विभिन्न राष्ट्रीय एजेंसियों तथा अंतरराष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्रों के बीच अधिकारों के अतिव्यापन एवं कानूनी जटिलताओं के कारण समन्वय स्थापित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
- बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विताएँ एवं क्षेत्रीय संघर्ष समुद्री असुरक्षा को अधिक बढ़ा रहे हैं।
अदन की खाड़ी
- यह एक गहन जल वाली समुद्री खाड़ी है, जो अरब प्रायद्वीप में स्थित यमन तथा अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में स्थित सोमालिया के मध्य अवस्थित है।
- यह बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के माध्यम से अरब सागर को लाल सागर से जोड़ती है।

विभिन्न समुद्री क्षेत्रों की भौगोलिक सीमा

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संक्षिप्त समाचार 02-07-2026