खड़ी ढलानों पर अवस्थित हिमनद (Hanging Glaciers)
पाठ्यक्रम: GS1 / भौतिक भूगोल
संदर्भ
- एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि बद्रीनाथ के ऊपर स्थित खड़ी ढलानों पर अवस्थित हिमनदों (Hanging Glaciers) के ढहने से बड़े पैमाने पर हिमस्खलन हो सकता है, जिससे हिमालयी तीर्थस्थल बद्रीनाथ के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
खड़ी ढलानों पर अवस्थित हिमनद (Hanging Glaciers) क्या हैं?
- ये बर्फ के ऐसे विशाल पिंड होते हैं, जो पर्वतों की तीव्र ढलानों पर स्थित होते हैं। ये प्रायः घाटी के तल तक विस्तारित होने के बजाय आधारशिला की खड़ी चट्टानों के पास अचानक समाप्त हो जाते हैं।
- इनके विखंडित होकर अलग होने अथवा ढलान से खिसकने के कारण हिमस्खलन हो सकता है, जिससे कम समय में भारी मात्रा में बर्फ, जल एवं मलबा नीचे की ओर आ सकता है।
हिमनदीय स्थलरूप

क्या आप जानते हैं? (Do You Know?)
- बद्रीनाथ, अलकनंदा नदी के तट पर समुद्र तल से लगभग 3,415 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
- यह भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय तीर्थस्थलों में से एक है। वर्ष 2025 की चारधाम यात्रा के दौरान यहाँ लगभग 17 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
स्रोत: IE
असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड
पाठ्यक्रम: GS2 / सामाजिक न्याय
संदर्भ
- श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने असंगठित श्रमिकों तथा गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी की है।
परिचय
- वैधानिक आधार: इस बोर्ड का गठन सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत किया गया है। यह संहिता असंगठित श्रमिकों, गिग श्रमिकों एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा लाभों का विस्तार करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करती है।
- संरचना: बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री द्वारा की जाएगी। इसमें निम्नलिखित के प्रतिनिधि शामिल होंगे:
- केंद्र एवं राज्य सरकारें।
- एग्रीगेटर कंपनियाँ एवं नियोक्ता।
- नागरिक समाज संगठन एवं श्रमिक संघ।
- गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन।
- बोर्ड की बैठक वर्ष में कम-से-कम तीन बार आयोजित की जाएगी तथा इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित होंगे:
- असंगठित श्रमिकों, गिग श्रमिकों एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के विभिन्न वर्गों के लिए उपयुक्त योजनाएँ तैयार करने हेतु केंद्र सरकार को सिफारिश करना।
- इस संहिता के प्रशासन से संबंधित ऐसे विषयों पर केंद्र सरकार को परामर्श देना, जिन्हें सरकार द्वारा बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
- केंद्र सरकार द्वारा संचालित श्रमिकों से संबंधित सामाजिक कल्याण योजनाओं की निगरानी करना।
- निधि एवं लेखा से किए गए व्यय की समीक्षा करना।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा संबंधी प्रावधान
- धारा 6: असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड तथा राज्य स्तर पर असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा बोर्डों के गठन का प्रावधान करती है।
- धारा 113: असंगठित श्रमिकों, गिग श्रमिकों एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के पंजीकरण का प्रावधान करती है।
- धारा 114: केंद्र सरकार को गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों को शामिल करते हुए सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ बनाने का अधिकार प्रदान करती है:
- जीवन एवं दिव्यांगता बीमा।
- दुर्घटना बीमा।
- स्वास्थ्य एवं मातृत्व लाभ।
- वृद्धावस्था सुरक्षा।
- शिशु देखभाल केंद्र (क्रेच) की सुविधाएँ।
स्रोत: PIB
आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus)
पाठ्यक्रम: GS2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध
चर्चा में क्यों?
