खादी एवं ग्रामोद्योग (KVI)
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- खादी एवं ग्रामोद्योग (KVI) ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने, रोजगार सृजन करने तथा आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने में निरंतर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC)
- खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) एक वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम, 1956 के अंतर्गत वर्ष 1957 में की गई थी।
- यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अंतर्गत कार्य करता है। इसका उद्देश्य ग्रामीण रोजगार सृजन, स्वरोजगार को प्रोत्साहन तथा स्थानीय उत्पादन को सुदृढ़ करने के लिए खादी एवं ग्रामोद्योगों को बढ़ावा देना है।
- इसके प्रमुख कार्यों में वित्तीय सहायता प्रदान करना, कारीगरों को प्रशिक्षण देना, विपणन में सहयोग करना तथा ग्राम-आधारित उद्यमों का विकास करना शामिल है।
खादी एवं ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने की पहलें
- खादी विकास योजना (KVY) वर्तमान योजनाओं के विभिन्न घटकों के माध्यम से खादी क्षेत्र को प्रोत्साहित करती है, जिनमें शामिल हैं:
- संशोधित बाजार विकास सहायता (MMDA)
- ब्याज सब्सिडी पात्रता प्रमाणपत्र (ISEC)
- खादी कारीगरों के लिए कार्यशाला योजना
- मौजूदा कमजोर खादी संस्थानों के बुनियादी ढाँचे का सुदृढ़ीकरण
- विपणन अवसंरचना एवं खादी के लिए सहायता (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
- ग्रामोद्योग विकास योजना (GVY) साझा सुविधाओं, प्रौद्योगिकी उन्नयन, प्रशिक्षण तथा उपकरण-किट वितरण के माध्यम से ग्रामोद्योगों को प्रोत्साहित करती है।
- खादी उत्कृष्टता केंद्र (CoEK) की स्थापना खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT), नई दिल्ली के सहयोग से की गई है। इसका उद्देश्य खादी उत्पादों के लिए डिजाइन संबंधी सुधार, उत्पाद विकास तथा बाजार सहायता प्रदान करना है।
स्रोत: PIB
वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020–2025 के दौरान वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश में भारत की हिस्सेदारी 5.7% रही।
ग्रीनफील्ड निवेश
- ग्रीनफील्ड निवेश प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का एक प्रकार है, जिसमें कोई मूल कंपनी विदेश में अपना व्यावसायिक परिचालन शुरू करने के लिए पूरी तरह नई इकाइयों और अवसंरचना का निर्माण करती है।
- ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में शुरुआत से ही नई सुविधाओं का निर्माण किया जाता है। यह ब्राउनफील्ड निवेश से भिन्न है, जिसमें पहले से विद्यमान संरचनाओं और सुविधाओं का उपयोग किया जाता है।
- ग्रीनफील्ड निवेश में कई जोखिम होते हैं, जिनमें बड़ी पूँजी, समय और प्रयास की आवश्यकता के साथ-साथ अपरिचित व्यावसायिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों से निपटने की चुनौती शामिल है।
- विकासशील देश प्रोत्साहनों के माध्यम से ग्रीनफील्ड निवेश आकर्षित करते हैं, जिससे रोजगार सृजन होता है और अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- वर्ष 2020 से 2025 के बीच वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश में रणनीतिक क्षेत्रों की हिस्सेदारी 16% से बढ़कर 44% हो गई।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अवसंरचना और संबंधित प्रौद्योगिकियों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों ने कुल वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा आकर्षित किया।
- AI अवसंरचना के बाद अर्धचालक मूल्य शृंखला (8.1%) तथा ऊर्जा संक्रमण प्रौद्योगिकियों एवं सेवाओं (7.8%) का स्थान रहा।
- क्षेत्रवार निवेश:
- यूरोप में रणनीतिक निवेश का 28.4% हिस्सा आया, जबकि उत्तरी अमेरिका की हिस्सेदारी 28% रही।
- विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में अधिकांश पूँजी विकासशील एशिया (26.5%) की ओर प्रवाहित हुई। चीन, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर नए निवेश के प्रमुख गंतव्य रहे।
- भारत-विशिष्ट निष्कर्ष:
- वर्ष 2020 से 2025 के दौरान वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश में भारत की हिस्सेदारी 5.7% रही। इसके बाद मलेशिया (4%), इंडोनेशिया (3.8%) और चीन (2.8%) का स्थान रहा।
- पिछले लगभग दो दशकों में लागू की गई औद्योगिक नीतियों की संख्या के संदर्भ में भारत का स्थान ऊँचा रहा है।
- वर्ष 2008–2021 के दौरान भारत ने 1,416 औद्योगिक नीतियाँ लागू कीं। इस मामले में भारत केवल चीन (4,201) और अमेरिका (4,025) से पीछे रहा।
स्रोत: TH
मध्य एशियाई फ्लाईवे (CAF)
पाठ्यक्रम: GS3/जैव विविधता
संदर्भ
- मध्य एशियाई संरक्षण नेटवर्क (CACN) ने एक नए मध्य एशियाई फ्लाईवे डिजिटल हब का शुभारंभ किया है।
डिजिटल हब के बारे में
- इसका उद्देश्य विश्व के प्रमुख प्रवासी मार्गों में से एक पर प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए ज्ञान और सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुदृढ़ करना है।
- यह प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों, फ्लाईवे के महत्त्वपूर्ण स्थलों, संरक्षण परियोजनाओं तथा भागीदारी के अवसरों से संबंधित जानकारी को एक मंच पर उपलब्ध कराएगा।
- यह पक्षियों के टकराव की घटनाओं और चिह्नित पक्षियों के देखे जाने की सूचना दर्ज करने के लिए समर्पित पोर्टल भी उपलब्ध कराएगा।
मध्य एशियाई फ्लाईवे (CAF)
- मध्य एशियाई फ्लाईवे एक विशाल प्रवासी गलियारा है, जो उत्तरी, मध्य और दक्षिणी एशिया तथा ट्रांस-कॉकस क्षेत्र के 30 देशों में फैला हुआ है। यह आर्कटिक महासागर एवं हिंद महासागर को जोड़ता है।
- इसमें प्रवासी जलपक्षियों, स्थलवासी पक्षियों तथा शिकारी पक्षियों के कुछ सबसे महत्त्वपूर्ण प्रवास मार्ग शामिल हैं। इनमें से अनेक प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं या उनकी जनसंख्या में गिरावट आ रही है।
