संक्षिप्त समाचार 14-10-2026

नवनियुक्त उप निर्वाचन आयुक्त

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन

संदर्भ

  • 2010 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रकाश राजपुरोहित को भारत निर्वाचन आयोग में उप निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया गया है।

उप निर्वाचन आयुक्त (DEC)

  • परिचय: उप निर्वाचन आयुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी होता है, जो देशभर में निर्वाचन संबंधी कार्यों के प्रबंधन और पर्यवेक्षण में भारत निर्वाचन आयोग की सहायता करता है।
    • आयोग की सहायता के लिए पाँच या छह उप निर्वाचन आयुक्त तथा महानिदेशक कार्यरत होते हैं, जो सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी हैं।
  • नियुक्ति: सामान्यतः केंद्र सरकार द्वारा वरिष्ठ सिविल सेवकों को इस पद पर नियुक्त किया जाता है।
  • प्रशासनिक स्थिति: ये अधिकारी भारत निर्वाचन आयोग के समग्र पर्यवेक्षण में कार्य करते हैं और उसके निर्णयों के क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करते हैं।
  • निर्वाचन आयुक्तों से अंतर: मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्त संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत संवैधानिक पदाधिकारी हैं, जबकि उप निर्वाचन आयुक्त सहायक प्रशासनिक अधिकारी होते हैं।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI)

  • भारत निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है।
  • इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित संख्या में अन्य निर्वाचन आयुक्त शामिल होते हैं।
  • प्रमुख कार्य: आयोग मतदाता सूचियों की तैयारी का प्रबंधन करता है तथा संसद, राज्य विधानमंडलों और राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के पदों के लिए चुनाव संपन्न कराता है।
  • संविधान के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद के कानून के प्रावधानों के अधीन की जाती है।

स्रोत: TH

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन

संदर्भ

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपना 33वाँ स्थापना दिवस मनाया।

परिचय

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भारत में मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए स्थापित एक वैधानिक एवं स्वायत्त निकाय है।
  • इसकी स्थापना 12 अक्टूबर, 1993 को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत की गई थी।
    • यह अधिनियम पेरिस सिद्धांतों (1991) के अनुरूप बनाया गया था। इन सिद्धांतों में राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं की स्थिति और कार्यप्रणाली के मानक निर्धारित किए गए हैं।
  • मुख्यालय: नई दिल्ली।
  • आयोग उन अधिकारों से संबंधित मामलों पर विचार करता है, जो संविधान द्वारा प्रत्याभूत हैं अथवा अंतरराष्ट्रीय अभिसमयों में निहित हैं और भारतीय न्यायालयों द्वारा लागू किए जा सकते हैं। इनमें जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से संबंधित अधिकार शामिल हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की संरचना

  • आयोग में एक अध्यक्ष तथा मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत निर्धारित अन्य सदस्य शामिल होते हैं। इस अधिनियम में वर्ष 2019 में संशोधन किया गया था।
  • नियुक्ति: भारत के राष्ट्रपति छह सदस्यीय समिति की सिफारिश पर अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करते हैं। इस समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।
  • कार्यकाल: अध्यक्ष और सदस्य तीन वर्ष या 70 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से जो भी पहले हो, पद पर बने रहते हैं।
    • अधिनियम के प्रावधानों के अधीन उन्हें पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र माना जाता है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रमुख कार्य