- 13वीं ADMM-Plus बैठक को संबोधित करते हुए भारत के रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत संयुक्त सैन्य अभ्यासों, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से अपना परिचालन अनुभव साझा करेगा। साथ ही, उन्होंने आसियान देशों के साथ एक समर्पित रक्षा ‘यूथ ब्रिज’ स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा।
दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन
- उत्पत्ति: इसकी स्थापना वर्ष 1967 में थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आसियान घोषणा-पत्र , जिसे बैंकॉक घोषणा भी कहा जाता है, पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। इसके संस्थापक सदस्य इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर एवं थाईलैंड थे।
- ब्रुनेई दारुस्सलाम वर्ष 1984 में आसियान में शामिल हुआ। इसके बाद वियतनाम वर्ष 1995 में, लाओस एवं म्यांमार वर्ष 1997 में तथा कंबोडिया वर्ष 1999 में शामिल हुए। वर्ष 2025 में तिमोर-लेस्ते इसका 11वाँ सदस्य बना।
- आदर्श वाक्य : “एक दृष्टि, एक पहचान, एक समुदाय”।
- अधिदेश : आसियान का उद्देश्य क्षेत्र में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति एवं सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देना तथा क्षेत्रीय शांति, स्थिरता एवं सहयोग को प्रोत्साहित करना है।
- उद्देश्य :
- आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करना।
- कृषि, उद्योग एवं व्यापार को प्रोत्साहन देना।
- परिवहन एवं संचार सुविधाओं में सुधार करना।
- शिक्षा, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के क्षेत्र में पारस्परिक सहायता प्रदान करना।
- लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना।
भारत के लिए आसियान का महत्त्व
- आर्थिक अवसर: आसियान भारतीय वस्तुओं, सेवाओं एवं निवेश के लिए एक प्रमुख बाजार उपलब्ध कराता है।
- एक्ट ईस्ट नीति : दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के संबंधों में आसियान एक केंद्रीय स्तंभ की भूमिका निभाता है।
- हिंद-प्रशांत रणनीति : यह स्वतंत्र, खुले, समावेशी एवं नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के भारत के दृष्टिकोण को समर्थन प्रदान करता है।
- पूर्वोत्तर क्षेत्र की संपर्क व्यवस्था: क्षेत्रीय संपर्क में सुधार से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जा सकता है।
- समुद्री सुरक्षा: सहयोग से नौवहन की स्वतंत्रता एवं क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में सहायता मिलती है।
- ऊर्जा सुरक्षा: वियतनाम जैसे देशों के साथ सहयोग से भारत को अपनी ऊर्जा साझेदारियों में विविधता लाने में सहायता मिलती है।
आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus)
- ADMM आसियान के अंतर्गत रक्षा संबंधी परामर्श एवं सहयोग का सर्वोच्च तंत्र है।
- ADMM-Plus आसियान सदस्य देशों तथा उनके आठ संवाद साझेदारों के बीच सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने का एक मंच है।
- आसियान के 11 सदस्य देश: ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते एवं वियतनाम।
- आठ संवाद साझेदार : भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड।
- वर्ष 2026 के लिए ADMM-Plus की अध्यक्षता फिलीपींस कर रहा है।
भारत की स्थिति
- भारत वर्ष 1992 में आसियान का संवाद साझेदार बना था।
- ADMM-Plus की प्रथम बैठक 12 अक्टूबर, 2010 को वियतनाम की राजधानी हनोई में आयोजित की गई थी।
- ADMM-Plus के विभिन्न तंत्रों में भारत की सक्रिय भागीदारी, एक्ट ईस्ट नीति के अंतर्गत दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की बढ़ती रक्षा कूटनीति को दर्शाती है।
- इसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति, स्थिरता एवं सामूहिक विकास सुनिश्चित करना है।
स्रोत: TH
महँगाई भत्ता (DA)
पाठ्यक्रम: GS2 / शासन व्यवस्था; GS3 / अर्थव्यवस्था
चर्चा में क्यों?
