पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ
- विश्व पर्यटन दिवस 2026 27 सितंबर को “पर्यटन को पुनः आकार देने के लिए डिजिटल एजेंडा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता” विषय के तहत मनाया गया।
परिचय
- विश्व पर्यटन दिवस, संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (यूएनडब्ल्यूटीओ) की एक पहल है।
- यह 1970 में यूएनडब्ल्यूटीओ के संविधानों को अपनाए जाने की स्मृति में मनाया जाता है।
- इसे पहली बार 1980 में मनाया गया था। यह दिवस सामाजिक-आर्थिक विकास में पर्यटन के योगदान और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को आगे बढ़ाने में इसकी भूमिका को रेखांकित करता है।
- वर्ष 2026 का विषय पर्यटन के भविष्य को आकार देने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर प्रकाश डालता है।
- वैश्विक स्तर पर, 2024 में यात्रा और पर्यटन ने 10.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर, अर्थात वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 10%, का योगदान दिया। इस क्षेत्र ने 35.7 करोड़ रोजगारों को समर्थन दिया और अंतरराष्ट्रीय पर्यटक व्यय के रूप में 1.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर उत्पन्न किए।
भारत में पर्यटन क्षेत्र
- वर्ष 2023-24 में इस क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में 5.22% योगदान रहा और इसने 8.46 करोड़ रोजगारों को समर्थन दिया।
- 2025 में घरेलू पर्यटक यात्राओं की संख्या बढ़कर 428.55 करोड़ हो गई, जबकि विदेशी पर्यटक यात्राओं की संख्या बढ़कर 2.53 करोड़ हो गई।
- पर्यटन से होने वाली विदेशी मुद्रा आय बढ़कर ₹2,76,831 करोड़ हो गई।
- लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक पर्यटन का अर्थव्यवस्था में योगदान 10% हो, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप है।

भारत का विविध पर्यटन परिदृश्य
- आध्यात्मिक और तीर्थ पर्यटन: अयोध्या, काशी, बोधगया, अमृतसर, तिरुपति और पुरी जैसे स्थल पूरे भारत तथा विदेशों से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
- बौद्ध परिपथ और सांस्कृतिक संबंध: भारत की बौद्ध विरासत इसे पूरे एशिया के समुदायों और यात्रियों से जोड़ती है।
- इस परिपथ में शामिल प्रमुख स्थल बुद्ध के जन्म से लेकर उनके महापरिनिर्वाण तक के जीवन से जुड़े हैं। इनमें बोधगया, वैशाली, राजगीर, कुशीनगर, सारनाथ और श्रावस्ती, साथ ही कपिलवस्तु और लुंबिनी शामिल हैं।
चार सबसे पवित्र बौद्ध स्थल (चतुर्महास्थान)
- लुंबिनी (नेपाल): गौतम बुद्ध का जन्मस्थान।
- बोधगया (बिहार): बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति का स्थल।
- सारनाथ (उत्तर प्रदेश): प्रथम उपदेश का स्थल (धर्मचक्र प्रवर्तन)।
- कुशीनगर (उत्तर प्रदेश): महापरिनिर्वाण (मृत्यु) का स्थल।
- विरासत और सांस्कृतिक पर्यटन: भारत की विरासत उसके किलों, महलों, मंदिरों, पुरातात्त्विक स्थलों, संग्रहालयों और ऐतिहासिक शहरों में प्रतिबिंबित होती है।
- शास्त्रीय नृत्य और संगीत, त्योहार, हस्तशिल्प तथा क्षेत्रीय व्यंजन पर्यटकों को उन परंपराओं का अनुभव करने का अवसर देते हैं, जो पीढ़ियों से निरंतर समृद्ध होती आ रही हैं।
- कल्याण, योग और चिकित्सा पर्यटन: योग, आयुर्वेद और चिकित्सा की अन्य पारंपरिक प्रणालियों की भारत की दीर्घकालिक परंपराएँ देश को कल्याण पर्यटन में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती हैं।
- पारिस्थितिकी पर्यटन और वन्यजीव पर्यटन: भारत के विविध भौगोलिक परिदृश्य वन्यजीव सफारी और पक्षी-दर्शन से लेकर ट्रैकिंग और प्राकृतिक पगडंडियों तक विभिन्न अनुभव प्रदान करते हैं।
- राष्ट्रीय उद्यान, बाघ अभयारण्य, आर्द्रभूमियाँ, मैंग्रोव, वन और हिमालयी परिदृश्य संरक्षण को समर्थन देते हुए प्रकृति का अनुभव करने के अवसर प्रदान करते हैं।
- तटीय, क्रूज और अनुभवात्मक पर्यटन: समुद्री क्रूज यात्रियों की संख्या 2014-15 में 1.08 लाख से बढ़कर 2025-26 में 4.62 लाख हो गई।
- विशाखापत्तनम, मुंबई और चेन्नई में अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनलों का उन्नयन कर उन्हें परिचालित किया गया है। पूर्वी तट क्रूज परिपथ का भी विस्तार किया गया है, जिसमें पुडुचेरी को जोड़ा गया है।
- एमआईसीई पर्यटन: बैठकें, प्रोत्साहन, सम्मेलन और प्रदर्शनियाँ, अर्थात एमआईसीई पर्यटन, भारत की पर्यटन रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- पर्यटन मंत्रालय ने इस क्षेत्र के विकास में सहायता के लिए एमआईसीई उद्योग के लिए राष्ट्रीय रणनीति और मार्गदर्शिका तैयार की है।
- भारत दिल्ली में भारत मंडपम, यशोभूमि तथा मुंबई में जियो वर्ल्ड सेंटर जैसे प्रमुख स्थलों के माध्यम से अपने एमआईसीई बुनियादी ढाँचे को मजबूत कर रहा है।
चुनौतियाँ
- बुनियादी ढाँचे की कमियाँ: भारत के कई पर्यटन स्थलों पर अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा है, जिसमें खराब सड़कें, अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन और लोकप्रिय पर्यटन क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी शामिल है।
