बहामास ISA में सम्मिलित
पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संगठन
संदर्भ
- बहामास अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का 116वाँ सदस्य बन गया है।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) क्या है?
- ISA का संयुक्त रूप से शुभारंभ भारत और फ्रांस द्वारा वर्ष 2015 में पेरिस में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) के पक्षकारों के 21वें सम्मेलन (COP21) के अवसर पर किया गया था।
- इसका मुख्यालय गुरुग्राम, हरियाणा में स्थित है।
- इस गठबंधन का उद्देश्य अपनी ‘टुवर्ड्स 1000’ रणनीति के माध्यम से वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा को अपनाने की प्रक्रिया में तीव्रता लाना है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:
- वर्ष 2030 तक सौर ऊर्जा समाधानों में 1,000 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश जुटाना।
- 1,000 गीगावाट (GW) सौर ऊर्जा क्षमता की स्थापना को सुगम बनाना।
- 1,000 मिलियन लोगों तक स्वच्छ ऊर्जा की पहुँच सुनिश्चित करना।
- वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में प्रतिवर्ष 1,000 मिलियन टन की कमी लाने में सहायता करना।
- प्रारंभ में इसका ध्यान कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच स्थित देशों पर केंद्रित था। हालाँकि, वर्ष 2020 में इसके रूपरेखा समझौते में संशोधन के बाद ISA ने संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के लिए अपनी सदस्यता खोल दी।
स्रोत: AIR
‘गिरफ्तारी’, ‘हिरासत’ और 24 घंटे की समय-सीमा पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी
पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था
संदर्भ
- सुजीत दास एवं अन्य बनाम भारत संघ (2026) मामले में सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने निर्णय दिया कि गिरफ्तार व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करने की 24 घंटे की समय-सीमा हिरासत में लिए जाने के वास्तविक समय से शुरू होती है, न कि गिरफ्तारी को औपचारिक रूप से दर्ज किए जाने के समय से।
सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय
- न्यायालय ने कहा कि ‘गिरफ्तारी’ और ‘हिरासत’ के बीच कृत्रिम अंतर स्थापित करने का कोई भी प्रयास संविधान के अनुच्छेद 22 के खंड (2) के अंतर्गत प्रदत्त मौलिक संरक्षण को कमजोर या निष्प्रभावी कर देगा।
- न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि 24 घंटे की समय-सीमा की गणना करते समय, गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक पहुँचने में लगने वाले आवश्यक यात्रा समय के अतिरिक्त किसी अन्य समय को इसमें से बाहर नहीं रखा जा सकता।
- न्यायालय ने माना कि स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act), 1985 की धारा 37 के अंतर्गत निर्धारित कठोर जमानत शर्तें अनुच्छेद 21 और 22 के अंतर्गत प्रदत्त मौलिक अधिकारों को निष्प्रभावी नहीं कर सकतीं।
संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधान
- अनुच्छेद 22(2): इसके अंतर्गत प्रत्येक गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है। इसमें गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक पहुँचने में लगने वाला आवश्यक यात्रा समय शामिल नहीं होता।
- मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना किसी भी व्यक्ति को इस अवधि से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
- अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार): यह गारंटी देता है कि किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित किया जा सकता है।
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 58: यह पुलिस अधिकारी को बिना वारंट गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक पहुँचने में लगने वाले आवश्यक यात्रा समय को छोड़कर 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखने से प्रतिबंधित करती है।
- इसके अंतर्गत यह भी आवश्यक है कि 24 घंटे की सीमा के अंदर भी हिरासत मामले की परिस्थितियों के अनुरूप उचित बनी रहे।
