संक्षिप्त समाचार 30-06-2026

किसान सारथी प्लेटफ़ॉर्म 

पाठ्यक्रम: GS2/शासन

संदर्भ

  • किसान सारथी (Kisan Sarathi) वर्ष 2021 में प्रारंभ किया गया भारत का सबसे बड़ा एकीकृत डिजिटल कृषि परामर्श मंच है।

परिचय

  • प्रारंभकर्ता: इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय।
  • कार्यान्वयन: भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान (IARI) तथा डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन द्वारा।
  • यह मंच इंटरैक्टिव सूचना प्रसार प्रणाली (IIDS) का उपयोग करता है। IIDS किसानों और विशेषज्ञों के बीच द्वि-दिशात्मक (Two-way) संवाद की सुविधा प्रदान करता है। यह कृषि ज्ञान के प्रयोगशाला से खेत तक (Lab-to-Land) हस्तांतरण को भी समर्थन देता है।
  • किसान सारथी (Kisan Sarathi) ऐप किसानों को निम्नलिखित से जोड़ता है: 
    • 730 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs);
    • 100 से अधिक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थान;
    • 65 से अधिक कृषि विश्वविद्यालय।

विशेषताएँ:

  • किसान तथा उसके खेत की प्रोफ़ाइल के आधार पर व्यक्तिगत कृषि परामर्श प्रदान करता है।
  • 13 क्षेत्रीय भाषाओं में विषय-विशेषज्ञों के साथ प्रत्यक्ष संवाद की सुविधा उपलब्ध कराता है।
  • किसानों की आवश्यकता के अनुसार कॉल एवं कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा प्रदान करता है।
  • किसानों के ज्ञान डेटाबेस तक पहुँच उपलब्ध कराता है।

महत्त्व:

  • किसानों को मौसम संबंधी अद्यतन जानकारी, बाज़ार भाव तथा अन्य विषयों पर क्षेत्र-विशिष्ट एवं वास्तविक समय (Real-Time) परामर्श प्राप्त होता है।
  • किसानों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप उपयुक्त सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
  • प्रमुख फसलों के मंडी भाव तथा जिला-वार बाज़ार दरों तक आसान पहुँच उपलब्ध कराता है।
  • यह किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान में सहायता करता है तथा प्रयोगशाला से खेत तक (Lab-to-Land) प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुदृढ़ बनाता है।

स्रोत: PIB

नालंदा विश्वविद्यालय में प्राचीन ‘शास्त्रार्थ’ परंपरा के पुनर्जीवन की प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सराहना 

पाठ्यक्रम: GS1/इतिहास 

संदर्भ 

  • प्रधानमंत्री मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय द्वारा प्राचीन भारतीय शास्त्रार्थ परंपरा के पुनर्जीवन की सराहना की। 

परिचय 

  • प्राचीन भारतीय परंपरा शास्त्रार्थ शास्त्रों तथा दार्शनिक विषयों पर विद्वतापूर्ण विमर्श और संवाद की परंपरा है।
    • प्राचीन नालंदा तथा विक्रमशिला विश्वविद्यालयों में शास्त्रार्थ शिक्षण, अधिगम तथा ज्ञान की परीक्षा का प्रमुख माध्यम था, जहाँ गहन बौद्धिक विमर्श के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान और परीक्षण किया जाता था।
  • हाल ही में नालंदा विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह से पूर्व आयोजित ‘शास्त्रार्थ 2026’ के माध्यम से इस परंपरा का पुनर्जीवन किया गया।

नालंदा विश्वविद्यालय

  • यह विश्व का प्रथम आवासीय विश्वविद्यालय था, जिसकी स्थापना 427 ईस्वी में गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम द्वारा बिहार के राजगीर स्थित नालंदा में की गई थी।
  • यह लगभग 800 वर्षों तक समृद्ध रहा और 12वीं शताब्दी ईस्वी के अंत तक ज्ञान का प्रमुख केंद्र बना रहा।
  • ऐसा माना जाता है कि यहाँ लगभग 2,000 शिक्षक तथा 10,000 विद्यार्थी अध्ययनरत थे।
  • नालंदा में चीन, कोरिया, जापान, तिब्बत, मंगोलिया, श्रीलंका तथा दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से भी विद्वान अध्ययन हेतु आते थे।
  • नालंदा के सबसे विस्तृत विवरण चीनी विद्वानों ने दिए हैं, जिनमें ह्वेनसांग (Xuanzang) सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं। वे अपने साथ सैकड़ों बौद्ध ग्रंथ चीन ले गए, जिनका बाद में चीनी भाषा में अनुवाद किया गया।
  • पुनर्जीवन: वर्ष 2006 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के पुनर्जीवन का प्रस्ताव रखा।
    • इसके पश्चात भारतीय संसद ने नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010 पारित किया।

