पाठ्यक्रम: जीएस-3/ अवसंरचना
चर्चा में क्यों?
- सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने जून 2026 में भारत की प्रतिष्ठित पुल परियोजनाओं का एक संकलन जारी किया, जिसमें यह दर्शाया गया है कि पिछले एक दशक में पुल अवसंरचना ने भारत में संपर्क, क्षेत्रीय विकास तथा सामरिक पहुँच को किस प्रकार परिवर्तित किया है।
भारत की पुल अवसंरचना की स्थिति
- भारत का सड़क नेटवर्क अब 63 लाख किलोमीटर से अधिक विस्तृत हो चुका है, जिससे यह विश्व के सबसे बड़े सड़क नेटवर्कों में से एक बन गया है।
- बजट 2026-27 में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत सड़कों और पुलों के लिए 1,21,999 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 5% अधिक है। यह सड़क अवसंरचना के प्रति निरंतर पूंजीगत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- प्रधानमंत्री गतिशक्ति संपर्क नोड्स के अंतर्गत अनेक प्रमुख पुलों का निर्माण कार्य जारी है, जिनमें शामिल हैं:
- जोगीघोपा में ब्रह्मपुत्र नदी पर 4 किलोमीटर लंबा पुल।
- कोसी नदी पर 29 किलोमीटर लंबा पुल।
- गंगा नदी पर जेपी सेतु के समानांतर 14 किलोमीटर लंबा पुल।

महत्व: पुल क्यों महत्वपूर्ण हैं?
- आर्थिक गुणक प्रभाव: पुल केवल परिवहन संरचनाएँ नहीं हैं, बल्कि आर्थिक गुणक के रूप में कार्य करते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-8 पर नर्मदा पुल भारत के सबसे व्यस्त माल परिवहन गलियारे में माल ढुलाई को तेज करता है, जबकि औंटा-सिमरिया पुल उत्तर बिहार के कृषि अधिशेष को दक्षिणी बाजारों तक पहुँच प्रदान करता है।
- सामरिक और रक्षा महत्व: धौला-सादिया पुल अपनी नागरिक उपयोगिता के अतिरिक्त सामरिक महत्व भी रखता है, क्योंकि यह अरुणाचल प्रदेश सीमा तक सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तीव्र आवाजाही को संभव बनाता है।
- क्षेत्रीय एकीकरण: पूर्वोत्तर क्षेत्र के पुल उस संपर्क अभाव को प्रत्यक्ष रूप से दूर करते हैं जिसने ऐतिहासिक रूप से आर्थिक विकास को सीमित किया तथा उग्रवाद और पलायन को बढ़ावा दिया।
- पर्यावरणीय अभियांत्रिकी(Engineering): चंबल पुल का 300 मीटर लंबा बिना स्तंभ वाला निलंबित विस्तार यह प्रदर्शित करता है कि अवसंरचना विकास और पारिस्थितिकीय संवेदनशीलता एक-दूसरे के अनुकूल हो सकते हैं।
- समावेशी संपर्क: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत निर्मित पुल ग्रामीण परिवारों को स्वास्थ्य केंद्रों, विद्यालयों और बाजारों से जोड़ते हैं, जिससे मानव विकास संकेतकों में प्रत्यक्ष सुधार होता है, जिसे केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आँकड़ों से नहीं मापा जा सकता।
पुल अवसंरचना से संबंधित चुनौतियाँ
- रखरखाव की कमी: भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1.5 लाख से अधिक पुल हैं, जिनमें से अनेक औपनिवेशिक काल या 1960-70 के दशक में निर्मित किए गए थे।
- क्रियान्वयन में विलंब: भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृतियों, उपयोगिताओं के स्थानांतरण तथा ठेकेदारों की क्षमता संबंधी बाधाओं के कारण अनेक अवसंरचना परियोजनाएँ विलंबित हुई हैं।
- भूवैज्ञानिक एवं भूभाग संबंधी चुनौतियाँ: पूर्वोत्तर, हिमालयी क्षेत्रों तथा तटीय क्षेत्रों में पुल परियोजनाओं को भूकंपीय संवेदनशीलता, आकस्मिक बाढ़, उच्च ऊँचाई पर कार्य स्थितियाँ तथा सीमित निर्माण अवधि जैसी असाधारण अभियांत्रिकी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ: वन्यजीव गलियारों और पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने वाली परियोजनाओं के लिए बहु-स्तरीय और दीर्घकालिक स्वीकृतियों की आवश्यकता होती है। चंबल पुल की अभिनव अभिकल्पना (Design innovation) जितनी अभियांत्रिकी (Engineering )उपलब्धि थी, उतनी ही नियामकीय आवश्यकताओं की प्रतिक्रिया भी थी।
- शहरी पुलों की उपेक्षा: ग्रामीण क्षेत्रों के लिए PMGSY जैसी कोई व्यापक योजना शहरी सड़कों और पुलों हेतु उपलब्ध नहीं है। परिणामस्वरूप, अधिक यातायात भार के बावजूद शहरों की पुल अवसंरचना अपर्याप्त वित्तपोषण और कमजोर रखरखाव का सामना कर रही है।
आगे की राह
- राष्ट्रीय पुल परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के रियल टाइम सेंसर पायलट कार्यक्रम को राष्ट्रीय राजमार्गों के सभी पुलों तक विस्तारित किया जाए, जिससे संरचनात्मक स्वास्थ्य की सतत निगरानी प्रणाली विकसित हो और संभावित विफलताओं से पहले पूर्वानुमानित रखरखाव संभव हो सके।
- पूर्वोत्तर में संपर्क की शेष कड़ियों को प्राथमिकता: भारत-तिब्बत-म्यांमार सीमा के साथ स्थित फ्रंटियर राजमार्ग (NH-913) पर पुलों के निर्माण को त्वरित किया जाए, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों से जनसंख्या के पलायन को रोका जा सके और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) तक पहुँच में सुधार हो। इसके लिए एक समर्पित NHIDCL परियोजना पाइपलाइन विकसित की जानी चाहिए।
- पुलों को प्रधानमंत्री गतिशक्ति से एकीकृत करना: प्रत्येक प्रमुख पुल परियोजना को गतिशक्ति के आर्थिक नोडों, औद्योगिक गलियारों और लॉजिस्टिक पार्कों से जोड़ा जाए, ताकि पुलों में किए गए निवेश से केवल संपर्क लाभ ही नहीं, बल्कि स्पष्ट आर्थिक प्रतिफल भी प्राप्त हों।
- शहरी पुल नीति: अमृत 2.0 के अंतर्गत एक समर्पित शहरी पुल नवीनीकरण मिशन प्रारंभ किया जाए, जिसके अंतर्गत 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में 30 वर्ष से अधिक पुराने सभी पुलों का अनिवार्य लेखा-परीक्षण और संरचनात्मक नवीनीकरण किया जाए।
स्रोत: PIB