पाठ्यक्रम: GS2/ सामाजिक न्याय
संदर्भ
- राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने महिलाओं के संपत्ति के अधिकार तथा सामाजिक और आर्थिक न्याय तक उनकी पहुँच से संबंधित विषयों पर एक परामर्श बैठक आयोजित की।
परिचय
- महिला सशक्तीकरण में महिलाओं को अपने अधिकारों का प्रयोग करने, संसाधनों तक पहुँच प्राप्त करने, स्वतंत्र निर्णय लेने तथा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन में समान रूप से भाग लेने में सक्षम बनाना शामिल है।
- महिला-नेतृत्व वाला विकास महिलाओं को केवल विकास कार्यक्रमों के लाभार्थियों के रूप में देखने के बजाय, संस्थाओं, समुदायों और अर्थव्यवस्था को आकार देने में सक्रिय भागीदारों एवं नेतृत्वकर्ताओं के रूप में मान्यता देने पर बल देता है।
वितरणात्मक न्याय बनाम क्षतिपूरक न्याय
- वितरणात्मक न्याय : यह संरचनात्मक असमानताओं को दूर करने तथा व्यक्तियों को विकास में सार्थक रूप से भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए संसाधनों, अवसरों और क्षमताओं के न्यायसंगत वितरण पर केंद्रित है।
- क्षतिपूरक न्याय : यह वर्तमान या अतीत में उत्पन्न वंचनाओं को दूर करने के लिए संरक्षणात्मक उपायों, लक्षित सहायता, कानूनी उपचारों और हुई क्षति के लिए मुआवजे पर केंद्रित है।
महिलाओं के संपत्ति अधिकारों के लिए संवैधानिक एवं कानूनी ढाँचा
- अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानूनों के समान संरक्षण की गारंटी देता है, जबकि अनुच्छेद 15 लिंग सहित विभिन्न आधारों पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है।
- अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति देता है।
- अनुच्छेद 300A प्रावधान करता है कि किसी भी व्यक्ति को विधि के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।
- हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 में वर्ष 2005 में किए गए संशोधन के माध्यम से हिंदू संयुक्त परिवार की संपत्ति में बेटियों को समान सहदायिकी अधिकार प्रदान किए गए।
- हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 और विशेष विवाह अधिनियम, 1954, भरण-पोषण तथा उत्तराधिकार से संबंधित कानूनों के साथ मिलकर, संपत्ति के अधिकारों के संबंध में महिलाओं की कानूनी स्थिति को क्रमशः सुदृढ़ करते रहे हैं।
न्यायिक हस्तक्षेप
- एयर इंडिया सांविधिक निगम बनाम यूनाइटेड लेबर यूनियन (1996): सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि प्रस्तावना तथा अनुच्छेद 38, 39 और 46 का उद्देश्य समतामूलक सामाजिक व्यवस्था स्थापित करना है। न्यायालय ने वितरणात्मक न्याय को आर्थिक व्यवस्था के पुनर्गठन के लिए एक आधारभूत संवैधानिक लक्ष्य माना।
- उपभोक्ता शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र बनाम भारत संघ (1995): सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि सामाजिक-आर्थिक न्याय और वितरणात्मक न्याय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार तथा मानवीय गरिमा के अभिन्न अंग हैं।
- विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा (2020): सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि हिंदू संयुक्त परिवार की संपत्ति में बेटियों को जन्म से ही बेटों के समान सहदायिकी अधिकार प्राप्त हैं।
प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
- पितृसत्तात्मक सामाजिक मानदंड: महिलाओं से प्रायः अपेक्षा की जाती है कि वे पुरुष रिश्तेदारों के पक्ष में अपने उत्तराधिकार के अधिकारों का त्याग कर दें। वहीं, परिवार और समुदाय का दबाव उन्हें अपने कानूनी अधिकारों का दावा करने से हतोत्साहित करता है।
- कानूनी अधिकारों और वास्तविक स्वामित्व के बीच अंतर: वैधानिक संरक्षणों का अस्तित्व अपने आप यह सुनिश्चित नहीं करता कि महिलाएँ संपत्ति और उत्पादक परिसंपत्तियों का स्वामित्व प्राप्त करें, उसे बनाए रखें या उन पर नियंत्रण स्थापित कर सकें।
- न्याय तक पहुँच में बाधाएँ: मुकदमेबाजी की लागत, प्रक्रियागत विलंब, कानूनी सहायता तक सीमित पहुँच तथा परिवार के सदस्यों पर निर्भरता महिलाओं को संपत्ति संबंधी दावे प्रस्तुत करने से रोकती है।
महिला सशक्तीकरण के लिए सरकारी पहलें
- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: इस पहल का उद्देश्य लिंग-आधारित भ्रूण चयन की समस्या का समाधान करना तथा बालिकाओं के अस्तित्व, संरक्षण और शिक्षा को बढ़ावा देना है।
- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA): विधिक सेवा ढाँचे के माध्यम से पात्र महिलाओं को न्यायालयों और अन्य कानूनी मंचों के समक्ष अपने अधिकारों के लिए प्रयास करने हेतु निःशुल्क कानूनी सहायता एवं सहयोग उपलब्ध कराया जाता है।
- मिशन शक्ति: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इस व्यापक कार्यक्रम को ‘संबल’ और ‘सामर्थ्य’ घटकों के माध्यम से लागू करता है। इसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तीकरण को सुदृढ़ करना है।
- नव्या (NAVYA—किशोर लड़कियों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी आकांक्षाओं को पोषित करना): यह पहल प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (PMKVY 4.0) के अंतर्गत 16–18 वर्ष की आयु वर्ग की किशोरियों पर केंद्रित है।
- वर्ष 2025 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के अंतर्गत युवा महिलाओं को डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सेवाओं और पर्यावरण की दृष्टि से सतत रोजगारों से परिचित कराया जाता है।
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को पहले जीवित बच्चे के लिए दो किस्तों में ₹5,000 तथा दूसरे बच्चे के लिए ₹6,000 की सहायता दी जाती है, बशर्ते दूसरा बच्चा बालिका हो।
- विज्ञान ज्योति योजना: यह योजना कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं को मार्गदर्शन, प्रयोगशालाओं से परिचय, कार्यशालाओं और व्यवस्थित सहयोग के माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित (STEM) की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करती है।
आगे की राह
- वर्तमान कानूनों का प्रभावी प्रवर्तन: संपत्ति और उत्तराधिकार से संबंधित वर्तमान कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा विवादों के समाधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- कानूनी साक्षरता को सुदृढ़ करना: स्वयं सहायता समूह (SHGs), पंचायती राज संस्थाएँ और स्थानीय विधिक सेवा प्राधिकरण मिलकर महिलाओं को उत्तराधिकार के अधिकारों, आवश्यक दस्तावेजों एवं उपलब्ध कानूनी उपायों के बारे में जागरूक कर सकते हैं।
- न्याय तक पहुँच में सुधार: कानूनी सहायता, समुदाय-स्तरीय सहयोग, सरल प्रक्रियाएँ और समयबद्ध शिकायत निवारण महिलाओं के लिए अपने अधिकारों को लागू कराना आसान बना सकते हैं।
Source: TH
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