भारत और कतर द्वारा द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा 

पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध

संदर्भ

  • भारत और कतर ने विदेश कार्यालय परामर्श के छठे दौर के दौरान अपने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की।

भारत-कतर संबंधों का संक्षिप्त विवरण

  • राजनयिक संबंधों की स्थापना: भारत और कतर के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना वर्ष 1973 में हुई थी। वर्ष 2023 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण हुए।
  • रणनीतिक साझेदारी: वर्ष 2025 में भारत और कतर ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
    • भारत के वर्तमान में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के चार अन्य सदस्य देशों—संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, ओमान और कुवैत—के साथ भी रणनीतिक साझेदारी संबंध हैं।
  • आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध: वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत और कतर के बीच द्विपक्षीय व्यापार 13.91 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इस अवधि के दौरान कतर को भारत का निर्यात 1.62 अरब अमेरिकी डॉलर तथा कतर से भारत का आयात 12.29 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
    • दोनों देशों ने दोहरे कराधान से बचाव संबंधी संधि पर भी हस्ताक्षर किए हैं तथा वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की योजना बनाई है।
  • ऊर्जा: कतर भारत को तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने कतर से 5.61 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की 10.86 मिलियन मीट्रिक टन LNG का आयात किया।
    • इसके अतिरिक्त, कतर भारत को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) का भी सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने कतर से 2.67 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की 4.58 मिलियन मीट्रिक टन LPG का आयात किया।
    • वित्तीय वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय हाइड्रोकार्बन व्यापार 10.81 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो कुल द्विपक्षीय व्यापार का 77.71% था।
    • वर्ष 2024 में कतर एनर्जी (QatarEnergy) और पेट्रोनेट LNG ने 20 वर्ष के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके अंतर्गत वर्ष 2028 से प्रतिवर्ष 7.5 मिलियन टन LNG की आपूर्ति की जाएगी।
  • रक्षा: भारत-कतर रक्षा सहयोग समझौते पर वर्ष 2008 में हस्ताक्षर किए गए थे तथा वर्ष 2018 में इसे पाँच वर्ष के लिए विस्तारित किया गया। इस सहयोग का संचालन संयुक्त रक्षा सहयोग समिति (JDCC) के माध्यम से किया जाता है।
    • भारत द्विवार्षिक दोहा अंतरराष्ट्रीय समुद्री रक्षा प्रदर्शनी एवं सम्मेलन (DIMDEX) में भाग लेता है।
    • ज़ैर-अल-बहर भारतीय नौसेना और कतर की अमीरी नौसेना (QENF) के बीच आयोजित एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास है।
  • श्रम एवं प्रवासी भारतीय समुदाय: कतर में लगभग 8.30 लाख भारतीय रहते हैं, जो दोनों देशों के बीच घनिष्ठ जन-से-जन संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाते हैं।
    • कतर में भारतीय प्रवासी समुदाय वहाँ के विकास, विशेषकर निर्माण क्षेत्र एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
  • क्षेत्रीय सहयोग: खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) पश्चिम एशिया के छह देशों—सऊदी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन और ओमान—का एक राजनीतिक एवं आर्थिक गठबंधन है। इसकी स्थापना वर्ष 1981 में हुई थी।
    • भारत GCC के साथ नियमित रूप से संवाद करता है और इस संगठन के साथ अपने संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखता है।

खाड़ी क्षेत्र

  • खाड़ी क्षेत्र से सामान्यतः पश्चिम एशिया में फारस की खाड़ी के आसपास स्थित देशों का आशय है।
  • इसमें सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, कतर, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश शामिल हैं।
  • यह क्षेत्र विशाल तेल भंडारों के लिए प्रसिद्ध है, जिन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं राजनीति को व्यापक रूप से प्रभावित किया है।

भारत के लिए कतर का महत्त्व

  • ऊर्जा सुरक्षा: कतर भारत को तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। इससे होने वाला आयात भारत में विद्युत उत्पादन, उर्वरक निर्माण और औद्योगिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायता करता है।
  • प्रवासी भारतीय समुदाय: कतर में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और कार्य करते हैं। वे कतर की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के साथ-साथ भारत को धन प्रेषण भी करते हैं। उनकी सुरक्षा, कल्याण और श्रम अधिकार द्विपक्षीय संबंधों के महत्त्वपूर्ण विषय हैं।
  • समुद्री सुरक्षा: कतर की अवस्थिति होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। इसलिए क्षेत्रीय स्थिरता भारत के ऊर्जा आयात और वाणिज्यिक नौवहन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
  • क्षेत्रीय कूटनीति: कतर विभिन्न क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पक्षों के साथ राजनयिक संवाद बनाए रखता है। उसकी कूटनीतिक सक्रियता संघर्षों पर संवाद, तनाव कम करने और पश्चिम एशिया में भारत के हितों की रक्षा करने में सहायक हो सकती है।

चुनौतियाँ एवं चिंताएँ

  • हमास-इज़राइल युद्ध एवं समुद्री सुरक्षा: हमास-इज़राइल युद्ध तथा लाल सागर में जहाजों पर होने वाले हमलों से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास प्रभावित होते हैं।
  • पश्चिम एशिया में संतुलित कूटनीति: भारत पश्चिम एशिया की राजनीति में सतर्क प्रवृति अपनाते हुए खाड़ी देशों, ईरान और इज़राइल के साथ अपने संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास करता है।
  • व्यापार में सीमित विविधीकरण: द्विपक्षीय व्यापार में हाइड्रोकार्बन का महत्त्वपूर्ण वर्चस्व है। इससे विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, सेवाओं तथा अन्य गैर-ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएँ बनी हुई हैं।
  • कनेक्टिविटी परियोजनाओं में विलंब: क्षेत्रीय संघर्ष के कारण वर्ष 2023 से I2U2 समूह की पहलों में प्रगति प्रभावित हुई है।
    • भारत संघर्ष के बावजूद I2U2 तथा भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) जैसी आर्थिक पहलों को आगे बढ़ाने पर बल देता है।
  • GCC के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA): GCC के व्यापार वार्ताकार में बदलाव के कारण भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में विलंब हुआ है। ऐसा समझौता करना, जो GCC के सभी सदस्य देशों की अपेक्षाओं को संतुष्ट करे, एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है।

आगे की राह

  • कतर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विविधीकरण तथा पश्चिम एशिया के साथ व्यापक जुड़ाव की रणनीति में एक महत्त्वपूर्ण साझेदार है।
  • इस महत्त्वपूर्ण पश्चिम एशियाई साझेदारी को दीर्घकालिक एवं भविष्य के अनुरूप बनाने के लिए संस्थागत ढाँचों को सुदृढ़ करना, आर्थिक पूरकताओं का विस्तार करना तथा भारतीय प्रवासी समुदाय के कल्याण और अधिकारों को सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।

स्रोत: MEA

 

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