स्रोत: IE
अनुभव प्लेटफॉर्म
पाठ्यक्रम: GS2/शासन व्यवस्था
समाचारों में
- भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने ‘नेटवर्क अनुभव’ की शुरुआत की।
अनुभव प्लेटफॉर्म
- यह एक भू-स्थानिक एवं विश्लेषणात्मक प्लेटफॉर्म है, जो उपभोक्ताओं को वेब इंटरफेस के माध्यम से स्थान-विशिष्ट नेटवर्क परीक्षण परिणाम देखने और ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ (DND) सेवाओं का उपयोग करने की सुविधा प्रदान करता है।
- यह ट्राई का माईस्पीड और माईकॉल ऐप से प्राप्त उपभोक्ताओं द्वारा उत्पन्न डेटा तथा इसके स्वतंत्र ड्राइव परीक्षणों के निष्कर्षों को एक साथ प्रस्तुत करता है। इससे उपयोगकर्ताओं, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और नियामक को आवश्यक जानकारी प्राप्त होती है।
- यह प्लेटफॉर्म उपभोक्ताओं को सेवा प्रदाता और प्रौद्योगिकी के आधार पर सेलुलर तथा फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के परीक्षण परिणाम देखने की सुविधा देता है। इसमें डाउनलोड और अपलोड की गति भी शामिल है।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI)
- यह TRAI अधिनियम, 1997 के अंतर्गत स्थापित एक स्वतंत्र वैधानिक निकाय है।
- यह पारदर्शी विनियमन, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ता संरक्षण और दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र के सुव्यवस्थित विकास को प्रोत्साहन देने के लिए दूरसंचार, प्रसारण एवं केबल टेलीविजन क्षेत्रों का विनियमन करता है।
- यह एक नियामक प्राधिकरण है, न कि प्रत्यक्ष उपभोक्ता सेवाएँ प्रदान करने वाली संस्था।
- व्यक्तिगत सेवा संबंधी समस्याओं के लिए उपभोक्ताओं को निर्धारित शिकायत एवं शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से अपने लाइसेंस प्राप्त सेवा प्रदाता से संपर्क करना चाहिए।
स्रोत: DD
व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) योजना
पाठ्यक्रम: GS3/अवसंरचना
संदर्भ
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए एक नई व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) योजना को स्वीकृति दी है। इसके लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 17,500 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है।
परिचय
- इस योजना के अंतर्गत सरकार 92 गीगावाट-घंटा (GWh) की ऊर्जा भंडारण क्षमता को बढ़ावा देने की योजना बना रही है।
- इसमें से 30 GWh बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS), 60 GWh पंपित जलविद्युत भंडारण (PHP) और शेष 2 GWh उभरती हुई भंडारण प्रणाली प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित होंगे।
- इस योजना से देश की वर्तमान ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण प्रणाली की क्षमता के 170% के बराबर नई भंडारण क्षमता को समर्थन मिलने की संभावना है।
- वर्तमान में भारत के पास लगभग 54 GWh की ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता है और वर्ष 2031-32 तक इसे बढ़ाकर 411 GWh करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- ऊर्जा भंडारण क्षमता का आवंटन टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।
- इस योजना के अंतर्गत BESS परियोजनाओं के लिए न्यूनतम 40% घरेलू सामग्री आवश्यकता (DCR) लागू होगी।
- इस आवश्यकता का उद्देश्य स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देना, आयातित घटकों पर निर्भरता कम करना और भारतीय उद्योग के लिए अवसर सृजित करना है।
BESS और PHP
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS): यह एक ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकी है, जिसमें विद्युत को रासायनिक रूप से संग्रहित किया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर पुनः उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
- लिथियम-आयन बैटरियाँ, विशेष रूप से लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरियाँ, वर्तमान में ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण के लिए प्रमुख प्रौद्योगिकी हैं। इसका कारण इनकी घटती लागत, उच्च दक्षता और लंबी परिचालन अवधि है।
