चार शहरों में सर्वेक्षित स्थलों के 84% पर एकल-उपयोग प्लास्टिक नियम लागू

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • भारत के चार शहरों में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार 560 स्थलों में से लगभग 84% स्थानों पर अब भी एकल-उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं का प्रयोग जारी है, जिन्हें देशभर में तीन वर्ष पूर्व प्रतिबंधित किया गया था।

प्रमुख निष्कर्ष

  • 2025 में भुवनेश्वर, दिल्ली, गुवाहाटी और मुंबई में विशेष स्थलों पर क्षेत्रीय अध्ययन किया गया।
    • भुवनेश्वर में प्रतिबंधित एकल-उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं की उपलब्धता सर्वाधिक (89%) रही, इसके बाद दिल्ली (86%), मुंबई (85%) और गुवाहाटी (76%) का स्थान रहा।
  • क्षेत्रीय भिन्नताएँ: पतले प्लास्टिक थैले, डिस्पोजेबल प्लास्टिक कटलरी, कप, प्लेट और स्ट्रॉ अनौपचारिक बाज़ारों एवं छोटे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में व्यापक रूप से पाए गए।
  • संगठित मॉल और बड़े खुदरा प्रतिष्ठानों ने प्रतिबंध के अनुपालन में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि छोटे विक्रेताओं द्वारा संचालित अनौपचारिक बाज़ारों में उल्लंघन अधिक देखा गया।
  • अध्ययन ने प्रवर्तन में बड़ी खामियों को उजागर किया और कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने हेतु राष्ट्रव्यापी त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

एकल-उपयोग प्लास्टिक

  • एकल-उपयोग प्लास्टिक उन वस्तुओं को कहा जाता है जिन्हें केवल एक बार उपयोग कर निष्कासित कर दिया जाता है।
  • यह हल्का और सस्ता होता है, प्रायः गैर-बायोडिग्रेडेबल होता है तथा पुनर्चक्रण में कठिनाई होती है।
  • इसमें प्लास्टिक थैले, स्ट्रॉ, डिस्पोजेबल कटलरी (चम्मच, कांटे), प्लास्टिक बोतलें और खाद्य पैकेजिंग (रैपर, कंटेनर) शामिल हैं।

एकल-उपयोग प्लास्टिक का प्रयोग अब भी क्यों जारी है?

  • इसका मुख्य कारण उच्च ग्राहक मांग और विकल्पों की अधिक लागत है।
  • कुछ ग्राहक अपने थैले लाते हैं, परंतु अधिकांश ग्राहक अब भी विक्रेताओं से मुफ्त थैले की अपेक्षा करते हैं।
  • अधिकांश स्थलों पर प्रतिबंधित वस्तुओं की उपस्थिति से स्पष्ट होता है कि प्रवर्तन असंगत है।
  • प्लास्टिक से विकल्पों (जैसे कागज़ी कप और प्लेट) की ओर संक्रमण में अनिच्छा।
  • ग्राहक डिस्पोजेबल प्लेट और कटलरी को पुन: प्रयोज्य वस्तुओं की तुलना में अधिक स्वच्छ मानते हैं।

अनुशंसाएँ

  • सरकार, एकल-उपयोग प्लास्टिक निर्माता, खुदरा विक्रेता और उपभोक्ता—सभी हितधारकों द्वारा सशक्त राष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता।
  • अधिक सुदृढ़ प्रवर्तन और निगरानी तंत्र, नियमित निरीक्षण, नियामक एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई एवं सुसंगत दंड।
  • सतत विकल्पों की उपलब्धता और वहनीयता में सुधार हेतु स्थानीय उत्पादन को समर्थन, आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करना तथा बाज़ार तक पहुँच सुनिश्चित करना।
  • जन-जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन अभियानों को बढ़ावा देना, साथ ही छोटे विक्रेताओं को विकल्पी सामग्री अपनाने में लक्षित सहायता एवं प्रोत्साहन प्रदान करना।

प्लास्टिक क्या है?

  • “प्लास्टिक” शब्द ग्रीक शब्द प्लास्टिकोस(Plastikos) से लिया गया है, जिसका अर्थ है “आकार देने या ढालने योग्य।”
  • प्लास्टिक उन कृत्रिम या अर्ध-कृत्रिम पदार्थों की विस्तृत श्रेणी को संदर्भित करता है जिनमें मुख्य घटक के रूप में पॉलिमर होते हैं। इसकी परिभाषित विशेषता है प्लास्टिसिटी—किसी ठोस पदार्थ की लागू बलों के प्रति स्थायी विकृति सहने की क्षमता।
  • प्लास्टिक के मूल निर्माण खंड मोनोमर होते हैं, जो छोटे अणु हैं और बहुलकीकरण प्रक्रिया द्वारा जुड़कर लंबी श्रृंखलाएँ (Polymers) बनाते हैं।

भारत के प्रयास (Plastic Waste Management)

  • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR): सरकार ने प्लास्टिक निर्माताओं को उनके उत्पादों से उत्पन्न अपशिष्ट के प्रबंधन और निपटान की जिम्मेदारी दी है।
  • प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2022: 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक थैलों के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध।
  • प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2024:बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक को परिभाषित किया गया है कि वे न केवल विशिष्ट वातावरण में जैविक प्रक्रियाओं द्वारा विघटित हों, बल्कि कोई माइक्रोप्लास्टिक अवशेष भी न छोड़ें।
    • नियमों के अनुसार डिस्पोजेबल प्लास्टिक उत्पादों को तभी बायोडिग्रेडेबल लेबल किया जा सकता है जब वे माइक्रोप्लास्टिक अवशेष न छोड़ें।
  • स्वच्छ भारत अभियान: राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान जिसमें प्लास्टिक अपशिष्ट का संग्रह और निपटान शामिल है।
  • प्लास्टिक पार्क: भारत ने विशेष औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की है जहाँ प्लास्टिक अपशिष्ट का पुनर्चक्रण एवं प्रसंस्करण किया जाता है।
  • न्यायपालिका की भूमिका: भारतीय न्यायपालिका ने संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के अंतर्गत पर्यावरणीय क्षरण से संबंधित मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
  • बीच क्लीन-अप अभियान: सरकार और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों द्वारा समुद्र तटों से प्लास्टिक अपशिष्ट को एकत्रित कर निपटाने हेतु अभियान चलाए गए।
    • भारत MARPOL (समुद्री प्रदूषण की रोकथाम पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय) का हस्ताक्षरकर्ता है।

स्रोत: TH

 

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