पाठ्यक्रम: GS3/कृषि
संदर्भ
- भारत का कृषि क्षेत्र ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने, आर्थिक सुदृढ़ता सुनिश्चित करने और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा की रक्षा करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
भारत में कृषि क्षेत्र
- कृषि एवं संबद्ध गतिविधियाँ देश के सकल मूल्य वर्धन (Gross Value Added) में लगभग पाँचवाँ हिस्सा योगदान करती हैं, लगभग 46.1% कार्यबल को रोजगार देती हैं और लगभग 55% जनसंख्या का समर्थन करती हैं।
- विगत पाँच वर्षों में इस क्षेत्र ने स्थिर मूल्यों पर लगभग 4.4% की औसत वार्षिक वृद्धि दर प्राप्त की है।
- वर्ष 2024-25 में भारत ने 357.73 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) खाद्यान्न उत्पादन दर्ज किया, जो विगत वर्ष की तुलना में 25.43 MMT अधिक है।
- यह वृद्धि मुख्यतः धान, गेहूँ, मक्का और मोटे अनाज के उच्च उत्पादन से प्रेरित रही।
- कुल बागवानी उत्पादन 2024-25 में 362.08 मिलियन टन (MT) तक पहुँच गया, जो उच्च-मूल्य वाली फसलों की ओर संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है।
- कृषि निर्यात आय FY20 में 34.5 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर FY25 में 51.1 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई, जो 8.2% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) को दर्शाती है।
- प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात का हिस्सा FY18 में 14.9% से बढ़कर FY25 में 20.4% तक पहुँच गया।

- धान और गेहूँ: धान उत्पादन मुख्यतः उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में केंद्रित है। गेहूँ उत्पादन में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब अग्रणी राज्य हैं।
- दलहन और बाजरा: दलहन उत्पादन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान प्रमुख राज्य हैं। भारत विश्व में बाजरा उत्पादन में प्रथम स्थान पर है, जिसमें राजस्थान, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक का योगदान प्रमुख है।
- फल और सब्जियाँ: भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा फल और सब्ज़ी उत्पादक है।
- फल उत्पादन आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु में केंद्रित है।
- सब्ज़ी उत्पादन में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात अग्रणी हैं।
सुदृढ़ उत्पादन प्रणालियों को समर्थन देने वाली सार्वजनिक नीतियाँ
- बजट आवंटन:

- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (NFSNM): धान, गेहूँ, दलहन और पोषक-अनाज (Nutri-cereals) के उत्पादन में वृद्धि हेतु केंद्र प्रायोजित योजना।
- दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन (2025–31): घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि कर आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य।
- राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (NMEO): तेल पाम (NMEO-OP) और तिलहन (NMEO-Oilseeds) पहल सहित, 2030-31 तक खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने का उद्देश्य।
- बीज एवं रोपण सामग्री उप-मिशन (SMSP): प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण बीजों की आपूर्ति बढ़ाने, बीज प्रतिस्थापन दर सुधारने और किसान द्वारा बचाए गए बीजों की गुणवत्ता उन्नत करने का लक्ष्य।
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना: प्रत्येक भूमि-धारक किसान को 12 मानकों (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सल्फर, जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज, बोरॉन, pH, विद्युत चालकता और कार्बनिक कार्बन) पर आधारित मृदा स्थिति का विवरण प्रदान किया जाता है।
- यह प्रत्येक दो वर्ष में जारी होता है और किसानों को उपयुक्त उर्वरक एवं उपचार की जानकारी देता है।
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY): ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा देकर खेतों में जल दक्षता सुधारने का उद्देश्य।
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना: किसानों को एकल खिड़की प्रणाली के अंतर्गत लचीली और सरल प्रक्रियाओं के माध्यम से पर्याप्त एवं समय पर ऋण सहायता प्रदान करना।
निष्कर्ष
- भारत का कृषि रूपांतरण एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें सुदृढ़ उत्पादन वृद्धि, वैश्विक बाज़ार में बढ़ती उपस्थिति और खेत से बाज़ार तक मूल्य श्रृंखला में लक्षित नीति हस्तक्षेप शामिल हैं।
- जैसे-जैसे सुदृढ़ उत्पादन प्रणालियाँ विकसित होती जा रही हैं, कृषि की विस्तारित भूमिका ग्रामीण आजीविका को और अधिक समर्थन प्रदान करती है तथा दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए सुदृढ़ आधार तैयार करती है।
स्रोत: PIB