मेमोरी चिप की कमी और बढ़ती इलेक्ट्रॉनिक्स मुद्रास्फीति

पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था 

सन्दर्भ

  • वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर निर्माताओं के कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उन्मुख चिपों की ओर बढ़ते रुझान ने उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में प्रयुक्त मेमोरी चिपों की कमी उत्पन्न कर दी है। इससे स्मार्टफोन, लैपटॉप, रेफ्रिजरेटर, एयरकंडिशनर्स, टेलीविजन तथा अन्य उपकरणों की कीमतों में वृद्धि हुई है, जो भारत में खुदरा मुद्रास्फीति में योगदान दे रही है।

मेमोरी चिप क्या हैं और उनके प्रमुख अनुप्रयोग

  • मेमोरी चिप अर्धचालक उपकरण हैं जो इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में आँकड़ों का भंडारण और प्रसंस्करण करते हैं। वे आधुनिक डिजिटल अवसंरचना का एक महत्त्वपूर्ण घटक हैं।
  • प्रमुख प्रकार:
    • डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (DRAM): स्मार्टफोन, लैपटॉप, कम्प्यूटर तथा उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में अस्थायी आँकड़ा भंडारण के लिए प्रयुक्त होती है।
    • नैण्ड फ्लैश मेमोरी (NAND Flash Memory): पेन ड्राइव, एसएसडी, हार्ड डिस्क तथा मोबाइल भंडारण में प्रयुक्त होती है।
    • हाई बैंडविड्थ मेमोरी (HBM): कृत्रिम बुद्धिमत्ता सर्वरों, डेटा केन्द्रों तथा उच्च-प्रदर्शन कम्प्यूटिंग में प्रयुक्त उन्नत मेमोरी।
  • प्रमुख अनुप्रयोग: मेमोरी चिप स्मार्टफोन और टैबलेट; लैपटॉप और कम्प्यूटर; रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन; एयर कंडीशनर्स और स्मार्ट उपकरण; टेलीविजन और मनोरंजन प्रणालियाँ; विद्युत वाहन बैटरियाँ और नियंत्रण प्रणालियाँ; ईयरफोन, पहनने योग्य उपकरण तथा भंडारण युक्तियों में आवश्यक हैं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्लाउड कम्प्यूटिंग तथा डेटा केन्द्रों के बढ़ते उपयोग ने उन्नत मेमोरी चिपों, विशेष रूप से HBM, की माँग में तीव्र वृद्धि की है।

भारत में मेमोरी चिप और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)

  • भारत का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) वस्तुओं और सेवाओं के खुदरा स्तर पर होने वाली मुद्रास्फीति को मापता है।
  • CPI का महत्त्व:
    • मेमोरी चिप पर निर्भर इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद सामूहिक रूप से CPI बास्केट का लगभग 1% हिस्सा रखते हैं।
    • यद्यपि उनका भार अपेक्षाकृत कम है, फिर भी कीमतों में लगातार वृद्धि मुख्य मुद्रास्फीति पर ऊपर की ओर दबाव बना रही है।

हालिया प्रवृत्तियाँ: हाल के मुद्रास्फीति आँकड़ों के अनुसार—

  • लैपटॉप,कम्प्यूटर और टैबलेट की कीमतों में लगातार कई महीनों से वृद्धि हो रही है।
  • मोबाइल फोन की कीमतों में माह-दर-माह निरंतर बढ़ोतरी देखी गई है।
  • रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, टेलीविजन और एयर कंडीशनर्स की कीमतों में भी क्रमिक वृद्धि दर्ज की गई है।
  • पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क, जो पूर्णतः मेमोरी-भंडारण उत्पाद हैं, उनकी कीमतों में सबसे तीव्र बढ़ोतरी में से कुछ दर्ज की गई है।
  • जैसे-जैसे निर्माता सेमीकंडक्टर्स की बढ़ी हुई लागत का भार उपभोक्ताओं पर डाल रहे हैं, मुद्रास्फीति के प्रभाव खुदरा मूल्य सूचकांकों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।

मेमोरी चिप से संबंधित मुद्दे और चिंताएँ

1.कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के कारण आपूर्ति का विचलन

  • प्रमुख सेमीकंडक्टर कंपनियाँ अधिक लाभ और बढ़ती माँग के कारण कृत्रिम बुद्धिमत्ता-केंद्रित चिपों तथा हाई बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) के उत्पादन को प्राथमिकता दे रही हैं।
  • इससे उपभोक्ता उत्पादों में प्रयुक्त पारंपरिक DRAM और NAND मेमोरी के विनिर्माण की क्षमता कम हो गई है।

2. संरचनात्मक आपूर्ति की कमी

  • अगले 3–5 वर्षों तक माँग, आपूर्ति से अधिक रह सकती है।
  • उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अत्यधिक निवेश तथा लंबी स्थापना अवधि की आवश्यकता होती है।
  • प्रमुख वैश्विक खरीदारों द्वारा दीर्घकालिक अनुबंध किए जाने से उपलब्ध आपूर्ति और अधिक सीमित हो जाती है।

3. उपभोक्ता कीमतों में वृद्धि

  • मेमोरी चिप की बढ़ी हुई लागत के कारण स्मार्टफोन, लैपटॉप, कम्प्यूटर, घरेलू उपकरणों तथा भंडारण युक्तियों की कीमतें बढ़ रही हैं।
  • इससे उत्पादों की वहनीयता कम होती है तथा डिजिटल समावेशन के प्रयास प्रभावित होते हैं।