स्रोत: DD

प्रोजेक्ट ब्रह्मांक (BRAHMANK) का 16वाँ स्थापना दिवस 

पाठ्यक्रम: GS3/ सुरक्षा

संदर्भ

  • सीमा सड़क संगठन (BRO) के प्रोजेक्ट ब्रह्मांक ने अरुणाचल प्रदेश के राणाघाट में अपना 16वाँ स्थापना दिवस मनाया। 

परिचय 

  • इस परियोजना की स्थापना 29 जून 2011 को अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के राणाघाट में की गई थी तथा यह दिसंबर 2011 में पूर्ण रूप से कार्यशील हो गई।
  • यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश के सियांग, पूर्वी सियांग, पश्चिमी सियांग, अपर सियांग तथा शी-योमी जिलों के साथ-साथ असम के धीमाजी जिले के कुछ क्षेत्रों में सामरिक सड़क अवसंरचना के विकास एवं रखरखाव के लिए उत्तरदायी है।
  • परियोजना के अंतर्गत 811 किलोमीटर सड़कों तथा लगभग 86 पुलों के विकास एवं रखरखाव का दायित्व है, जिनमें छोटी पुलियाओं (Culverts) से लेकर बड़े इस्पात (Steel) तथा मेहराबी (Arch) पुल शामिल हैं।

स्रोत: PIB

पीएम फैमिली केयर ट्रैकर (PM-FCT)

पाठ्यक्रम: GS2/ स्वास्थ्य/ शासन

संदर्भ 

  • केंद्रीय गृह मंत्री ने गुजरात के गांधीनगर में पीएम फैमिली केयर ट्रैकर (PM-FCT) की पायलट परियोजना का शुभारंभ किया। 

परिचय 

  • यह एकीकृत डिजिटल मंच जन्म पंजीकरण संख्या अथवा आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता पहचान संख्या (ABHA ID) से जुड़े एक विशिष्ट पहचानकर्ता (Unique ID) के माध्यम से गर्भावस्था से लेकर 18 वर्ष की आयु तक लाभार्थियों के स्वास्थ्य, पोषण एवं शिक्षा की निगरानी करेगा।
    • यह प्रणाली विभिन्न सरकारी डिजिटल मंचों से प्राप्त आँकड़ों का एकीकरण करेगी तथा टीकाकरण, कुपोषण, विद्यालय में नामांकन तथा विद्यालय छोड़ने की दर (Dropout Rate) जैसे प्रमुख संकेतकों की निगरानी करेगी।
  • इस मंच में प्रत्येक व्यक्ति एवं परिवार के लिए डिजिटल स्वास्थ्य पासपोर्ट (Digital Health Passport), सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु डैशबोर्ड तथा छूटे हुए टीकाकरण एवं अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए स्वचालित अलर्ट की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
  • महत्त्व: PM-FCT को एक परिवार-केंद्रित डिजिटल मंच के रूप में विकसित किया गया है। विभिन्न योजनाओं के लिए अलग-अलग अभिलेख रखने के बजाय यह एक ही मंच के माध्यम से परिवार के प्रत्येक सदस्य के स्वास्थ्य एवं कल्याण की स्थिति का समग्र रूप से पता लगाने में सक्षम बनाता है।

स्रोत: AIR, TH

बाज़ बटालियन 

पाठ्यक्रम: GS3/सुरक्षा

संदर्भ 

  • भारतीय सेना “बाज़ बटालियन” (Baaz Battalions) नामक विशेषीकृत ड्रोन इकाइयों की स्थापना करने जा रही है। 

परिचय 

  • ये बटालियन भारतीय सेना की वर्तमान रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (Remotely Piloted Aircraft—RPA) फ्लाइट्स पर आधारित होंगी तथा विभिन्न सैन्य क्षेत्रों (Theatres) में ड्रोन संचालन के लिए एक समर्पित संगठनात्मक ढाँचा प्रदान करेंगी।
  • इन विशेषीकृत इकाइयों में प्रशिक्षित कार्मिक ड्रोन प्रणालियों का संचालन करेंगे, जिससे खुफिया जानकारी एकत्रीकरण, निगरानी एवं टोही (Intelligence, Surveillance and Reconnaissance—ISR) क्षमताएँ सुदृढ़ होंगी। साथ ही, लक्ष्य की पहचान (Target Acquisition) तथा युद्धक्षेत्र की वास्तविक समय (Real-Time) में स्थिति संबंधी जानकारी प्राप्त करने की क्षमता भी बेहतर होगी।
  • बाज़ बटालियन की स्थापना का निर्णय चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गतिरोध, पाकिस्तान के विरुद्ध ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन के प्रभावी उपयोग तथा विशेष रूप से रूस–यूक्रेन युद्ध सहित हाल के वैश्विक संघर्षों से प्राप्त अनुभवों के आधार पर लिया गया है।

स्रोत: India Today

 

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