पीएम विश्वकर्मा योजना

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन

संदर्भ

  • प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के कार्यान्वयन के लगभग तीन वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इस योजना ने 30 लाख लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है।

योजना के बारे में

  • वर्ष 2023 में प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा संचालित एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है। इसके लिए वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक की अवधि हेतु 13,000 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
  • इस योजना के अंतर्गत 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है, जिनमें बढ़ई, नाव निर्माता, कवच निर्माता, लोहार, हथौड़ा एवं औजार निर्माता, ताला बनाने वाला, स्वर्णकार, कुम्हार, मूर्तिकार/पत्थर तराशने वाला/पत्थर तोड़ने वाला, मोची/जूता निर्माता/पादत्राण कारीगर, राजमिस्त्री, टोकरी निर्माता/टोकरी बुनकर, चटाई निर्माता/नारियल रेशा बुनकर/झाड़ू निर्माता, पारंपरिक गुड़िया एवं खिलौना निर्माता, नाई, मालाकार, धोबी, दर्जी तथा मछली पकड़ने के जाल का निर्माता शामिल हैं।
  • यह योजना सम्मान, सामर्थ्य एवं समृद्धि के तीन स्तंभों पर आधारित है तथा इसका उद्देश्य गुरु-शिष्य परंपरा और पारंपरिक कौशलों की परिवार-आधारित कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करना है।
  • पात्रता :
    • यह योजना 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन कारीगरों एवं शिल्पकारों के लिए उपलब्ध है, जो सूचीबद्ध व्यवसायों में अपने हाथों एवं औजारों से कार्य करते हैं तथा असंगठित क्षेत्र में स्व-रोजगार से जुड़े हैं।
    • सरकारी कर्मचारी एवं उनके परिवार के सदस्य इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
    • विगत पाँच वर्षों के दौरान निर्धारित समान ऋण-आधारित स्व-रोजगार अथवा व्यवसाय ऋण प्राप्त करने वाले व्यक्ति सामान्यतः इस योजना के अंतर्गत पात्र नहीं होते हैं। हालाँकि, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना तथा प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के वे लाभार्थी, जिन्होंने अपना ऋण पूर्णतः चुका दिया है, पात्र हो सकते हैं।
  • प्रमुख लाभ
    • मान्यता: पंजीकरण एवं सत्यापन के बाद प्रधानमंत्री विश्वकर्मा प्रमाण-पत्र एवं पहचान-पत्र प्रदान किया जाता है।
    • कौशल प्रशिक्षण: 5 से 7 दिनों का मूलभूत प्रशिक्षण तथा 15 दिनों या उससे अधिक का उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिदिन 500 रुपये का वजीफा दिया जाता है।
    • औजार प्रोत्साहन: 15,000 रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है।
    • ऋण सहायता: बिना किसी संपार्श्विक सुरक्षा के अधिकतम 3 लाख रुपये तक का उद्यम विकास ऋण दो चरणों में प्रदान किया जाता है—पहले चरण में 1 लाख रुपये तथा दूसरे चरण में 2 लाख रुपये। इनकी ऋण अवधि क्रमशः 18 माह एवं 30 माह है। ऋण पर 5 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर निर्धारित है तथा भारत सरकार द्वारा 8 प्रतिशत तक ब्याज अनुदान प्रदान किया जाता है।
    • विपणन सहायता: उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणन, ब्रांड निर्माण, सरकारी ई-बाजार जैसे वाणिज्यिक मंचों पर पंजीकरण, विज्ञापन, प्रचार-प्रसार तथा अन्य विपणन गतिविधियों के माध्यम से सहायता प्रदान की जाती है, जिससे कारीगरों एवं शिल्पकारों को मूल्य शृंखला से बेहतर जुड़ाव प्राप्त हो सके।

स्रोत: DDNews

 

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