VB-G RAM G को निरस्त करने की मांग 

पाठ्यक्रम: GS2/शासन

संदर्भ

  •  विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन – ग्रामीण (VB-G RAM G) अधिनियम को निरस्त करने की मांग करते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं श्रमिक संगठनों ने 1 जुलाई से विरोध-प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

VB-G RAM G के बारे में

  • इसने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) का स्थान लिया है।
    • यह “मांग-आधारित ढाँचे” से “आपूर्ति-आधारित योजना” की ओर एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है।
  • उन्नत आजीविका गारंटी: अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों, जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से कार्य करना चाहते हैं, हेतु वैधानिक मजदूरी रोजगार की गारंटी को प्रति वित्तीय वर्ष 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।
  • केंद्र प्रायोजित योजना: यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
    • पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए व्यय साझेदारी का अनुपात 90:10 तथा अन्य सभी राज्यों के लिए 60:40 निर्धारित किया गया है।
  • कृषि के चरम मौसमों की सुरक्षा: अधिनियम के अंतर्गत राज्यों को यह अधिकार प्रदान किया गया है कि वे किसी वित्तीय वर्ष में अधिकतम 60 दिनों की अवधि को अग्रिम रूप से अधिसूचित कर सकें, जिसमें बुवाई एवं कटाई जैसे कृषि के चरम मौसम सम्मिलित हों।
    • इस अवधि के दौरान अधिनियम के अंतर्गत कार्य नहीं कराए जाएंगे, जिससे कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त श्रमबल उपलब्ध हो सके।
  • मानक-आधारित निधि आवंटन: राज्यों को पंचायतों की श्रेणियों तथा स्थानीय विकासात्मक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जिलों एवं ग्राम पंचायतों के बीच निधियों का पारदर्शी एवं आवश्यकता-आधारित वितरण सुनिश्चित करना होगा।
  • बेरोजगारी भत्ता: यदि पात्र आवेदकों को निर्धारित समय-सीमा के अंदर कार्य उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो राज्य सरकारों के लिए बेरोजगारी भत्ता प्रदान करना अनिवार्य होगा।
  • VGPP आधारित योजना निर्माण: योजना निर्माण विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के माध्यम से किया जाएगा।
    • इन योजनाओं को ग्राम पंचायतों द्वारा तैयार किया जाएगा तथा राष्ट्रीय स्थानिक नियोजन प्रणालियों के साथ एकीकृत किया जाएगा।
  • संस्थागत पर्यवेक्षण: अधिनियम के प्रावधानों की समीक्षा, निगरानी तथा प्रभावी कार्यान्वयन हेतु केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद तथा राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषदों का गठन किया जाएगा।

श्रमिकों द्वारा उठाई गई चिंताएँ

  • वित्तीय चिंताएँ: सरकारी आँकड़ों के विश्लेषण से यह संकेत मिला है कि प्रस्तावित योजना के अंतर्गत 125 दिनों के रोजगार का वादा न तो पर्याप्त वित्तीय समर्थन प्राप्त है और न ही प्रशासनिक दृष्टि से व्यवहार्य है।
    • कोई भी प्रमुख राज्य सक्रिय जॉब कार्डधारकों को वादित 125 दिनों के रोजगार का आधा भी उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं होगा।
  • मजदूरी दरों पर अस्पष्टता: नियमों में मजदूरी दरों के संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं।
    • साथ ही, वैधानिक न्यूनतम मजदूरी की गारंटी भी सुनिश्चित नहीं की गई है।
  • तकनीकी विफलताएँ: सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेहरे की पहचान तथा बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के निरंतर उपयोग का विरोध किया है।
    • उनका आरोप है कि तकनीकी विफलताओं के कारण श्रमिकों को बार-बार मजदूरी एवं कार्य-दिवसों की हानि उठानी पड़ी है।
  • मांग-आधारित से आपूर्ति-आधारित आवंटन की ओर परिवर्तन: मनरेगा के अंतर्गत पूर्व व्यवस्था में राज्यों द्वारा नीचे से ऊपर तथा मांग-आधारित अनुमान तैयार किए जाते थे।
    • नया अधिनियम ऊपर से नीचे “मानक-आधारित” आवंटन प्रणाली लागू करता है, जिसके मानदंड केंद्र सरकार द्वारा एकतरफा निर्धारित किए जाते हैं।
  • राज्यों पर अत्यधिक वित्तीय भार : मनरेगा में केंद्र सरकार मजदूरी लागत का 100% तथा सामग्री लागत का 75% वहन करती थी।
    • इसके विपरीत, VB-G RAM G अधिनियम में 60:40 केंद्र-राज्य वित्तीय साझेदारी का प्रावधान है।
    • अनेक राज्यों के लिए अपने 40% हिस्से की व्यवस्था करना कठिन हो सकता है।
    • इससे विभिन्न राज्यों में योजना के असमान क्रियान्वयन तथा क्षेत्रीय विषमताओं के बढ़ने का जोखिम उत्पन्न होता है।

निष्कर्ष

  • ग्रामीण भारत की बदलती आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए विभिन्न पूरक सरकारी योजनाओं को समाहित करते हुए एकीकृत एवं समग्र ग्रामीण विकास ढाँचे की स्थापना हेतु अधिक सशक्त अभिसरण की आवश्यकता है।
  • राष्ट्रीय विकास की प्रगति के साथ-साथ ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में समय-समय पर संशोधन किया जाना आवश्यक है, ताकि वे उभरती आवश्यकताओं एवं नई आकांक्षाओं के अनुरूप बने रह सकें।

Source: TH

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा संदर्भ वित्तीय वर्ष (FY) 2025-26 में भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है। परिचय यह विगत वित्तीय वर्ष की तुलना में 15.6% की वृद्धि तथा वित्तीय वर्ष 2020-21 की तुलना में 110% की वृद्धि को दर्शाता है। कुल रक्षा उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था संदर्भ भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ के रिकॉर्ड अधिशेष हस्तांतरण को स्वीकृति प्रदान की है। आर्थिक पूंजी रूपरेखा (ECF) आर्थिक पूंजी रूपरेखा (ECF) यह निर्धारित करती है कि RBI अपनी पूंजीगत आरक्षित निधियों का प्रबंधन किस प्रकार करेगा तथा सरकार को...
Read More

पेरिस समझौते के अंतर्गत संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र के कार्यान्वयन नियमों को भारत-जापान द्वारा स्वीकृति प्रदान  पाठ्यक्रम: GS2/ अंतरराष्ट्रीयसंबंध, GS3/ पर्यावरण संदर्भ भारत और जापान ने पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र के कार्यान्वयन नियमों को अपनाया है। परिचय यह तंत्र उन शमन परियोजनाओं पर सहयोग हेतु एक रूपरेखा प्रदान करता है,...
Read More
scroll to top