भारत में चुनाव चिह्नों को नियंत्रित करने वाले नियम
पाठ्यक्रम: GS2 / राजव्यवस्था एवं शासन
संदर्भ
- व्यंग्यात्मक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस प्रश्न पर परिचर्चा शुरू कर दी है कि यदि वह स्वयं को एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत कराती है, तो क्या उसे चुनाव चिह्न के रूप में कॉकरोच (तिलचट्टा) आवंटित किया जा सकता है।
भारत में चुनाव चिह्न
- चुनाव चिह्नों का विनियमन निर्वाचन चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के अंतर्गत किया जाता है, जिसका प्रशासन भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा किया जाता है।
- चुनाव चिह्नों के प्रकार:
- आरक्षित चिह्न : ये केवल मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य राजनीतिक दलों को आवंटित किए जाते हैं।
- उदाहरण: कमल, हाथ आदि।
- मुक्त चिह्न : ये पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों तथा निर्दलीय उम्मीदवारों को अधिसूचित सूची से आवंटित किए जाते हैं।
- आरक्षित चिह्न : ये केवल मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य राजनीतिक दलों को आवंटित किए जाते हैं।
कौन-कौन से चिह्न उपलब्ध हैं?
- निर्वाचन आयोग की नवीनतम मुक्त चिह्न सूची (मई 2025) में 184 चिह्न शामिल हैं।
- इनमें घरेलू वस्तुएँ, फल, सब्जियाँ, खेल उपकरण तथा विभिन्न औजार सम्मिलित हैं, जैसे—
- एयर कंडीशनर
- कूड़ादान
- फ्राइंग पैन
- अंगूर
- टूथब्रश
- टीवी रिमोट आदि।
- कुछ चिह्न कुछ राज्यों में उपलब्ध नहीं होते क्योंकि वे पहले से ही किसी मान्यता प्राप्त राज्य दल को आरक्षित रूप में आवंटित हैं।
क्या कॉकरोच को चुनाव चिह्न के रूप में आवंटित किया जा सकता है?
- 1990 के दशक में पशु कल्याण संगठनों द्वारा उठाई गई चिंताओं के बाद निर्वाचन आयोग ने नए पशु-आधारित चुनाव चिह्नों का आवंटन बंद कर दिया था।
- निर्वाचन चिह्न आदेश के अनुसार, कोई नया प्रस्तावित चिह्न:
- किसी वर्तमान चिह्न से मिलता-जुलता नहीं होना चाहिए।
- उसका कोई धार्मिक अथवा सांप्रदायिक अर्थ नहीं होना चाहिए।
- उसमें किसी पक्षी अथवा पशु का चित्रण नहीं होना चाहिए।
- चूँकि कॉकरोच (तिलचट्टा) प्राणी जगत से संबंधित एक कीट है, इसलिए सामान्यतः यह इस निषेध के अंतर्गत आएगा।
- अपवाद: कुछ मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल आज भी पशु-आधारित चुनाव चिह्नों का उपयोग करते हैं क्योंकि उन्हें ये चिह्न प्रतिबंध लागू होने से पहले आवंटित किए गए थे।
- उदाहरण:
- बहुजन समाज पार्टी (BSP) – हाथी
- ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (AIFB) – सिंह
- उदाहरण:
स्रोत: IE
भारत के प्रधानमंत्री
पाठ्यक्रम: GS2 / राजव्यवस्था
समाचार में
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी निरंतर चुनावी जनादेशों के आधार पर पद पर बने रहने वाले भारत के सबसे लंबे समय तक कार्यरत प्रधानमंत्री बन गए हैं। उन्होंने इस मामले में जवाहरलाल नेहरू को पीछे छोड़ दिया है।
भारत के प्रधानमंत्री के बारे में
- संवैधानिक स्थिति (अनुच्छेद 75): प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वे संघ सरकार के प्रमुख के रूप में कार्य करते हैं। वे वास्तविक कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग करते हैं।
- मंत्रिपरिषद के नेता (अनुच्छेद 74): प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करते हैं, जो राष्ट्रपति को उनके संवैधानिक कार्यों के निर्वहन में सहायता एवं परामर्श प्रदान करती है।
- भूमिका: प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के मध्य प्रमुख सेतु के रूप में कार्य करते हैं।
- वे मंत्रिमंडल के निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को देते हैं तथा नियुक्तियों, संसद के अधिवेशन बुलाने एवं लोकसभा के विघटन जैसे विषयों पर राष्ट्रपति को परामर्श प्रदान करते हैं।
