संक्षिप्त समाचार 07-10-2026

सिल्क रोड

पाठ्यक्रम: GS1/इतिहास

संदर्भ

  • नाम के विपरीत, सिल्क रोड एकल मार्ग नहीं था, बल्कि अनेक स्थलीय और समुद्री व्यापार मार्गों का एक जाल था, जो पूर्वी, मध्य, दक्षिणी और पश्चिमी एशिया के विभिन्न भागों को आपस में जोड़ता था।

प्राचीन सिल्क रोड

  • सिल्क रोड लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से महत्वपूर्ण हो गया, जब चीन के हान राजवंश ने पश्चिम की ओर विस्तार किया और मध्य एशियाई राज्यों के साथ संपर्क स्थापित किए।
    • उस समय चीनी रेशम एक अत्यंत मूल्यवान वस्तु था, इसलिए इस व्यापारिक मार्ग-जाल को सिल्क रोड कहा गया।
  • यह चीन और सुदूर पूर्व को मध्य पूर्व तथा यूरोप से जोड़ने वाले व्यापार मार्गों का एक जाल था।
    • पूरे वर्ष पूर्व से पश्चिम की ओर रेशम का परिवहन किया जाता था, केवल कठोर सर्दियों के दौरान यह व्यापार प्रभावित होता था। इसके बदले में सोने और चाँदी के सिक्के तथा अन्य मूल्यवान वस्तुएँ पूर्व की ओर लाई जाती थीं।
  • चूँकि इन मार्गों पर नियमित रूप से आवागमन होता था, इसलिए सिल्क रोड प्रौद्योगिकियों, धर्मों, कलात्मक शैलियों, भाषाओं और प्राकृतिक दर्शन के यूरेशिया में प्रसार का माध्यम भी बन गया।
  • सिल्क रोड के मार्ग 1453 ईस्वी तक उपयोग में रहे। इसके बाद उस्मानी साम्राज्य ने चीन के साथ व्यापार का बहिष्कार कर इन मार्गों को बंद कर दिया।

स्रोत: TH

मानसून की वापसी

पाठ्यक्रम: GS1/भूगोल

समाचार में

  • मानसून की वापसी के कारण पूरे भारत में गरज के साथ वर्षा और भारी बारिश की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

मानसून की वापसी या उत्तर-पूर्वी मानसून

  • मानसून की वापसी से आशय भारत से दक्षिण-पश्चिमी मानसून की वापसी से है, जो सामान्यतः अक्टूबर–नवंबर के दौरान होती है।
  • यह वर्षा ऋतु से शीत ऋतु की ओर संक्रमण का संकेत है।
  • इस अवधि के दौरान उत्तर-पूर्वी मानसून महत्वपूर्ण हो जाता है, विशेषकर दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी भारत में।
  • उत्तर-पूर्वी मानसून मुख्य रूप से पाँच मौसम विज्ञान प्रभागों—तमिलनाडु, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक—को प्रभावित करता है तथा भारत की वार्षिक वर्षा में लगभग 11 प्रतिशत का योगदान देता है, जबकि दक्षिण-पश्चिमी मानसून का योगदान लगभग 75 प्रतिशत है।
    • नवंबर–दिसंबर के दौरान उत्तरी और गंगा के मैदानी क्षेत्रों में होने वाली वर्षा मुख्यतः पश्चिमी विक्षोभों के कारण होती है, न कि उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण।
  • केरल में अक्टूबर–नवंबर के दौरान कुछ अतिरिक्त वर्षा भी होती है।

स्रोत: DTE

एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (ITLA)

पाठ्यक्रम: GS2/शासन

संदर्भ

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक विशेष प्रयोजन माध्यम, अर्थात् एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण की स्थापना को स्वीकृति दी।

एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण के बारे में

  • यह एक राष्ट्रीय शीर्ष संस्था है, जिसे विशेष प्रयोजन माध्यम के रूप में स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य माल परिवहन और यात्री परिवहन क्षेत्रों में एकीकृत एवं बहु-माध्यमीय परिवहन योजना, विशाल आँकड़ा विश्लेषण, परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन तथा नीतिगत सहयोग को बढ़ावा देना है।
  • इसे जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण कोरिया, चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में कार्यरत एकीकृत परिवहन योजना संस्थाओं के अनुरूप तैयार किया गया है।

ITLA की प्रमुख भूमिकाएँ एवं उत्तरदायित्व

  • दीर्घकालिक राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान: प्राधिकरण 10 वर्ष या उससे अधिक की योजना अवधि वाला एक व्यापक राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करेगा।
    • इसमें सड़क, रेलवे, बंदरगाह एवं नौवहन, नागरिक उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग, तटीय नौवहन, शहरी आवागमन और लॉजिस्टिक्स को शामिल किया जाएगा।
  • एकीकृत योजना रूपरेखा: यह लगभग पाँच वर्ष की योजना अवधि वाली अल्पकालिक क्षेत्रीय योजनाओं तथा परिवहन मंत्रालयों की वार्षिक योजनाओं का मूल्यांकन करेगा।
  • प्रमुख परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन: आईटीएलए ₹500 करोड़ या उससे अधिक लागत वाली भारत सरकार की अवसंरचना परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन करेगा।
  • निगरानी एवं प्रभाव आकलन: यह ₹500 करोड़ से अधिक लागत वाली परिवहन और अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी करेगा तथा मुद्दों के समाधान के लिए एक समन्वित तंत्र उपलब्ध कराएगा।
  • राष्ट्रीय परिवहन आँकड़ा भंडार: प्राधिकरण विभिन्न स्रोतों से प्राप्त प्रासंगिक परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स आँकड़ा समूहों को एकीकृत करके एक एकीकृत परिवहन आँकड़ा भंडार विकसित करेगा।
  • लॉजिस्टिक्स नीति संबंधी सहयोग: यह राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, 2022 की समीक्षा और अद्यतन करने में परामर्श तथा सहायता प्रदान करेगा।
  • अनुसंधान एवं नवाचार: यह परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देगा।

