केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पर विवाद

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, सिविल सेवाएँ, शक्तियों का पृथक्करण। GS 3/ आंतरिक सुरक्षा, अर्धसैनिक बल

संदर्भ

  • हाल ही में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 राज्यसभा में प्रस्तुत किया गया। इसका उद्देश्य भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को औपचारिक रूप देना है ताकि वे CAPFs में वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर कार्य कर सकें।

परिचय

  • विधेयक वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का अनुपात तय करता है, जिससे CAPF कैडर से पदोन्नत अधिकारियों की तुलना में IPS अधिकारियों को प्राथमिकता मिलेगी।
  • यह विधेयक केंद्र सरकार को भर्ती, पदोन्नति और सेवा शर्तों पर व्यापक नियम बनाने की शक्ति प्रदान करता है।
  • इसमें ‘नॉटविथस्टैंडिंग क्लॉज’ शामिल है, जिसके तहत बनाए गए नियम किसी भी वर्तमान कानून या न्यायालय के आदेश को अधिभूत कर सकते हैं। यही प्रावधान विधेयक का सबसे विवादास्पद हिस्सा है।

विधेयक की प्रमुख विशेषताएँ

  • एकीकृत वैधानिक ढाँचा: CRPF अधिनियम (1949), BSF अधिनियम (1968), CISF अधिनियम (1968), ITBP अधिनियम (1992) और SSB अधिनियम (2007) को निरस्त कर एक ही कानून लागू किया जाएगा।
  • नियम बनाने की शक्ति: केंद्र सरकार को भर्ती, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति और सेवा शर्तों पर नियम बनाने का अधिकार।
  • वैधानिक प्रतिनियुक्ति कोटा:
    • आईजी स्तर: 50% पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित।
    • एडीजी स्तर: न्यूनतम 67% पद IPS अधिकारियों से भरे जाएँगे।
    • एसडीजी एवं डीजी स्तर: 100% पद केवल IPS अधिकारियों के लिए।
  • वर्तमान लाभों का संरक्षण: समूह ‘A’ अधिकारियों को पूर्व में दिए गए वित्तीय लाभ (जैसे NFFU) जारी रहेंगे।
  • कवरेज: सहायक कमांडेंट से ऊपर के समूह ‘A’ अधिकारी, IPS अधिकारी (प्रतिनियुक्ति पर), तथा सेना अधिकारी (प्रतिनियुक्ति/पुनर्नियोजन पर)।
  • डीआईजी स्तर पर IPS कोटा का हटना: पूर्व का 20% आरक्षण हटाया गया है, परंतु उच्च स्तरों पर IPS की अनिवार्यता बनी रहती है।

विधेयक की आवश्यकता

  • प्रशासनिक विखंडन का अंत: स्वतंत्रता के बाद से पाँचों CAPFs अलग-अलग अधिनियमों के अंतर्गत संचालित होते रहे, जिससे सेवा नियमों और वेतन संरचनाओं में असमानता रही।
  • केंद्र-राज्य सुरक्षा संबंधों का संरक्षण: CAPFs का संचालन राज्य सरकारों से अलग नहीं है। चुनाव, आपदा प्रबंधन और उग्रवाद-रोधी अभियानों में IPS अधिकारियों के नेतृत्व की आवश्यकता होती है।
  • न्यायिक अनिश्चितता में संस्थागत निरंतरता: सर्वोच्च न्यायालय ने 2025 में IPS प्रतिनियुक्ति को ‘क्रमिक रूप से कम करने’ का निर्देश दिया था, परंतु समयसीमा स्पष्ट नहीं थी। विधेयक इस अस्पष्टता को दूर करता है।
  • अनुच्छेद 312 के तहत अखिल भारतीय सेवा का प्रावधान: IPS को संघ और राज्यों के बीच सुरक्षा मामलों में संरचनात्मक कड़ी के रूप में बनाया गया था। CAPFs में IPS नेतृत्व को वैधानिक रूप देना इसी संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप बताया गया है।
    • गृह मंत्री का तर्क: विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में अनुच्छेद 312 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि IPS अधिकारियों का राज्य और केंद्र में रोटेशन उन्हें व्यापक प्रशासनिक अनुभव देता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा बलों के नेतृत्व हेतु उपयुक्त है।
  • संचालन दक्षता: CAPFs में IPS अधिकारियों की अनिवार्य नियुक्ति से अंतर-सेवा परिचय और संचालनिक सामंजस्य सुदृढ़ होता है।

