पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारत 6G संगोष्ठी, 2026 का समापन नई दिल्ली में हुआ।
परिचय
- भारत 6G गठबंधन (B6GA) द्वारा इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के साथ आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में वैश्विक दूरसंचार क्षेत्र के प्रमुख नेताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। इसमें IMT-2030 तथा उससे आगे की प्रौद्योगिकियों के विकास की रूपरेखा पर चर्चा की गई।
- इस संगोष्ठी का एक प्रमुख परिणाम GSMA, one6G, GTI अलायंस, 6G इनोवेशन फ़ोरम (6G IF), ताइवान तथा VOICE के साथ पाँच नए समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान रहा। इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं को और अधिक सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी।
6G क्या है?
- 6G अर्थात छठी पीढ़ी की वायरलेस संचार प्रौद्योगिकी, 5G का उत्तराधिकारी संस्करण होगा। इसका उद्देश्य इंटरनेट कनेक्टिविटी को अधिक तीव्र, सुचारु और प्रभावी बनाना है।
- 6G का लक्ष्य सूचना को मात्र एक माइक्रोसेकंड में भेजने और प्राप्त करने की क्षमता विकसित करना है। यह समय 5G की प्रतिक्रिया अवधि की तुलना में 1,000 गुना कम है।
- अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) ने 6G प्रौद्योगिकी को ‘IMT-2030’ नाम दिया है।
- IMT-2030 का पूर्ण रूप International Mobile Telecommunications for 2030 अर्थात वर्ष 2030 के लिए अंतरराष्ट्रीय मोबाइल दूरसंचार है।

भारत का 6G मिशन
- भारत ने आगामी पीढ़ी की वायरलेस संचार प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त करने की महत्त्वाकांक्षी दृष्टि के साथ 6G की दिशा में प्रयास प्रारंभ किए।
- इस दृष्टिकोण ने नवाचारकर्ताओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और नीति-निर्माताओं के एक गतिशील पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को प्रोत्साहित किया है। ये सभी बेहतर कनेक्टिविटी और उन्नत संचार प्रौद्योगिकियों के विकास की दिशा में कार्यरत हैं।

भारत 6G गठबंधन के बारे में
- भारत 6G गठबंधन की स्थापना वर्ष 2023 में हुई थी। यह एक उद्योग-नेतृत्व वाला सहयोगात्मक मंच है, जो भारत की 6G संबंधी महत्त्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स, शिक्षाविदों और अनुसंधान संस्थानों को एक साथ लाता है।
- यह गठबंधन निम्नलिखित क्षेत्रों को प्रोत्साहित करता है:
- स्वदेशी अनुसंधान एवं नवाचार।
- बौद्धिक संपदा का सृजन।
- अंतरराष्ट्रीय मानक निर्धारण प्रक्रियाओं में भागीदारी।
- अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का विकास।
- किफायती, सुरक्षित, सतत और वैश्विक स्तर पर परस्पर-संगत 6G पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण।
6G प्रौद्योगिकी के विकास हेतु पहलें
- देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में 100 5G प्रयोगशालाओं की स्थापना: सरकार ने क्षमता निर्माण तथा देश में 6G के लिए तैयार शैक्षणिक एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में 100 5G प्रयोगशालाएँ स्थापित की हैं।
- दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि (TTDF) योजना: वर्ष 2022 में प्रारंभ इस योजना का उद्देश्य 6G सहित दूरसंचार प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा नवाचार को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह योजना भारत के दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्टअप्स, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), अनुसंधान संस्थानों तथा उद्योग जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देती है।
- IIIT-बेंगलुरु में प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र: अंतरविषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों पर राष्ट्रीय मिशन (NM-ICPS) के अंतर्गत IIIT-बेंगलुरु में एक प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र स्थापित किया गया है। यह केंद्र उन्नत संचार प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करता है, जो भविष्य के 6G नेटवर्क के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।
6G दृष्टिकोण का महत्त्व
- 6G प्रौद्योगिकी विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन लाने में सक्षम होगी।
- स्वास्थ्य सेवा: टेलीमेडिसिन, रोबोट-सहायित शल्य चिकित्सा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित रोग निदान को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
- कृषि: इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सेंसरों के माध्यम से स्मार्ट निगरानी और सटीक कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
- शिक्षा: संवर्धित वास्तविकता (AR) एवं आभासी वास्तविकता (VR) तकनीकों के माध्यम से वास्तविक समय में अधिक संवादात्मक और अनुभवात्मक शिक्षण संभव होगा।
- औद्योगिक स्वचालन: बेहतर मशीन-से-मशीन संचार, डिजिटल ट्विन्स (भौतिक प्रणालियों की आभासी प्रतिकृतियाँ) तथा IoT के उपयोग से उद्योग 4.0 को गति मिलेगी और स्मार्ट उद्योगों का विकास होगा।
चुनौतियाँ
- अनुसंधान एवं विकास में निवेश: अर्धचालकों, AI प्रोसेसरों और उन्नत सिस्टम-ऑन-चिप (SoCs) के विकास के लिए अनुसंधान एवं विकास में पर्याप्त निवेश की आवश्यकता है।
- साइबर सुरक्षा एवं डेटा गोपनीयता: अत्यधिक परस्पर-संबद्ध नेटवर्क वातावरण में साइबर हमलों, डेटा के दुरुपयोग और निजता के उल्लंघन से संबंधित चिंताएँ बढ़ सकती हैं।
- बुनियादी ढाँचे की उच्च लागत: छोटे सेल नेटवर्क, फाइबर-ऑप्टिक बैकहॉल तथा एज-कंप्यूटिंग सुविधाओं का व्यापक नेटवर्क स्थापित करने में अधिक लागत आ सकती है। विशेष रूप से ग्रामीण, दूरस्थ और भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम क्षेत्रों में यह चुनौती अधिक गंभीर होगी।
निष्कर्ष
- भारत का 6G मिशन आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।
- यह मिशन भारत को उन्नत दूरसंचार प्रौद्योगिकियों एवं समाधानों के एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसका उद्देश्य ऐसी किफायती प्रौद्योगिकियों का विकास करना है, जो न केवल भारत की आवश्यकताओं की पूर्ति करें, बल्कि वैश्विक कल्याण में भी योगदान दें।
स्रोत: PIB
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