पाठ्यक्रम: GS3/IT के क्षेत्रों में जागरूकता
संदर्भ
- भारत में दूरसंचार अवसंरचना सुदृढ़ फाइबर समावेशन के अभाव में अभी भी संवेदनशील और अपर्याप्त है। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क दूरसंचार सेवाओं की दक्षता, गति और विस्तार क्षमता निर्धारित करने वाली अदृश्य रीढ़ हैं।
भारत में दूरसंचार अवसंरचना की स्थिति
- भारत में 1 अरब से अधिक दूरसंचार ग्राहक हैं, जबकि 2014 में यह संख्या 25.15 करोड़ थी।
- भारत विश्व में सबसे कम डेटा शुल्क वाले देशों में से एक है।
- ब्रॉडबैंड कनेक्शन 2014 में 6.1 करोड़ से बढ़कर सितंबर 2025 में 99.56 करोड़ हो गए, जो 1532.13% की वृद्धि है।
- ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) की लंबाई 2019 में 19.35 लाख मार्ग किलोमीटर से बढ़कर सितंबर 2025 में 42.36 लाख मार्ग किलोमीटर हो गई।
- दूरसंचार अवसंरचना के घटक:
- मोबाइल टावर (निष्क्रिय अवसंरचना)
- ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) नेटवर्क
- स्पेक्ट्रम और वायरलेस सिस्टम
- डेटा केंद्र और स्विचिंग नेटवर्क
दूरसंचार अवसंरचना में फाइबर का महत्व
- 5G और भविष्य के नेटवर्क की रीढ़:
- 5G नेटवर्क में छोटे सेल्स का सघन परिनियोजन आवश्यक है, जिन्हें उच्च क्षमता वाले बैकहॉल से जोड़ना होता है, जो मुख्यतः फाइबर आधारित होता है।
- फाइबर अल्ट्रा-लो लेटेंसी और उच्च बैंडविड्थ प्रदान करता है, जो स्वायत्त वाहनों और टेलीमेडिसिन जैसी वास्तविक समय अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक है।
- वायरलेस बैकहॉल विकल्प (जैसे माइक्रोवेव) उच्च डेटा लोड को लंबे समय तक संभालने में अपर्याप्त हैं।
- विस्तार क्षमता और विश्वसनीयता:
- ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क लगभग असीमित क्षमता उन्नयन प्रदान करते हैं, बिना भौतिक अवसंरचना बदले।
- यह फाइबर को 6G और उससे आगे के लिए भविष्य-उन्मुख बनाता है तथा नेटवर्क की सुदृढ़ता सुनिश्चित करता है।
- आर्थिक गुणक प्रभाव:
- सुदृढ़ डिजिटल अवसंरचना उत्पादकता, नवाचार और GDP वृद्धि को बढ़ावा देती है।
- फाइबर नेटवर्क क्लाउड कंप्यूटिंग, IoT पारिस्थितिकी तंत्र और इंडस्ट्री 4.0 अनुप्रयोगों को सक्षम करते हैं।
- डिजिटल विभाजन का समापन:
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में फाइबर परिनियोजन समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
- भारतनेट का लक्ष्य ग्राम पंचायतों को जोड़ना है, परंतु प्रगति असमान बनी हुई है।
- फाइबर आधारित कनेक्टिविटी शिक्षा, स्वास्थ्य और शासन सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करती है।
भारत में फाइबर परिनियोजन की चुनौतियाँ
- कम फाइबर समावेशन: भारत में केवल 30–36% दूरसंचार टावर फाइबराइज्ड हैं, जबकि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में यह 70–80% है।
- उच्च राइट-ऑफ-वे (RoW) लागत और विलंब: विभिन्न राज्यों में जटिल अनुमतियाँ और उच्च शुल्क फाइबर विस्तार में बाधा डालते हैं।
- वित्तीय दबाव: दूरसंचार कंपनियाँ भारी ऋण भार का सामना कर रही हैं, जिससे फाइबर नेटवर्क पर पूंजीगत व्यय सीमित है।
- शहरी-ग्रामीण असमानता: फाइबर मुख्यतः शहरी क्षेत्रों में केंद्रित है, ग्रामीण क्षेत्रों में कमी बनी हुई है।
प्रमुख सरकारी पहल
- भारतनेट कार्यक्रम: प्रारंभ में राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (NOFN) के रूप में शुरू हुआ, बाद में भारतनेट नाम दिया गया। इसका लक्ष्य सभी ग्राम पंचायतों (~2.5 लाख) को उच्च गति ब्रॉडबैंड से जोड़ना है।
- राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति (NDCP), 2018: सार्वभौमिक ब्रॉडबैंड पहुँच, टावरों का फाइबराइजेशन और राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन का निर्माण।
- राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (NBM), 2019: प्रत्येक नागरिक को 50 Mbps कनेक्टिविटी, सभी गाँवों को फाइबर कनेक्टिविटी और टावर फाइबराइजेशन में वृद्धि।
- पीएम गति शक्ति एवं अवसंरचना एकीकरण: दूरसंचार अवसंरचना योजना को सड़कों, रेल और उपयोगिताओं के साथ एकीकृत करता है।
- राइट-ऑफ-वे (RoW) सुधार:
- भारतीय टेलीग्राफ राइट-ऑफ-वे नियमों में संशोधन
- समयबद्ध अनुमोदन और नाममात्र शुल्क
- ऑनलाइन एकल-खिड़की स्वीकृति प्रणाली का प्रोत्साहन
- दूरसंचार अधिनियम, 2023: अवसंरचना परिनियोजन और RoW अनुमतियों को सरल बनाना, दूरसंचार क्षेत्र में व्यापार सुगमता को बढ़ावा देना तथा फाइबर नेटवर्क के तीव्र विस्तार का समर्थन करना।
नीतिगत एवं रणनीतिक आवश्यकताएँ
- टावरों का फाइबराइजेशन तीव्र करना: कम से कम 70% फाइबराइजेशन का लक्ष्य।
- दूरसंचार कंपनियों के बीच अवसंरचना साझा करने को प्रोत्साहित करना।
- RoW नीतियों में सुधार: राज्यों में समान, कम लागत और समयबद्ध अनुमोदन लागू करना।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देना: भारतनेट जैसी सरकारी पहलों के साथ निजी निवेश का लाभ उठाना।
- सामान्य डक्ट अवसंरचना और ओपन-एक्सेस फाइबर नेटवर्क स्थापित करना।
- ग्रामीण कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित करना: डिजिटल समावेशन सुनिश्चित करने हेतु फाइबर नेटवर्क का विस्तार।
| मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] भारत में दूरसंचार अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के महत्व की परीक्षा कीजिए। चुनौतियों पर चर्चा कीजिए तथा सुधार हेतु उपाय सुझाइए। |
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