भारत में निजी सदस्य विधेयक (Private Member’s Bill) प्रणाली, जो प्रगतिशील कानूनों को प्रस्तुत करने की क्षमता रखती है, वर्षों से धीरे-धीरे कमजोर होती गई है। इसका कारण लगातार व्यवधान, स्थगन और सरकारी कार्यों को प्राथमिकता देना है।
सारे रिकार्ड तोड़ अप्रैल में 2.37 लाख करोड़ का जीएसटी संग्रह
India gets U.S. support in fight against terror