- पंपित जलविद्युत भंडारण (PHP): इसमें अतिरिक्त विद्युत का उपयोग करके जल को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय तक पंप किया जाता है।
- जब विद्युत की माँग अपने उच्चतम स्तर पर पहुँचती है, तब संग्रहित जल को टर्बाइनों के माध्यम से नीचे छोड़ा जाता है, जिससे विद्युत उत्पादन होता है।
महत्त्व
- भारत द्वारा अपने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का तीव्र गति से विस्तार किए जाने के कारण ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती जा रही हैं।
- ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ उच्च उत्पादन की अवधि के दौरान अतिरिक्त नवीकरणीय विद्युत का भंडारण कर सकती हैं और उस समय इसे उपलब्ध करा सकती हैं, जब विद्युत की माँग बढ़ जाती है, लेकिन विद्युत उत्पादन कम रहता है।
स्रोत: IE
प्रलय मिसाइल
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
संदर्भ
- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ का सफल उड़ान परीक्षण किया।
प्रलय मिसाइल के बारे में
- विकास: इसका विकास हैदराबाद स्थित अनुसंधान केंद्र इमारत ने DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर किया है।
- प्रकृति: यह स्वदेशी रूप से विकसित, ठोस प्रणोदक आधारित, अर्ध-बैलिस्टिक, सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल है।
- मारक क्षमता एवं पेलोड: इसकी मारक क्षमता पेलोड के भार के आधार पर लगभग 150 से 500 किमी तक है। यह 350 किमी की दूरी तक 1,000 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकती है, जबकि 500 किलोग्राम का हल्का पेलोड इसकी मारक क्षमता को बढ़ाकर लगभग 500 किमी कर देता है।
- गतिशीलता: इसे सड़क पर चलने वाले मोबाइल लॉन्चर से प्रक्षेपित किया जा सकता है, जिससे परिचालन संबंधी लचीलापन मिलता है और इसे तेजी से तैनात करना संभव होता है।
- परमाणु क्षमता: प्रलय को मुख्य रूप से पारंपरिक आयुध से सुसज्जित सामरिक मिसाइल के रूप में विकसित किया गया है।
- प्रलय भारत के वर्तमान मिसाइल भंडार की पूरक है, जिसमें ब्रह्मोस और प्रहार जैसी मिसाइलें शामिल हैं। यह दूर से किए जाने वाले मिसाइल हमलों की भारत की क्षमता को और सुदृढ़ करती है।
स्रोत: AIR
CERT-In ने एजेंटिक AI प्रणालियों के लिए सुरक्षा दिशानिर्देश जारी
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी/साइबर सुरक्षा
संदर्भ
- भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) ने ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सुरक्षा लेखा-परीक्षण दिशानिर्देश: सुरक्षित, नैतिक एवं लेखा-परीक्षण योग्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों के लिए रूपरेखा’ जारी की है।
एजेंटिक AI के बारे में
- एजेंटिक AI से तात्पर्य ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों से है, जो सीमित मानवीय हस्तक्षेप के साथ निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र रूप से योजना बना सकती हैं, निर्णय ले सकती हैं तथा कई चरणों वाले कार्यों को पूरा कर सकती हैं।
- परंपरागत AI प्रणालियाँ मुख्य रूप से उपयोगकर्ता के निर्देशों का उत्तर देती हैं, जबकि एजेंटिक AI निम्नलिखित कार्य कर सकती है:
- स्वायत्त कार्य निष्पादन: किसी कार्य को पूरा करने के लिए स्वतंत्र रूप से कई चरणों का निष्पादन करना।
- उपकरणों का एकीकरण: बाहरी सॉफ्टवेयर, डेटाबेस और एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (APIs) तक पहुँच बनाना तथा कोड निष्पादित करना।
- दीर्घकालिक स्मृति: विगत संवादों और कार्यों से प्राप्त जानकारी को बनाए रखना।
- कार्य प्रत्यायोजन: अन्य AI एजेंटों या प्रणालियों को कार्य सौंपना।
CERT-In दिशानिर्देशों के प्रमुख प्रावधान
- इस रूपरेखा में यह परीक्षण करने का प्रावधान है कि क्या कोई AI एजेंट अपने अधिकृत अधिकारों की सीमा से आगे जा सकता है, बिना अनुमति उपकरणों का उपयोग कर सकता है, अनुमोदन तंत्र को दरकिनार कर सकता है अथवा अपने अभिप्रमाणन विवरणों का दुरुपयोग कर सकता है।