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महँगाई भत्ते (DA) तथा पेंशनभोगियों के लिए महँगाई राहत (DR) की एक अतिरिक्त किस्त जारी करने को स्वीकृति दी है। इसके अंतर्गत मूल वेतन/पेंशन के 3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ इसकी दर बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी गई है, ताकि बढ़ती कीमतों के प्रभाव की भरपाई की जा सके।
महँगाई भत्ता (DA)
- यह सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को प्रदान किया जाने वाला एक भत्ता है, जिसका उद्देश्य मुद्रास्फीति एवं जीवन-यापन की बढ़ती लागत के प्रभाव को कम करना है। बढ़ती महँगाई के कारण मुद्रा की क्रय शक्ति में होने वाली कमी की भरपाई के लिए इसे दिया जाता है।
- इसमें सामान्यतः वर्ष में दो बार संशोधन किया जाता है।
- इसकी गणना श्रम ब्यूरो द्वारा जारी औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के वर्तमान मासिक आँकड़ों के आधार पर की जाती है।
- गणना : सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की वेतन संरचना के अंतर्गत महँगाई भत्ते की गणना मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में की जाती है।
- इसकी गणना में मकान किराया भत्ता (HRA) अथवा परिवहन भत्ता जैसे वेतन के अन्य घटकों को शामिल नहीं किया जाता है।
- महँगाई भत्ता गणना का सूत्र : महँगाई भत्ते की राशि = मूल वेतन × (महँगाई भत्ते की दर ÷ 100)
स्रोत: TH
लड़ाकू विमान
पाठ्यक्रम: GS3 / रक्षा
संदर्भ
- रक्षा मंत्री ने अमेरिकी युद्ध सचिव के साथ बैठक के दौरान पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों के लिए वाशिंगटन द्वारा प्रदान किए जा रहे सहायता पैकेज को लेकर भारत की चिंताओं को व्यक्त किया।
लड़ाकू विमानों की विभिन्न पीढ़ियाँ
- प्रथम पीढ़ी (1940–1950 का दशक): इस प्रारंभिक दौर के जेट विमानों में रडार की सुविधा नहीं थी। ये मुख्य रूप से मशीनगनों एवं बिना निर्देशित रॉकेटों पर निर्भर थे तथा इनकी गति एवं परिचालन ऊँचाई अपेक्षाकृत सीमित थी।
- इस पीढ़ी के प्रमुख विमानों में F-86 सेबर (अमेरिका), MiG-15 (सोवियत संघ) तथा ग्लॉस्टर मीटियर (ब्रिटेन) शामिल हैं।
- द्वितीय पीढ़ी (1950–1960 का दशक): इस पीढ़ी के लड़ाकू विमान ध्वनि की गति से अधिक गति प्राप्त करने में सक्षम हुए तथा इनमें प्रारंभिक रडार प्रणालियाँ स्थापित की गईं। वायु-से-वायु में मार करने वाली मिसाइल तकनीक का विकास हुआ, जिसने हवाई युद्ध की प्रकृति में व्यापक परिवर्तन किया।
- इस पीढ़ी के प्रमुख विमानों में MiG-21 (सोवियत संघ), F-104 स्टारफाइटर (अमेरिका) तथा मिराज-III (फ्रांस) शामिल हैं।
- तृतीय पीढ़ी (1970–1980 का दशक): इस पीढ़ी के लड़ाकू विमान अधिक बहुउद्देशीय एवं बहुमुखी हो गए। ये हवा-से-हवा तथा वायु-से-सतह दोनों प्रकार के सैन्य अभियानों को संचालित करने में सक्षम थे।
- इस अवधि के प्रमुख विमानों में F-4 फैंटम-II (अमेरिका), MiG-23 (सोवियत संघ) तथा SEPECAT जगुआर (ब्रिटेन/फ्रांस) शामिल हैं।
- साढ़े तीनवीं पीढ़ी (1980–1990 का दशक): इस चरण में वर्तमान लड़ाकू विमानों को उन्नत रडार, बेहतर कॉकपिट डिस्प्ले तथा दृश्य सीमा से परे मार करने वाली मिसाइलों की सीमित क्षमताओं से सुसज्जित किया गया।
