सूक्ष्म-प्लास्टिक(Microplastics) के पारिस्थितिकीय जोखिम

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • हाल ही के एक अध्ययन में पाया गया कि चेन्नई के समुद्र तटों पर कई वैश्विक तटों की तुलना में सूक्ष्म-प्लास्टिक की मात्रा कम है, फिर भी समुद्री जीवन के लिए जोखिम गंभीर बना हुआ है।

सूक्ष्म-प्लास्टिक क्या हैं?

  • परिभाषा: सूक्ष्म-प्लास्टिक वे छोटे प्लास्टिक कण या रेशे होते हैं जिनका आकार 5 मिलीमीटर से कम होता है और इनमें से कई मानव आँख से दिखाई नहीं देते।
  • प्रदूषण का पैमाना: वर्ष 2020 में लगभग 2.7 मिलियन टन सूक्ष्म-प्लास्टिक पर्यावरण में प्रवेश कर गए थे और अनुमान है कि 2040 तक यह आँकड़ा दोगुना हो जाएगा।
  • रूप: मोती (Beads), टुकड़े (Fragments), पेलेट्स, फिल्म, फोम और रेशे।
  • प्रकार:
    • प्राथमिक: जानबूझकर छोटे आकार में निर्मित (जैसे कॉस्मेटिक्स में माइक्रोबीड्स)।
    • द्वितीयक: बड़े प्लास्टिक उत्पादों (जैसे बोतलें, थैले) के टूटने से उत्पन्न।

कम मात्रा का अर्थ कम जोखिम क्यों नहीं है?

  • विषाक्त रेशे: नायलॉन माइक्रोफाइबर अत्यधिक विषैले और स्थायी होते हैं, जो समुद्री सूक्ष्म-प्लास्टिक का लगभग 35% हिस्सा बनाते हैं।
  • प्रदूषक वाहक: ये आसपास के जल की तुलना में 10⁵–10⁶ गुना अधिक विषैले पदार्थ (जैसे भारी धातु, POPs) अवशोषित कर सकते हैं।
  • खाद्य श्रृंखला में संचरण: सूक्ष्म-प्लास्टिक प्लवक से मछली और अंततः मानव तक पहुँचते हैं, जिससे जैव-आवर्धन (Biomagnification) और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं।

स्रोत

  • मछली पकड़ने की गतिविधियाँ: अनुमानतः समुद्री अपशिष्ट का कम से कम 10% मछली पकड़ने के अपशिष्ट से बनता है, जिससे प्रत्येक वर्ष 5–10 लाख टन मछली पकड़ने के उपकरण समुद्र में पहुँचते हैं।
  • कृत्रिम वस्त्र: सिंथेटिक कपड़े समुद्र में सूक्ष्म-प्लास्टिक भार का 35% योगदान करते हैं।
  • पर्यटन और समुद्र तट उपयोग: तटीय पर्यटन से एकल-उपयोग प्लास्टिक अपशिष्ट की बड़ी मात्रा उत्पन्न होती है।
  • शहरी सीवेज और अपवाह: अपशिष्ट जल एक प्रमुख मार्ग है; उपचार संयंत्र 90% तक हटाते हैं, लेकिन शेष प्रतिदिन अरबों सूक्ष्म-प्लास्टिक कण जल निकायों में छोड़ते हैं।

प्रभाव/चुनौतियाँ

  • मानव स्वास्थ्य चिंताएँ: सूक्ष्म-प्लास्टिक मानव ऊतक और रक्त में पाए गए हैं, जिनके प्रभाव अभी अत्यंत सीमा तक अज्ञात हैं।
  • समुद्री जैव विविधता पर खतरा: सूक्ष्म-प्लास्टिक 1300+ समुद्री प्रजातियों में दर्ज किए गए हैं, जिससे जैव विविधता ह्रास और पारिस्थितिक असंतुलन होता है।
  • अंतर्ग्रहण और शारीरिक क्षति: मछली, प्रवाल और प्लवक जैसे जीव इन्हें निगलते हैं, जिससे आंतरिक चोटें एवं अवरोध उत्पन्न होते हैं। अनुमान है कि 90% से अधिक समुद्री पक्षियों ने किसी न किसी समय प्लास्टिक निगला है।
  • महासागर कार्बन चक्र में व्यवधान: सूक्ष्म-प्लास्टिक महासागर के कार्बन चक्र को बाधित कर सकते हैं। यदि ज़ोप्लवक इन्हें निगलते हैं, तो उनके मल-पिंड धीरे-धीरे नीचे जाते हैं और टूटने या अन्य जीवों द्वारा खाए जाने की संभावना अधिक होती है, जिससे कार्बन का समुद्र तल तक पहुँचना और स्थायी रूप से अवशोषित होना कम हो जाता है।

सूक्ष्म-प्लास्टिक से निपटने की पहल

  • भारत:
    • एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध (2022): स्रोत पर प्लास्टिक अपशिष्ट को कम करने हेतु पहचानी गई वस्तुओं पर प्रतिबंध।
    • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR): उत्पादकों को प्लास्टिक अपशिष्ट के संग्रह, पुनर्चक्रण और पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित निपटान की जिम्मेदारी दी गई।
    • NCCR द्वारा निगरानी: राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र भारत के तटों पर सूक्ष्म-प्लास्टिक की निगरानी करता है और नीति निर्माण हेतु आँकड़े प्रदान करता है।
  • वैश्विक:
    • MARPOL कन्वेंशन: अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन का ढाँचा, जो जहाज़ों से होने वाले समुद्री प्रदूषण, जिसमें प्लास्टिक कचरा भी शामिल है, को नियंत्रित करता है।
    • वैश्विक प्लास्टिक संधि: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अंतर्गत वार्ता, जिसका उद्देश्य 2040 तक कानूनी रूप से बाध्यकारी वैश्विक समझौते के माध्यम से प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना है।

निष्कर्ष

  • सूक्ष्म-प्लास्टिक प्रदूषण एक बढ़ती हुई पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी चिंता है, जो जल, समुद्री जीवन एवं वैश्विक खाद्य श्रृंखलाओं को प्रभावित कर रही है।
  • इससे निपटने के लिए अनुसंधान को सुदृढ़ करना, जैव-अपघटनीय विकल्पों को बढ़ावा देना, अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करना और जन-जागरूकता को बढ़ाना आवश्यक है।

स्रोत: TH

 

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