वर्ष 2030 तक अंतरिक्ष को मलबा-मुक्त बनाने की दिशा में भारत के प्रयास

पाठ्यक्रम: GS3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ने वर्ष 2030 तक अंतरिक्ष को मलबा-मुक्त बनाने का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। इसके साथ ही, उन्होंने हैदराबाद में कॉस्मोसर्व स्पेस द्वारा स्थापित अंतरिक्ष रोबोटिक्स सुविधा ‘बेस 1’ का उद्घाटन किया।

अंतरिक्ष मलबा क्या है?

  • अंतरिक्ष मलबे से तात्पर्य पृथ्वी की कक्षा में उपस्थित या पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर रही सभी गैर-कार्यात्मक मानव निर्मित वस्तुओं से है। इसमें उनके टुकड़े और अन्य घटक भी शामिल हैं।
  • केसलर सिंड्रोम : यह एक सैद्धांतिक परिदृश्य है, जिसमें निम्न पृथ्वी कक्षा में कृत्रिम वस्तुओं के बीच टक्करों की एक शृंखलाबद्ध प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप अंतरिक्ष मलबे की मात्रा तीव्रता से बढ़ती है और लंबे समय तक पृथ्वी के निकटवर्ती अंतरिक्ष का उपयोग असंभव हो सकता है।

अंतरिक्ष मलबे के खतरे

  • उच्च कक्षीय वेग: नासा के अनुसार, अंतरिक्ष मलबा 18,000 मील प्रति घंटे तक की गति से यात्रा कर सकता है, जो एक गोली की गति से 10 गुना अधिक है।
  • टक्कर का जोखिम: अत्यधिक गति से चलने वाला मलबा कार्यरत उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों से टकरा सकता है। इससे महत्त्वपूर्ण प्रणालियाँ क्षतिग्रस्त हो सकती हैं या पूरी तरह काम करना बंद कर सकती हैं।
  • मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए खतरा: इससे अंतरिक्ष यानों और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) सहित अन्य अंतरिक्ष स्टेशनों पर वर्तमान अंतरिक्ष यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ जाता है।
  • आर्थिक हानि: इससे उपग्रहों के प्रतिस्थापन, मरम्मत, बीमा और अंतरिक्ष अभियानों की लागत बढ़ सकती है।

अंतरिक्ष मलबे से संबंधित अंतरराष्ट्रीय समझौते

  • अंतरिक्ष दायित्व अभिसमय, 1972 : यह अंतरिक्ष वस्तु से किसी प्रकार की क्षति होने की स्थिति में उत्तरदायित्व निर्धारित करता है।
    • इस संधि के अनुसार, “प्रक्षेपण करने वाला राज्य अपनी अंतरिक्ष वस्तुओं द्वारा पृथ्वी की सतह पर या विमान को पहुँचाई गई क्षति के लिए पूर्णतः उत्तरदायी होगा।” इसके अतिरिक्त, अंतरिक्ष में अपनी गलती के कारण होने वाली क्षति के लिए भी वह उत्तरदायी होगा।
  • शून्य मलबा चार्टर : यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और यूरोपीय संघ की अंतरिक्ष परिषद की बैठक में 12 देशों तथा ESA ने शून्य मलबा चार्टर पर हस्ताक्षर किए हैं।
    • इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक अंतरिक्ष में मलबा-निरपेक्ष स्थिति प्राप्त करना है।

अंतरिक्ष मलबा प्रबंधन की दिशा में भारत की पहलें

  • सक्रिय मलबा निष्कासन (ADR): भारत गैर-कार्यात्मक उपग्रहों और अन्य मलबे को कक्षा से पकड़कर हटाने के लिए स्वदेशी क्षमताओं का विकास कर रहा है।
  • परियोजना नेत्र : अंतरिक्ष वस्तुओं की निगरानी और विश्लेषण के लिए नेटवर्क (NETRA) एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली है, जिसे ISRO ने भारतीय उपग्रहों के लिए अंतरिक्ष संबंधी खतरों का पता लगाने में सहायता हेतु शुरू किया है।
    • इस परियोजना से भारत को अपनी स्वतंत्र अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता (SSA) क्षमता विकसित करने में सहायता मिलने की संभावना है। ऐसी क्षमता अन्य अंतरिक्ष शक्तियों के पास पहले से विद्यमान है।
    • SSA का उपयोग भारतीय उपग्रहों के लिए अंतरिक्ष मलबे से उत्पन्न खतरों का पूर्वानुमान लगाने हेतु किया जाता है।
  • ISRO सुरक्षित एवं सतत परिचालन प्रबंधन प्रणाली (IS4OM): इसकी स्थापना वर्ष 2022 में की गई थी। इसका उद्देश्य टक्कर का खतरा उत्पन्न करने वाली वस्तुओं की निरंतर निगरानी करना और अंतरिक्ष मलबे से उत्पन्न जोखिम को कम करना है।
  • मिशन EMBRACE: यह भारतीय स्टार्टअप कॉस्मोसर्व स्पेस का वर्ष 2026 का अंतरिक्ष मिशन था। इसके अंतर्गत स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट पर विश्व की प्रथम कक्षा में कार्यरत सॉफ्ट रोबोटिक कैप्चर प्रणाली का परीक्षण किया गया।
    •  हालाँकि, अंतरिक्ष की परिस्थितियों में संभावित यांत्रिक समस्या के कारण रोबोटिक पंखुड़ियाँ अपेक्षा के अनुरूप खुलने में विफल रहीं।

अंतरिक्ष मलबे को हटाने में चुनौतियाँ

  • उच्च लागत: मलबा हटाने वाले अभियानों के विकास और तैनाती में पर्याप्त वित्तीय एवं तकनीकी निवेश की आवश्यकता होती है।
  • नियामक संबंधी मुद्दे: बाह्य अंतरिक्ष संधि के अंतर्गत अंतरिक्ष वस्तुएँ अपने प्रक्षेपण करने वाले राज्यों के अधिकार क्षेत्र और नियंत्रण में रहती हैं। इससे उनकी सहमति के बिना उन्हें हटाना जटिल हो जाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय समन्वय: अंतरिक्ष मलबे को हटाने के लिए सार्वभौमिक रूप से बाध्यकारी और प्रवर्तनीय मानकों की कमी के कारण समन्वय संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।
  • द्वि-उपयोग संबंधी चिंताएँ: मलबा हटाने के लिए उपयोग की जाने वाली प्रौद्योगिकियों का उपयोग उपग्रह-रोधी गतिविधियों के लिए भी किया जा सकता है। इससे सुरक्षा संबंधी चिंताएँ बढ़ती हैं।

आगे की राह

  • रोबोटिक पकड़, स्वायत्त नौवहन और उपग्रहों की सर्विसिंग संबंधी प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी अनुसंधान को सुदृढ़ करना चाहिए।
  • उत्तरदायी उपग्रह निपटान और सक्रिय मलबा निष्कासन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित मानकों का विकास करना चाहिए।
  • संयुक्त राष्ट्र की बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग संबंधी समिति (COPUOS) के अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए।
  • भविष्य में अंतरिक्ष मलबे के निर्माण को न्यूनतम करने के लिए ‘डिज़ाइन फॉर डिमाइज़’ (वायुमंडलीय पुनः प्रवेश के दौरान उपग्रह के नष्ट होने के अनुरूप अभिकल्पना), मिशन-पश्चात निपटान और कक्षा से बाहर निकालने वाली प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

स्रोत: PIB

 

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