- इसके प्रमुख उदाहरणों में MiG-23MLD (सोवियत संघ), F-5E टाइगर-II (अमेरिका) तथा MiG-21 बाइसन (भारत) शामिल हैं।
- चतुर्थ पीढ़ी (1990 के दशक से वर्तमान तक): इस पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के संचालन में डिजिटल प्रणालियों एवं नेटवर्क-केंद्रित वॉरफेयर की भूमिका महत्त्वपूर्ण हो गई। इनमें बहु-भूमिका क्षमता तथा सटीक लक्ष्य भेदन प्रणालियाँ विकसित की गईं।
- प्रमुख उदाहरणों में मिराज-2000 (फ्रांस), F/A-18 हॉर्नेट (अमेरिका) तथा HAL तेजस Mk1 (भारत) शामिल हैं।
- साढ़े चारवीं पीढ़ी : इस पीढ़ी के विमानों में सेंसर फ्यूजन (विभिन्न सेंसरों से प्राप्त सूचनाओं का एकीकरण), उन्नत रडार प्रणालियों तथा आंशिक स्टील्थ क्षमताओं जैसी तकनीकों का समावेश किया गया है।
- प्रमुख उदाहरणों में डसॉल्ट राफेल (फ्रांस), F-16 ब्लॉक 50/52+ (अमेरिका) तथा HAL तेजस Mk1A (भारत) शामिल हैं।
- पाँचवीं पीढ़ी : इन विमानों का विकास मुख्य रूप से स्टील्थ तकनीक (रडार से बचने की क्षमता), एकीकृत एवियोनिक्स तथा नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमताओं को ध्यान में रखकर किया गया है। इनमें सुपरक्रूज़ (बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से अधिक उड़ान), उन्नत सेंसर प्रणाली तथा रडार संकेतों को कम करने के लिए आंतरिक हथियार कक्ष जैसी विशेषताएँ होती हैं।
- प्रमुख विमानों में F-22 रैप्टर एवं F-35 लाइटनिंग-II (अमेरिका), Su-57 (रूस), J-20 (चीन) तथा भारत का प्रस्तावित HAL AMCA शामिल हैं।
स्रोत: TH
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा भारत के गंगा डॉल्फिन संरक्षण प्रयासों को सम्मान
पाठ्यक्रम: GS3 / पर्यावरण एवं संरक्षण
चर्चा में क्यों?
- संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने गंगा नदी डॉल्फिन के संरक्षण एवं पुनर्स्थापित करने के लिए भारत के प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र की 35 विश्व पुनर्बहाली प्रमुख पहलों में शामिल किया है।
गंगा नदी डॉल्फिन (प्लैटनिस्टा गैंगेटिका) के बारे में
- विशेषताएँ :
- गंगा नदी डॉल्फिन मूलतः दृष्टिहीन होती है तथा मछलियों एवं अन्य शिकार का पता लगाने के लिए पराश्रव्य ध्वनि तरंगें उत्सर्जित करती है। इन तरंगों के शिकार से टकराकर वापस आने के आधार पर यह इकोलोकेशन तकनीक से अपने शिकार का पता लगाती है।
- साँस लेते समय उत्पन्न होने वाली विशिष्ट ध्वनि के कारण इसे लोकप्रिय रूप से ‘सुसु’ कहा जाता है।
- वितरण : यह भारत, नेपाल एवं बांग्लादेश के गंगा तथा ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन में पाई जाती है।
- यह केवल स्वच्छ जल में ही जीवित रह सकती है।
- खतरे :
- जल विकास परियोजनाएँ।
- जल प्रदूषण।
- अवैध शिकार।
- मछली पकड़ने के जाल में आकस्मिक रूप से फँसने के कारण मृत्यु।
- संरक्षण स्थिति :
- भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत संरक्षित।
- संकटापन्न वन्य जीव एवं वनस्पतियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CITES) के परिशिष्ट-I में शामिल।
- प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर अभिसमय (CMS) के परिशिष्ट-I में शामिल।
