पाठ्यक्रम: GS2/ राजव्यवस्था
संदर्भ
- भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 को विस्तृत परीक्षण के लिए वित्त संबंधी विभाग-संबद्ध स्थायी समिति के पास प्रेषित किया गया है।
परिचय
- भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 कोलकाता स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) के लिए एक विधिक ढाँचा प्रदान करता है।
- यह विधेयक भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 को निरस्त करके उसके स्थान पर नया कानून लागू करने का प्रयास करता है।
भारतीय सांख्यिकी संस्थान
- प्रोफेसर पी. सी. महालनोबिस ने वर्ष 1931 में कोलकाता में भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना की।
- वर्ष 1959 में भारतीय संसद के एक अधिनियम द्वारा संस्थान को राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान का दर्जा प्रदान किया गया।
- भारतीय सांख्यिकी संस्थान सांख्यिकी के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण प्रदान करता है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
- निगमीकरण: वर्तमान में भारतीय सांख्यिकी संस्थान पश्चिम बंगाल सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1961 के अंतर्गत एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत है।
- विधेयक के अनुसार, भारतीय सांख्यिकी संस्थान एक निगमित निकाय तथा लाभ-रहित विधिक संस्था होगा।
- अभ्यागत(Visitor): भारत के राष्ट्रपति संस्थान के अभ्यागत होंगे।
- शासी मंडल: भारतीय सांख्यिकी संस्थान में एक शासी मंडल होगा, जो संस्थान का प्रमुख नीति-निर्धारण एवं कार्यकारी निकाय होगा।
- शासी मंडल का अध्यक्ष शिक्षा, उद्योग, शिक्षण, लोक नीति, सांख्यिकी विज्ञान एवं संबद्ध विज्ञान अथवा अन्य संबंधित क्षेत्रों में प्रतिष्ठित व्यक्ति होगा।
- अध्यक्ष का नामांकन केंद्र सरकार की सिफारिश पर अभ्यागत द्वारा किया जाएगा।
- परिषदें: विधेयक के अंतर्गत निम्नलिखित निकाय स्थापित किए जाएंगे:
- शैक्षणिक परिषद: यह प्रमुख शैक्षणिक निकाय होगी तथा पाठ्यक्रम, प्रवेश, परीक्षाओं और मूल्यांकन जैसे विषयों पर निर्णय लेगी।
- वित्त समिति: यह लेखाओं और व्यय की जाँच करेगी।
- प्रबंधन परिषद: प्रत्येक केंद्र के लिए एक प्रबंधन परिषद होगी।
- निदेशक: शासी मंडल एक निदेशक की नियुक्ति करेगा, जो संस्थान का मुख्य कार्यकारी अधिकारी होगा। इसके लिए अभ्यागत की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी।
- निदेशक शासी मंडल और शैक्षणिक परिषद के निर्णयों को लागू करने के लिए उत्तरदायी होगा।
संसदीय स्थायी समितियाँ क्या हैं?
- संसदीय स्थायी समितियाँ संसद की स्थायी समितियाँ हैं, जिनका गठन कार्यपालिका के कामकाज की जाँच, समीक्षा और निगरानी के लिए किया जाता है।
- ये समितियाँ पूरे वर्ष कार्य करती रहती हैं, जबकि तदर्थ समितियाँ अस्थायी प्रकृति की होती हैं और किसी विशेष उद्देश्य के लिए गठित की जाती हैं।
- संसदीय स्थायी समितियों के प्रकार:
- विभाग-संबद्ध स्थायी समितियाँ: ये समितियाँ मंत्रालयों की अनुदान माँगों, उन्हें संदर्भित विधेयकों तथा नीतिगत मुद्दों की जाँच करती हैं।
- उदाहरण: वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति।
- वित्तीय समितियाँ: इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित समितियाँ शामिल हैं:
- लोक लेखा समिति
- प्राक्कलन समिति
- सार्वजनिक उपक्रम समिति
- अन्य स्थायी समितियाँ: इनमें निम्नलिखित समितियाँ शामिल हैं:
- कार्य मंत्रणा समिति
- विशेषाधिकार समिति
- नियम समिति
- विभाग-संबद्ध स्थायी समितियाँ: ये समितियाँ मंत्रालयों की अनुदान माँगों, उन्हें संदर्भित विधेयकों तथा नीतिगत मुद्दों की जाँच करती हैं।
स्रोत: TH
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