- इसमें कार्यों का असुरक्षित प्रत्यायोजन तथा आपातकालीन रोक तंत्र की प्रभावशीलता भी ऐसे क्षेत्र बताए गए हैं, जिनकी लेखा-परीक्षकों को जाँच करनी चाहिए।
- यह एजेंट की स्मृति तथा विगत संवादों या कार्यों से उसके द्वारा सुरक्षित रखी गई जानकारी से जुड़े जोखिमों को भी संबोधित करता है।
- इसमें यह परीक्षण करने की आवश्यकता बताई गई है कि क्या इस स्मृति के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है और क्या एक उपयोगकर्ता की जानकारी दूसरे उपयोगकर्ता तक लीक हो सकती है।
- यह रूपरेखा उन प्रणालियों को भी अलग से संबोधित करती है, जिनमें कई AI एजेंट मिलकर काम करते हैं और एक-दूसरे को कार्य सौंपते हैं।
- इसमें प्रत्येक एजेंट की विशिष्ट पहचान तथा स्पष्ट रूप से परिभाषित अनुमतियाँ सुनिश्चित करने का प्रावधान है।
- कार्य प्रत्यायोजन पर नियंत्रण: संगठनों के पास ऐसे नियंत्रण होने चाहिए, जो कार्यों के बार-बार प्रत्यायोजन, अनियंत्रित रूप से नए कार्यों के निर्माण तथा ऐसी चक्रीय प्रक्रियाओं का पता लगा सकें और उन्हें सीमित कर सकें, जिनमें एजेंट एक-दूसरे को निरंतर कार्य सौंपते रहते हैं।
- लेखा-परीक्षण अभिलेख: दिशानिर्देश ऐसे अभिलेखों को बनाए रखने का प्रावधान करते हैं, जिनकी सहायता से लेखा-परीक्षक बहु-एजेंट प्रणाली में घटित घटनाओं का पुनर्निर्माण कर सकें।
- आपातकालीन नियंत्रण: उच्च जोखिम वाली प्रणालियों के लिए इस रूपरेखा में किसी एक एजेंट अथवा संपूर्ण कार्यप्रवाह को निलंबित करने तथा उसकी पहुँच संबंधी अभिप्रमाणन जानकारी को रद्द करने की क्षमता का भी प्रावधान है।
- दिशानिर्देश संगठनों को उत्पादन में उपयोग की जाने वाली AI प्रणालियों के घटकों की सूची बनाए रखने के लिए भी कहते हैं। इसमें मॉडल, प्रशिक्षण डेटा, सॉफ्टवेयर तथा बाहरी उपकरण शामिल हैं।
स्रोत: TH
मालाबार ट्री टोड
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण, समाचारों में प्रजातियाँ
समाचारों में
- मालाबार ट्री टोड को आधिकारिक रूप से कर्नाटक का राज्य उभयचर घोषित किया गया है।
मालाबार ट्री टोड
- इसे ‘मलेनाडिना मारा गांटिकप्पे’ के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खोज वर्ष 1876 में हुई थी।
- आवास: यह अर्ध-वृक्षवासी प्रजाति है, जो सामान्यतः लैटेराइट पठारों पर स्थित पर्वतीय आर्द्र सदाबहार वनों में पाई जाती है।
- वितरण: यह भारत के पश्चिमी घाट की स्थानिक प्रजाति है, जहाँ इसका वितरण क्षेत्र अत्यधिक खंडित है।
- यह केरल, गोवा, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्यों में पाई जाती है।
- विशेषताएँ: यह विश्व की उन टोड प्रजातियों में से एक है, जो पेड़ों पर चढ़ सकती है।
- अन्य उभयचरों के विपरीत, इसका प्रजनन चक्र मानसून के आगमन से पूर्व मार्च से जून तक होता है।
- पारिस्थितिक भूमिका: यह सदाबहार वनों के स्वास्थ्य का आकलन करने वाली एक महत्त्वपूर्ण संकेतक प्रजाति भी है।
- संरक्षण स्थिति: यह एक उभयचर प्रजाति है, जिसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची II के अंतर्गत सूचीबद्ध किया जाना है।
- IUCN की संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची में इसे ‘कम चिंताजनक’ श्रेणी में रखा गया है।
- कर्नाटक देश का प्रथम ऐसा राज्य बन गया है, जिसने आधिकारिक रूप से राज्य उभयचर घोषित किया है।
क्या आप जानते हैं?
- केरल ने पर्पल फ्रॉग (जिसे स्थानीय रूप से महाबली या पिग-नोज्ड फ्रॉग के नाम से जाना जाता है) को अपना राज्य उभयचर घोषित किया था, लेकिन इसे अभी तक आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है। इस प्रकार, मालाबार ट्री टोड यह सम्मान प्राप्त करने वाला देश का पहला आधिकारिक राज्य उभयचर बन गया है।
- कर्नाटक के अब तक घोषित राज्य प्रतीक :
- राजकीय पशु: हाथी
- राजकीय वृक्ष: चंदन
- राजकीय पक्षी: इंडियन रोलर
- राजकीय तितली: सदर्न बर्ड विंग
- राजकीय पुष्प: कमल
- राजकीय मछली: कार्नेटिक कार्प
- राजकीय फल: आम
स्रोत:IE
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संक्षिप्त समाचार 06-11-2026