पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- भारत की बढ़ती कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) संबंधी महत्त्वाकांक्षाओं, इंडियाAI मिशन और AI इम्पैक्ट समिट ने स्वदेशी अनुसंधान क्षमताओं के विकास तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने की आवश्यकता पर नई बहस को जन्म दिया है।
वैश्विक AI परिदृश्य को समझना
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अनुसंधान में व्यापक रूप से दस परस्पर संबद्ध क्षेत्र शामिल हैं: आधारभूत मॉडल, तर्क क्षमता, AI एजेंट, बहुआयामी AI, AI सुरक्षा, रोबोटिक्स, विज्ञान के लिए AI, विशिष्ट हार्डवेयर, डेटा एवं अधिगम विधियाँ तथा AI शासन।
- वैश्विक AI परिदृश्य मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख पक्षों द्वारा आकार ले रहा है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका: आधारभूत मॉडल, तर्क क्षमता, AI एजेंट, सुरक्षा, विज्ञान के लिए AI और उन्नत हार्डवेयर के क्षेत्र में अग्रणी है। इसके नेतृत्व को बड़े पैमाने पर निजी निवेश, उन्नत संगणना अवसंरचना और वैश्विक अनुसंधान प्रतिभाओं का समर्थन प्राप्त है।
- चीन: रोबोटिक्स और AI अनुसंधान प्रकाशनों के क्षेत्र में अग्रणी के रूप में उभरा है। साथ ही, यह आधारभूत मॉडल और अर्धचालक क्षमताओं के क्षेत्र में भी तेजी से अंतर कम कर रहा है।
- यूरोपीय संघ: EU AI अधिनियम के माध्यम से AI शासन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह अधिनियम AI प्रणालियों के लिए जोखिम-आधारित विनियामक रूपरेखा स्थापित करता है।
- जहाँ अमेरिका और चीन तकनीकी विकास के क्षेत्र में प्रमुख स्थान रखते हैं, वहीं बहुआयामी AI, दक्ष संगणना तथा डेटा-अधिगम विधियों के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तीव्र बनी हुई है।
भारत की AI तत्परता
- भारत का AI पारिस्थितिकी तंत्र धीरे-धीरे प्रौद्योगिकी को अपनाने से स्वदेशी अनुसंधान एवं नवाचार की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
- इंडियाAI मिशन का उद्देश्य संगणना अवसंरचना को सुदृढ़ करना, स्वदेशी AI मॉडल विकसित करना, स्टार्टअप्स को समर्थन देना तथा उत्तरदायी AI को बढ़ावा देना है।
- प्रमुख विकासों में शामिल हैं:
- साझा संगणना अवसंरचना पहल के माध्यम से 45,000 से अधिक GPU की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- चयनित अनुसंधान एवं उद्योग समूहों के माध्यम से स्वदेशी आधारभूत मॉडल विकसित करना।
- AI डेटा केंद्रों और संगणना अवसंरचना का विस्तार करना।
- शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स के माध्यम से AI अनुसंधान को सुदृढ़ करना।
- AI इम्पैक्ट समिट का आयोजन करना, जिसका समापन 92 देशों द्वारा समर्थित नई दिल्ली घोषणा के साथ हुआ। इससे वैश्विक AI शासन में भारत की भूमिका सुदृढ़ हुई है।
- हालाँकि, अत्याधुनिक अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की क्षमताएँ अमेरिका और चीन की तुलना में अभी भी अपेक्षाकृत सीमित हैं।
भारत की उभरती हुई शक्तियाँ
- मल्टीपल AI: AI4Bharat, भारतजेन, सर्वम AI और भाषानी जैसी पहलें भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में भाषा मॉडल, डेटासेट और उपकरण विकसित कर रही हैं।
- इन क्षमताओं का उपयोग अफ्रीका और एशिया के बहुभाषी समाजों में भी किया जा सकता है।
- अनुप्रयुक्त AI समाधान: भारतीय संस्थान वास्तविक विश्व की चुनौतियों का समाधान करने के लिए AI आधारित अनुप्रयोग विकसित कर रहे हैं:
- वाधवानी AI: AI आधारित तपेदिक (टीबी) की जाँच और कपास में कीट प्रबंधन।
- IIT रोपड़ का Annam.AI: मौसम संबंधी जानकारी और कृषि समाधान।
- आईआईटी कानपुर का ऐरावत रिसर्च फाउंडेशन: AI आधारित वायु गुणवत्ता निगरानी।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI): आधार, UPI और अन्य डिजिटल मंच बड़े पैमाने पर, किफायती तथा अंतर-संचालनीय डिजिटल प्रणालियाँ विकसित करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।
- यह AI को एक सार्वजनिक उपयोगिता के रूप में विकसित करने के लिए महत्त्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
भारत की वर्तमान चुनौतियाँ
- अत्याधुनिक अनुसंधान का अभाव: मौलिक AI अनुसंधान और उन्नत मॉडल विकास में अपर्याप्त निवेश।
- संगणना संबंधी निर्भरता: आयातित GPU और उन्नत अर्धचालक प्रौद्योगिकियों पर अत्यधिक निर्भरता।
- प्रतिभा संबंधी बाधाएँ: विशिष्ट अनुसंधानकर्ताओं, डॉक्टरेट उपाधिधारकों और अनुभवी AI वैज्ञानिकों की कमी।
- कमजोर स्वदेशी बौद्धिक संपदा: वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी AI प्रौद्योगिकियों और बौद्धिक संपदा पर सीमित स्वामित्व।
- अविकसित रोबोटिक्स: उन्नत रोबोटिक्स और भौतिक AI के क्षेत्र में अपेक्षाकृत कमजोर क्षमताएँ।
- सुरक्षा एवं शासन संबंधी कमियाँ: एल्गोरिदम आधारित पक्षपात, निजता, व्याख्येयता और AI के दुरुपयोग से संबंधित अनुसंधान को सुदृढ़ करने की आवश्यकता।
भारत वैश्विक नेतृत्व कहाँ विकसित कर सकता है?
