भारत का उदय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की माँग करता है

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध

सन्दर्भ

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रतिनिधिक बनाने की आवश्यकता ने भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी पर पुनः ध्यान केंद्रित किया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता

  • अप्रतिनिधिक सदस्यता: जब वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी, तब 51 सदस्य देशों में से सुरक्षा परिषद में 11 सदस्य थे, अर्थात लगभग 22%।
  • आज संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देश हैं, जबकि सुरक्षा परिषद में केवल 15 सदस्य हैं, जो कुल सदस्यता का 8% से भी कम है।
  • संघर्षों का समाधान करने में अक्षमता: परिषद की वर्तमान संरचना अनेक महत्त्वपूर्ण संघर्षों का प्रभावी समाधान करने तथा अंतर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा बनाए रखने में पर्याप्त सक्षम नहीं है।
  • विश्व व्यवस्था में परिवर्तन: वर्ष 1945 के बाद वैश्विक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन हुए हैं, इसलिए इन नई वास्तविकताओं का स्थायी सदस्यता में भी प्रतिबिम्ब होना चाहिए।
  • वीटो शक्ति: वर्तमान में केवल पाँच स्थायी सदस्यों के पास वीटो शक्ति है, जिसके उपयोग से यूक्रेन और गाज़ा जैसे वैश्विक संकटों एवं संघर्षों पर सुरक्षा परिषद की कार्रवाई कई बार बाधित हुई है।
  • परिषद के शेष 10 सदस्य दो वर्ष के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्य के रूप में चुने जाते हैं और उन्हें वीटो का अधिकार प्राप्त नहीं है।
  • शक्ति का असंतुलन: परिषद की वर्तमान संरचना उस समय के वैश्विक शक्ति-संतुलन को अत्यधिक महत्त्व देती है।
  • विश्व की केवल 5% जनसंख्या वाला यूरोप किसी भी वर्ष परिषद की 33% सीटों पर नियंत्रण रखता है (इसमें एक अन्य यूरोपीय शक्ति रूस शामिल नहीं है)।
  • वैधता का प्रश्न: पाँच स्थायी सदस्यों, विशेषकर उनकी वीटो शक्ति के कारण, असमान रूप से अधिक शक्ति का केंद्रीकरण परिषद की निष्पक्षता एवं वैधता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC)

  • यह संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है, जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा बनाए रखना है।
  • इसकी पहली बैठक 17 जनवरी 1946 को वेस्टमिंस्टर, लंदन में आयोजित हुई थी।
  • मुख्यालय: न्यूयॉर्क नगर।
  • सदस्यता: सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं।
  • 5 स्थायी सदस्य (वीटो शक्ति सहित): चीन,फ्रांस,रूस,यूनाइटेड किंगडम,संयुक्त राज्य अमेरिका।
  • 10 अस्थायी सदस्य

 अस्थायी सदस्यों का निर्वाचन

  • प्रत्येक वर्ष महासभा 10 में से 5 अस्थायी सदस्यों का दो वर्ष के कार्यकाल के लिए निर्वाचन करती है।
  • 10 अस्थायी सीटों का क्षेत्रीय वितरण इस प्रकार है—
  • अफ्रीकी एवं एशियाई देशों के लिए — 5 सीटें
  • पूर्वी यूरोपीय देशों के लिए — 1 सीट
  • लैटिन अमेरिकी एवं कैरेबियाई देशों के लिए — 2 सीटें
  • पश्चिमी यूरोपीय एवं अन्य देशों के लिए — 2 सीटें
  • सुरक्षा परिषद के लिए निर्वाचित होने हेतु उम्मीदवार देश को महासभा में उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्य देशों के दो-तिहाई बहुमत का समर्थन प्राप्त करना आवश्यक होता है।
  • चुनाव गुप्त मतदान के माध्यम से आयोजित किए जाते हैं, जिसमें सभी 193 सदस्य देश मतदान करते हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र के 50 से अधिक सदस्य देश ऐसे हैं जो आज तक कभी भी सुरक्षा परिषद के सदस्य नहीं बने हैं।
  • भारत ने अंतिम बार 2021–22 में अस्थायी सदस्य के रूप में सुरक्षा परिषद में स्थान प्राप्त किया था।