स्रोत: AIR

भारत और जापान द्वारा संयुक्त ऋण-पत्र तंत्र के लिए परिचालन नियमावली शुरूआत

पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध, GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • भारत और जापान ने नई दिल्ली में भारत-जापान संयुक्त ऋण-पत्र तंत्र के लिए परिचालन नियमावली का शुभारंभ किया।

परिचय

  • संयुक्त ऋण-पत्र तंत्र का उद्देश्य उन्नत निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा देना, जलवायु वित्त को एकत्रित करना, प्रौद्योगिकी सहयोग को सुगम बनाना तथा भारत में उच्च-विश्वसनीयता वाले उत्सर्जन में कमी और उत्सर्जन अवशोषण को समर्थन प्रदान करना है।
  • संयुक्त ऋण-पत्र तंत्र दोनों देशों के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों को प्राप्त करने में योगदान देता है। इसके अंतर्गत जापान के योगदान का मात्रात्मक मूल्यांकन किया जाता है तथा ऋण-पत्र के एक हिस्से का अधिग्रहण किया जाता है।
  • यह पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय सहयोग को क्रियान्वित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

स्रोत: DD News

भारत का प्रथम घरेलू यात्रा सर्वेक्षण

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच प्रथम बार पूरे भारत में घरेलू यात्रा पर सर्वेक्षण किया।

परिचय

  • इस सर्वेक्षण में घरेलू यात्रा के प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया है, जिनमें निम्नलिखित हैं:
    • यात्रा का उद्देश्य: रोजगार, शिक्षा, सामाजिक गतिविधियाँ, सांस्कृतिक एवं मनोरंजन संबंधी गतिविधियाँ, पर्यटन, घरेलू कार्य, देखभाल संबंधी कार्य तथा अन्य उद्देश्य।
    • परिवहन का साधन: विभिन्न जनसांख्यिकीय समूहों द्वारा यात्रा के लिए उपयोग किए जाने वाले परिवहन के साधन।
    • यात्रा की अवधि एवं दूरी: यात्राओं के दौरान लगने वाला औसत समय तथा तय की गई दूरी।

सर्वेक्षण के निष्कर्ष

  • निश्चित कार्यस्थल तक आवागमन के लिए दोपहिया वाहन परिवहन का प्रमुख साधन हैं। कुल 42.6 प्रतिशत कामगार निश्चित कार्यस्थल तक पहुँचने के लिए दोपहिया वाहनों का उपयोग करते हैं।
  • रात में की जाने वाली यात्राओं में 73.5 प्रतिशत यात्राएँ बसों और रेल द्वारा की जाती हैं। इसके बाद कारों की हिस्सेदारी 15.1 प्रतिशत और दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 8.8 प्रतिशत है।
  • कार्यबल की यात्रा में लैंगिक अंतर: देशभर में 61.9 प्रतिशत पुरुष कामगार प्रतिदिन कार्य  के लिए 1 किलोमीटर से अधिक की यात्रा करते हैं, जबकि महिला कामगारों में यह अनुपात 41.9 प्रतिशत है।
    • निश्चित कार्यस्थल तक आवागमन पर प्रति कामगार औसत मासिक व्यय ₹785 है।
    • शहरी कामगारों का मासिक व्यय ₹1,044 है, जबकि ग्रामीण कामगारों का व्यय ₹612 है।
    • पुरुष कामगार अपने आवागमन पर प्रत्येक माह औसतन ₹835 व्यय करते हैं, जबकि महिला कामगारों का औसत व्यय ₹533 है।

स्रोत: AIR

भारतीय नौसेना का प्रथम स्वदेशी नौसैनिक सहायता पोत ‘सूर्य’

पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा

संदर्भ

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी रूप से निर्मित प्रथम नौसैनिक सहायता पोत ‘सूर्य’ का शुभारंभ किया।

परिचय

  • हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा अभिकल्पित और निर्मित ‘सूर्य’ भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे पाँच नौसैनिक सहायता पोतों में प्रथम है।
  • लगभग 43,500 टन विस्थापन क्षमता और 20 समुद्री मील की अधिकतम गति वाला यह पोत समुद्र में लंबे समय तक चलने वाले अभियानों के दौरान युद्धपोतों को रसद सहायता प्रदान करने के लिए बनाया गया है।
  • यह बड़ी मात्रा में ईंधन और स्वच्छ जल के साथ-साथ गोला-बारूद, अतिरिक्त कलपुर्जे और अन्य आवश्यक सामग्री ले जा सकता है।
  • इसमें हेलीकॉप्टर संचालन के लिए उपयुक्त उड़ान डेक तथा आत्मरक्षा प्रणालियाँ भी उपलब्ध हैं।
  • ‘सूर्य’ हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निरंतर समुद्री उपस्थिति को समर्थन प्रदान करते हुए नौसेना की परिचालन सहनशक्ति और पहुँच को बढ़ाने में सहायता करेगा।

स्रोत: TH

 

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