  •  जाँच एवं अन्वेषण: आयोग मानवाधिकारों के उल्लंघन तथा लोक सेवकों द्वारा ऐसे उल्लंघनों को रोकने में की गई लापरवाही की जाँच स्वयं या याचिका प्राप्त होने पर करता है।
    • न्यायालय की अनुमति से मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप कर सकता है।
    • बंदियों की परिस्थितियों की निगरानी के लिए जेलों और सरकार के नियंत्रणाधीन अन्य संस्थानों का दौरा करता है।
  • संवर्धन एवं जागरूकता: शैक्षिक कार्यक्रमों, संगोष्ठियों और अन्य जनसंपर्क पहलों के माध्यम से मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाता है।
  • अनुसंधान एवं सिफारिशें: संविधान के अंतर्गत मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध प्रावधानों की समीक्षा करता है और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के उपाय सुझाता है।
    • दोषी लोक सेवकों के विरुद्ध मुआवजा देने अथवा अभियोजन चलाने की सिफारिश कर सकता है।
    • आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय का रुख कर सकता है।
  •  अन्य प्रमुख कार्य: आयोग न्यायालयों या सरकारी कार्यालयों से सार्वजनिक अभिलेख और उनकी प्रतियाँ मँगवा सकता है।
    • यह केंद्र और राज्य सरकारों को वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है।
    • सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार-क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों और संरक्षण गृहों के कामकाज की निगरानी करता है।

स्रोत: AIR

बिम्सटेक की दिल्ली घोषणा

पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध

संदर्भ

  • भारत ने नई दिल्ली में प्रथम बार बिम्सटेक के गृह मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की। इस बैठक का समापन दिल्ली घोषणा को अपनाने के साथ हुआ।

दिल्ली घोषणा

  • घोषणा में आतंकवाद, जिसमें सीमापार आतंकवाद भी शामिल है, की निंदा की गई।
  • आतंकवाद के वित्तपोषण, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और धन शोधन के विरुद्ध क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने का आह्वान किया गया।

बिम्सटेक क्या है?

  • पूर्ण नाम: बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल (BIMSTEC)।
  • बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी के तटीय और उससे सटे क्षेत्रों में स्थित सात सदस्य देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1997 में बैंकॉक घोषणा पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी।
  • यह बंगाल की खाड़ी से लगे दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को एक साझा मंच पर लाता है।
  • उद्देश्य: सदस्य देशों की आर्थिक वृद्धि में सहायता करना।
    • सामाजिक विकास को बढ़ावा देना।
    • विज्ञान, प्रौद्योगिकी और आर्थिक विकास सहित अन्य क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करना।
  • बिम्सटेक के सदस्य देश: संस्थापक सदस्य: बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड।
  • वर्तमान सदस्य (7): बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्याँमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड।
  • जनसंख्या एवं अर्थव्यवस्था: बिम्सटेक क्षेत्र में लगभग 1.7 अरब लोग रहते हैं, जो विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 22% है। इस क्षेत्र का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद लगभग 5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर है।
  • सचिवालय: ढाका, बांग्लादेश।

स्रोत: TH

दीर्घकालिक पूँजीगत लाभ कर पर परिचर्चा

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • दीर्घकालिक पूँजीगत लाभ कर को लेकर एक बार पुनः परिचर्चा तीव्र हो गई है। निवेशक, वित्तीय बाजार और अर्थशास्त्री इस प्रश्न पर विचार कर रहे हैं कि यह कर पूँजी निर्माण को प्रोत्साहित करता है या बाधित।

दीर्घकालिक पूँजीगत लाभ कर क्या है?

  • यह किसी पूँजीगत परिसंपत्ति को निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रखने के बाद बेचने पर प्राप्त लाभ पर लगाया जाने वाला कर है। सूचीबद्ध इक्विटी के लिए यह अवधि 12 महीने तथा संपत्ति और असूचीबद्ध शेयरों के लिए 24 महीने है।
  • वर्तमान कर व्यवस्था (बजट 2024): सूचीबद्ध इक्विटी से प्राप्त दीर्घकालिक पूँजीगत लाभ पर ₹1.25 लाख वार्षिक सीमा से अधिक की राशि पर 12.5% कर लगाया जाता है। पहले यह दर ₹1 लाख से अधिक के लाभ पर 10% थी। अल्पकालिक पूँजीगत लाभ पर 20% कर लगाया जाता है।
  • मुद्रास्फीति समायोजन की समाप्ति: संपत्ति और अन्य परिसंपत्तियों से प्राप्त लाभ पर मुद्रास्फीति समायोजन के बिना 12.5% की एकसमान दर से कर लगाया जाता है। 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई संपत्ति के मामले में निवासी व्यक्ति पुराने प्रावधान के अंतर्गत मुद्रास्फीति समायोजन सहित 20% कर की दर का विकल्प चुन सकते हैं।
  • इक्विटी पर कर का इतिहास: वर्ष 2018 तक इक्विटी से प्राप्त दीर्घकालिक पूँजीगत लाभ कर-मुक्त था। वर्ष 2018 में इस पर 10% कर लगाया गया, जबकि शेयरों के लेन-देन पर प्रतिभूति लेन-देन कर (STT) पहले से लगाया जा रहा था।

