पाठ्यक्रम: GS2/ राजव्यवस्था और शासन
संदर्भ
- मद्रास उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि अनुच्छेद 161 के अंतर्गत क्षमा और समयपूर्व रिहाई संबंधी अधिकारों का प्रयोग करते समय राज्यपाल को मंत्रिपरिषद का परामर्श अनिवार्य होता है।
संविधान का अनुच्छेद 161 क्या है?
- अनुच्छेद 161 राज्यपाल को क्षमा, लघुकरण, परिहार, विराम तथा प्रविलंबन के रूपांतरण का अधिकार प्रदान करता है।
- यह उन अपराधों पर लागू होता है जो राज्य की कार्यपालिका शक्ति के अंतर्गत आते हैं।
- अनुच्छेद 161, अनुच्छेद 72 के समान है, जो राष्ट्रपति को इसी प्रकार के अधिकार प्रदान करता है।
- अनुच्छेद 163 यह स्थापित करता है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद राज्यपाल को उनके कार्यों के निर्वहन में सहायता और परामर्श देगी।
प्रमुख न्यायिक हस्तक्षेप
- शमशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य (1974): न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रपति और राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सहायता एवं परामर्श पर कार्य करना चाहिए। वे संवैधानिक प्रमुख हैं, वास्तविक कार्यपालिका नहीं।
- मरु राम बनाम भारत संघ (1980): न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दया अधिकार (अनुच्छेद 72 और 161) मंत्रिमंडल के परामर्श पर आधारित होने चाहिए, न कि राष्ट्रपति या राज्यपाल की व्यक्तिगत इच्छा पर।
- ए.जी. पेरारिवलन मामला (2022): न्यायालय ने पुनः पुष्टि की कि राज्यपाल द्वारा मामलों (जैसे दया याचिकाओं) पर निर्णय में अत्यधिक विलंब न्यायिक समीक्षा के अधीन है। सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के अंतर्गत राज्यपाल की निष्क्रियता के कारण राहत प्रदान की।
निर्णय का महत्व
- यह निर्णय संसदीय शासन प्रणाली को सुदृढ़ करता है और यह सिद्धांत पुष्ट करता है कि राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख हैं।
- यह निर्णय राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधित करके मनमाने निर्णयों को रोकता है।
राष्ट्रपति और राज्यपाल के क्षमा अधिकारों की तुलना
- भारत के राष्ट्रपति किसी भी व्यक्ति को, जो संघ की कार्यपालिका शक्ति के अंतर्गत अपराध का दोषी है, क्षमा, लघुकरण, विराम, परिहार, प्रविलंबन या दंडादेश का रूपांतरण प्रदान कर सकते हैं।
- राष्ट्रपति मृत्यु-दंड को क्षमा कर सकते हैं। वे मृत्यु-दंड को क्षमा करने वाले एकमात्र प्राधिकारी हैं।
- राज्यपाल मृत्यु-दंड को क्षमा नहीं कर सकते। तथापि, वे मृत्यु-दंड को निलंबित, क्षमा या रूपांतरित कर सकते हैं।
- राष्ट्रपति सैन्य न्यायालय (कोर्ट-मार्शल) द्वारा दिए गए दंड के मामलों में भी क्षमा अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।
- राज्यपाल के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है।
क्षमा अधिकार का स्वरूप
- क्षमा(Pardon): यह दंड और दोषसिद्धि दोनों को समाप्त कर देता है तथा दोषी को सभी दंड, दंडादेश और अयोग्यताओं से पूर्णतः मुक्त कर देता है।
- लघुकरण(Commutation): यह एक प्रकार के दंड को हल्के दंड में परिवर्तित करता है।
- परिहार(Remission): यह दंड की अवधि को कम करता है, परंतु उसके स्वरूप को नहीं बदलता।
- विराम (Respite): यह किसी विशेष परिस्थिति (जैसे दोषी की शारीरिक अक्षमता या महिला अपराधी की गर्भावस्था) के कारण मूल दंड के स्थान पर हल्का दंड प्रदान करता है।
- प्रविलंबन(Reprieve): यह दंडादेश (विशेषकर मृत्यु-दंड) के क्रियान्वयन को अस्थायी अवधि के लिए रोकता है।
स्रोत: TH
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