स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को सुदृढ़ करने वाले कारक

  • जनसांख्यिकीय महत्त्व: विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत विश्व की लगभग एक-छठी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है।
  • आर्थिक शक्ति: क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर भारत विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है तथा वर्ष 2026 में इसकी GDP (PPP) लगभग 20 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर आँकी गई है।
  • भारत वैश्विक व्यापार, प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा बाज़ारों तथा विकासात्मक वित्त को महत्त्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है।
  • सैन्य क्षमता: भारत की सशस्त्र सेनाएँ विश्व की सबसे बड़ी सेनाओं में शामिल हैं तथा रक्षा व्यय के मामले में भी भारत अग्रणी देशों में है। वर्ष 2026 में भारत का रक्षा बजट रिकॉर्ड 86 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
  • भारत उन चुनिंदा देशों में है जिनके पास विश्वसनीय परमाणु त्रि-आयामी प्रतिरोधक क्षमता (Nuclear Triad) उपलब्ध है।
  • अंतर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा में योगदान: वर्ष 1948 से भारत संयुक्त राष्ट्र शान्ति स्थापना अभियानों में सर्वाधिक सैनिक योगदान देने वाले देशों में रहा है, जबकि शान्तिरक्षकों की शहादत के मामले में भी भारत अग्रणी देशों में शामिल है।
  • यह बहुपक्षवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता तथा संयुक्त राष्ट्र के दायित्वों के निर्वहन के प्रति उसकी दृढ़ इच्छा को दर्शाता है।
  • ग्लोबल साउथ की आवाज़: भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन, जी-20 की अध्यक्षता तथा ग्लोबल साउथ के लिए एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन जैसे मंचों पर प्रभावी नेतृत्व प्रदर्शित किया है।
  • समुद्री सुरक्षा: हिन्द महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका नौवहन की स्वतंत्रता तथा समुद्र के विधि पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) एवं उससे सम्बद्ध संस्थाओं, जैसे समुद्र के विधि हेतु अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण (ITLOS), के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

भारत की दावेदारी के समक्ष चुनौतियाँ

  • संशोधन की जटिल प्रक्रिया: सुरक्षा परिषद में किसी भी सुधार के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के दो-तिहाई बहुमत के साथ-साथ सभी पाँच स्थायी सदस्यों की पुष्टि आवश्यक होती है। इससे संस्थागत सुधार अत्यन्त कठिन हो जाता है।
  • चीन का विरोध: चीन भारत को स्थायी सदस्य बनाए जाने के प्रति सतर्क रुख अपनाता रहा है तथा भारत की दावेदारी का स्पष्ट समर्थन करने से प्रायः बचता है।
  • कॉफी क्लब (Uniting for Consensus-UfC): यह 1990 के दशक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटों के विस्तार के विरोध में गठित एक समूह है।
  • इटली के नेतृत्व में यह समूह जी-4 देशों (ब्राज़ील, जर्मनी, भारत और जापान) की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का विरोध करता है।

निष्कर्ष

  • सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्यता प्रदान किए जाने से एशिया तथा विश्व में स्थिरता को बल मिलेगा।
  • इससे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना बदलती भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अधिक अनुरूप बनेगी, उसके निर्णयों की वैधता सुदृढ़ होगी तथा परिषद को स्वयं को अधिक प्रभावी एवं प्रतिनिधिक संस्था के रूप में पुनर्गठित करने का अवसर प्राप्त होगा।

स्रोत : IE

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ नागरिकता सन्दर्भ विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज़ है और इसे नागरिकता का अंतिम अथवा निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। परिचय भारतीय पासपोर्ट, विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज़ है। यह अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के लिए धारक की पहचान...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध सन्दर्भ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के प्रति तुर्किये के समर्थन के कारण भारत-तुर्किये संबंध निम्न स्तर पर पहुँच गए थे। एक वर्ष बाद दोनों देश कूटनीतिक संवाद और सुरक्षा सहयोग के माध्यम से अपने संबंधों को पुनः सुदृढ़ करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पृष्ठभूमि कश्मीर मुद्दे पर...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ पर्यावरण सन्दर्भ संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि जीवाश्म ईंधनों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण विश्व एक साथ जलवायु संकट और ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा की ओर तीव्र संक्रमण तथा जलवायु अनुकूलन उपायों को सुदृढ़ करने का आह्वान किया। दोहरे संकट...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-3/नवीकरणीय ऊर्जा ;पर्यावरण  सन्दर्भ क्लाइमेट कम्पैटिबल फ्यूचर्स (CCF) के हालिया विश्लेषण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के आँकड़ों से पता चलता है कि भारत में रूफटॉप सौर ऊर्जा को अपनाने में उल्लेखनीय क्षेत्रीय असमानताएँ मौजूद हैं। भारत में रूफटॉप सौर ऊर्जा की स्थिति भारत की कुल रूफटॉप सौर ऊर्जा क्षमता 25.7 गीगावाट...
Read More

थेवा(Thewa)कला  पाठ्यक्रम: जीएस-1/कला एवं संस्कृति  सन्दर्भ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी हालिया स्लोवाकिया यात्रा के दौरान स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को थेवा कला से निर्मित कफ़लिंक भेंट किए। थेवा कला :परिचय थेवा कला राजस्थान के प्रतापगढ़ की भारत की सर्वाधिक विशिष्ट पारम्परिक हस्तकलाओं में से एक है। यह कला लगभग 400 वर्ष पुरानी है तथा इसकी...
Read More
scroll to top