पाठ्यक्रम: जीएस-2/ अंतरराष्ट्रीय संबंध
सन्दर्भ
- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के एक जाँच आयोग ने कहा है कि इज़राइल ने फ़िलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया है, जिसके परिणामस्वरूप गाज़ा में नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध तथा युद्ध अपराध हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र जाँच आयोग क्या है?
- यह अधिकृत फ़िलिस्तीनी क्षेत्र, जिसमें पूर्वी यरूशलेम तथा इज़राइल शामिल हैं, पर संयुक्त राष्ट्र का स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच आयोग है।
- इसकी स्थापना मई 2021 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा की गई थी।
- इसे प्रतिवर्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दायित्व सौंपा गया है।
नरसंहार(Genocide) क्या है?
- “नरसंहार” शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1944 में पोलैंड के विधिवेत्ता राफ़ाएल लेम्किन ने किया था।
- इसे पहली बार 1946 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंतरराष्ट्रीय विधि के अंतर्गत अपराध के रूप में मान्यता दी गई।
- 1948 के नरसंहार अपराध की रोकथाम एवं दंड संबंधी अभिसमय के माध्यम से इसे एक स्वतंत्र अपराध के रूप में संहिताबद्ध किया गया।
- अप्रैल 2022 तक इस अभिसमय का 153 देशों द्वारा अनुमोदन किया जा चुका है।
- भारत ने इस अभिसमय पर 1949 में हस्ताक्षर किए तथा 1959 में इसका अनुमोदन किया।
- अभिसमय के अनुसार, यदि किसी राष्ट्रीय, जातीय, नस्लीय अथवा धार्मिक समूह को पूर्णतः या आंशिक रूप से नष्ट करने के उद्देश्य से निम्नलिखित में से कोई भी कार्य किया जाता है, तो उसे नरसंहार माना जाएगा—
- समूह के सदस्यों की हत्या करना।
- समूह के सदस्यों को गंभीर शारीरिक अथवा मानसिक क्षति पहुँचाना।
- ऐसे जीवन-परिस्थितियाँ जानबूझकर उत्पन्न करना जिनसे समूह का पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से भौतिक विनाश हो जाए।
- समूह के भीतर जन्म रोकने के उद्देश्य से उपाय लागू करना।
- समूह के बच्चों का बलपूर्वक किसी अन्य समूह में स्थानांतरण करना।
- अभिसमय के अनुसार नरसंहार का अपराध सशस्त्र संघर्ष, चाहे वह अंतरराष्ट्रीय हो या गैर-अंतरराष्ट्रीय, दोनों स्थितियों में हो सकता है। यह शांतिपूर्ण परिस्थितियों में भी संभव है।
- अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की रोम संविधि के अनुच्छेद 6 में भी नरसंहार की यही परिभाषा दी गई है।
| अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की रोम संविधि रोम संविधि वह मूल अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की स्थापना हुई।इसे 1998 में रोम में अपनाया गया तथा 2002 में यह प्रभावी हुई।यह संविधि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय को निम्नलिखित गंभीर अपराधों के लिए व्यक्तियों के विरुद्ध अभियोजन चलाने का अधिकार प्रदान करती है—नरसंहार,मानवता के विरुद्ध अपराध,युद्ध अपराध,आक्रमण का अपराध। |
मानवता के विरुद्ध अपराध क्या हैं?
- रोम संविधि के अनुच्छेद 7 के अनुसार, मानवता के विरुद्ध अपराध वे विशिष्ट कृत्य हैं, जो किसी नागरिक आबादी के विरुद्ध व्यापक अथवा व्यवस्थित आक्रमण के भाग के रूप में तथा उस आक्रमण की जानकारी होते हुए किए जाते हैं।
- इनमें निम्नलिखित अपराध सम्मिलित हैं— हत्या,दासता,निर्वासन अथवा जनसंख्या का बलपूर्वक स्थानांतरण,अवैध कारावास,यातना,बलात्कार एवं यौन हिंसा के अन्य रूप, राजनीतिक, नस्लीय, राष्ट्रीय, जातीय, सांस्कृतिक, धार्मिक अथवा लैंगिक आधार पर पहचाने जाने वाले समूहों का उत्पीड़न आदि।
युद्ध अपराध क्या हैं?
- रोम संविधि के अनुच्छेद 8 के अनुसार, युद्ध अपराध वे गंभीर उल्लंघन हैं जो किसी सशस्त्र संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानवीय विधि के विरुद्ध किए जाते हैं।
- न्यायालय विशेष रूप से तब अधिकार-क्षेत्र का प्रयोग करता है, जब ऐसे अपराध किसी योजना अथवा नीति के अंतर्गत या बड़े पैमाने पर किए गए हों।
युद्ध अपराधों में जिनेवा अभिसमय के गंभीर उल्लंघन सम्मिलित हैं, जैसे—
- जानबूझकर हत्या करना,
- यातना अथवा अमानवीय व्यवहार,
- जानबूझकर गंभीर पीड़ा या गंभीर चोट पहुँचाना,
- संपत्ति का अवैध विनाश अथवा अधिग्रहण,
- युद्धबंदियों को शत्रु सेना की सेवा के लिए बाध्य करना,
- युद्धबंदियों को निष्पक्ष न्याय से वंचित करना,
- अवैध निर्वासन अथवा निरुद्ध करना, बंधक बनाना।
- रोम संविधि युद्ध के नियमों एवं परंपराओं के अन्य गंभीर उल्लंघनों को भी अपराध घोषित करती है।
रिपोर्ट का विधिक महत्व
- संयुक्त राष्ट्र का कोई जाँच आयोग स्वयं आपराधिक दायित्व निर्धारित नहीं कर सकता और न ही दंडात्मक प्रतिबंध लगा सकता है। तथापि, इसके निष्कर्ष निम्नलिखित अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों के समक्ष दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में उपयोग किए जा सकते हैं—
- अंतरराष्ट्रीय न्यायालय, जो देशों के बीच विवादों का निपटारा करता है।
- अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय, जो नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध, युद्ध अपराध तथा आक्रमण के अपराध के लिए व्यक्तियों के विरुद्ध अभियोजन चलाता है।
- उदाहरण के लिए, दक्षिण अफ्रीका द्वारा इज़राइल के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में दायर नरसंहार संबंधी वाद में न्यायालय ने कहा है कि गाज़ा के फ़िलिस्तीनियों को संयुक्त राष्ट्र नरसंहार अभिसमय के अंतर्गत ऐसे अधिकार प्राप्त हैं, जिनकी सुरक्षा किया जाना आवश्यक है।
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