चरम मौसम पूर्वानुमान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सीमाएँ

पाठ्यक्रम: जीएस-1/ भूगोल, जीएस-3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी 

सन्दर्भ

  • एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि यद्यपि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित मौसम पूर्वानुमान मॉडल ने उल्लेखनीय सटीकता और गति प्राप्त की है, फिर भी वे रिकॉर्ड-तोड़ चरम मौसमीय घटनाओं की भविष्यवाणी करने में अपेक्षाकृत कम प्रभावी हैं।

मौसम पूर्वानुमान का पारंपरिक मॉडल

  • पारंपरिक मौसम पूर्वानुमान में संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (NWP) मॉडलों का उपयोग किया जाता है।
  • यह मॉडल द्रव गतिकी तथा ऊष्मागतिकी(fluid dynamics and thermodynamics) के समीकरणों का उपयोग करके वायुमंडलीय प्रक्रियाओं का अनुकरण करता है।
  • ये मॉडल निम्नलिखित प्रक्रियाओं का अनुकरण करते हैं—वायुमंडलीय परिसंचरण,ऊष्मा का स्थानांतरण,आर्द्रता की गति,बादलों का निर्माण,वर्षण प्रक्रियाएँ,महासागर–वायुमंडल अंतःक्रियाएँ।

भारत में मौसम पूर्वानुमान

  • वर्तमान में भारत मौसम पूर्वानुमान के लिए सैटेलाईट डेटा तथा कम्प्यूटर मॉडलों पर निर्भर है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) मौसम पूर्वानुमान हेतु इनसैट (INSAT) श्रृंखला के उपग्रहों तथा महाशक्तिशाली संगणकों का उपयोग करता है।
  • भारत में मुख्य रूप से मौसम संबंधी प्रेक्षणों के लिए तीन उपग्रहों — INSAT-3D, INSAT-3DR तथा INSAT-3DS — का उपयोग किया जाता है।
  • मौसम वैज्ञानिक उपग्रहों से प्राप्त निम्नलिखित आँकड़ों का उपयोग करते हैं—बादलों की गति,बादलों के शीर्ष का तापमान,वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा। 
  • ये आँकड़े वर्षा के आकलन, मौसम पूर्वानुमान तथा चक्रवातों की निगरानी और उनके मार्ग के निर्धारण में सहायक होते हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मौसम पूर्वानुमान

  • पारंपरिक मौसम मॉडलों के विपरीत, जो भौतिकी के नियमों पर आधारित होते हैं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित मॉडल आँकड़ों से कार्य प्रारम्भ करते हैं।
  • ये मॉडल मशीन लर्निंग (ML) एल्गोरिदम का उपयोग करके पैटर्न की पहचान करते हैं तथा इनपुट वेरिएबल जैसे तापमान, आर्द्रता और पवन वेग और उनसे उत्पन्न मौसमीय घटनाओं, जैसे चक्रवात अथवा भारी वर्षा, के बीच संबंधों को समझते हैं।
  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने “मौसम और जलवायु में कृत्रिम बुद्धिमत्ता/मशीन अधिगम के अनुप्रयोग” पर एक समर्पित कार्यात्मक समूह की स्थापना की है।
  • वर्तमान में प्रायोगिक रूप से उपयोग किए जा रहे AI मॉडल निम्नलिखित हैं—
  • Pangu-Weather
  • GraphCast
  • FourCastNet
  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चक्रवातों की तीव्रता का आकलन करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित एडवांस्ड ड्वोराक टेक्निक  (AiDT) का भी उपयोग किया है।

मौसम पूर्वानुमान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडलों के लाभ

  • विशाल आँकड़ों के उपयोग की क्षमता: कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडल उपग्रहों, रडारों, मौसम केन्द्रों तथा यहाँ तक कि सोशल मीडिया से प्राप्त विशाल आँकड़ा-संग्रहों का प्रसंस्करण कर सकते हैं। इससे वे सूक्ष्म संकेतों तथा प्रवृत्तियों की पहचान करने में सक्षम होते हैं।
  • गैर-रेखीय प्रणालियों (Nonlinear Systems)  के विश्लेषण की क्षमता:कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल पृथ्वी तंत्र के विभिन्न चरों के बीच छिपे हुए प्रतिरूपों तथा गैर-रेखीय कारण-परिणाम संबंधों का पता लगा सकते हैं। ऐसे संबंधों को भौतिकी-आधारित मॉडल कभी-कभी पहचान नहीं पाते।
  • स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलन:कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र-विशिष्ट मॉडलों के विकास की सुविधा प्रदान करती है। ये मॉडल स्थानीय भौगोलिक, स्थलाकृतिक तथा जलवायवीय कारकों को ध्यान में रखते हैं, जिससे पूर्वानुमानों की प्रासंगिकता और सटीकता बढ़ती है।
  • वास्तविक समय में पूर्वानुमान:कृत्रिम बुद्धिमत्ता तीव्र गति से तात्कालिक पूर्वानुमान (Nowcasting) करने में सक्षम है, अर्थात् अगले कुछ घंटों के मौसम का पूर्वानुमान प्रदान कर सकती है।
  • यह आपदा तैयारी, शीघ्र चेतावनी प्रणाली तथा शहरी नियोजन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल चरम मौसमीय घटनाओं के पूर्वानुमान में क्यों संघर्ष करते हैं?

