डिजिटल इंडिया 

पाठ्यक्रम: GS2/शासन 

संदर्भ

  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने 1 जुलाई 2026 को अपने 11 वर्ष पूर्ण कर लिए।

भारत का डिजिटल नेतृत्व

  • पिछले एक दशक में डिजिटल इंडिया, भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure—DPI) की आधारशिला बन चुका है।
    • इसने विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार, स्टार्टअप विकास तथा प्रौद्योगिकी के अपनाने की गति को तेज किया है।
  • भारत अब वैश्विक स्तर पर वास्तविक समय (Real-Time) के डिजिटल भुगतानों में अग्रणी है, जहाँ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से विश्व के लगभग 49% रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन संपन्न होते हैं।
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था का भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 12–14% योगदान है तथा अगले दशक में इसके लगभग एक-पाँचवाँ (20%) तक पहुँचने की अपेक्षा है।
  • भारत ने वर्ष 2023 में अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान इंडिया स्टैक ग्लोबल (India Stack Global) तथा वैश्विक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना भंडार (Global DPI Repository) की शुरुआत की, जिससे भारतीय डिजिटल समाधानों की वैश्विक पहुँच का विस्तार हुआ।
  • फरवरी 2026 तक भारत ने इंडिया स्टैक तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) प्रणालियों के क्षेत्र में सहयोग हेतु 24 देशों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये सहयोग डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान तथा सार्वजनिक सेवाओं के वितरण जैसे क्षेत्रों को शामिल करते हैं।

डिजिटल इंडिया के नौ स्तंभ क्या हैं? 

  • ब्रॉडबैंड पहुँच (Broadband Access): विश्वसनीय ब्रॉडबैंड डिजिटल शासन तथा समावेशी आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है।
    • उदाहरण: मार्च 2026 के अंत तक ब्रॉडबैंड इंटरनेट ग्राहकों की संख्या बढ़कर 106.58 करोड़ हो गई। 
  • मोबाइल कनेक्टिविटी की सार्वभौमिक पहुँच: जनवरी 2026 तक भारतनेट-1 तथा भारतनेट-2 के अंतर्गत लगभग 2.15 लाख ग्राम पंचायतों अर्थात् लगभग 97% ग्राम पंचायतों को लगभग 7 लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। 
  • सार्वजनिक इंटरनेट पहुँच कार्यक्रम (Public Internet Access Programme): सुलभ डिजिटल सेवा केंद्र नागरिकों को उनके घरों के निकट ही डिजिटल सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराते हैं। उदाहरण: वर्तमान में 6.5 लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर (Common Service Centres—CSCs) तथा 1.6 लाख डाकघर डिजिटल सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
  • ई-शासन: यह कागजरहित, एकीकृत तथा नागरिक-केंद्रित प्रशासन को बढ़ावा देता है।
    • डिजीलॉकर तथा राष्ट्रीय सिंगल साइन-ऑन (National Single Sign-On) जैसे मंच प्रमाण-पत्रों, आवेदनों, भुगतानों तथा सार्वजनिक सेवाओं तक निर्बाध पहुँच प्रदान करते हैं, जिससे कागजी कार्यवाही कम होती है और जीवन-यापन की सुगमता बढ़ती है।
  • ई-क्रांति: डिजिटल इंडिया के सेवा प्रदायगी स्तंभ के रूप में ई-क्रांति ने भौतिक से डिजिटल शासन की ओर संक्रमण को गति प्रदान की है।
    • ई-हॉस्पिटल, ई-संजीवनी तथा ई-कोर्ट्स जैसे एकीकृत मंचों ने प्रमाण-पत्रों, स्वास्थ्य सेवाओं तथा न्यायिक सेवाओं तक पहुँच को अधिक सरल बनाया है।
  • सभी के लिए सूचना (Information for All): यह स्तंभ सरकारी सूचनाओं को सरलता से उपलब्ध कराकर तथा डिजिटल मंचों के माध्यम से नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करके पारदर्शी एवं सहभागी शासन को सुदृढ़ बनाता है।
    • माईगव (MyGov) तथा ओपन गवर्नमेंट डेटा (Open Government Data) जैसी पहलें नागरिकों को सरकारी सूचनाओं तक सहज पहुँच प्रदान करती हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण: वित्त वर्ष 2014–15 में ₹1.9 लाख करोड़ के स्तर से बढ़कर मार्च 2026 तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन लगभग ₹12 लाख करोड़ तक पहुँच गया है।
    • आज भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता है, जो वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य शृंखला में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
  • रोज़गार के लिए सूचना प्रौद्योगिकी: राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर एवं सेवा कंपनियाँ संघ (NASSCOM) के अनुसार, वित्त वर्ष 2024–25 में सूचना प्रौद्योगिकी एवं आईटी-सक्षम सेवाओं (IT & ITeS) उद्योग से लगभग 283 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।
    • भारत के 2,100 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र (Global Capability Centres—GCCs) इंजीनियरिंग, विश्लेषिकी, साइबर सुरक्षा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित क्षेत्रों में लगभग 26 लाख पेशेवरों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं।
  • प्रारंभिक लाभ कार्यक्रम (Early Harvest Programmes): बायोमेट्रिक उपस्थिति, सुरक्षित सरकारी ई-मेल, सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट, ई-पुस्तकें (eBooks), एसएमएस-आधारित मौसम चेतावनी तथा डिजिटल संचार मंच जैसी त्वरित प्रभाव वाली पहलों ने प्रौद्योगिकी-आधारित शासन के तत्काल लाभों को प्रदर्शित किया।