4. मुख्य मुद्रास्फीति पर प्रभाव

  • इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की मुद्रास्फीति, मुख्य मुद्रास्फीति (खाद्य एवं ईंधन रहित मुद्रास्फीति) को प्रभावित करती है।
  • खाद्य मुद्रास्फीति के विपरीत, इसे पारंपरिक मौद्रिक उपायों से नियंत्रित करना अधिक कठिन होता है।

5. उपभोक्ता माँग में मंदी

  • बढ़ती कीमतें बिक्री की मात्रा को कम कर सकती हैं।
  • इससे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में डिजिटल पहुँच प्रभावित हो सकती है।

बाजार पूर्वानुमान दर्शाते हैं:

  • वैश्विक स्तर पर स्मार्टफोन की खेपों में कमजोरी।
  • कम लागत वाले उपकरणों, विशेषकर प्रारम्भिक श्रेणी के स्मार्टफोन, पर अधिक प्रभाव।

भारत-विशिष्ट चुनौतियाँ

1. आयात पर निर्भरता

भारत सेमीकंडक्टर्स, मेमोरी चिपों तथा इलेक्ट्रॉनिक अवयवों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

इससे घरेलू निर्माता वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों तथा मूल्य आधारित शॉक के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं।

2. दीर्घकालिक खरीद प्रतिबद्धताओं का अभाव

वैश्विक मेमोरी निर्माताओं के अनुसार भारतीय खरीदार प्रायः अल्पकालिक आदेश देते हैं तथा दीर्घकालिक खरीद समझौतों से बचते हैं।

सीमित आपूर्ति की स्थिति में इससे भारत की सौदेबाजी क्षमता कमजोर होती है।

3. सीमित घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम 

भारत के पास सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स संयोजन में मजबूत क्षमता है।

किन्तु उन्नत मेमोरी चिपों के लिए बड़े पैमाने की निर्माण इकाइयों (fabs) का अभी अभाव है।

4. मुद्रास्फीति संबंधी जोखिम

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मुद्रास्फीति प्रबंधन को लेकर सतर्क बना हुआ है।

इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि घरेलू व्यय बढ़ा सकती है, आयातित मुद्रास्फीति को बढ़ावा दे सकती है तथा मौद्रिक नीति के निर्णयों को जटिल बना सकती है।

5. डिजिटल डिवाइड की चिंता

कम लागत वाले स्मार्टफोन और कम्प्यूटर्स  की बढ़ती कीमतें डिजिटल साक्षरता, ऑनलाइन शिक्षा, वित्तीय समावेशन तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विस्तार में बाधा बन सकती हैं।

प्रमुख संबंधित प्रयास और पहल

1. इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM)

भारत में व्यापक सेमीकंडक्टर तथा डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने का लक्ष्य।

2. सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम

अर्धचालक निर्माण इकाइयों, डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों, पैकेजिंग एवं परीक्षण सुविधाओं तथा डिज़ाइन-आधारित प्रोत्साहनों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

3. उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना

बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, मोबाइल फोन उत्पादन तथा अवयव पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को प्रोत्साहित करती है।

4.डिज़ाइन आधारित प्रोत्साहन (DLI) योजना

घरेलू सेमीकंडक्टर डिज़ाइन क्षमता तथा नवाचार को बढ़ावा देती है।

5. स्वीकृत सेमीकंडक्टर परियोजनाएँ

सरकार ने सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने तथा आयात निर्भरता कम करने हेतु अनेक परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है।

6. राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति (NPE), 2019

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में घरेलू मूल्य संवर्धन तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने का लक्ष्य।

आगे की राह : सुदृढ़ीकरण के उपाय

1. आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण

  • कुछ चुनिंदा वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम की जाए।
  • सेमीकंडक्टर उत्पादक देशों के साथ रणनीतिक साझेदारियाँ विकसित की जाएँ।

2. दीर्घकालिक खरीद अनुबंधों को बढ़ावा

  • भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को महत्त्वपूर्ण अवयवों के लिए बहुवर्षीय समझौते करने हेतु प्रोत्साहित किया जाए।
  • इससे आपूर्ति सुरक्षा तथा मूल्य स्थिरता में सुधार होगा।

3. घरेलू विनिर्माण में तेजी

  • सेमीकंडक्टर निर्माण एवं पैकेजिंग परियोजनाओं को शीघ्र क्रियान्वित किया जाए।
  • स्वदेशी अवयव निर्माण को सुदृढ़ किया जाए।

4. रणनीतिक सेमीकंडक्टर भंडार का निर्माण

  • आवश्यक क्षेत्रों के लिए महत्त्वपूर्ण चिपों के भंडारण की संभावना पर विचार किया जाए।

5. अनुसंधान, विकास एवं कौशल संवर्धन

  • सेमीकंडक्टर अनुसंधान, चिप डिज़ाइन तथा उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों में निवेश बढ़ाया जाए।
  • शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग को मजबूत किया जाए।

6. औद्योगिक नीति में सेमीकंडक्टर्स का समावेशन

  • सेमीकंडक्टर विकास को डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों के साथ समन्वित किया जाए।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न] प्रश्न: मेमोरी चिप की कमी के भारत की अर्थव्यवस्था तथा मुद्रास्फीति प्रबंधन पर पड़ने वाले प्रभावों का परीक्षण कीजिए। भारत के समक्ष उपस्थित चुनौतियों की चर्चा करते हुए उसके सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाने के उपाय सुझाइए। 

स्रोत: IE

 

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