- प्रमुख निकायों के अध्यक्ष: प्रधानमंत्री अनेक महत्वपूर्ण संस्थानों एवं परिषदों की अध्यक्षता करते हैं, जिनमें शामिल हैं—
- नीति आयोग
- राष्ट्रीय एकता परिषद
- अंतर-राज्यीय परिषद
स्रोत: TH
आयुष्मान भारत योजना
पाठ्यक्रम: GS2 / स्वास्थ्य
संदर्भ
- पश्चिम बंगाल ने औपचारिक रूप से आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) में शामिल होकर इस प्रमुख स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाला भारत का अंतिम राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है।
आयुष्मान भारत योजना
- भारत सरकार द्वारा वर्ष 2018 में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने के उद्देश्य से आयुष्मान भारत योजना प्रारंभ की गई थी।
- इसके दो प्रमुख घटक हैं—
- आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY)
- आयुष्मान आरोग्य मंदिर
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY)
- यह विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक वित्तपोषित स्वास्थ्य आश्वासन योजनाओं में से एक है।
- इसके अंतर्गत प्रत्येक पात्र परिवार को द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर की अस्पताल सेवाओं हेतु प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है।
- कवरेज: अस्पताल में भर्ती होने से पूर्व के 3 दिनों का व्यय।
- अस्पताल से छुट्टी के बाद 15 दिनों तक के व्यय।
- इसमें निदान एवं दवाओं का व्यय भी सम्मिलित है।
- नकदरहित उपचार : लाभार्थी देश के किसी भी सूचीबद्ध सरकारी अथवा निजी अस्पताल में नकदरहित उपचार प्राप्त कर सकते हैं।
- कोई प्रतिबंध नहीं
- परिवार के आकार पर कोई सीमा नहीं।
- आयु पर कोई सीमा नहीं।
- लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं।
- पात्रता: ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लिए पात्र परिवारों का चयन सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना 2011 (SECC 2011) में निर्धारित वंचना एवं व्यवसाय संबंधी मानदंडों के आधार पर किया जाता है।
- इसमें वे परिवार भी शामिल हैं जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (RSBY) के अंतर्गत कवर थे, किंतु SECC 2011 के डेटाबेस में उपलब्ध नहीं थे।
- वित्तपोषण: योजना का व्यय केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच 60:40 के अनुपात में साझा किया जाता है।
- हालाँकि निम्नलिखित राज्यों/क्षेत्रों के लिए यह अनुपात 90:10 है—
- पूर्वोत्तर राज्य
- हिमालयी राज्य (जैसे उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश)
- केंद्रशासित प्रदेश
- हालाँकि निम्नलिखित राज्यों/क्षेत्रों के लिए यह अनुपात 90:10 है—
आयुष्मान आरोग्य मंदिर
- इस घटक के अंतर्गत 1.50 लाख स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (AB-HWCs) की स्थापना की गई, जिन्हें अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर नाम दिया गया है।
- इनका निर्माण निम्न संस्थानों के उन्नयन द्वारा किया गया है—
- उप-स्वास्थ्य केंद्र (SHCs)
- ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs)
- शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs)
- उद्देश्य: स्वास्थ्य सेवाओं को समुदाय के निकट उपलब्ध कराना।
- व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल ( CPHC) प्रदान करना।
- रोगियों को सामुदायिक स्तर पर अनुवर्ती देखभाल उपलब्ध कराना।
- उपलब्ध सेवाएँ: इन केंद्रों के माध्यम से समुदाय के निकट निम्न सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं—
- आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ
- आवश्यक दवाएँ
- निदान संबंधी सुविधाएँ
स्रोत: IE
VB-G RAM G हेतु ₹95,692 करोड़ का प्रावधान
पाठ्यक्रम: GS2 / शासन
संदर्भ
- सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G) में सुचारु संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों हेतु ₹95,692 करोड़ के अंतरिम बजटीय आवंटन का प्रस्ताव किया है।
VB-G RAM G के बारे में
- यह योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (MGNREGA) का स्थान लेगी।
- यह परिवर्तन “मांग-आधारित ढाँचे “ से “आपूर्ति-आधारित योजना” की ओर एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है।
- उन्नत आजीविका गारंटी : यह योजना प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ग्रामीण परिवारों के लिए वैधानिक मजदूरी रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर देगी।
- यह लाभ उन वयस्क व्यक्तियों को प्राप्त होगा जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आएँगे।
- केंद्र प्रायोजित योजना : इस योजना का कार्यान्वयन एक केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में किया जाएगा।
- वित्तीय साझेदारी का स्वरूप निम्नानुसार होगा—
- पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए: 90:10
- अन्य सभी राज्यों के लिए: 60:40
- वित्तीय साझेदारी का स्वरूप निम्नानुसार होगा—
- राज्यों को मानक आधारित आवंटन : राज्य सरकारें जिलों एवं ग्राम पंचायतों के बीच निधियों का पारदर्शी तथा आवश्यकता-आधारित वितरण सुनिश्चित करेंगी।
- इसके लिए पंचायतों की श्रेणी एवं स्थानीय विकास आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाएगा।
- बेरोजगारी भत्ता: यदि पात्र आवेदकों को निर्धारित अवधि के अंदर कार्य उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो संबंधित राज्य सरकारें बेरोजगारी भत्ता प्रदान करने के लिए बाध्य होंगी।
- विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) आधारित योजना निर्माण: योजना निर्माण विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (VGPPs) के माध्यम से किया जाएगा।
- इन योजनाओं को ग्राम पंचायतों द्वारा तैयार किया जाएगा तथा राष्ट्रीय स्थानिक योजना प्रणालियों के साथ एकीकृत किया जाएगा।
- संस्थागत पर्यवेक्षण : योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, समीक्षा एवं निगरानी हेतु निम्न परिषदों का गठन किया जाएगा—
- केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद
- राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषदें
- ये परिषदें अपने-अपने क्षेत्राधिकार में अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी करेंगी।
स्रोत: AIR
भूमि बंदरगाह प्रबंधन प्रणाली (LPMS): ‘विनिमय’
पाठ्यक्रम: GS3 / अवसंरचना
समाचार में
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्मार्ट बॉर्डर्स पहल के अंतर्गत नई दिल्ली में भूमि बंदरगाह प्रबंधन प्रणाली (LPMS), जिसे ‘विनिमय’ नाम दिया गया है, का उद्घाटन किया।
परिचय
- यह एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच है, जिसे भारत की स्थलीय सीमाओं पर माल-प्रसंस्करण एवं यात्री आवागमन को डिजिटाइज़ एवं एकीकृत करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
- यह वास्तविक समय में डेटा साझाकरण तथा समन्वित परिचालन को सक्षम बनाता है।
- भूमि बंदरगाह : भूमि बंदरगाह वह अधिसूचित सड़क अथवा रेल सीमा बिंदु होता है, जिसका उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाता है—
- सीमा शुल्क
- आव्रजन
- व्यापार-संबंधी गतिविधियाँ
- विकास एवं प्रशासन: LPMS का विकास भारतीय भूमि बंदरगाह प्राधिकरण (LPAI) द्वारा किया गया है।
- LPAI गृह मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है।
- इसकी स्थापना भारतीय भूमि बंदरगाह प्राधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत की गई थी।
- इसका उद्देश्य एकीकृत जाँच चौकियों (ICPs) का विकास एवं प्रबंधन करना है।
- LPMS की प्रमुख विशेषताएँ:
