पाठ्यक्रम: GS3/ आपदा प्रबंधन
संदर्भ
- विश्व जोखिम सर्वेक्षण 2026 की रिपोर्ट आपदा संबंधी चेतावनियाँ प्राप्त होने और उन पर कार्रवाई कर पाने की क्षमता के बीच एक बड़े अंतर को उजागर करती है।
परिचय
- विगत पाँच वर्षों में किसी आपदा का अनुभव करने वाले लगभग 80% वयस्कों को कम-से-कम एक पूर्व चेतावनी प्राप्त हुई थी। इसके बावजूद, चेतावनी प्राप्त करने वालों में से 36% लोग अपनी सुरक्षा के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर सके।
- निम्न-आय वाले देशों में उच्च-आय वाले देशों की तुलना में आपदाओं के प्रति जोखिम अधिक था और चेतावनियों तक पहुँच कम थी।
- ये निष्कर्ष पूर्वानुमान-आधारित कार्रवाई के महत्त्व को रेखांकित करते हैं।
पूर्वानुमान-आधारित कार्रवाई क्या है?
- पूर्वानुमान-आधारित कार्रवाई से आशय किसी पूर्वानुमानित खतरे के घटित होने से पहले किए जाने वाले पूर्व-सहमत उपायों से है। इसमें पूर्वानुमानों या प्रारंभिक चेतावनियों का उपयोग करके लोगों, आजीविका और अवसंरचना पर संभावित प्रभाव को कम किया जाता है।
- उदाहरण के लिए, जब बाढ़ के पूर्वानुमान से जलमग्न होने की उच्च संभावना का संकेत मिलता है, तो अधिकारी बाढ़ का जल पहुँचने से पहले ही संवेदनशील परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा सकते हैं, पशुधन को सुरक्षित स्थानों पर ले जा सकते हैं, आवश्यक वस्तुओं का वितरण कर सकते हैं और आपातकालीन धनराशि जारी कर सकते हैं।
आपदा प्रबंधन में पूर्वानुमान-आधारित कार्रवाई का महत्त्व
- जीवन एवं संपत्ति की हानि को कम करना: समय पर निकासी, अस्थायी आश्रय और पशुधन को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने से चक्रवात, बाढ़ या लू की घटना से पहले जनहानि को रोका जा सकता है तथा हानि कम की जा सकती है।
- आजीविका की सुरक्षा: गंभीर मौसम की चेतावनी मिलने पर किसान फसलों की समय से कटाई कर सकते हैं, पशुधन को सुरक्षित स्थानों पर ले जा सकते हैं और कृषि उपकरणों की सुरक्षा कर सकते हैं।
- आपदा प्रतिक्रिया की लागत में कमी: समय रहते की गई कार्रवाई से आपातकालीन बचाव, राहत और पुनर्निर्माण पर होने वाले व्यय को कम किया जा सकता है।
- संवेदनशील समुदायों की सुरक्षा: वृद्धजन, दिव्यांगजन, बच्चे, अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिक और निम्न-आय वाले परिवारों के पास चेतावनियों पर प्रतिक्रिया देने के लिए अक्सर सीमित संसाधन होते हैं।
- जलवायु अनुकूलन क्षमता को सुदृढ़ करना: जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक गर्मी, भारी वर्षा और कुछ अन्य खतरों से जुड़े जोखिम बढ़ रहे हैं। ऐसे में पूर्वानुमान-आधारित कार्रवाई समुदायों को पूर्वानुमानित घटनाओं के लिए तैयार होने में सहायता कर सकती है।
भारत में संस्थागत एवं परिचालन संबंधी बाधाएँ
- संस्थागत विखंडन: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDMAs), जिला प्रशासन, पूर्वानुमान एजेंसियों और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय की कमी के कारण कार्रवाई में देरी हो सकती है।
- अंतिम छोर तक संचार संबंधी कमियाँ: चेतावनियाँ दूरस्थ समुदायों तक उनकी समझ में आने वाली भाषाओं या सुलभ प्रारूपों में नहीं पहुँच पाती हैं।
- वित्तीय बाधाएँ: पहले से निर्धारित और उपलब्ध कराई गई धनराशि की कमी के कारण निकासी, राहत तथा आजीविका की सुरक्षा में देरी हो सकती है।
- पूर्वानुमान संबंधी अनिश्चितता: गलत चेतावनियाँ या स्थानीय स्तर पर त्रुटिपूर्ण पूर्वानुमान जनता के विश्वास को कम कर सकते हैं।
- सीमित स्थानीय क्षमता: प्रशिक्षित कर्मियों, परिवहन सुविधाओं, आश्रय स्थलों और आपातकालीन उपकरणों की कमी कार्यान्वयन को बाधित करती है।
- सामाजिक बाधाएँ: गरीबी, जागरूकता की कमी और परिवारों की सीमित तैयारी के कारण लोग चेतावनियाँ प्राप्त करने के बाद भी कार्रवाई नहीं कर पाते हैं।
बेहतर एकीकरण के लिए उपाय
- प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान को सुदृढ़ करना तथा कार्रवाई शुरू करने के लिए स्पष्ट मानदंड निर्धारित करना।
- भारत की सचेत (SACHET) चेतावनी प्रणाली को आधार बनाते हुए SMS, रेडियो, सायरन और सामुदायिक नेटवर्क के माध्यम से बहुभाषी एवं भौगोलिक क्षेत्र-विशिष्ट चेतावनियों का विस्तार करना।
- जिला एवं स्थानीय स्तर पर पूर्व-स्वीकृत आकस्मिक योजनाएँ तैयार करना तथा समर्पित धनराशि की व्यवस्था करना।
- आपदा प्रबंधन योजनाओं, कृषि, शहरी नियोजन और स्वास्थ्य सेवाओं में पूर्वानुमान-आधारित कार्रवाई को एकीकृत करना।
- स्थानीय अधिकारियों को प्रशिक्षित करना तथा पंचायतों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और सामुदायिक स्वयंसेवकों को शामिल करना।
- चेतावनियों की पहुँच, प्रतिक्रिया समय और टाली गई क्षति सहित परिणामों की निगरानी करना।
Source: DTE
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