पाठ्यक्रम: GS3/आधारभूत अवसंरचना
संदर्भ
- विगत एक दशक में भारत ने परिवहन, आवास, जल, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स तथा डिजिटल नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में अवसंरचना निर्माण को तीव्र गति प्रदान की है।
भारत में अवसंरचना विकास
- परिवहन एवं संपर्कता :

- प्रमुख रेलवे पुल:
- चिनाब पुल (2025)
- अंजी खड्ड पुल (2025)
- पंबन पुल (2025)
- बैराबी–सैरांग रेल परियोजना (2025)
- सड़क एवं राजमार्ग:
- राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार 61 प्रतिशत बढ़कर 1.46 लाख किलोमीटर तक पहुँच गया है।
- 3,644 किलोमीटर एक्सप्रेसवे परिचालन में हैं।
- नागरिक उड्डयन:
- परिचालित हवाई अड्डों की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 2026 में 165 हो गई है।
- उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना के अंतर्गत 95 हवाई अड्डों को जोड़ा गया तथा 1.64 करोड़ यात्रियों को लाभ प्राप्त हुआ।
- गगन (GAGAN):
- वर्ष 2015 में गगन (GPS एडेड GEO ऑगमेंटेड नेविगेशन) प्रणाली का परिचालन प्रारंभ किया गया।
- यह विश्व की प्रथम भूमध्यरेखीय उपग्रह-आधारित संवर्द्धन प्रणाली है, जिसने नौवहन की सटीकता एवं उड़ान सुरक्षा में वृद्धि की है।
- समुद्री एवं लॉजिस्टिक्स अवसंरचना : बंदरगाहों की क्षमता लगभग दोगुनी होकर 1,726 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) हो गई है।
- राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या 5 से बढ़कर 111 हो गई है।
- विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक में भारत की रैंकिंग 2014 में 54वें स्थान से सुधरकर 2023 में 38वें स्थान पर पहुँच गई।
- भारत ने अपने राष्ट्रीय जलमार्गों के नेटवर्क का विस्तार 2014 के 5 जलमार्गों से बढ़ाकर 2026 में 111 जलमार्गों तक कर लिया है।
- जल अवसंरचना : जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में नल जल कवरेज 2019 के 17 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में लगभग 82 प्रतिशत हो गया है।
- सिंचाई, नदी पुनर्जीवन तथा केन–बेतवा जैसी नदी-लिंक परियोजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
- ऊर्जा सुरक्षा : स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 248 गीगावाट (GW) से बढ़कर 533 गीगावाट हो गई है।
- विद्युत कमी 4.2 प्रतिशत से घटकर 0.03 प्रतिशत रह गई है।
- भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्वच्छ ऊर्जा उत्पादक देश बन गया है।
- सौभाग्य योजना के अंतर्गत लगभग 2.86 करोड़ परिवारों का विद्युतीकरण किया गया है।
- स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन : एलपीजी (LPG) कवरेज 55.9 प्रतिशत से बढ़कर 107.2 प्रतिशत हो गया है।
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के माध्यम से गरीब परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है तथा देशभर में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या 33 करोड़ से अधिक हो गई है।
- डिजिटल अवसंरचना : इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या 25 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ से अधिक हो गई है।
- ब्रॉडबैंड कनेक्शन लगभग 100 करोड़ तक पहुँच गए हैं।
- वर्ष 2026 तक 5G सेवाएँ देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में उपलब्ध हैं तथा लगभग 85 प्रतिशत जनसंख्या को इनकी पहुँच प्राप्त है।
भारत में अवसंरचना विकास की चुनौतियाँ
- वित्तीय बाधाएँ : बड़े अवसंरचना परियोजनाओं के लिए अत्यधिक निवेश की आवश्यकता होती है, जिससे सार्वजनिक वित्त पर दबाव बढ़ता है तथा निजी पूँजी पर निर्भरता में वृद्धि होती है।
- भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याएँ: विवादों, पुनर्वास संबंधी चिंताओं तथा लंबी स्वीकृति प्रक्रियाओं के कारण परियोजनाओं में विलंब होता है, जिससे उनकी लागत और समयसीमा दोनों बढ़ जाती हैं।
- पर्यावरणीय एवं सामाजिक चिंताएँ : अवसंरचना विस्तार से पारिस्थितिकीय क्षरण, वनों की कटाई, जैव-विविधता में ह्रास तथा समुदायों के विस्थापन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
- कार्यान्वयन में विलंब : नौकरशाही बाधाएँ, न्यायिक विवाद तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की समस्याएँ परियोजनाओं के निष्पादन को धीमा कर देती हैं।
- क्षेत्रीय असंतुलन : अवसंरचना विकास अभी भी असमान बना हुआ है, जहाँ पूर्वोत्तर, पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्र अपेक्षाकृत पिछड़े हुए हैं।
- शहरी अवसंरचना पर दबाव : तीव्रता से बढ़ते शहरीकरण के कारण परिवहन, आवास, जलापूर्ति तथा अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों का विकास अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है।
- संचालन एवं अनुरक्षण संबंधी अंतराल : पर्याप्त रखरखाव के अभाव में अवसंरचना परिसंपत्तियों की दक्षता एवं उपयोगी आयु प्रभावित होती है।
- जलवायु एवं आपदा संबंधी जोखिम : चरम मौसमीय घटनाएँ, बाढ़, चक्रवात तथा हीटवेव अवसंरचना की प्रत्यास्थता के लिए बढ़ते जोखिम उत्पन्न कर रही हैं।
आगे की राह
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को और सुदृढ़ किया जाए।
- भूमि अधिग्रहण एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया को पारदर्शी तंत्र के माध्यम से तीव्र किया जाए।
- जलवायु-अनुकूल एवं सतत अवसंरचना को प्रोत्साहित किया जाए।
- अनुरक्षण एवं परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ बनाया जाए।
- अविकसित एवं वंचित क्षेत्रों में अंतिम छोर तक संपर्कता में सुधार किया जाए।
- परियोजनाओं के कुशल निष्पादन हेतु संस्थागत एवं तकनीकी क्षमताओं का विकास किया जाए।
निष्कर्ष
- भारत का अवसंरचनात्मक रूपांतरण आर्थिक विकास, संपर्कता तथा सामाजिक समावेशन के एक प्रमुख प्रेरक के रूप में उभरा है।
- यद्यपि परिवहन, ऊर्जा, आवास, जल तथा डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, तथापि विद्यमान चुनौतियों का समाधान करना अत्यंत आवश्यक है।
- गुणवत्ता, प्रत्यास्थता एवं समावेशिता पर आधारित संतुलित दृष्टिकोण ही वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होगा।
Source: PIB
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