समावेशी दशक को गति देने वाली प्रमुख पहलें

  • जैम त्रिमूर्ति (JAM Trinity): डिजिटल इंडिया की आधारशिला के रूप में जैम त्रिमूर्ति ने भारत में वित्तीय समावेशन तथा कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। इसने करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा तथा सरकारी सेवाओं तक निर्बाध पहुँच सुनिश्चित की।
  • डिजिलॉकर: डिजिलॉकर फिजिकल डॉक्यूमेंट्स की जगह एक सुरक्षित डिजिटल वॉलेट है, और पूरे भारत में डॉक्यूमेंट स्टोरेज और वेरिफिकेशन को बदल रहा है।
    • मार्च 2026 तक, इस प्लेटफ़ॉर्म पर 70.69 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स रजिस्टर हो चुके हैं और 850 करोड़ से ज़्यादा डॉक्यूमेंट्स जारी किए जा चुके हैं।
  • यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI): वर्ष 2026 में अपने दस वर्ष पूर्ण करने वाला UPI नागरिकों और व्यवसायों के लिए त्वरित एवं सुरक्षित लेन-देन के माध्यम से डिजिटल भुगतान व्यवस्था में परिवर्तन ला रहा है।
  • UPI का वैश्विक विस्तार अब नौ देशों तक हो चुका है, जिनमें कंबोडिया इसका नवीनतम अपनाने वाला देश है। 
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाने वाले डिजिटल मंच:
    • ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली (ORS) रोगियों को डिजिटल माध्यम से अपॉइंटमेंट बुक करने की सुविधा प्रदान करती है, जिससे कतारें और कागजी कार्यवाही कम होती है। क्लाउड-आधारित ई-हॉस्पिटल (eHospital) मंच अस्पतालों के संचालन का डिजिटलीकरण कर रहा है, जबकि ई-ब्लडबैंक (eBloodBank) स्वास्थ्य संस्थानों में रक्त की उपलब्धता एवं उसके प्रबंधन को बेहतर बना रहा है।
    • ई-संजीवनी (eSanjeevani): यह टेलीमेडिसिन मंच विशेष रूप से ग्रामीण तथा वंचित क्षेत्रों में रोगियों को दूरस्थ रूप से डॉक्टरों से जोड़ रहा है।
    • टेली-मानस (Tele MANAS): यह देशभर में निःशुल्क टेली-परामर्श तथा मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराता है।
  • प्रौद्योगिकी के माध्यम से वाणिज्य को सशक्त बनाना:
    • सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने सार्वजनिक खरीद प्रणाली को अधिक पारदर्शी, दक्ष तथा कागजरहित बनाकर उसमें परिवर्तन किया है।
    • डिजिटल वाणिज्य हेतु मुक्त नेटवर्क (ONDC) एक खुला एवं अंतरसंचालनीय (Interoperable) डिजिटल वाणिज्य पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है, जो विभिन्न मंचों पर खरीदारों और विक्रेताओं को आपस में जोड़ता है।
  • एग्रीस्टैक (AgriStack): प्रौद्योगिकी के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना
    • डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत विकसित एग्रीस्टैक (AgriStack) एक किसान-केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) है, जो ई-नाम (e-NAM) के माध्यम से ऑनलाइन कृषि व्यापार तथा किसान ई-मित्र (Kisan e-Mitra) जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित चैटबॉट के माध्यम से किसानों को त्वरित कृषि संबंधी जानकारी एवं सरकारी योजनाओं से जुड़ी सहायता प्रदान करता है।
  • शिक्षा तक पहुँच को सशक्त बनाने वाले डिजिटल मंच:
    • दीक्षा (Digital Infrastructure for Knowledge Sharing—DIKSHA) पाठ्यक्रम-आधारित डिजिटल शिक्षण सामग्री तथा शिक्षक प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा में परिवर्तन ला रहा है।
    • स्वयं (Study Webs of Active Learning for Young Aspiring Minds—SWAYAM) तथा स्वयं प्रभा (SWAYAM Prabha) कक्षा से बाहर भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच का विस्तार कर रहे हैं।
  • भारत की डिजिटल कार्यशक्ति को सशक्त बनाना:
    • प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA) ने नागरिकों को स्मार्टफोन के उपयोग, इंटरनेट तक पहुँच, डिजिटल भुगतान तथा ऑनलाइन सेवाओं का प्रशिक्षण देकर ग्रामीण डिजिटल विभाजन को कम किया है।
    • फ्यूचरस्किल्स प्राइम (FutureSkills Prime) शिक्षार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा तथा डेटा विश्लेषण जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए तैयार कर रहा है।
    • स्किल इंडिया डिजिटल हब (Skill India Digital Hub—SIDH) कौशल विकास, प्रमाणन तथा रोजगार सेवाओं के लिए एक एकीकृत मंच है।
    • इंडियाएआई मिशन (IndiaAI Mission) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शिक्षा, अवसंरचना तथा उत्तरदायी AI के उपयोग को सुदृढ़ बना रहा है।

आगे की राह

  • डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना: विशेषकर दूरस्थ तथा वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism—LWE) प्रभावित क्षेत्रों में सार्वभौमिक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाए।
  • डिजिटल विभाजन को कम करना: डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों का विस्तार किया जाए, ताकि ग्रामीण आबादी, महिलाएँ, वरिष्ठ नागरिक तथा अन्य संवेदनशील वर्ग डिजिटल अर्थव्यवस्था से वंचित न रहें।
  • विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाना: सेमीकंडक्टर मिशन (Semiconductor Mission) के माध्यम से घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जाए, अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित किया जाए तथा भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखलाओं के साथ और अधिक गहराई से जोड़ा जाए।

स्रोत: PIB

 

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