संक्षिप्त समाचार 18-06-2026

पेरिस समझौते के अंतर्गत संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र के कार्यान्वयन नियमों को भारत-जापान द्वारा स्वीकृति प्रदान 

पाठ्यक्रम: GS2/ अंतरराष्ट्रीयसंबंध, GS3/ पर्यावरण

संदर्भ

  • भारत और जापान ने पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र के कार्यान्वयन नियमों को अपनाया है।

परिचय

  • यह तंत्र उन शमन परियोजनाओं पर सहयोग हेतु एक रूपरेखा प्रदान करता है, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम अथवा समाप्त करती हैं तथा भारत में सतत विकास को बढ़ावा देती हैं।
  • यह पेरिस समझौते के अंतर्गत भारत एवं जापान दोनों के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) की प्राप्ति में भी योगदान देगा।
  • कार्यान्वयन नियमों के प्रमुख प्रावधान: इन नियमों में तंत्र के लिए निम्नलिखित प्रशासनिक व्यवस्थाएँ निर्धारित की गई हैं—
    • दोनों देशों के प्रतिनिधियों से युक्त संयुक्त समिति की स्थापना।
    • परियोजनाओं की स्वीकृति हेतु पारदर्शी प्रक्रियाएँ।
    • तृतीय-पक्ष सत्यापन एवं प्रमाणीकरण प्रक्रियाएँ।
    • सतत विकास सुरक्षा उपाय ।
    • कार्बन क्रेडिट के निर्गमन एवं हस्तांतरण की निगरानी हेतु राष्ट्रीय रजिस्ट्रियों की स्थापना।

पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6.2

  • अनुच्छेद 6.2 देशों को अपने जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु उत्सर्जन कटौती इकाइयों (कार्बन क्रेडिट) के आदान-प्रदान एवं व्यापार की अनुमति प्रदान करता है।
  • मेजबान देश निवेश, क्षमता निर्माण सहायता तथा घरेलू संसाधनों से उपलब्ध न होने वाली प्रौद्योगिकियों तक पहुँच के बदले इन इकाइयों को क्रेता देश को बेचता है।
  • क्रेता देश इन इकाइयों को, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय रूप से हस्तांतरित शमन परिणाम कहा जाता है, अपने जलवायु लक्ष्यों की पूर्ति में होने वाली कमी को पूरा करने के लिए खरीदता है।

स्रोत: AIR

RBI द्वारा विदेशी मुद्रा एकत्रित करने हेतु बैंकों को NRI/PIO के लिए अधिक ब्याज दरें प्रदान करने की स्वीकृति प्रदान

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • RBI के निर्देशों के अनुसार NRE/NRO जमा पर ब्याज दरें, तुलनीय घरेलू रुपया सावधि जमाओं पर बैंक द्वारा प्रदान की जाने वाली ब्याज दरों से अधिक नहीं होंगी।

परिचय

  • RBI ने विदेशी मुद्रा भंडार को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 3 से 5 वर्ष की अवधि वाली नई विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक [FCNR(B)] जमाओं पर ब्याज दरों की अधिकतम सीमा तथा 3 वर्ष या उससे अधिक अवधि वाली अनिवासी बाह्य (NRE) जमाओं पर ब्याज दर संबंधी प्रतिबंधों को 30 सितंबर, 2026 तक अस्थायी रूप से हटा दिया है।
  • महत्त्व: इस निर्णय से अनिवासी भारतीयों (NRIs) तथा भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIOs) को भारतीय बैंकों में अपनी धनराशि जमा करने पर अधिक ब्याज दरों का लाभ प्राप्त होगा।
    • इससे भारत को विदेशी मुद्रा, विशेषकर डॉलर, जुटाने में सहायता मिलेगी, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होगी।
    • यह अवमूल्यनशील रुपये को समर्थन प्रदान करने तथा भुगतान संतुलन संबंधी दायित्वों को पूरा करने में सहायक होगा।

विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक [FCNR(B)] खाता

  • FCNR(B) खाता वह खाता है जिसमें जमा राशि विदेशी मुद्रा में रखी जाती है।
  • इससे जमाकर्ता को विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्राप्त होती है।
  • केवल NRI, PIO एवं OCI ही FCNR(B) खाता खोल सकते हैं तथा NRI की स्थिति विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।
  • इसमें जमा राशि अमेरिकी डॉलर (USD), ब्रिटिश पाउंड (GBP), यूरो (EUR), जापानी येन (JPY), ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कनाडाई डॉलर (CAD) आदि विदेशी मुद्राओं में रखी जा सकती है।
  • यह केवल सावधि जमा के रूप में उपलब्ध होता है, जिसकी परिपक्वता अवधि 1 वर्ष से 5 वर्ष तक होती है।
  • इन खातों का उद्देश्य NRI समुदाय से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करना, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को सुदृढ़ करना तथा जमाकर्ताओं को मुद्रा उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करना है।

स्रोत: TH

नागपुर में उच्च ऊर्जा चिकित्सा साइक्लोट्रॉन परियोजना (HEMCP)

पाठ्यक्रम: GS2/ स्वास्थ्य, GS3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने ₹300 करोड़ की लागत से नागपुर में उच्च ऊर्जा चिकित्सा साइक्लोट्रॉन परियोजना (HEMCP) की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की है।

चिकित्सा साइक्लोट्रॉन क्या है?