दीर्घकालिक पूँजीगत लाभ कर में कमी या युक्तिसंगत बदलाव के पक्ष में तर्क

  • दोहरा कराधान: पूँजीगत लाभ ऐसी कंपनियों के लाभ से उत्पन्न होता है, जिन पर पहले ही निगमित आयकर लगाया जा चुका होता है। इसके अतिरिक्त प्रतिभूति लेन-देन कर भी लगाया जाता है। इस प्रकार निवेशकों पर कराधान की तीन परतों का भार पड़ता है।
  • दीर्घकालिक निवेश को हतोत्साहित करना: कर की ऊँची दर से कर कटौती के बाद प्राप्त प्रतिफल कम हो जाता है और लंबे समय तक इक्विटी में निवेश बनाए रखने की प्रेरणा कमजोर पड़ती है। यह स्थिति विशेष रूप से तब महत्त्वपूर्ण है, जब घरेलू बचत सोने और अचल संपत्ति से निकलकर वित्तीय परिसंपत्तियों की ओर स्थानांतरित हो रही है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता: सिंगापुर, हांगकांग और संयुक्त अरब अमीरात में इक्विटी पर पूँजीगत लाभ कर नहीं लगाया जाता। इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक इन बाजारों की ओर आकर्षित हो सकते हैं, जिससे भारत से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की निकासी बढ़ सकती है।

स्रोत: TH

सोयाबीन की उन्नत किस्में—एनआरसी 268 और एनआरसी 270

पाठ्यक्रम: GS3/कृषि

संदर्भ

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत इंदौर स्थित राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान ने सोयाबीन की उन्नत किस्मों एनआरसी 268 और एनआरसी 270 की उपज क्षमता का प्रदर्शन किया।

प्रमुख बिंदु

  • दोनों किस्मों से लगभग 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त हुई है। अनुकूल परिस्थितियों में इनकी उपज 22–25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुँचने की संभावना है।
  • एनआरसी 270: इस किस्म के बीज आकार में बड़े और अधिक वजनी होते हैं, जिससे बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है।
  • इन किस्मों को अनियमित वर्षा, शुष्क अवधि, कीटों और रोगों का बेहतर ढंग से सामना करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

भारत में सोयाबीन का उत्पादन

  • सोयाबीन (ग्लाइसिन मैक्स) दलहनी कुल (फैबेसी) का पौधा है। यह खरीफ की एक महत्त्वपूर्ण तिलहनी फसल है, जिसकी खेती मुख्यतः दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान की जाती है।
  • मध्य प्रदेश भारत का प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्य है, जिसके बाद महाराष्ट्र का स्थान है।
  • सोयाबीन गर्म जलवायु में अच्छी तरह उगता है और इसके लिए मृदा में पर्याप्त आर्द्रता आवश्यक होती है।
  • सोयाबीन एक दलहनी फसल है, जिसकी जड़ों की ग्रंथिकाओं में राइजोबियम जीवाणुओं के साथ सहजीवी संबंध बनता है।
  • सरकार सोयाबीन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी घोषित करती है, जबकि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद उत्पादकता और प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति सहनशीलता बढ़ाने के लिए उन्नत किस्में विकसित करती है।