- बहुभाषी एवं वॉयस-फर्स्ट AI: कम सेवा प्राप्त भाषाओं के लिए मुक्त स्रोत AI मॉडल विकसित करना, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण आबादी और गैर-अंग्रेजी भाषी लोगों को डिजिटल सेवाओं तक समावेशी पहुँच मिल सके।
- मितव्ययी AI : ऐसे छोटे, ऊर्जा-कुशल और किफायती मॉडल विकसित करना, जो सस्ते स्मार्टफोन, वाहनों एवं कृषि उपकरणों पर चल सकें तथा ऑफलाइन वातावरण में भी उपयोगी हों।
- सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में AI: विशेष रूप से संसाधन-सीमित परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, आपदा प्रबंधन और भूमि प्रशासन में विश्वसनीय AI समाधानों का एकीकरण करना।
- AI मूल्यांकन एवं विश्वसनीयता: विकासशील देशों की आवश्यकताओं के अनुरूप बहुभाषी मानक परीक्षण प्रणालियाँ, डीपफेक का पता लगाने वाली प्रणालियाँ, पक्षपात मूल्यांकन उपकरण और सुरक्षा मानक विकसित करना।
- ये प्राथमिकताएँ भारत को वैश्विक दक्षिण के लिए किफायती, समावेशी और सामाजिक रूप से प्रासंगिक AI समाधान उपलब्ध कराने वाला देश बना सकती हैं।
आगे की राह: भारत के AI अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण
- एक समर्पित संस्थान की स्थापना: NPCI के संस्थागत दृष्टिकोण पर आधारित राष्ट्रीय AI विकास संगठन की स्थापना करना, जिसमें सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी हो।
- यह अनुसंधान, अवसंरचना और बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन के बीच समन्वय स्थापित कर सकता है।
- दीर्घकालिक वित्तपोषण सुनिश्चित करना: एक दशक तक प्रतिवर्ष ₹25,000–30,000 करोड़ उपलब्ध कराना तथा निवेश को सीमित संसाधनों में अनेक क्षेत्रों में फैलाने के बजाय चुनिंदा रणनीतिक अनुसंधान प्राथमिकताओं पर केंद्रित करना।
- मुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देना: सार्वजनिक वित्तपोषण से विकसित मॉडल, डेटासेट और मानक परीक्षण प्रणालियों को खुले रूप में उपलब्ध कराना।
- विश्वसनीय डेटा-साझाकरण रूपरेखाएँ विकसित करने के लिए डेटा सशक्तीकरण एवं संरक्षण संरचना (DEPA) को मिशन मोड में लागू करना तथा AIKosh और भाषिणी जैसे मंचों को सुदृढ़ करना।
- सरकार को प्रथम ग्राहक बनाना: स्वदेशी AI समाधानों की माँग उत्पन्न करने तथा विभिन्न सरकारी विभागों में उनके विस्तार को सुगम बनाने के लिए सार्वजनिक खरीद का उपयोग करना।
- अनुसंधान प्रतिभा को सुदृढ़ करना: 1,000 अनुसंधान पीठों की स्थापना करना, कई हजार डॉक्टरेट फेलोशिप शुरू करना तथा विदेशों में कार्यरत भारतीय अनुसंधानकर्ताओं को वापस आकर्षित करना।
- संगणना एवं अर्धचालक क्षमताओं का विस्तार: साझा GPU तक पहुँच बढ़ाना, राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग अवसंरचना को सुदृढ़ करना तथा सेमीकॉन इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से स्वदेशी, ऊर्जा-कुशल AI चिप डिजाइन को बढ़ावा देना।
निष्कर्ष
- भारत को केवल AI प्रौद्योगिकियों के उपभोक्ता बने रहने के बजाय वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी AI समाधान विकसित करने वाला देश बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
- इसकी सफलता स्वदेशी बौद्धिक संपदा, निरंतर अनुसंधान निवेश और उत्तरदायी नवाचार पर निर्भर करेगी।
- भारत को एक विशिष्ट विकास मार्ग अपनाना चाहिए, अर्थात् ऐसा किफायती, बहुभाषी, ऊर्जा-कुशल और समावेशी AI विकसित करना, जो विश्व के सबसे बड़े AI मॉडल बनाने की प्रतिस्पर्धा में शामिल होने के बजाय अरबों लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करे।
- इससे भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की सफलता को वैश्विक AI नेतृत्व के अवसर में परिवर्तित किया जा सकता है।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न]: चर्चा कीजिए कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरने के लिए आधार और UPI के माध्यम से अपनी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का किस प्रकार लाभ प्राप्त कर सकता है। |
स्रोत: BS