- CAF अंतरराष्ट्रीय संरक्षण प्रयासों, विशेष रूप से प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण संबंधी अभिसमय (CMS) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त प्रमुख प्रवासी पक्षी मार्गों में से एक है।
- इस फ्लाईवे का उपयोग 600 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ करती हैं। इसलिए इनके संरक्षण के लिए राष्ट्रीय सीमाओं के पार सहयोग और सूचनाओं का आदान-प्रदान अत्यंत आवश्यक है।

CAQM समिति द्वारा 2030 तक दिल्ली में 100% इलेक्ट्रिक कारों का प्रस्ताव
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
संदर्भ
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा नियुक्त 15 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की सिफारिश की है।
प्रमुख सिफारिशें
- समिति ने दिल्ली-NCR में BS-I, BS-II और BS-III वाहनों को तत्काल चरणबद्ध तरीके से हटाने की सिफारिश की है।
- वर्ष 2030 तक BS-IV वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अंतर्गत वर्ष 2026 की सर्दियों में प्रायोगिक प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया गया है।
- वर्ष 2035 तक BS-VI दोपहिया वाहनों तथा वर्ष 2040 तक BS-VI चारपहिया वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की सिफारिश की गई है।
- वर्ष 2035 से यदि औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 200 से अधिक रहता है, तो BS-VI वाहनों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करने का सुझाव दिया गया है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)
- CAQM का गठन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत किया गया था।
- उद्देश्य: यह अधिनियम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता से संबंधित समस्याओं के बेहतर समन्वय, अनुसंधान, पहचान और समाधान के लिए एक आयोग के गठन का प्रावधान करता है।
- आयोग की प्रमुख शक्तियाँ:
- वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाना।
- वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए संहिताएँ एवं दिशा-निर्देश तैयार करना।
- निरीक्षण और विनियमन सहित विभिन्न मामलों पर निर्देश जारी करना, जो संबंधित व्यक्ति या प्राधिकरण के लिए बाध्यकारी होंगे।
- केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, पराली जलाने से प्रदूषण फैलाने वाले किसानों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति आरोपित करना और उसकी वसूली करना।
- श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (GRAP) के अंतर्गत NCR में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए आदेश जारी करना।
- किसी भी प्रकार के टकराव की स्थिति में आयोग के आदेश या निर्देश संबंधित राज्य सरकारों, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों तथा राज्य स्तरीय वैधानिक निकायों के आदेशों पर प्रभावी होंगे।
स्रोत: THE PRINT
SIDM चैंपियन पुरस्कार 2026
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) के आठवें वार्षिक सत्र में SIDM चैंपियन पुरस्कार 2026 प्रदान किए।
पुरस्कार के बारे में
- स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास, उत्पाद नवाचार, डिजाइन, आयात प्रतिस्थापन, विनिर्माण उत्कृष्टता और निर्यात के क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए विभिन्न संगठनों को कुल 15 चैंपियन पुरस्कार प्रदान किए गए।
- उद्देश्य: भारतीय उद्योगों को प्रौद्योगिकी और उत्पाद नवाचार में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना, ताकि रक्षा बलों की क्षमताओं से संबंधित कमियों को दूर किया जा सके।
- पात्रता मानदंड: सभी भारतीय विनिर्माण कंपनियाँ SIDM चैंपियन पुरस्कारों में भाग लेने के लिए पात्र हैं।
- ऐसी कंपनियाँ पात्र हैं जिनमें विदेशी हिस्सेदारी अधिकतम 50% तक हो और जो किसी विदेशी कंपनी की सहायक कंपनी न हों।
SIDM के बारे में
- सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसका गठन भारतीय रक्षा उद्योग के शीर्ष निकाय के रूप में कार्य करने के उद्देश्य से किया गया है।
- यह भारत के रक्षा उद्योग के विकास और क्षमता संवर्धन के लिए एक प्रतिनिधि, उत्प्रेरक तथा सहायक संस्था के रूप में कार्य करता है।
स्रोत: PIB
नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम परिवर्तित कर प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर रखा जाएगा
पाठ्यक्रम: GS2/शासन; GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम बदलकर ‘नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा’ करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
परिचय
- मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्षों की निरंतर सेवा के उपलक्ष्य में यह प्रस्ताव पारित किया। इस अवधि की शुरुआत वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल से हुई थी।
- प्रस्ताव लागू होने के बाद, यह किसी पदासीन प्रधानमंत्री के नाम पर रखा जाने वाला पहला हवाई अड्डा बन जाएगा। अन्य हवाई अड्डे—नई दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, लखनऊ का चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डा और वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा—पूर्व प्रधानमंत्रियों के नाम पर हैं।
- गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के अंतर्गत किया गया है। इस परियोजना में ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड तथा उत्तर प्रदेश के राज्य प्राधिकरण शामिल हैं।
- यह उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा हवाई अड्डा है और दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के एक प्रमुख विमानन केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में अग्रसर है।
स्रोत: IE
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संक्षिप्त समाचार 10-10-2026