स्रोत: PIB

‘नामेरी वन्य प्रकृति अध्ययनशाला’ पहल

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • असम के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से प्रकृति से जोड़ने के उद्देश्य से नामेरी बाघ अभयारण्य में ‘नामेरी वन्य प्रकृति अध्ययनशाला’ पहल आरंभ की।

पहल के बारे में

  • यह आवासीय पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत नामेरी बाघ अभयारण्य में दो और तीन दिवसीय क्षेत्रीय अध्ययन शिविर आयोजित किए जाते हैं।
  • इसका उद्देश्य कक्षा 8 और उससे ऊपर के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, पर्यावरण के प्रति जागरूकता तथा वन्यजीव संरक्षण के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है।
  • इस पहल के अंतर्गत पक्षी-दर्शन, जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी तंत्र की समझ और वनवासी समुदायों की पारंपरिक प्रथाओं का अध्ययन जैसी गतिविधियाँ कराई जाती हैं।

नामेरी बाघ अभयारण्य के बारे में

  • यह असम के सोनितपुर जिले में पूर्वी हिमालय की तलहटी में स्थित है।
  • जिया-भराली नदी इस क्षेत्र से होकर बहती है। अरुणाचल प्रदेश में इसी नदी को कामेंग नदी के नाम से जाना जाता है।
  • सितंबर 2026 में नामेरी बाघ अभयारण्य को बाघ संरक्षण और संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन के निर्धारित मानकों को पूरा करने के लिए संरक्षण आश्वस्तता एवं बाघ मानक (CA|TS) के अंतर्गत स्वीकृत दर्जा प्राप्त हुआ।
  • CA|TS एक वैश्विक रूपरेखा है, जिसका उपयोग बाघ अभयारण्यों के प्रबंधन और संरक्षण की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए किया जाता है।
  • इसे वर्ष 2013 में जापान में आयोजित प्रथम एशियाई उद्यान कांग्रेस में आरंभ किया गया था।

स्रोत: TH

दक्षिण कोरिया द्वारा स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन का परीक्षण 

पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा

संदर्भ

  • दक्षिण कोरिया ने अपने देश में विकसित पहले हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (HGV) का सफल परीक्षण किया है। कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ते तनाव के बीच यह उसकी नई उच्च गति वाली आक्रमण क्षमता विकसित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

हाइपरसोनिक अस्त्र क्या हैं?

  • हाइपरसोनिक अस्त्र ऐसी प्रणालियाँ हैं, जो ध्वनि की गति से कम-से-कम पाँच गुना अधिक गति अर्थात् मैक 5 या उससे अधिक गति से चलती हैं।
  • इन्हें मुख्यतः दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
    • हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (HGV): रॉकेट प्रणोदक इन्हें अधिक ऊँचाई तक पहुँचाते हैं। इसके बाद ये अलग होकर हाइपरसोनिक गति से अपने लक्ष्य की ओर फिसलते हुए आगे बढ़ते हैं और उड़ान के दौरान अपनी दिशा में बदलाव कर सकते हैं।
    • हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें: ये स्क्रैमजेट जैसे उच्च गति वाले वायु-श्वसन इंजनों से संचालित होती हैं। ये वायुमंडल के अंदर हाइपरसोनिक गति बनाए रख सकती हैं तथा कम ऊँचाई पर उड़ते हुए अपनी दिशा बदल सकती हैं।

क्या आप जानते हैं?

  • भारत के हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों में निम्नलिखित शामिल हैं:
    • हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक वाहन (HSTDV): इसने लगभग मैक 6 की गति से उड़ान का प्रदर्शन किया है।
    • प्रस्तावित ब्रह्मोस-II: इसे लगभग मैक 7 की गति प्राप्त करने के उद्देश्य से विकसित करने की योजना है।

स्रोत: TOI

 

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