- एकल इलेक्ट्रॉनिक खिड़की
- केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) तथा सीमा सुरक्षा बल (BSF) जैसी एजेंसियों के साथ एकीकरण
- लॉजिस्टिक्स एवं विनियामक डेटा का सुरक्षित वास्तविक समय आदान-प्रदान
- स्वचालित गेट प्रबंधन हेतु स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली (ANPR)
स्रोत: TH
शिव शक्ति बिंदु पर चंद्रयान-3 द्वारा चंद्रमा के आंतरिक रहस्यों का प्रकटीकरण
पाठ्यक्रम: GS3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर द्वारा प्राप्त आँकड़ों से पता चला है कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट स्थित शिव शक्ति बिंदु की मृदा रासायनिक रूप से अंटार्कटिका में खोजे गए चंद्र उल्कापिंड (ALHA 81005) से अत्यधिक समानता रखती है।
- ये निष्कर्ष रोवर पर स्थापित अल्फा कण एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (APXS) द्वारा किए गए अवलोकनों पर आधारित हैं।
रासायनिक समानता का महत्व
- पारंपरिक चंद्र उच्चभूमि शैलों से भिन्नता: इस मृदा की संरचना पारंपरिक चंद्र उच्चभूमि की उन शैलों से भिन्न है, जिनमें मुख्यतः फेरोएन एनोर्थोसाइट पाया जाता है।
- मृदा की संरचना: इस मृदा में निम्नलिखित पदार्थों का मिश्रण पाया गया है—
- फेरोएन एनोर्थोसाइट सामग्री
- मैग्नीशियम-समृद्ध (Mg-Suite) शैलें
- यह संकेत देता है कि चंद्रमा की गहरी परतों की सामग्री सतही रेगोलिथ के साथ मिश्रित हो गई है।
चंद्र मैग्मा महासागर सिद्धांत का सत्यापन
- इन निष्कर्षों ने चंद्र मैग्मा महासागर सिद्धांत के समर्थन में नए प्रमाण प्रस्तुत किए हैं।
- इस सिद्धांत के अनुसार—
- प्रारंभिक चंद्रमा पिघली हुई शैलों के एक वैश्विक महासागर से आच्छादित था।
- शीतलन की प्रक्रिया के दौरान हल्के खनिज ऊपर की ओर तैरकर चंद्र पर्पटी (Crust) का निर्माण करने लगे।
- वहीं, अधिक घनत्व वाले लौह एवं मैग्नीशियम युक्त खनिज गहराई में नीचे धँस गए।
- प्रमुख निष्कर्ष: सतह पर गहराई में स्थित लौह एवं मैग्नीशियम युक्त पदार्थों की उपस्थिति इस सिद्धांत का समर्थन करती है तथा चंद्रमा के विकास के इस मॉडल को और अधिक पुष्ट करती है।
स्रोत: IE
वैज्ञानिकों द्वारा फेफड़ों के कैंसर की शीघ्र पहचान करने वाले रक्त परीक्षण का विकास
पाठ्यक्रम: GS3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- एक नए अध्ययन में रक्त प्लाज़्मा में पाए जाने वाले 14 प्रोटीनों के एक समूह, जिसे “14-प्रोटीन सिग्नेचर” कहा जाता है, को फेफड़ों के कैंसर के वर्षों पूर्व निदान की संभावना का एक सशक्त संकेतक बताया गया है।
परिचय
- रक्त प्लाज़्मा रक्त का तरल भाग होता है, जो मानव शरीर में प्रवाहित होता है।
- इसमें हजारों प्रकार के प्रोटीन उपस्थित होते हैं, जो शरीर के विभिन्न अंगों एवं ऊतकों से उत्पन्न होते हैं।
- इन सभी प्रोटीनों के समग्र समूह को प्लाज़्मा प्रोटिओम कहा जाता है।
- प्रोटिओम के बड़े पैमाने पर व्यवस्थित अध्ययन को प्रोटिओमिक्स कहा जाता है।
- प्लाज़्मा प्रोटिओमिक्स का महत्व: प्लाज़्मा प्रोटिओमिक्स प्रोफ़ाइल स्वास्थ्य एवं रोग की स्थिति का वास्तविक समय चित्र प्रस्तुत करती है।
- यदि वैज्ञानिक किसी रोग के प्रारंभ होने से पूर्व एवं पश्चात की प्रोटिओमिक प्रोफ़ाइलों की तुलना कर सकें, तो वे शरीर में होने वाले महत्वपूर्ण जैविक परिवर्तनों के संकेत प्राप्त कर सकते हैं।
- अध्ययन का महत्व: वैज्ञानिक वर्तमान में ऐसी नई पद्धति विकसित करने की दिशा में अग्रसर हैं, जिसके माध्यम से उन व्यक्तियों की पहचान की जा सकेगी जिनमें भविष्य में फेफड़ों का कैंसर विकसित होने की संभावना अधिक है।
- इससे ऐसे व्यक्तियों को पूर्व-निवारक स्वास्थ्य संरक्षण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
- फेफड़ों के कैंसर के प्रमुख कारण: धूम्रपान इसका प्रमुख कारण है।