- IUCN स्थिति: संकटग्रस्त ।
- राष्ट्रीय एवं राज्य जलीय जीव:
- वर्ष 2009 में गंगा नदी डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था।
- यह असम का राज्य जलीय जीव भी है।
भारत की संरक्षण संबंधी पहलें
- प्रोजेक्ट डॉल्फिन (2020): इसका उद्देश्य नदी एवं समुद्री डॉल्फिन दोनों का संरक्षण करना है।
- संरक्षण कार्ययोजना (2022–2047): यह डॉल्फिन संरक्षण एवं उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना प्रदान करती है।
- सामुदायिक भागीदारी: निगरानी, बचाव एवं संरक्षण संबंधी गतिविधियों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
- नदी पुनर्स्थापना : प्रदूषण को कम करना, नदियों में पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखना तथा डॉल्फिन के प्राकृतिक आवासों का संरक्षण करना।
सिंधु नदी डॉल्फिन के बारे में भी जानें (प्लैटनिस्टा माइनर)
- विशेषताएँ : सिंधु नदी डॉल्फिन भी कार्यात्मक रूप से दृष्टिहीन होती है तथा दिशा निर्धारण एवं शिकार का पता लगाने के लिए इकोलोकेशन तकनीक पर निर्भर रहती है।
- इसे स्थानीय भाषाओं में सामान्यतः ‘भुलन’ कहा जाता है।
- वितरण : यह पाकिस्तान में सिंधु नदी तंत्र में पाई जाती है।
- भारत में इसकी एक छोटी जनसंख्या ब्यास नदी में भी पाई जाती है।
- खतरे : जल अपवर्तन एवं जल मोड़ने वाली परियोजनाओं के कारण इसके प्राकृतिक आवास का क्षेत्र अत्यंत सीमित हो गया है।
- इसके परिणामस्वरूप इसकी जनसंख्या नदी के कुछ अलग-अलग हिस्सों तक सीमित हो गई है।
- संरक्षण स्थिति : भारत में भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत संरक्षित।
- CITES के परिशिष्ट-I में शामिल।
- CMS के परिशिष्ट-I में शामिल।
- IUCN स्थिति: संकटग्रस्त (Endangered)।
- राज्य जलीय जीव : सिंधु नदी डॉल्फिन पंजाब का राज्य जलीय जीव है।
स्रोत: IE
संयुक्त अरब अमीरात का प्रथम श्रेणी ज़ायेद-II सम्मान
पाठ्यक्रम: विविध
चर्चा में क्यों?
- भारतीय मूल के पायलट कैप्टन स्मित मच्छर तथा फ्लाईदुबई के उनके अन्य चालक दल के सदस्यों को उड़ान FZ1073 के कॉकपिट में हुए हमले के दौरान उनके साहस एवं व्यावसायिक दक्षता के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा प्रथम श्रेणी ज़ायेद-II सम्मान प्रदान किया गया।
प्रथम श्रेणी ज़ायेद-II सम्मान के बारे में
- यह संयुक्त अरब अमीरात का एक प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान है, जिसे असाधारण सार्वजनिक सेवा, राजनयिक उपलब्धियों एवं साहसिक कार्यों के लिए विदेशी राजनयिकों, अंतरराष्ट्रीय विशिष्ट व्यक्तियों तथा अन्य उल्लेखनीय हस्तियों को प्रदान किया जाता है।
- इस सम्मान की स्थापना संयुक्त अरब अमीरात के संस्थापक एवं प्रथम राष्ट्रपति शेख ज़ायेद बिन सुल्तान अल नाहयान की स्मृति में की गई थी।
पूर्व सम्मान प्राप्तकर्ता
- कैप्टन स्मित मच्छार इस सम्मान को प्राप्त करने वाले तीसरे भारतीय हैं।
- भारत के पूर्व राजदूत नवदीप सिंह सूरी (2019) तथा संजय सुधीर (2025) को भी उनके राजनयिक योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया जा चुका है।
स्रोत: IE
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संक्षिप्त समाचार 30-10-2026