पाठ्यक्रम: GS3/ खाद्य सुरक्षा
संदर्भ
- कृषि मंत्रालय (MoA) ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) तथा अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) के सहयोग से विश्व खाद्य दिवस 2026 मनाया।
परिचय
- विश्व खाद्य दिवस प्रत्येक वर्ष 16 अक्टूबर को वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की स्थापना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
- इस दिवस की स्थापना भूख की निरंतर बनी हुई समस्या तथा खाद्य सुरक्षा को साझा प्राथमिकता बनाने की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए की गई थी।
- वर्ष 2026 की थीम: “आज नवाचार करें। कल का पोषण करें।”
खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताएँ (SOFI 2026)
- वैश्विक परिदृश्य: विश्व में खाद्य सुरक्षा एवं पोषण की स्थिति (SOFI) 2026 के अनुसार, वर्ष 2025 में वैश्विक जनसंख्या के अनुमानित 7.8% हिस्से को भूख का सामना करना पड़ा, जबकि यह आँकड़ा वर्ष 2024 में 8.1% और वर्ष 2022 में 8.6% था।
- भारतीय परिदृश्य:
- अल्पपोषित जनसंख्या: वर्ष 2023–2025 में अल्पपोषित लोगों की संख्या घटकर 14.25 करोड़ (जनसंख्या का 9.8%) रह गई, जबकि वर्ष 2004–2006 में यह संख्या 24.39 करोड़ (21.1%) थी।
- स्वस्थ आहार की लागत: वर्ष 2025 में स्वस्थ आहार की लागत बढ़कर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 4.11 PPP डॉलर हो गई, जो वर्ष 2017 के बाद से लगभग 48% की वृद्धि दर्शाती है।
- वहनीयता का संकट: वर्ष 2025 में भारत की लगभग 52.01 करोड़ आबादी (कुल आबादी का 35.5%) स्वस्थ आहार वहन करने में असमर्थ थी।
- कुपोषण के संकेतक: बच्चों में बौनापन घटकर 32.9% रह गया और दुबलापन 18.7% दर्ज किया गया, जबकि बचपन में अधिक वजन, वयस्कों में मोटापा और महिलाओं में एनीमिया की स्थिति निरंतर खराब रही।
वैश्विक खाद्य सुरक्षा के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
- जलवायु परिवर्तन: चरम मौसमी घटनाएँ, वर्षा के बदलते प्रतिरूप और बढ़ते तापमान कृषि उत्पादकता को कम करते हैं तथा फसलों के उगने के मौसम को बाधित करते हैं।
- संघर्ष और युद्ध: संघर्ष फसलों को नष्ट करते हैं, किसानों को विस्थापित करते हैं, खाद्य आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करते हैं तथा खाद्य वितरण के लिए उत्तरदायी संस्थानों को कमजोर करते हैं।
- पौष्टिक खाद्य पदार्थों की उच्च लागत: फल, सब्जियाँ, दालें, दूध और प्रोटीन-समृद्ध खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि।
- आय संबंधी बाधाएँ: अनेक परिवार विविधतापूर्ण आहार की तुलना में कम कीमत वाले, अधिक कैलोरी प्रदान करने वाले मुख्य खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देते हैं।
- आहार में असंतुलन: प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्त्वों का अपर्याप्त सेवन तथा अनाज पर अत्यधिक निर्भरता।
- मातृ पोषण की खराब स्थिति: एनीमिया का उच्च प्रसार पीढ़ी-दर-पीढ़ी कुपोषण की समस्या को बढ़ाता है।
- क्षेत्रीय एवं सामाजिक असमानताएँ: जनजातीय क्षेत्रों, दूरस्थ क्षेत्रों और शहरी गरीब जनसंख्या को अब भी पोषण संबंधी अधिक जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
- खाद्य उपभोग के बदलते प्रतिरूप: अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत ने मोटापे में वृद्धि को बढ़ावा दिया है।
खाद्य की कमी से अधिशेष तक भारत की यात्रा
- हरित क्रांति: अधिक उपज देने वाली फसल किस्मों की शुरुआत, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और सुनिश्चित कीमतों ने अनाज उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS): खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि ने बड़े पैमाने पर खाद्य वितरण और पोषण कार्यक्रमों के लिए आधार तैयार किया।
- खाद्य अधिशेष: भारत खाद्यान्न, दूध, दालों, फलों और सब्जियों के विश्व के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक बन गया है।
भारत की खाद्य सुरक्षा रूपरेखा
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013: यह ग्रामीण जनसंख्या के 75% तक और शहरी जनसंख्या के 50% तक के लोगों को रियायती खाद्यान्न प्राप्त करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है। इसके अंतर्गत लगभग 81 करोड़ लोग आते हैं।
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY): वर्ष 2024 से पात्र लाभार्थियों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। इस व्यवस्था को वर्ष 2028 तक बढ़ा दिया गया है।
- लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS): पात्र लाभार्थियों तक खाद्यान्न वितरण में सहायता करती है।
- डिजिटलीकरण: डिजिटलीकृत राशन कार्ड और आधार सीडिंग लाभार्थियों की पहचान में सुधार करने तथा वितरण में होने वाली अनियमितताओं को कम करने में सहायता करते हैं।
- एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड (ONORC): यह पात्र लाभार्थियों, विशेषकर प्रवासी श्रमिकों, को देशभर की राशन दुकानों से अपने खाद्यान्न संबंधी अधिकारों का लाभ प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
- मध्याह्न भोजन कार्यक्रम: इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी, स्थानीय निकायों द्वारा संचालित तथा सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में बच्चों की नामांकन दर, विद्यालय में बने रहने की दर और उपस्थिति बढ़ाने के साथ-साथ उनकी पोषण स्थिति में सुधार करना है।
- खाद्य सुदृढ़ीकरण: सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत फोर्टिफाइड चावल, गेहूँ के आटे और खाद्य तेलों को प्रोत्साहित करती है।
- पोषण ट्रैकर: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोषण ट्रैकर ICT एप्लिकेशन को एक प्रमुख शासन उपकरण के रूप में विकसित किया है।
- यह बच्चों की लंबाई, वजन, लिंग और आयु के आधार पर उनके बौनेपन, दुबलेपन, कम वजन तथा मोटापे का गतिशील आकलन करने के लिए WHO की विस्तारित तालिकाओं और दिन-आधारित Z-स्कोर का उपयोग करता है।
- सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0: इसमें पोषण अभियान, आंगनवाड़ी सेवाएँ और किशोरियों के लिए योजना जैसी प्रमुख योजनाएँ शामिल हैं। ये देश में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए प्रत्यक्ष एवं लक्षित हस्तक्षेप के रूप में कार्य करती हैं।
आगे की राह
- फलों, सब्जियों, दालों, मोटे अनाजों और दुग्ध उत्पादों के उत्पादन, आपूर्ति एवं उपभोग को बढ़ावा देना तथा कटाई के पश्चात होने वाली हानि को कम करना।
- सार्वजनिक नीतियों का ध्यान केवल पर्याप्त कैलोरी उपलब्ध कराने के बजाय संतुलित, विविधतापूर्ण और सूक्ष्म पोषक तत्त्वों से भरपूर आहार तक पहुँच सुनिश्चित करने पर होना चाहिए।
- एनीमिया को कम करने के लिए आयरन-फोलिक एसिड अनुपूरण का विस्तार करना, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करना और आहार में विविधता को प्रोत्साहित करना।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में पोषण शिक्षा, शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के विनियमन को एकीकृत करना।
Source: TH
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