अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग परिसंचरण (AMOC) को स्थिर करने हेतु भू-इंजीनियरी दृष्टिकोण 

पाठ्यक्रम: जीएस-1 / भूगोल

सन्दर्भ

  • यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय (Utrecht University)के एक हालिया अध्ययन में यह जाँच की गई है कि क्या बेरिंग जलडमरूमध्य पर बाँध का निर्माण करके अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग परिसंचरण को स्थिर किया जा सकता है।

अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग परिसंचरण (AMOC)

  • अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग परिसंचरण (AMOC) एक विशाल महासागरीय धाराओं की प्रणाली है, जिसमें गर्म और लवणीय सतही जल उत्तर की ओर प्रवाहित होता है, ठंडा होकर अधिक सघन बनता है, उत्तरी अटलांटिक में नीचे धँसता है और फिर गहराई में दक्षिण की ओर लौटता है।
  • यह प्रणाली पृथ्वी की जलवायु को नियंत्रित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से ऊष्मा को उच्च अक्षांशों तक पहुँचाती है तथा विभिन्न क्षेत्रों के बीच तापमान संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है।
  • तापमान और लवणता में भिन्नता, विशेष रूप से पिघलती बर्फ की चादरों से ताजे पानी के प्रवाह के कारण, पानी के घनत्व को कम कर सकती है, डूबने की प्रक्रिया को कमजोर कर सकती है, और इस प्रकार अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन को धीमा या बाधित कर सकती है।

बेरिंग जलडमरूमध्य को बंद करने की प्रक्रिया

  • बेरिंग जलसन्धि प्रशांत महासागर को आर्कटिक महासागर से जोड़ता है और आर्कटिक क्षेत्र में मीठे जल के प्रवाह की अनुमति देता है।
  • महासागरीय धाराओं को बाँध के माध्यम से परिवर्तित करने का विचार 1960 के दशक में प्योत्र मिखाइलोविच बोरिसोव (Petr Mikhailovich Borisov) द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
  • प्रस्तावित बेरिंग जलडमरूमध्य बाँध तीन भागों में विभाजित है:
  • रूस के मुख्य भूभाग और बिग डायोमीड द्वीप के बीच (लगभग 38 किमी),
  • बिग डायोमीड और लिटिल डायोमीड के बीच (लगभग 4 किमी) तथा लिटिल डायोमीड और अलास्का के बीच (लगभग 38 किमी)।

प्रमुख चुनौतियाँ

  • तकनीकी एवं भौगोलिक बाधाएँ: बेरिंग जलसन्धि लगभग 80 किलोमीटर चौड़ा है और अत्यंत दूरस्थ क्षेत्र में स्थित है, जहाँ आधारभूत संरचना सीमित है। ऐसे बाँध का निर्माण और रख-रखाव अत्यधिक कठिन तथा महँगा होगा।
  • पारिस्थितिक प्रभाव: यह क्षेत्र समुद्री स्तनधारियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवासन मार्ग है। महासागरीय धाराओं और लवणता में परिवर्तन से आर्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र तथा जैव-विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
  • भूराजनीतिक समस्याएँ: यह जलडमरूमध्य रूस और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के बीच स्थित है। ऐसे में निर्णय लेने के अधिकार और संभावित परिणामों की जिम्मेदारी को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।
  • नैतिक चिंताएँ: यह प्रस्ताव बड़े पैमाने पर जलवायु में जानबूझकर हस्तक्षेप (भू-इंजीनियरी) से संबंधित है।
  • इससे अनपेक्षित परिणामों तथा दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभावों का जोखिम बना रहता है।

आगे की राह

  • अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग परिसंचरण (AMOC) पर वैज्ञानिक अनुसंधान को सुदृढ़ किया जाना चाहिए, जिसके लिए बेहतर जलवायु मॉडल, दीर्घकालिक महासागरीय निगरानी तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आँकड़ों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना आवश्यक है।
  • बेरिंग जलडमरूमध्य को बंद करने जैसे भू-इंजीनियरी विकल्पों को केवल प्रायोगिक और अंतिम उपाय के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि प्रदूषण नियंत्रण (निवारण) के विकल्प के रूप में।
  • किसी भी बड़े स्तर के भू-इंजीनियरी हस्तक्षेप को वैश्विक शासन ढाँचे, पारदर्शिता तथा प्रभावित देशों की सहमति के आधार पर ही संचालित किया जाना चाहिए।

स्रोत: DTE

 

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