- पर्यावरणीय क्षरण: बढ़ते पर्यटन से प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग तथा वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान जैसी पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
- मानकीकरण का अभाव: पर्यटन क्षेत्र की विभिन्न सेवाओं में, होटल और रेस्तराँ से लेकर टूर संचालकों तक, मानकीकृत गुणवत्ता नियंत्रण का अभाव है। यह असंगति पर्यटकों के समग्र अनुभव को प्रभावित करती है।
- मौसमी प्रभाव: कई पर्यटन स्थलों पर मौसमी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, जहाँ चरम पर्यटन मौसम के दौरान पर्यटकों की संख्या अधिक और पर्यटन के कम मौसम में कम होती है।
- विपणन और प्रचार संबंधी चुनौतियाँ: प्रभावी विपणन रणनीतियों का अक्सर अभाव रहता है और कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के बेहतर प्रचार की आवश्यकता है।
- सांस्कृतिक संवेदनशीलता और प्रबंधन: पर्यटन की आवश्यकताओं के साथ संतुलन बनाए रखते हुए सांस्कृतिक विरासत का जिम्मेदारीपूर्वक प्रबंधन करना एक चुनौती है।
सरकारी पहल
- कनेक्टिविटी और निवेश को बढ़ावा देना: 2025 के बजट में वित्त मंत्री ने राज्यों के साथ साझेदारी में चुनौती आधारित तरीके से 50 प्रमुख पर्यटन स्थलों को विकसित करने की एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की।
- इस पहल का उद्देश्य पर्यटन बुनियादी ढाँचे को बेहतर बनाना, यात्रा को सुगम बनाना और प्रमुख स्थलों तक कनेक्टिविटी को मजबूत करना है।
- स्वदेश दर्शन योजना: इसे पर्यटन मंत्रालय द्वारा 2014-15 में देशभर में चिन्हित विषयों के आधार पर पर्यटन परिपथों को विकसित करने के लिए शुरू किया गया था।
- इस योजना के तहत मंत्रालय ने 15 विषयगत पर्यटन परिपथों में 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें से 75 परियोजनाएँ भौतिक रूप से पूरी हो चुकी हैं।
- इसी आधार पर स्वदेश दर्शन 2.0 में गंतव्य-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें सतत और अनुभव-आधारित पर्यटन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- प्रसाद योजना: तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रसाद) को 2014-15 में चिन्हित तीर्थ और विरासत स्थलों पर पर्यटन बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए शुरू किया गया था।
- यह योजना इन स्थलों के एकीकृत विकास के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसमें पर्यटक सुविधाओं, सुगम पहुँच, स्वच्छता, सुरक्षा और स्थानीय आजीविकाओं पर केंद्रित हस्तक्षेप शामिल हैं।
- पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (SASCI): यह प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने में सहायता करती है। इसका ध्यान बेहतर पर्यटन बुनियादी ढाँचे, कनेक्टिविटी और पर्यटक सुविधाओं पर है।
- सेवा प्रदाताओं के क्षमता निर्माण (CBSP) के तहत पर्यटन मंत्रालय कौशल विकास, कौशल उन्नयन और पुनः कौशल विकास के लिए अल्पकालिक प्रशिक्षण प्रदान करता है।
- इसमें स्थानीय समुदायों, जनजातीय क्षेत्रों और वंचित पृष्ठभूमि के युवाओं को शामिल किया जाता है। हुनर से रोजगार तक भी इसी योजना के तहत लागू किया जाता है।
- अतिथि देवो भव अभियान: यह पहल आतिथ्य और मेहमानों के साथ अत्यंत सम्मान एवं देखभाल से व्यवहार करने की सांस्कृतिक भावना को बढ़ावा देती है।
- इसमें पर्यटन क्षेत्र में सेवा प्रदाताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।
- वीजा सुधार: कई देशों के नागरिकों के लिए ई-वीजा सुविधाओं की शुरुआत ने भारत आने के लिए वीजा प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाया है। इस कदम का उद्देश्य अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करना है।
- सतत पर्यटन के लिए समर्थन: सरकार विभिन्न योजनाओं और दिशानिर्देशों के माध्यम से पर्यावरण-अनुकूल और सतत पर्यटन प्रथाओं को बढ़ावा दे रही है, जिसमें जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना भी शामिल है।
वर्ष 2025-26 के बजट में रोजगार-आधारित विकास को सुविधाजनक बनाने के उपाय:
- होमस्टे के लिए मुद्रा ऋण प्रदान करना;
- प्रभावी गंतव्य प्रबंधन के लिए राज्यों को प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन प्रदान करना, जिसमें पर्यटक सुविधाएँ, स्वच्छता और विपणन प्रयास शामिल हैं; तथा
- कुछ पर्यटक समूहों के लिए वीजा शुल्क में छूट के साथ सुव्यवस्थित ई-वीजा सुविधाएँ शुरू करना।
निष्कर्ष
- विश्व पर्यटन दिवस 2026 का विषय इस बदलते परिदृश्य को दर्शाता है, जहाँ प्रौद्योगिकी, आँकड़े और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर्यटन अनुभव का अभिन्न हिस्सा बनते जा रहे हैं।
- भारत के विस्तारित डिजिटल मंच, कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम सेवाएँ, गंतव्य विकास, कनेक्टिविटी और कौशल निर्माण के प्रयास एक अधिक सुगम और परस्पर जुड़े पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सहायता कर रहे हैं।
स्रोत: PIB
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