पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- कम-से-कम पाँच राज्यों ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि प्रमुख शहरी आजीविका मिशन के लिए वित्तीय सहायता को लेकर स्पष्टता के अभाव से शहरी गरीबों के सामाजिक संरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
परिचय
- दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) वर्ष 2014 से 2024 तक संचालित हुआ। इसके अंतर्गत 10 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया।
- आवासन एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय वर्ष 1997 से केंद्र प्रायोजित योजना स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना (SJSRY) का कार्यान्वयन कर रहा था। वर्ष 2013 से इसका पुनर्गठन करके इसे दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के रूप में संचालित किया गया।
- आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने दिसंबर 2025 तक दीनदयाल जन आजीविका योजना–शहरी (DJAY-S) नामक एक प्रायोगिक परियोजना संचालित की।
- इस प्रायोगिक परियोजना का उद्देश्य एक नई योजना के लिए आधार तैयार करना था, किंतु सूत्रों के अनुसार, अब इस पर विचार नहीं किया जा रहा है।
दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की प्रमुख विशेषताएँ
- स्वयं सहायता समूहों का गठन: शहरी गरीब महिलाओं को संगठित करके स्वयं सहायता समूह बनाए गए, ताकि सामूहिक प्रयासों और वित्तीय आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा सके।
- वित्तीय सहायता: प्रत्येक पात्र स्वयं सहायता समूह को ₹10,000 की चक्रीय निधि उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त, रियायती ऋण और बैंकिंग सेवाओं से जुड़ने की सुविधा प्रदान की गई।
- कौशल विकास: कौशल प्रशिक्षण, रोजगार उपलब्ध कराने में सहायता तथा सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से आजीविका के अवसरों को बढ़ावा दिया गया।
- सामाजिक सशक्तीकरण: सामुदायिक संस्थाओं को सुदृढ़ किया गया तथा संवेदनशील शहरी परिवारों की औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुँच में सुधार किया गया।
परिवर्तन से उत्पन्न प्रमुख चिंताएँ
- वित्तपोषण को लेकर अनिश्चितता: तमिलनाडु, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक सहित कई राज्यों ने बताया है कि उपलब्ध धनराशि समाप्त हो चुकी है, वित्तीय देनदारियाँ लंबित हैं अथवा कर्मचारियों के वेतन भुगतान को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
- आजीविका गतिविधियों में व्यवधान: वित्तपोषण में विलंब से स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियाँ, बैंकिंग सेवाओं से उनका जुड़ाव, ब्याज सब्सिडी और शहरी गरीब परिवारों की संस्थागत ऋण तक पहुँच प्रभावित हो सकती है।
- सामुदायिक संस्थाओं के कमजोर होने का जोखिम: वित्तीय और प्रशासनिक सहायता बंद होने से पिछले एक दशक में विकसित स्वयं सहायता समूहों तथा उनके महासंघों की क्षमता कमजोर पड़ सकती है।
- कर्मचारियों की निरंतरता को लेकर अनिश्चितता: राज्यों ने परिवर्तन की अवधि के दौरान वेतन और प्रशासनिक व्यय के वित्तपोषण पर स्पष्टता माँगी है। वहीं, केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों को प्रारंभिक रूप से उपलब्ध संसाधनों से इन व्ययों की पूर्ति करनी चाहिए।
- राज्यों में असमान कार्यान्वयन: राज्यों की वित्तीय क्षमताओं में अंतर के कारण विभिन्न शहरी क्षेत्रों में आजीविका सहायता की निरंतरता और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
सरकार का पक्ष
- आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने कहा है कि प्रायोगिक परियोजना से प्राप्त अनुभवों का उपयोग एक नए शहरी आजीविका कार्यक्रम की संभावनाओं का पता लगाने के लिए किया जा रहा है।
- वर्तमान स्वयं सहायता समूहों को प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, अटल नवीकरण एवं शहरी रूपांतरण मिशन (AMRUT), पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना सहित अन्य सरकारी पहलों से जोड़ा जा रहा है।
- मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया है कि परिवर्तन की अवधि में लाभार्थियों को सहायता की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान प्रशासनिक संरचनाओं को बनाए रखना महत्त्वपूर्ण है।
आगे की राह
- वित्तपोषण की निरंतरता सुनिश्चित करना: केंद्र सरकार को प्रस्तावित मिशन की समय-सीमा और वित्तपोषण संरचना स्पष्ट करनी चाहिए तथा पात्र एवं पूर्व-स्वीकृत लंबित देनदारियों का निपटान करना चाहिए।
- संक्रमणकालीन वित्तीय सहायता प्रदान करना: नई योजना के पूरी तरह क्रियाशील होने तक आवश्यक कर्मचारियों, स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों और लाभार्थियों को सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकती है।
- स्वयं सहायता समूहों के बीच समन्वय को संस्थागत रूप देना: आजीविका के अवसरों में विविधता लाने के लिए शहरी स्वयं सहायता समूहों को नगरपालिका सेवाओं, अपशिष्ट प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण, आवास और नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों से जोड़ा जाना चाहिए।
- समावेशी शहरी आजीविका ढाँचा तैयार करना: नई योजना में दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के व्यापक गरीबी उन्मूलन दृष्टिकोण को दीनदयाल जन आजीविका योजना–शहरी के अंतर्गत पहचाने गए संवेदनशील व्यावसायिक समूहों के लिए लक्षित सहायता के साथ समन्वित किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
- दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से नई शहरी आजीविका व्यवस्था की ओर संक्रमण के दौरान पिछले एक दशक में विकसित सामुदायिक संस्थाओं और आजीविका के अवसरों का संरक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- समय पर वित्तपोषण, नीतिगत स्पष्टता और केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य हैं कि शहरी गरीब पहले से उपलब्ध सहायता प्रणालियों तक अपनी पहुँच न खो दें।
स्रोत: IE
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