विधेयक से जुड़े मुद्दे और आलोचनाएँ

  • स्थायी अवरोध (Glass Ceiling) – 13,000 अधिकारियों के लिए: विधेयक द्वारा सभी उच्च पदों को IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित कर दिया गया है।इससे CAPF कैडर अधिकारी, जिन्होंने 30 वर्षों तक सेवा की है, कभी भी अपने बल का नेतृत्व नहीं कर पाएंगे।
    • उदाहरण: 1995 में BSF में सहायक कमांडेंट के रूप में शामिल अधिकारी, जिन्होंने कारगिल युद्ध में सेवा दी, सैकड़ों सीमा अभियानों का नेतृत्व किया और एडीजी तक पहुँचे — वे इस विधेयक के तहत BSF के महानिदेशक नहीं बन सकते। यह पद केवल IPS अधिकारी को ही मिलेगा।
    • सर्वोच्च न्यायालय ने 2025 में इस व्यवस्था को समानता मानदंडों का संरचनात्मक उल्लंघन कहा था।
  • शक्तियों के पृथक्करण के लिए खतरा:‘नॉटविथस्टैंडिंग क्लॉज’ न्यायालय के आदेशों पर विधेयक की प्रधानता स्थापित करता है।
    • इसे संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन माना जा सकता है, जिसमें न्यायिक पुनरीक्षण और शक्तियों का पृथक्करण शामिल हैं।
  • सार्वजनिक रोजगार में समानता (अनुच्छेद 14 और 16):संविधान प्रत्येक नागरिक को सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर की गारंटी देता है।
    • यह विधेयक सरकारी सेवकों की दो स्थायी श्रेणियाँ बना देता है —
      • एक, जो उच्चतम पदों के लिए पात्र है।
      • दूसरा, जो अपने प्रवेश स्तर के कारण स्थायी रूप से वंचित है।
    • यह स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है और गंभीर संवैधानिक चुनौती का सामना करेगा।
  • मनोबल एवं संस्थागत ठहराव की मानवीय लागत:CAPFs में पदोन्नति संकट केवल सैद्धांतिक नहीं है, बल्कि इसके प्रत्यक्ष मानवीय परिणाम हैं।
    • निरुत्साहित बल का संचालन कमजोर होता है, और विधेयक कार्मिक संकट के मूल कारणों को संबोधित नहीं करता।
    • उदाहरण: 2021–2025 के बीच 749 CAPF कर्मियों ने आत्महत्या की, 46,000 अधिकारियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और 9,532 ने इस्तीफा दिया। CISF में एक कैडर अधिकारी को एडीजी पद तक पहुँचने में लगभग तीन दशक लगते हैं।
  • अल्पावधि नेतृत्व और उसके संचालनिक परिणाम:IPS अधिकारी CAPF में 2–3 वर्षों के लिए प्रतिनियुक्त होते हैं।
    • वे बल की भौगोलिक परिस्थितियों, सिद्धांतों और कार्मिकों को समझते हैं, परंतु फिर स्थानांतरित हो जाते हैं।
    • उनके साथ संस्थागत ज्ञान भी चला जाता है।
    • कैडर अधिकारी वह निरंतरता प्रदान करते हैं जो जटिल सुरक्षा अभियानों के लिए आवश्यक है।

आगे की राह

  • स्थायी समिति को संदर्भित करना: विधेयक को गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति को भेजा जाना चाहिए, जिसमें CAPF कैडर अधिकारी संघों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य हो।
  • प्रशासनिक सुधार को प्रतिनियुक्ति कोटा से अलग करना: एकीकृत अधिनियम, शिकायत निवारण, पारदर्शी पदोन्नति मानदंड और कल्याण ढाँचे जैसे सुधार लक्ष्यों को IPS कोटा को वैधानिक रूप से अनिवार्य किए बिना भी हासिल किया जा सकता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय के कैडर समीक्षा निर्देश का पालन: 2025 के निर्णय में गृह मंत्रालय को छह माह में कैडर समीक्षा पूरी करने का निर्देश दिया गया था, जिसका पालन नहीं हुआ।
  • प्रतिनियुक्ति में कमी हेतु वैधानिक मार्ग: स्थायी कोटा तय करने के बजाय, कानून समयबद्ध कमी का प्रावधान कर सकता है।
    • उदाहरण: IG स्तर पर IPS कोटा 50% से घटाकर पाँच वर्षों में 30% किया जाए और प्रत्येक चरण में समीक्षा हो।
  • प्रतिनियुक्त अधिकारियों के लिए बल-विशिष्ट प्रशिक्षण: किसी भी IPS अधिकारी को CAPF कमान संभालने से पहले कठोर बल-विशिष्ट प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होना चाहिए।
  • CAPF कल्याण एवं निवारण प्राधिकरण का गठन: आत्महत्या, त्यागपत्र और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के चिंताजनक आँकड़ों को देखते हुए एक वैधानिक निकाय बनाया जाना चाहिए।
    • इसके पास स्वतंत्र निगरानी शक्तियाँ हों।
    • संसद को वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दायित्व हो।
    • कैरियर ठहराव और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को सीधे संबोधित करने का अधिदेश हो।
मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पाँच अलग-अलग बल-विशिष्ट अधिनियमों को एकीकृत कर एक ही वैधानिक ढाँचे में बदलना चाहता है। भारत की आंतरिक सुरक्षा संरचना के लिए इसकी आवश्यकता और महत्व की विवेचना कीजिए।

Source: TH

 

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