पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- केंद्र सरकार ने डीप-टेक स्टार्ट-अप्स को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए मानदंडों में छूट दी है।
परिचय
- केंद्र ने डीप-टेक स्टार्ट-अप्स के लिए DSIR से ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता प्राप्त करने हेतु अनिवार्य तीन-वर्षीय व्यवहार्यता मानदंड को हटा दिया है।
- यह वित्तीय सहायता औद्योगिक अनुसंधान और विकास प्रोत्साहन कार्यक्रम (IRDPP) के अंतर्गत प्रदान की जाती है।
- DSIR विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है ताकि औद्योगिक अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।
- पूर्व वित्तीय मानदंड:
- स्टार्ट-अप्स DSIR समर्थन के लिए तभी पात्र थे जब वे कम से कम तीन वर्षों तक स्थिरता और व्यवहार्यता प्रदर्शित करते।
- यह शर्त अक्सर शुरुआती चरण के डीप-टेक नवप्रवर्तकों को बाहर कर देती थी, जिनके लिए सामान्यतः लंबी परिपक्वता अवधि होती है।
डीप टेक्नोलॉजी क्या है?
- डीप टेक उन उन्नत और विघटनकारी तकनीकों को संदर्भित करता है जिनमें परिवर्तनकारी बदलाव लाने एवं भविष्य के समाधान प्रदान करने की क्षमता होती है।
- यह शब्द अत्याधुनिक अनुसंधान का वर्णन करने के लिए प्रयोग किया जाता है जैसे:
- नैनोटेक्नोलॉजी
- बायोटेक्नोलॉजी
- मटेरियल साइंसेज़
- क्वांटम टेक्नोलॉजी
- सेमीकंडक्टर्स
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- डेटा साइंसेज़
- रोबोटिक्स
- 3D प्रिंटिंग आदि।
भारत की डीप-टेक महत्वाकांक्षाओं का महत्व
- वैश्विक नेतृत्व: भारत को “चाइना+1” वैश्विक परिदृश्य में एक विश्वसनीय R&D हब के रूप में स्थापित करता है, और क्वांटम कंप्यूटिंग व 6G जैसी अग्रणी तकनीकों में अपने विशाल STEM प्रतिभा पूल का लाभ उठाता है।
- प्रौद्योगिकीय संप्रभुता: राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और अंतरिक्ष के लिए विदेशी आयात पर महत्वपूर्ण निर्भरता को कम करता है, जिससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के प्रति असुरक्षित नहीं रहता।
- स्थानीय चुनौतियों का समाधान: “इंडिया-फर्स्ट” समाधान सक्षम करता है, जैसे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के लिए AI, खाद्य सुरक्षा हेतु प्रिसिजन एग्रीकल्चर, और ऊर्जा स्वतंत्रता के लिए ग्रीन हाइड्रोजन।
- आर्थिक मूल्य: एक सुदृढ़ डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में ऊपर ले जाता है, जिससे वह कम लागत वाली सेवाओं और असेंबली-आधारित विनिर्माण से उच्च-मूल्य अनुसंधान, डिज़ाइन एवं बौद्धिक संपदा निर्माण की ओर बढ़ता है।
| अनुसंधान विकास और नवाचार (RDI) योजना कोष – इस योजना का प्रावधान 6 वर्षों में ₹1 लाख करोड़ का है, जिसमें FY 2025–26 के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। – यह राशि भारत की समेकित निधि से वित्तपोषित होगी। – विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) RDI योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल विभाग होगा। योजना के प्रमुख उद्देश्य – निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करना ताकि वे सनराइज़ डोमेन्स और अन्य क्षेत्रों में अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) को आर्थिक सुरक्षा, रणनीतिक उद्देश्य तथा आत्मनिर्भरता के लिए बढ़ा सकें। – उच्च स्तर के टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल्स (TRL) पर परिवर्तनकारी परियोजनाओं को वित्तपोषित करना। – उन तकनीकों के अधिग्रहण का समर्थन करना जो महत्वपूर्ण या उच्च रणनीतिक महत्व की हों।एक डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स की स्थापना को सुगम बनाना। |
स्रोत: TH