1. ऐतिहासिक आँकड़ों पर निर्भरता

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल ऐतिहासिक मौसम अभिलेखों के आधार पर प्रशिक्षित किए जाते हैं।
  • वे पूर्व में दर्ज अवलोकनों के भीतर सांख्यिकीय प्रतिरूपों तथा संबंधों की पहचान करते हैं।

2. एक्सट्रापोलेशन (बहिर्वेशन) की समस्या

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल उन घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने में अत्यंत सक्षम होते हैं जो पहले से देखी गई मौसमीय परिस्थितियों की सीमा के भीतर आती हैं (इंटरपोलेशन)।
  • किन्तु वे अभूतपूर्व अथवा रिकॉर्ड-तोड़ घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने में कठिनाई का सामना करते हैं, क्योंकि ऐसी घटनाएँ उनके प्रशिक्षण आँकड़ों की सीमा से बाहर होती हैं (एक्सट्रापोलेशन)।
  • परिणामस्वरूप, अत्यधिक तीव्र ताप-लहरें, शीत-लहरें अथवा प्रचण्ड पवन-तूफानों का आकलन प्रायः कम करके किया जाता है।

3. भौतिक प्रक्रियाओं की सीमित समझ

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल चरों के बीच सहसंबंधों को सीखते हैं, न कि वायुमंडल को संचालित करने वाले मूलभूत भौतिक नियमों को।
  • इससे नई अथवा असामान्य मौसमीय परिस्थितियों का पूर्वानुमान लगाने की उनकी क्षमता सीमित हो जाती है।

4. जलवायु परिवर्तन की चुनौती

  • वर्तमान जलवायु आँकड़ों पर प्रशिक्षित एआई मॉडल भविष्य की अधिक गर्म जलवायु में कम प्रभावी हो सकते हैं।
  • इसका कारण यह है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से वायुमंडलीय तंत्र निरंतर परिवर्तित हो रहा है।

5. एआई मॉडलों की “ब्लैक बॉक्स” प्रकृति

  • विशेषकर गहन अधिगम (Deep Learning) आधारित AI प्रणालियाँ “ब्लैक बॉक्स” के रूप में कार्य करती हैं, अर्थात् उनकी निर्णय-निर्माण प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होती।
  • इससे विश्वास, पारदर्शिता तथा व्याख्यात्मकता में कमी आती है, विशेषकर गैर-विशेषज्ञों तथा परिचालन मौसम वैज्ञानिकों के लिए।

दक्षता बढ़ाने हेतु की गई पहलें

1.मिशन मौसम: 

  • भारत सरकार ने मौसम पूर्वानुमान, मॉडलिंग तथा सूचना प्रसार की क्षमताओं को उन्नत करने के लिए मिशन मौसम प्रारम्भ किया है।
  • मिशन के प्रमुख उद्देश्य:अत्याधुनिक मौसम निगरानी प्रौद्योगिकियों एवं प्रणालियों का विकास। उन्नत उपकरणों से युक्त अगली पीढ़ी के राडारों तथा उपग्रहों की स्थापना।
  • बेहतर पृथ्वी तंत्र मॉडल तथा आँकड़ा-आधारित विधियों (AI/ML के उपयोग सहित) का विकास।

2. राष्ट्रीय मानसून मिशन

  • वर्ष 2012 में इसे प्रारम्भ किया गया।
  • इसका उद्देश्य मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को अधिक वास्तविक समय आधारित और जमीनी स्तर पर एकत्रित आँकड़ों पर आधारित बनाना था।

3. डॉप्लर राडारों का विस्तार

  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) मौसम पूर्वानुमानों की सटीकता बढ़ाने के लिए डॉप्लर राडारों का व्यापक उपयोग कर रहा है।
  • डॉप्लर राडारों की संख्या वर्ष 2013 में 15 से बढ़कर वर्ष 2026 में 50 हो गई है।
  • डॉप्लर राडार निकटवर्ती क्षेत्रों में वर्षा का पूर्वानुमान लगाने में उपयोगी होते हैं, जिससे पूर्वानुमान अधिक त्वरित और सटीक बनते हैं।

4. मौसम सूचना नेटवर्क एवं डेटा प्रणाली (WINDS)

  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मौसम सूचना नेटवर्क एवं डेटा प्रणाली (WINDS) प्रारम्भ किया है।
  • इसके अंतर्गत 2 लाख से अधिक भू-आधारित मौसम केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि दीर्घकालिक तथा अति-स्थानीय (हाइपर-लोकल) मौसम आँकड़े एकत्र किए जा सकें।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
आईएमडी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन एक संस्था है। यह भारत में मौसम संबंधी प्रेक्षणों, मौसम पूर्वानुमान तथा भूकम्प विज्ञान के लिए प्रमुख एजेंसी है।यह विश्व मौसम विज्ञान संगठन(WMO) के छह क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केन्द्रों में से एक है।

स्रोत: TH

 

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