  • चिकित्सा साइक्लोट्रॉन एक विशेष प्रकार का कण त्वरक है, जो स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोग होने वाले रेडियोआइसोटोप का उत्पादन करता है।
  • यह विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्रों की सहायता से प्रोटॉन जैसे आवेशित कणों को अत्यधिक गति प्रदान करता है।
  • तत्पश्चात इन तीव्र गति वाले कणों को लक्ष्य पदार्थ पर प्रक्षेपित किया जाता है, जिससे नाभिकीय अभिक्रियाएँ होती हैं और रेडियोआइसोटोप उत्पन्न होते हैं।
  • रेडियोआइसोटोप के उपयोग: उत्पादित रेडियोआइसोटोप का उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जाता है—
    • PET (पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी) स्कैन एवं PET-CT इमेजिंग।
    • विभिन्न नाभिकीय चिकित्सा निदान प्रक्रियाएँ।
    • कैंसर जैसी बीमारियों के उपचार हेतु लक्षित रेडियोन्यूक्लाइड चिकित्सा ।
  • प्रमुख चिकित्सा रेडियोआइसोटोप:
    • फ्लोरीन-18 (F-18)
    • गैलियम-68 (Ga-68)
    • ल्यूटेशियम-177 (Lu-177) आदि।

स्रोत: TH

बिटुमेन

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष का प्रभाव भारत की सड़क अवसंरचना विस्तार योजनाओं पर पड़ा है, क्योंकि भारत अपनी बिटुमेन आवश्यकता का लगभग 30–40% आयात करता है।
    • भारत के कुल बिटुमेन आयात का 99% से अधिक हिस्सा इराक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ईरान, ओमान तथा बहरीन से प्राप्त होता है।

बिटुमेन

  • बिटुमेन कच्चे तेल का एक उप-उत्पाद है, जो अपनी जलरोधक एवं आसंजन विशेषताओं के लिए जाना जाता है।
  • इसका उपयोग मुख्यतः सड़क निर्माण तथा छत निर्माण में किया जाता है।
  • कनाडा में तेल बालू के रूप में बिटुमेन के विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक भंडारों में से एक पाया जाता है, जो वैश्विक आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
    • बिटुमिनस बालू के अन्य प्रमुख भंडार संयुक्त राज्य अमेरिका, वेनेज़ुएला तथा रूस में भी पाए जाते हैं।
  • बिटुमेन का उत्पादन रिफाइनरियों में किया जाता है, जिससे इसकी शुद्धता सुनिश्चित होती है, गुणवत्ता में एकरूपता बनी रहती है तथा वैश्विक निर्माण क्षेत्र की विशाल मांग को अपेक्षाकृत कम लागत पर पूरा किया जा सकता है।

स्रोत: IE

शोधकर्ताओं के अनुसार ब्रह्मांड का विस्तार अब भी तीव्र गति से जारी 

पाठ्यक्रम: GS3/ अंतरिक्ष

संदर्भ

  • विस्फोटित होने वाले एक विशेष प्रकार के तारों से संबंधित आँकड़ों का पुनः विश्लेषण करने के बाद शोधकर्ताओं के एक दल ने यह पुष्टि की है कि ब्रह्मांड का विस्तार त्वरित गति से हो रहा है।
    • वर्ष 1990 के दशक में किए गए ऐसे ही अवलोकनों के परिणामस्वरूप डार्क एनर्जी नामक एक रहस्यमय ब्रह्मांडीय शक्ति की पहचान हुई थी।

डार्क मैटर एवं डार्क एनर्जी

  • व्यापक रूप से यह माना जाता है कि ब्रह्मांड की संरचना तीन प्रकार के घटकों से मिलकर बनी है—
    • सामान्य पदार्थ
    • डार्क मैटर
    • डार्क एनर्जी 
  • अनुमानतः ब्रह्मांड का लगभग 68% भाग डार्क एनर्जी, 27% भाग डार्क मैटर तथा शेष 5% से भी कम भाग सामान्य पदार्थ से निर्मित है।
  • डार्क मैटर : सामान्य पदार्थ के विपरीत, डार्क मैटर विद्युतचुंबकीय बल के साथ अंतःक्रिया नहीं करता।
    • इसका अर्थ है कि यह न तो प्रकाश का अवशोषण करता है, न परावर्तन करता है और न ही उत्सर्जन करता है, जिससे इसका प्रत्यक्ष अवलोकन अत्यंत कठिन हो जाता है।
    • डार्क मैटर एक आकर्षण बल की भाँति कार्य करता है तथा ब्रह्मांड को एक साथ बाँधे रखने वाले ब्रह्मांडीय सीमेंट के समान माना जाता है।
    • ऐसा इसलिए है क्योंकि डार्क मैटर गुरुत्वाकर्षण बल के साथ अंतःक्रिया करता है।
    • चूँकि यह प्रकाश का उत्सर्जन, अवशोषण अथवा परावर्तन नहीं करता, इसलिए खगोलविद इसके प्रभावों का अध्ययन केवल दृश्यमान पदार्थों, जैसे तारों एवं आकाशगंगाओं, पर पड़ने वाले गुरुत्वीय प्रभाव के माध्यम से करते हैं।
  • डार्क एनर्जी : डार्क एनर्जी एक प्रतिकर्षण बल के रूप में कार्य करती है।
    • इसे एक प्रकार का प्रतिगुरुत्व माना जाता है, जो ब्रह्मांड के निरंतर त्वरित विस्तार को प्रेरित करता है।
    • डार्क एनर्जी, डार्क मैटर की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली एवं प्रमुख शक्ति मानी जाती है।

स्रोत: TH

 

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