- इसके अतिरिक्त वायु प्रदूषण तथा व्यावसायिक जोखिम भी फेफड़ों के कैंसर के लिए उत्तरदायी हैं।
- वैश्विक स्थिति: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नवीनतम अनुमानों के अनुसार—
- प्रतिवर्ष लगभग 25 लाख (2.5 मिलियन) नए मामले सामने आते हैं।
- प्रतिवर्ष लगभग 18 लाख (1.8 मिलियन) लोगों की मृत्यु फेफड़ों के कैंसर के कारण होती है।
स्रोत: TH
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS)
पाठ्यक्रम: GS3 / पर्यावरण
समाचार में
- रक्षा मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर (पूर्व छावनी क्षेत्र) में 250 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना के साथ बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की है।
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) के बारे में
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) ऐसी प्रौद्योगिकी है, जो विद्युत ऊर्जा को पुनर्भरणीय बैटरियों में संग्रहित कर भविष्य में उपयोग हेतु सुरक्षित रखती है।
- प्रमुख उद्देश्य: सौर एवं पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से उत्पन्न अतिरिक्त विद्युत को संग्रहित करना।
- विद्युत की मांग एवं आपूर्ति के बीच संतुलन स्थापित करना।
- ग्रिड की स्थिरता में सुधार करना।
- विद्युत आपूर्ति में उतार-चढ़ाव को कम करना।
- उच्च मांग के समय ऊर्जा प्रबंधन को सक्षम बनाना।
- दूरस्थ क्षेत्रों में ऊर्जा पहुँच को बढ़ावा देना।
- ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना।
प्रमुख ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियाँ
- विद्युत-रासायनिक (बैटरी आधारित) प्रौद्योगिकियाँ:
- लिथियम-आयन बैटरी : विश्व स्तर पर सर्वाधिक उपयोग की जाने वाली प्रौद्योगिकी।
- ऊर्जा घनत्व: 150 से 300 Wh/kg।
- राउंड-ट्रिप दक्षता: 90 से 95 प्रतिशत।
- उपयोग:
- विद्युत वाहन (EVs)
- ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण
- चुनौती:
- आयातित लिथियम एवं कोबाल्ट पर निर्भरता।
- लिथियम आयरन फॉस्फेट : अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित।
- कम लागत वाली।
- लंबा जीवन चक्र।
- उपयोगिता-स्तरीय BESS तथा विद्युत बसों के लिए तेजी से लोकप्रिय विकल्प।
- सोडियम-आयन बैटरी : घरेलू स्तर पर उपलब्ध प्रचुर मात्रा में सोडियम का उपयोग।
- कम लागत।
- भू-राजनीतिक निर्भरता में कमी।
- भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण, क्योंकि देश में लिथियम भंडार सीमित हैं।
- सॉलिड-स्टेट बैटरी : आगामी पीढ़ी की बैटरी प्रौद्योगिकी।
- ठोस इलेक्ट्रोलाइट का उपयोग।
- अधिक ऊर्जा घनत्व।
- बेहतर सुरक्षा।
- वर्तमान में उच्च लागत एवं सीमित विस्तार क्षमता इसकी प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
- फ्लो बैटरियाँ :
- उदाहरण: वैनाडियम रेडॉक्स बैटरी
- जिंक-ब्रोमीन बैटरी
- विशेषताएँ: दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण।
- न्यूनतम क्षमता ह्रास।
- नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोगिता-स्तरीय एकीकरण के लिए उपयुक्त।
- उदाहरण: वैनाडियम रेडॉक्स बैटरी
- लिथियम-आयन बैटरी : विश्व स्तर पर सर्वाधिक उपयोग की जाने वाली प्रौद्योगिकी।
- यांत्रिक एवं तापीय भंडारण प्रौद्योगिकियाँ:
- पम्प्ड स्टोरेज जलविद्युत (PSH): विश्व की सबसे परिपक्व बड़े पैमाने की ऊर्जा भंडारण तकनीक।
- ऊँचाई के अंतर का उपयोग करके ऊर्जा का भंडारण एवं पुनः उत्पादन किया जाता है।
- तापीय भंडारण : पिघला हुआ लवण
- बर्फ आधारित तापीय भंडारण
- इनका उपयोग मुख्यतः— सघन सौर ऊर्जा एवं औद्योगिक अनुप्रयोगों में किया जाता है।
- पम्प्ड स्टोरेज जलविद्युत (PSH): विश्व की सबसे परिपक्व बड़े पैमाने की ऊर्जा भंडारण तकनीक।
स्रोत: TH
Previous article
भारत में डिजिटल समावेशन के विकसित होते परिदृश्य पर प्रतिवेदन
Next article
संक्षिप्त समाचार 10-06-2026